Wednesday, 04 Nov 2026 | 06:13 PM

Trending :

हिमाचल विधानसभा में गूंजेगा एपल इम्पोर्ट ड्यूटी का मामला:3 लाख परिवारों की रोजी पर संकट, केंद्र ने अमेरिका-न्यूजीलैंड-EU के लिए शुल्क घटाया

हिमाचल विधानसभा में गूंजेगा एपल इम्पोर्ट ड्यूटी का मामला:3 लाख परिवारों की रोजी पर संकट, केंद्र ने अमेरिका-न्यूजीलैंड-EU के लिए शुल्क घटाया

हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली सेब इंडस्ट्री पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने से मंडरा रहे संकट का मुद्दा आज विधानसभा में उठेगा। ठियोग से विधायक कुलदीप सिंह राठौर सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी में की गई कटौती का मामला सदन में उठाने जा रहे हैं। यह मामला प्रदेश की 5500 करोड़ रुपए की सेब आर्थिकी और लगभग 3 लाख बागवान परिवारों की आजीविका से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। दरअसल, केंद्र सरकार ने अमेरिका और न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत और यूरोपीय यूनियन (EU) के लिए 20 प्रतिशत कर दी है। इम्पोर्ट ड्यूटी कम होने से अब विदेशी सेब सस्ते दामों पर भारतीय बाजार में उपलब्ध होगा। इससे हिमाचल के साथ साथ जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उद्योग पर भी संकट खड़ा हो गया है। हिमाचल का प्रीमियम सेब बुरी तरह होगा प्रभावित कुलदीप राठौर ने बताया कि वाशिंगटन एपल के भारतीय बाजार में आने से हिमाचल का प्रीमियम सेब बुरी तरह प्रभावित होगा। इससे न केवल प्रीमियम सेब के दाम गिरेंगे, बल्कि कोल्ड स्टोर में रखे सेब पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। अभी अमेरिका-न्यूजीलैंड और EU के लिए इम्पोर्ट ड्यूटी घटाई गई गई है। अब इनकी आड़ में दूसरे देश भी इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने का दबाव डालेंगे। मोदी ने किया था इम्पोर्ट ड्यूटी 100% का वादा राठौर ने बताया कि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 100 फीसदी करने का भरोसा दिया था। हकीकत में इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बजाय कम की जा रही है। इससे सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि सदन में यह मामला उठाकर केंद्र सरकार से इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने के फैसले का विरोध जताएंगे और यह फैसला वापस लेने की मांग की जाएगी। हिमाचल के बागवान सचिवालय का घेराव कर चुके बता दें कि हिमाचल के बागवान इस फैसले के खिलाफ दो महीने पहले सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर चुके हैं। बागवानों का आरोप है कि केंद्र सरकार आयात शुल्क बढ़ाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग देशों के लिए इसे कम कर रही है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है। इस वजह से बागवान ज्यादा चिंतित बागवानों की चिंता की एक बड़ी वजह उत्पादन लागत और उत्पादकता में अंतर भी है। हिमाचल में प्रति हेक्टेयर 7 से 8 मीट्रिक टन सेब उत्पादन होता है, जबकि अमेरिका, न्यूजीलैंड और चीन जैसे देशों में यह 60 से 70 मीट्रिक टन तक पहुंच जाता है। वहीं, हिमाचल में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण प्रति किलो सेब उत्पादन की लागत करीब 27 रुपए आती है। ऐसे में बागवानों को लाभ तभी मिल पाता है, जब उनका सेब कम से कम 50 से 100 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिके। अन्य देश भी भारत पर आयात शुल्क कम करने का बनाएंगे दबाव विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका, न्यूजीलैंड और EU को दी गई रियायतों के बाद अब अन्य देश भी भारत पर आयात शुल्क कम करने का दबाव बना सकते हैं। इससे भारतीय बाजार में विदेशी सेब की हिस्सेदारी बढ़ेगी और स्थानीय उत्पादकों के लिए प्रतिस्पर्धा और कठिन हो जाएगी।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Petrol ₹14 Loss; Rupee All-Time Low

May 1, 2026/
8:26 am

नई दिल्ली23 मिनट पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी सोना-चांदी से जुड़ी रही। 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 2,290 रुपए...

गांजा तस्करी का अंतरराज्यीय नेटवर्क उजागर, 6 आरोपी गिरफ्तार:बालाघाट, ओडिशा, उदयपुर से पकड़े गए, मास्टरमाइंड फरार

April 20, 2026/
6:01 pm

बालाघाट पुलिस ने सोमवार को गांजा तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए 6 और आरोपियों को गिरफ्तार...

इंदौर में युवक के सिर पर पत्थर मारकर हत्या:शराब दुकान के पास मैदान में गंभीर हालत में मिला था, इलाज के दौरान मौत

April 11, 2026/
10:31 pm

इंदौर के केट रोड पर शनिवार रात एक युवक की सिर में पत्थर मारकर हत्या कर दी गई। युवक कुंदन...

R Madhavan Birthday Interesting Facts; 3 Idiots

June 1, 2026/
4:30 am

3 मिनट पहलेलेखक: अभय पांडेय कॉपी लिंक ‘रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट’ आर माधवन की डायरेक्टर के तौर पर पहली फिल्म...

हिमाचल में तूफान में हादसा, 4 महिला टीचर्स की मौत:आनी में पेड़ गिरने से खाई में गिरी बोलेरो गाड़ी, 3 गंभीर, दो IGMC शिमला रेफर

May 2, 2026/
8:01 pm

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला के अंतर्गत आते आनी क्षेत्र में शनिवार शाम एक हृदयविदारक हादसा पेश आया। शमशर-गुगरा मार्ग...

भास्कर अपडेट्स:कर्नाटक में पुल से ट्रैक्टर गिरा, 7 श्रद्धालुओं की मौत; CM ने 5-5 लाख मुआवजे का ऐलान किया

May 16, 2026/
12:36 am

कर्नाटक के कोप्पल जिले में शुक्रवार को एक ट्रक की टक्कर से ट्रैक्टर पुल से नीचे गिर गया। हादसे में...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

हिमाचल विधानसभा में गूंजेगा एपल इम्पोर्ट ड्यूटी का मामला:3 लाख परिवारों की रोजी पर संकट, केंद्र ने अमेरिका-न्यूजीलैंड-EU के लिए शुल्क घटाया

हिमाचल विधानसभा में गूंजेगा एपल इम्पोर्ट ड्यूटी का मामला:3 लाख परिवारों की रोजी पर संकट, केंद्र ने अमेरिका-न्यूजीलैंड-EU के लिए शुल्क घटाया

हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली सेब इंडस्ट्री पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने से मंडरा रहे संकट का मुद्दा आज विधानसभा में उठेगा। ठियोग से विधायक कुलदीप सिंह राठौर सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी में की गई कटौती का मामला सदन में उठाने जा रहे हैं। यह मामला प्रदेश की 5500 करोड़ रुपए की सेब आर्थिकी और लगभग 3 लाख बागवान परिवारों की आजीविका से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। दरअसल, केंद्र सरकार ने अमेरिका और न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत और यूरोपीय यूनियन (EU) के लिए 20 प्रतिशत कर दी है। इम्पोर्ट ड्यूटी कम होने से अब विदेशी सेब सस्ते दामों पर भारतीय बाजार में उपलब्ध होगा। इससे हिमाचल के साथ साथ जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उद्योग पर भी संकट खड़ा हो गया है। हिमाचल का प्रीमियम सेब बुरी तरह होगा प्रभावित कुलदीप राठौर ने बताया कि वाशिंगटन एपल के भारतीय बाजार में आने से हिमाचल का प्रीमियम सेब बुरी तरह प्रभावित होगा। इससे न केवल प्रीमियम सेब के दाम गिरेंगे, बल्कि कोल्ड स्टोर में रखे सेब पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। अभी अमेरिका-न्यूजीलैंड और EU के लिए इम्पोर्ट ड्यूटी घटाई गई गई है। अब इनकी आड़ में दूसरे देश भी इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने का दबाव डालेंगे। मोदी ने किया था इम्पोर्ट ड्यूटी 100% का वादा राठौर ने बताया कि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 100 फीसदी करने का भरोसा दिया था। हकीकत में इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बजाय कम की जा रही है। इससे सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि सदन में यह मामला उठाकर केंद्र सरकार से इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने के फैसले का विरोध जताएंगे और यह फैसला वापस लेने की मांग की जाएगी। हिमाचल के बागवान सचिवालय का घेराव कर चुके बता दें कि हिमाचल के बागवान इस फैसले के खिलाफ दो महीने पहले सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर चुके हैं। बागवानों का आरोप है कि केंद्र सरकार आयात शुल्क बढ़ाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग देशों के लिए इसे कम कर रही है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है। इस वजह से बागवान ज्यादा चिंतित बागवानों की चिंता की एक बड़ी वजह उत्पादन लागत और उत्पादकता में अंतर भी है। हिमाचल में प्रति हेक्टेयर 7 से 8 मीट्रिक टन सेब उत्पादन होता है, जबकि अमेरिका, न्यूजीलैंड और चीन जैसे देशों में यह 60 से 70 मीट्रिक टन तक पहुंच जाता है। वहीं, हिमाचल में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण प्रति किलो सेब उत्पादन की लागत करीब 27 रुपए आती है। ऐसे में बागवानों को लाभ तभी मिल पाता है, जब उनका सेब कम से कम 50 से 100 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिके। अन्य देश भी भारत पर आयात शुल्क कम करने का बनाएंगे दबाव विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका, न्यूजीलैंड और EU को दी गई रियायतों के बाद अब अन्य देश भी भारत पर आयात शुल्क कम करने का दबाव बना सकते हैं। इससे भारतीय बाजार में विदेशी सेब की हिस्सेदारी बढ़ेगी और स्थानीय उत्पादकों के लिए प्रतिस्पर्धा और कठिन हो जाएगी।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.