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प्राइवेट पार्ट पर मस्से होने की क्या है वजह? किन लोगों को इसका ज्यादा खतरा, कैसे मिलेगा छुटकारा

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Warts on Private Parts: प्राइवेट पार्ट पर मस्से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के कारण होते हैं. एक्सपर्ट्स की मानें तो जेनिटल वॉर्ट्स एक सेक्सुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन है. यह वायरस असुरक्षित यौन संबंध बनाने और संक्रमित व्यक्ति के स्किन के संपर्क से फैलता है. प्राइवेट पार्ट के मस्से हटाने के लिए कई तरह के ट्रीटमेंट उपलब्ध हैं.

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जेनिटल वॉर्ट्स की सबसे बड़ी वजह ह्यूमन पैपिलोमावायरस है.

HPV and Genital Warts: हाथ-पैर और गर्दन पर मस्से हो जाएं, तो लोग इन्हें नजरअंदाज करते हैं. ये मस्से जिंदगीभर बने रहते हैं और अधिकतर लोग इसका कोई ट्रीटमेंट नहीं कराते हैं. कई बार लोगों के प्राइवेट पार्ट पर या इसके आसपास मस्से हो जाते हैं. इन मस्सों से लोगों को समस्याएं होती हैं और वे शर्मिंदगी के कारण इस बारे में किसी से बात भी नहीं करते हैं. डॉक्टर्स के अनुसार प्राइवेट पार्ट पर मस्से होना एक कॉमन, लेकिन सेंसिटिव समस्या है. मेडिकल की भाषा में इन्हें जेनिटल वॉर्ट्स (Genital Warts) कहा जाता है. ये मस्से आमतौर पर जानलेवा नहीं होते हैं, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर ये बढ़ सकते हैं.

अमेरिका की क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक जेनिटल वॉर्ट्स की सबसे बड़ी वजह ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) है. यह एक प्रकार का सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (STI) है. यह वायरस त्वचा से त्वचा के संपर्क के जरिए फैलता है. असुरक्षित यौन संबंध, एक से अधिक पार्टनर होना या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से यह वायरस फैल जाता है. खास बात यह है कि कई बार व्यक्ति में वायरस होने के बावजूद लक्षण दिखाई नहीं देते, फिर भी वह दूसरों को संक्रमित कर सकता है.

इसके लक्षणों की बात करें तो जेनिटल वॉर्ट्स छोटे-छोटे उभरे हुए दाने या मस्सों की तरह दिखाई देते हैं, जो त्वचा के रंग या हल्के ग्रे कलर के हो सकते हैं. ये मस्से जननांग, गुदा, जांघों के आसपास या महिलाओं में योनि के अंदर भी हो सकते हैं. कई बार ये फूलगोभी जैसे गुच्छों के रूप में भी दिखाई देते हैं. आमतौर पर इनमें दर्द नहीं होता, लेकिन खुजली, जलन, हल्का खून आना या असहजता महसूस हो सकती है. जेनिटल वॉर्ट्स का कोई परमानेंट नहीं है, लेकिन मस्सों को हटाया जा सकता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर की सलाह से क्रीम, केमिकल ट्रीटमेंट, क्रायोथेरेपी, लेजर या सर्जरी के जरिए प्राइवेट पार्ट के मस्सों को हटाया जा सकता है. कुछ मामलों में ये अपने आप भी ठीक हो सकते हैं, लेकिन इलाज करवाने से संक्रमण फैलने का खतरा कम हो जाता है. इलाज के दौरान यौन संबंध से बचना जरूरी होता है. इन मस्सों से बचने के लिए सेफ संबंध बनाना जरूरी है. कंडोम का इस्तेमाल संक्रमण के खतरे को कम करता है, हालांकि यह पूरी तरह सुरक्षा नहीं देता. एक ही पार्टनर के साथ संबंध रखना, व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाना भी जरूरी है.

डॉक्टर्स की मानें तो HPV वैक्सीन भी जेनिट वॉर्ट्स से बचने का एक असरदार तरीका है. यह वैक्सीन एचपीवी वायरस से काफी हद तक बचाव कर सकती है. आमतौर पर इस वैक्सीन को सर्वाइकल कैंसर से बचाने में बेहद कारगर माना जाता है और इस कैंसर की वजह भी HPV वायरस होता है. ऐसे में अगर आप एचपीवी वैक्सीन लगवा लेंगे, तो सर्वाइकल कैंसर के अलावा एचपीवी वायरस से होने वाली कई समस्याओं से बचाव कर सकते हैं. यह वैक्सीन लड़के और लड़कियां दोनों लगवा सकते हैं.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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जेनिटल वॉर्ट्स की सबसे बड़ी वजह ह्यूमन पैपिलोमावायरस है.

HPV and Genital Warts: हाथ-पैर और गर्दन पर मस्से हो जाएं, तो लोग इन्हें नजरअंदाज करते हैं. ये मस्से जिंदगीभर बने रहते हैं और अधिकतर लोग इसका कोई ट्रीटमेंट नहीं कराते हैं. कई बार लोगों के प्राइवेट पार्ट पर या इसके आसपास मस्से हो जाते हैं. इन मस्सों से लोगों को समस्याएं होती हैं और वे शर्मिंदगी के कारण इस बारे में किसी से बात भी नहीं करते हैं. डॉक्टर्स के अनुसार प्राइवेट पार्ट पर मस्से होना एक कॉमन, लेकिन सेंसिटिव समस्या है. मेडिकल की भाषा में इन्हें जेनिटल वॉर्ट्स (Genital Warts) कहा जाता है. ये मस्से आमतौर पर जानलेवा नहीं होते हैं, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर ये बढ़ सकते हैं.

अमेरिका की क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक जेनिटल वॉर्ट्स की सबसे बड़ी वजह ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) है. यह एक प्रकार का सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (STI) है. यह वायरस त्वचा से त्वचा के संपर्क के जरिए फैलता है. असुरक्षित यौन संबंध, एक से अधिक पार्टनर होना या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से यह वायरस फैल जाता है. खास बात यह है कि कई बार व्यक्ति में वायरस होने के बावजूद लक्षण दिखाई नहीं देते, फिर भी वह दूसरों को संक्रमित कर सकता है.

इसके लक्षणों की बात करें तो जेनिटल वॉर्ट्स छोटे-छोटे उभरे हुए दाने या मस्सों की तरह दिखाई देते हैं, जो त्वचा के रंग या हल्के ग्रे कलर के हो सकते हैं. ये मस्से जननांग, गुदा, जांघों के आसपास या महिलाओं में योनि के अंदर भी हो सकते हैं. कई बार ये फूलगोभी जैसे गुच्छों के रूप में भी दिखाई देते हैं. आमतौर पर इनमें दर्द नहीं होता, लेकिन खुजली, जलन, हल्का खून आना या असहजता महसूस हो सकती है. जेनिटल वॉर्ट्स का कोई परमानेंट नहीं है, लेकिन मस्सों को हटाया जा सकता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर की सलाह से क्रीम, केमिकल ट्रीटमेंट, क्रायोथेरेपी, लेजर या सर्जरी के जरिए प्राइवेट पार्ट के मस्सों को हटाया जा सकता है. कुछ मामलों में ये अपने आप भी ठीक हो सकते हैं, लेकिन इलाज करवाने से संक्रमण फैलने का खतरा कम हो जाता है. इलाज के दौरान यौन संबंध से बचना जरूरी होता है. इन मस्सों से बचने के लिए सेफ संबंध बनाना जरूरी है. कंडोम का इस्तेमाल संक्रमण के खतरे को कम करता है, हालांकि यह पूरी तरह सुरक्षा नहीं देता. एक ही पार्टनर के साथ संबंध रखना, व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाना भी जरूरी है.

डॉक्टर्स की मानें तो HPV वैक्सीन भी जेनिट वॉर्ट्स से बचने का एक असरदार तरीका है. यह वैक्सीन एचपीवी वायरस से काफी हद तक बचाव कर सकती है. आमतौर पर इस वैक्सीन को सर्वाइकल कैंसर से बचाने में बेहद कारगर माना जाता है और इस कैंसर की वजह भी HPV वायरस होता है. ऐसे में अगर आप एचपीवी वैक्सीन लगवा लेंगे, तो सर्वाइकल कैंसर के अलावा एचपीवी वायरस से होने वाली कई समस्याओं से बचाव कर सकते हैं. यह वैक्सीन लड़के और लड़कियां दोनों लगवा सकते हैं.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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