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नई दिल्ली3 मिनट पहले

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तस्वीर- फाइल फोटो

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की बिल्डिंग के गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि यह मामला न्यायिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर विचार का विषय है।

यह याचिका बदरवाड़ा वेणुगोपाल उर्फ बरा खतरनाक की तरफ से दायर की गई थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने याचिका पर सुनवाई की।

CJI ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नई बिल्डिंग बन रही है और इस मुद्दे पर उस समय विचार किया जा सकता है। याचिकाकर्ता ने मौजूदा भवन पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने की मांग की। इस पर कोर्ट ने आश्वासन दिया कि इसके बारे में सोचा जाएगा, लेकिन ऐसे मामलों को याचिका के जरिए नहीं उठाया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक प्रतीक में अशोक चक्र के नीचे अशोक स्तंभ का सिंह बना है।

सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक प्रतीक में अशोक चक्र के नीचे अशोक स्तंभ का सिंह बना है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे इस मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लिखित अनुरोध करें। याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने मई 2025 में इस मुद्दे पर लेटर लिखा था, जिस पर नवंबर 2025 में जवाब मिला था कि सुप्रीम कोर्ट अपना अलग प्रतीक इस्तेमाल करता है।

इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि वह जवाब उनके कार्यकाल से पहले का है और अब इस पर विचार किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सचिव जनरल को निर्देश दिया कि इस मामले पर एक नोट तैयार कर सक्षम प्राधिकारी के सामने रखा जाए।

याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि अगर गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने के लिए कोई वास्तु या संरचनात्मक व्यवस्था नहीं है, तो जरूरी संस्थागत और तकनीकी कदम उठाए जाएं। यह सब संविधान और राज्य प्रतीक के उपयोग से जुड़े कानूनों के अनुसार किया जाए।

याचिका में यह भी मांग की गई थी कि इस प्रक्रिया को तय समय सीमा में लागू किया जाए। इसके लिए करीब 8 सप्ताह का समय सुझाया गया था। यह मांग State Emblem of India (Prohibition of Improper Use) Act, 2005 और State Emblem of India (Regulation of Use) Rules, 2007 के अनुरूप की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के प्रतीक में अशोक चक्र और संस्कृत श्लोक

सुप्रीम कोर्ट का आधिकारिक प्रतीक अशोक चक्र के नीचे स्थित अशोक स्तंभ के सिंह को दर्शाता है। इसके नीचे संस्कृत में “यतो धर्मस्ततो जयः” (जहां धर्म है, वहां विजय है) लिखा है।

यह प्रतीक 26 जनवरी 1950 को अपनाया गया था, जिस दिन सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई थी। यह सारनाथ के सिंह स्तंभ से प्रेरित है, जो न्याय, धर्म और देश की सर्वोच्च अदालत की अधिकारिता का प्रतीक है।

वहीं भारत का राष्ट्रीय प्रतीक सारनाथ स्थित सम्राट अशोक के लायन कैपिटल (सिंह स्तंभ) से लिया गया है। इसमें चार एशियाई शेर पीठ से पीठ मिलाकर खड़े हैं। सामने से केवल तीन शेर दिखाई देते हैं, चौथा पीछे होता है।

नीचे एक गोलाकार आधार होता है, जिस पर सिंह, बैल, घोड़े और हाथी की आकृतियां उकेरे गए हैं। इसके बीच में अशोक चक्र होता है और नीचे “सत्यमेव जयते” (सत्य की ही जीत होती है) लिखा होता है। राष्ट्रीय प्रतीक देश की करेंसी और सरकारी दस्तावेजों पर इस्तेमाल होता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की बिल्डिंग के गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि यह मामला न्यायिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर विचार का विषय है।

यह याचिका बदरवाड़ा वेणुगोपाल उर्फ बरा खतरनाक की तरफ से दायर की गई थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने याचिका पर सुनवाई की।

CJI ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नई बिल्डिंग बन रही है और इस मुद्दे पर उस समय विचार किया जा सकता है। याचिकाकर्ता ने मौजूदा भवन पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने की मांग की। इस पर कोर्ट ने आश्वासन दिया कि इसके बारे में सोचा जाएगा, लेकिन ऐसे मामलों को याचिका के जरिए नहीं उठाया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक प्रतीक में अशोक चक्र के नीचे अशोक स्तंभ का सिंह बना है।

सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक प्रतीक में अशोक चक्र के नीचे अशोक स्तंभ का सिंह बना है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे इस मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लिखित अनुरोध करें। याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने मई 2025 में इस मुद्दे पर लेटर लिखा था, जिस पर नवंबर 2025 में जवाब मिला था कि सुप्रीम कोर्ट अपना अलग प्रतीक इस्तेमाल करता है।

इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि वह जवाब उनके कार्यकाल से पहले का है और अब इस पर विचार किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सचिव जनरल को निर्देश दिया कि इस मामले पर एक नोट तैयार कर सक्षम प्राधिकारी के सामने रखा जाए।

याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि अगर गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने के लिए कोई वास्तु या संरचनात्मक व्यवस्था नहीं है, तो जरूरी संस्थागत और तकनीकी कदम उठाए जाएं। यह सब संविधान और राज्य प्रतीक के उपयोग से जुड़े कानूनों के अनुसार किया जाए।

याचिका में यह भी मांग की गई थी कि इस प्रक्रिया को तय समय सीमा में लागू किया जाए। इसके लिए करीब 8 सप्ताह का समय सुझाया गया था। यह मांग State Emblem of India (Prohibition of Improper Use) Act, 2005 और State Emblem of India (Regulation of Use) Rules, 2007 के अनुरूप की गई थी।

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यह प्रतीक 26 जनवरी 1950 को अपनाया गया था, जिस दिन सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई थी। यह सारनाथ के सिंह स्तंभ से प्रेरित है, जो न्याय, धर्म और देश की सर्वोच्च अदालत की अधिकारिता का प्रतीक है।

वहीं भारत का राष्ट्रीय प्रतीक सारनाथ स्थित सम्राट अशोक के लायन कैपिटल (सिंह स्तंभ) से लिया गया है। इसमें चार एशियाई शेर पीठ से पीठ मिलाकर खड़े हैं। सामने से केवल तीन शेर दिखाई देते हैं, चौथा पीछे होता है।

नीचे एक गोलाकार आधार होता है, जिस पर सिंह, बैल, घोड़े और हाथी की आकृतियां उकेरे गए हैं। इसके बीच में अशोक चक्र होता है और नीचे “सत्यमेव जयते” (सत्य की ही जीत होती है) लिखा होता है। राष्ट्रीय प्रतीक देश की करेंसी और सरकारी दस्तावेजों पर इस्तेमाल होता है।

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