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Amal Malik Reveals Bigg Boss Struggle After Emotional Jaipur Show

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जयपुर4 घंटे पहलेलेखक: अनुराग त्रिवेदी

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बॉलीवुड के प्रसिद्ध म्यूजिक कंपोजर और सिंगर अमाल मलिक हाल ही में जयपुर पहुंचे, जहां एक लाइव परफॉर्मेंस के दौरान वे मंच पर भावुक हो गए। उस पल को याद करते हुए उन्होंने बताया कि जब उनके पिता मंच पर उनका ही गाना गा रहे थे और दर्शक उन्हें भरपूर प्यार दे रहे थे, तो वे खुद को रोक नहीं पाए। अमाल मानते हैं कि उनके पिता को अपने करियर में वह पहचान और सम्मान नहीं मिला, जिसके वे पूरी तरह हकदार थे।

दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने अपनी जर्नी के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि मलिक फैमिली से आने के बावजूद उनका सफर आसान नहीं रहा और उनके पिता ने भी बॉलीवुड में लंबा संघर्ष किया। अमाल ने अपने पिता को “सबसे सफल फेलियर” बताते हुए कहा कि उन्होंने कभी हार नहीं मानी और वही उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है।

बातचीत के दौरान अमाल ने रियलिटी शो Bigg Boss में अपने अनुभव पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि जब वह इस शो में गए, तब वह जीवन के एक कठिन और मानसिक रूप से कमजोर दौर से गुजर रहे थे। हालांकि 106 दिनों का वह सफर उनके लिए खुद को फिर से समझने और मजबूत बनने का मौका साबित हुआ।

जयपुर में परफॉर्मेंस के दौरान अमाल मलिक के पिता डब्बू मलिक ने गाना गाया, पिता को अपना सॉन्ग गाता देख अमाल भावुक हो गए

जयपुर में परफॉर्मेंस के दौरान अमाल मलिक के पिता डब्बू मलिक ने गाना गाया, पिता को अपना सॉन्ग गाता देख अमाल भावुक हो गए

सवाल: जयपुर में परफॉर्मेंस के दौरान आप क्यों रोने लगे?

अमाल मलिक: जयपुर में मेरे साथ पिता स्टेज पर थे और वह मेरा गाना गा रहे थे। उन्हें मंच पर मेरा गाना गाते हुए देखना मेरे लिए बहुत भावुक कर देने वाला पल था। सबसे खास बात यह थी कि लोग उन्हें इतना प्यार दे रहे थे। मुझे हमेशा लगता है कि अपने दौर में भी वे इस प्यार और सम्मान के पूरी तरह हकदार थे।

आज अगर मैं और मेरा भाई अरमान एक माध्यम बन पाए हैं और लोगों का वह प्यार हमारे जरिए उन्हें मिल रहा है, तो इससे ज्यादा खुशी की बात मेरे लिए और क्या हो सकती है। उस पल मुझे खुद भी समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है। मैं बहुत खुश था और साथ ही भावुक भी हो गया।

अमाल मलिक के फादर ‘डबु मलिक’

अमाल मलिक के फादर ‘डबु मलिक’

आप मानते हैं कि आपके पिता को अपने करियर में वह पहचान और अवसर नहीं मिल पाए, जिसके वे हकदार थे?

अमाल मलिक: अक्सर लोगों की यह धारणा होती है कि अगर आप मलिक फैमिली से आते हैं, जहां पहले से एक म्यूजिकल लेगेसी है, तो आपको सब कुछ आसानी से मिल जाता होगा। लोग समझते हैं कि हम लोग जैसे चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं, लेकिन हकीकत बिल्कुल अलग है।

मेरे पापा की बॉलीवुड में यात्रा बहुत मुश्किल रही है। मेरे अंकल अनु मलिक, जो मेरे पापा के बड़े भाई हैं, उनका करियर बहुत शानदार रहा। करीब 40–45 साल तक वह सुपरस्टार म्यूजिक डायरेक्टर रहे हैं और हमारी फैमिली की म्यूजिकल लेगेसी को उन्होंने 90 के दशक से लेकर आज तक मजबूती से आगे बढ़ाया है।

मेरे पापा ने भी 2000 से 2004 के बीच बहुत अच्छा काम किया। उन्होंने करीब 60–70 फिल्मों में काम किया, लेकिन उन्हें वह पहचान और सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। यहां तक कि कई बार उन्हें किसी बड़े समारोह या फंक्शन में आमंत्रण तक नहीं मिला। यह बात एक बच्चे के रूप में मुझे और मेरे छोटे भाई अरमान को बहुत महसूस होती थी। हम दोनों के मन में हमेशा यही था कि हमें अपने पापा के लिए कुछ करके दिखाना है।

जब मेरे दादाजी सरदार मलिक अपने जीवन के अंतिम दौर में थे, तब मेरे पापा ने संगीत से दूरी बना ली।

उस समय मैं केवल 15 साल का था। पिता ने मुझसे वादा लिया कि मैं हर हफ्ते कम से कम 10 हजार रुपए कमाकर लाऊंगा। इसके लिए मैंने टीवी सीरियल्स के लिए काम किया और वहीं से मेरी यात्रा शुरू हुई। मैं हमेशा कहता हूं कि अगर मेरे पापा इतने ईमानदारी से संघर्ष न करते और अपने तरीके से ‘सफल असफलता’ का सामना न करते, तो शायद आज मैं और मेरा भाई अरमान मलिक यहां तक नहीं पहुंचते।

सिंगर अमाल मलिक

सिंगर अमाल मलिक

सवाल: आपकी जर्नी के बारे में बताएं?

अमाल मलिक : मेरे पापा ने मुझे हमेशा एक ही बात कही जब भी इस इंडस्ट्री में आओ तो इतने तैयार रहो कि कोई आप पर सवाल न उठा सके। मैंने संगीत को व्यवस्थित तरीके से सीखा। मैंने पियानो में वेस्टर्न क्लासिकल का कोर्स किया और ट्रिनिटी कॉलेज लंदन की परीक्षाएं मुंबई में दीं। संगीत एक बहुत बड़ा समंदर है, उसे पूरी तरह सीखना संभव नहीं है, लेकिन मैंने जितना हो सका उतना सीखने की कोशिश की। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत मैंने अपने दादाजी से सीखा और अब भी भारतीय संगीत की औपचारिक ट्रेनिंग ले रहा हूं।

हमारे परिवार में सबसे ज्यादा संगीत की औपचारिक शिक्षा मेरे दादाजी सरदार मलिक ने ली थी। वे हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के विशारद थे और कपूरथला, पंजाब से शास्त्रीय परंपरा में ट्रेंनिंग लेकर आए थे। उन्हें केवल संगीत ही नहीं, बल्कि कथक और भरतनाट्यम जैसे नृत्य रूपों की भी अच्छी समझ थी। शुरुआती दौर में उन्होंने कोरियोग्राफर के रूप में भी काम किया और 1940–50 के दशक में दो फिल्मों में कोरियोग्राफी की थी।

2019 में मुझे मेलबर्न सिम्फनी ऑर्केस्ट्राके साथ परफॉर्म करने का मौका मिला। मुझसे पहले वहां सिर्फ ए. आर. रहमान ने प्रस्तुति दी थी। मेरे लिए और मेरे पापा के लिए यह बहुत गर्व का क्षण था कि मैं उस मंच पर प्रस्तुति देने वाला दूसरा भारतीय बना।

सवाल: जब आप दोनों भाई साथ में म्यूजिक पर काम करते हैं तो किस तरह की चर्चा होती है?

अमाल मलिक : अब तो हम दोनों भाई साथ बैठकर म्यूजिक बनाने का समय बहुत कम निकाल पाते हैं। आखिरी बार हम लोग करीब 2014–15 में साथ बैठकर म्यूजिक पर काम करते थे। आजकल मैं अपने काम में व्यस्त रहता हूं और अरमान मलिक भी अपने शो और दूसरे प्रोजेक्ट्स में काफी व्यस्त रहते हैं। उनकी शादी भी हो चुकी है, इसलिए सबके अपने-अपने काम और जिम्मेदारियां हैं।

हालांकि हम लोग एक-दूसरे के काम का रिव्यू हमेशा करते रहते हैं। अक्सर फोन या वीडियो कॉल पर बातचीत होती रहती है। जब भी हम म्यूजिक पर चर्चा करते हैं तो कई बार ऐसा लगता है कि हम दो नहीं बल्कि तीन भाई हैं, क्योंकि पापा भी उस बातचीत का हिस्सा बन जाते हैं और बिल्कुल दोस्त की तरह सलाह देते हैं।

हमारे परिवार में संगीत सिर्फ एक परंपरा ही नहीं, बल्कि हमें भावनात्मक रूप से भी जोड़कर रखने वाली चीज है। जब कोई गाना पूरी तरह तैयार हो जाता है तो सबसे आखिर में हमारी मम्मी उसे सुनती हैं। वह हमेशा कहती हैं कि उन्हें डेमो नहीं सुनना, सीधे फाइनल गाना ही सुनना है, जैसे म्यूजिक लेबल को सुनाया जाता है।

मम्मी का म्यूजिक से उतना जुड़ाव नहीं है। उनका बैकग्राउंड लॉ का है और घर में वही अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखती हैं। हालांकि म्यूजिक मैं खुद ही बनाता हूं, लेकिन जब भी कोई नया गाना तैयार करता हूं तो सबसे पहले उसे अपने पापा को सुनाता हूं। उसके बाद मैं अपने चार–पांच करीबी दोस्तों और अरमान को भी सुनाता हूं। मैं मजाक में उन्हें अपने “पांच पांडव” कहता हूं।

अमाल मलिक ने शेयर की बिग बॉस में जाने की जर्नी

अमाल मलिक ने शेयर की बिग बॉस में जाने की जर्नी

सवाल: बिगबॉस में आपकी जर्नी कैसी रही?

अमाल मलिक: जब मैं शो में गया, तब मेरी मानसिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। मेरे दोस्तों, परिवार और यहां तक कि डॉक्टरों ने भी कहा कि यह सही समय नहीं है। लेकिन मैंने इसे खुद को चुनौती देने का मौका समझा। और अंत में शो का फाइनलिस्ट बना और यह मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि रही। 106 दिनों तक उस घर में रहना आसान नहीं था, लेकिन वह अनुभव मेरे लिए बहुत खास रहा। आखिरी पांच लोगों ने जितना लंबा समय वहां बिताया, उसके लिए मैं सभी को सलाम करता हूं।

हालांकि मैंने पहले कई इंटरव्यू में कहा था कि बिग बॉस मेरे स्वभाव का शो नहीं है। लेकिन जब उन्होंने बताया कि इस बार शो में सभ्य और समझदार लोग होंगे और फॉर्मेट भी थोड़ा अलग होगा, तब मैंने इस चुनौती को स्वीकार किया।

इस दौरान मैंने एक पोस्ट भी डाली थी, जिसमें मैंने अपने परिवार से दूरी और मानसिक स्थिति के बारे में बात की थी। दअसल, उस समय मेरे पालतू डॉग “हैंडसम” की डेथ हो गई थी जिसे मैंने खुद अपने हाथों दफनाया था। इस घटना से भावनात्मक रूप से मेरे जीवन में काफी बदलाव आया। लोग पूछ रहे थे कि मैं फिल्में क्यों नहीं कर रहा हूं, अचानक क्यों गायब हो गया हूं। उसी का जवाब देने के लिए मैंने वह पोस्ट लिखी थी।

मैंने पहले खतरों के खिलाड़ी के लिए हां भी कहा था, लेकिन मेरे घुटने की चोट के कारण डॉक्टरों ने मुझे उस शो में हिस्सा लेने से मना कर दिया और वह मौका नहीं बन पाया।

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जयपुर4 घंटे पहलेलेखक: अनुराग त्रिवेदी

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बॉलीवुड के प्रसिद्ध म्यूजिक कंपोजर और सिंगर अमाल मलिक हाल ही में जयपुर पहुंचे, जहां एक लाइव परफॉर्मेंस के दौरान वे मंच पर भावुक हो गए। उस पल को याद करते हुए उन्होंने बताया कि जब उनके पिता मंच पर उनका ही गाना गा रहे थे और दर्शक उन्हें भरपूर प्यार दे रहे थे, तो वे खुद को रोक नहीं पाए। अमाल मानते हैं कि उनके पिता को अपने करियर में वह पहचान और सम्मान नहीं मिला, जिसके वे पूरी तरह हकदार थे।

दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने अपनी जर्नी के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि मलिक फैमिली से आने के बावजूद उनका सफर आसान नहीं रहा और उनके पिता ने भी बॉलीवुड में लंबा संघर्ष किया। अमाल ने अपने पिता को “सबसे सफल फेलियर” बताते हुए कहा कि उन्होंने कभी हार नहीं मानी और वही उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है।

बातचीत के दौरान अमाल ने रियलिटी शो Bigg Boss में अपने अनुभव पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि जब वह इस शो में गए, तब वह जीवन के एक कठिन और मानसिक रूप से कमजोर दौर से गुजर रहे थे। हालांकि 106 दिनों का वह सफर उनके लिए खुद को फिर से समझने और मजबूत बनने का मौका साबित हुआ।

जयपुर में परफॉर्मेंस के दौरान अमाल मलिक के पिता डब्बू मलिक ने गाना गाया, पिता को अपना सॉन्ग गाता देख अमाल भावुक हो गए

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सवाल: जयपुर में परफॉर्मेंस के दौरान आप क्यों रोने लगे?

अमाल मलिक: जयपुर में मेरे साथ पिता स्टेज पर थे और वह मेरा गाना गा रहे थे। उन्हें मंच पर मेरा गाना गाते हुए देखना मेरे लिए बहुत भावुक कर देने वाला पल था। सबसे खास बात यह थी कि लोग उन्हें इतना प्यार दे रहे थे। मुझे हमेशा लगता है कि अपने दौर में भी वे इस प्यार और सम्मान के पूरी तरह हकदार थे।

आज अगर मैं और मेरा भाई अरमान एक माध्यम बन पाए हैं और लोगों का वह प्यार हमारे जरिए उन्हें मिल रहा है, तो इससे ज्यादा खुशी की बात मेरे लिए और क्या हो सकती है। उस पल मुझे खुद भी समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है। मैं बहुत खुश था और साथ ही भावुक भी हो गया।

अमाल मलिक के फादर ‘डबु मलिक’

अमाल मलिक के फादर ‘डबु मलिक’

आप मानते हैं कि आपके पिता को अपने करियर में वह पहचान और अवसर नहीं मिल पाए, जिसके वे हकदार थे?

अमाल मलिक: अक्सर लोगों की यह धारणा होती है कि अगर आप मलिक फैमिली से आते हैं, जहां पहले से एक म्यूजिकल लेगेसी है, तो आपको सब कुछ आसानी से मिल जाता होगा। लोग समझते हैं कि हम लोग जैसे चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं, लेकिन हकीकत बिल्कुल अलग है।

मेरे पापा की बॉलीवुड में यात्रा बहुत मुश्किल रही है। मेरे अंकल अनु मलिक, जो मेरे पापा के बड़े भाई हैं, उनका करियर बहुत शानदार रहा। करीब 40–45 साल तक वह सुपरस्टार म्यूजिक डायरेक्टर रहे हैं और हमारी फैमिली की म्यूजिकल लेगेसी को उन्होंने 90 के दशक से लेकर आज तक मजबूती से आगे बढ़ाया है।

मेरे पापा ने भी 2000 से 2004 के बीच बहुत अच्छा काम किया। उन्होंने करीब 60–70 फिल्मों में काम किया, लेकिन उन्हें वह पहचान और सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। यहां तक कि कई बार उन्हें किसी बड़े समारोह या फंक्शन में आमंत्रण तक नहीं मिला। यह बात एक बच्चे के रूप में मुझे और मेरे छोटे भाई अरमान को बहुत महसूस होती थी। हम दोनों के मन में हमेशा यही था कि हमें अपने पापा के लिए कुछ करके दिखाना है।

जब मेरे दादाजी सरदार मलिक अपने जीवन के अंतिम दौर में थे, तब मेरे पापा ने संगीत से दूरी बना ली।

उस समय मैं केवल 15 साल का था। पिता ने मुझसे वादा लिया कि मैं हर हफ्ते कम से कम 10 हजार रुपए कमाकर लाऊंगा। इसके लिए मैंने टीवी सीरियल्स के लिए काम किया और वहीं से मेरी यात्रा शुरू हुई। मैं हमेशा कहता हूं कि अगर मेरे पापा इतने ईमानदारी से संघर्ष न करते और अपने तरीके से ‘सफल असफलता’ का सामना न करते, तो शायद आज मैं और मेरा भाई अरमान मलिक यहां तक नहीं पहुंचते।

सिंगर अमाल मलिक

सिंगर अमाल मलिक

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अमाल मलिक : मेरे पापा ने मुझे हमेशा एक ही बात कही जब भी इस इंडस्ट्री में आओ तो इतने तैयार रहो कि कोई आप पर सवाल न उठा सके। मैंने संगीत को व्यवस्थित तरीके से सीखा। मैंने पियानो में वेस्टर्न क्लासिकल का कोर्स किया और ट्रिनिटी कॉलेज लंदन की परीक्षाएं मुंबई में दीं। संगीत एक बहुत बड़ा समंदर है, उसे पूरी तरह सीखना संभव नहीं है, लेकिन मैंने जितना हो सका उतना सीखने की कोशिश की। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत मैंने अपने दादाजी से सीखा और अब भी भारतीय संगीत की औपचारिक ट्रेनिंग ले रहा हूं।

हमारे परिवार में सबसे ज्यादा संगीत की औपचारिक शिक्षा मेरे दादाजी सरदार मलिक ने ली थी। वे हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के विशारद थे और कपूरथला, पंजाब से शास्त्रीय परंपरा में ट्रेंनिंग लेकर आए थे। उन्हें केवल संगीत ही नहीं, बल्कि कथक और भरतनाट्यम जैसे नृत्य रूपों की भी अच्छी समझ थी। शुरुआती दौर में उन्होंने कोरियोग्राफर के रूप में भी काम किया और 1940–50 के दशक में दो फिल्मों में कोरियोग्राफी की थी।

2019 में मुझे मेलबर्न सिम्फनी ऑर्केस्ट्राके साथ परफॉर्म करने का मौका मिला। मुझसे पहले वहां सिर्फ ए. आर. रहमान ने प्रस्तुति दी थी। मेरे लिए और मेरे पापा के लिए यह बहुत गर्व का क्षण था कि मैं उस मंच पर प्रस्तुति देने वाला दूसरा भारतीय बना।

सवाल: जब आप दोनों भाई साथ में म्यूजिक पर काम करते हैं तो किस तरह की चर्चा होती है?

अमाल मलिक : अब तो हम दोनों भाई साथ बैठकर म्यूजिक बनाने का समय बहुत कम निकाल पाते हैं। आखिरी बार हम लोग करीब 2014–15 में साथ बैठकर म्यूजिक पर काम करते थे। आजकल मैं अपने काम में व्यस्त रहता हूं और अरमान मलिक भी अपने शो और दूसरे प्रोजेक्ट्स में काफी व्यस्त रहते हैं। उनकी शादी भी हो चुकी है, इसलिए सबके अपने-अपने काम और जिम्मेदारियां हैं।

हालांकि हम लोग एक-दूसरे के काम का रिव्यू हमेशा करते रहते हैं। अक्सर फोन या वीडियो कॉल पर बातचीत होती रहती है। जब भी हम म्यूजिक पर चर्चा करते हैं तो कई बार ऐसा लगता है कि हम दो नहीं बल्कि तीन भाई हैं, क्योंकि पापा भी उस बातचीत का हिस्सा बन जाते हैं और बिल्कुल दोस्त की तरह सलाह देते हैं।

हमारे परिवार में संगीत सिर्फ एक परंपरा ही नहीं, बल्कि हमें भावनात्मक रूप से भी जोड़कर रखने वाली चीज है। जब कोई गाना पूरी तरह तैयार हो जाता है तो सबसे आखिर में हमारी मम्मी उसे सुनती हैं। वह हमेशा कहती हैं कि उन्हें डेमो नहीं सुनना, सीधे फाइनल गाना ही सुनना है, जैसे म्यूजिक लेबल को सुनाया जाता है।

मम्मी का म्यूजिक से उतना जुड़ाव नहीं है। उनका बैकग्राउंड लॉ का है और घर में वही अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखती हैं। हालांकि म्यूजिक मैं खुद ही बनाता हूं, लेकिन जब भी कोई नया गाना तैयार करता हूं तो सबसे पहले उसे अपने पापा को सुनाता हूं। उसके बाद मैं अपने चार–पांच करीबी दोस्तों और अरमान को भी सुनाता हूं। मैं मजाक में उन्हें अपने “पांच पांडव” कहता हूं।

अमाल मलिक ने शेयर की बिग बॉस में जाने की जर्नी

अमाल मलिक ने शेयर की बिग बॉस में जाने की जर्नी

सवाल: बिगबॉस में आपकी जर्नी कैसी रही?

अमाल मलिक: जब मैं शो में गया, तब मेरी मानसिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। मेरे दोस्तों, परिवार और यहां तक कि डॉक्टरों ने भी कहा कि यह सही समय नहीं है। लेकिन मैंने इसे खुद को चुनौती देने का मौका समझा। और अंत में शो का फाइनलिस्ट बना और यह मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि रही। 106 दिनों तक उस घर में रहना आसान नहीं था, लेकिन वह अनुभव मेरे लिए बहुत खास रहा। आखिरी पांच लोगों ने जितना लंबा समय वहां बिताया, उसके लिए मैं सभी को सलाम करता हूं।

हालांकि मैंने पहले कई इंटरव्यू में कहा था कि बिग बॉस मेरे स्वभाव का शो नहीं है। लेकिन जब उन्होंने बताया कि इस बार शो में सभ्य और समझदार लोग होंगे और फॉर्मेट भी थोड़ा अलग होगा, तब मैंने इस चुनौती को स्वीकार किया।

इस दौरान मैंने एक पोस्ट भी डाली थी, जिसमें मैंने अपने परिवार से दूरी और मानसिक स्थिति के बारे में बात की थी। दअसल, उस समय मेरे पालतू डॉग “हैंडसम” की डेथ हो गई थी जिसे मैंने खुद अपने हाथों दफनाया था। इस घटना से भावनात्मक रूप से मेरे जीवन में काफी बदलाव आया। लोग पूछ रहे थे कि मैं फिल्में क्यों नहीं कर रहा हूं, अचानक क्यों गायब हो गया हूं। उसी का जवाब देने के लिए मैंने वह पोस्ट लिखी थी।

मैंने पहले खतरों के खिलाड़ी के लिए हां भी कहा था, लेकिन मेरे घुटने की चोट के कारण डॉक्टरों ने मुझे उस शो में हिस्सा लेने से मना कर दिया और वह मौका नहीं बन पाया।

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