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क्या वेट लॉस की दवा फैटी लिवर में भी कारगर? किन लोगों के लिए फायदेमंद, डॉक्टर पारस अग्रवाल से समझिए

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Weight Loss Drugs and Fatty Liver: वेट लॉस की दवाएं फैटी लिवर से भी राहत दिला सकती हैं. डॉक्टर पारस अग्रवाल के अनुसार वजन कम होने पर शरीर सबसे पहले लिवर का फैट घटाता है. फैटी लिवर और डायबिटीज एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. वेट लॉस की दवा उन लोगों को भी दी जा सकती है, जिनका BMI 30 से ज्यादा हो.

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वेट लॉस ड्रग्स फैटी लिवर से राहत दिलाने में बेहद असरदार हो सकते हैं.

Diabetes-Fatty Liver Connection: लिवर हमारे शरीर के सबसे जरूरी ऑर्गन्स में शुमार है. आजकल लाइफस्टाइल और खानपान बिगड़ गया है, जिसका सीधा असर लिवर की सेहत पर देखने को मिल रहा है. बड़ी संख्या में लोग फैटी लिवर का शिकार हो रहे हैं. खासतौर से डायबिटीज के अधिकतर मरीजों में यह समस्या देखी जाती है. डॉक्टर्स की मानें तो फैटी लिवर और डायबिटीज इंटरलिंक है. जिन लोगों को फैटी लिवर है, उन्हें टाइप 2 डायबिटीज का रिस्क ज्यादा होता है. डायबिटीज के मरीजों को फैटी लिवर का खतरा ज्यादा होता है. कई मरीज डायबिटीज और फैटी लिवर दोनों से जूझ रहे हैं. ऐसे में वेट लॉस ड्रग्स दोनों ही परेशानियों से राहत दिलाने में बेहद असरदार साबित हो सकते हैं.

गुरुग्राम के मारेंगो एशिया हॉस्पिटल के एंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ. पारस अग्रवाल ने News18 को बताया कि जिन दवाओं को हम वेट लॉस ड्रग्स कहते हैं, वे दरअसल टाइप 2 डायबिटीज के ट्रीटमेंट के लिए डेवलप की गई हैं. ये दवाएं वजन कम करती हैं और डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद करती हैं. कई रिसर्च में पता चला है कि ये ड्रग्स डायबिटीज के अलावा फैटी लिवर से राहत दिलाने में भी असरदार साबित हो रहे हैं. दरअसल फैटी लिवर और डायबिटीज का गहरा संबंध है. लिवर शरीर में ग्लूकोज को स्टोर करता है. जब किसी व्यक्ति को डायबिटीज होती है, तो इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण लिवर में फैट का जमाव होने लगता है, जिसे फैटी लिवर कहते हैं. एक बीमारी दूसरी को बढ़ावा देती है. इसलिए दोनों का मैनेजमेंट जरूरी है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर अग्रवाल ने बताया कि जिन लोगों को सिर्फ फैटी लिवर की समस्या है, वे भी वेट लॉस ड्रग्स ले सकते हैं. इससे उन्हें न सिर्फ फैटी लिवर से राहत मिलेगी, बल्कि टाइप 2 डायबिटीज का रिस्क भी कम हो जाएगा. वजन घटाने वाली दवाएं, खासकर GLP-1) श्रेणी की दवाएं शरीर में इंसुलिन के स्राव को संतुलित करती हैं और भूख को कम करती हैं. जब इन दवाओं के प्रभाव से शरीर का वजन कम होना शुरू होता है, तो सबसे सकारात्मक असर लिवर पर पड़ता है. वजन घटने की प्रक्रिया में शरीर सबसे पहले लिवर में जमा अतिरिक्त फैट को फ्यूल के रूप में इस्तेमाल करता है. इससे लिवर की सूजन कम होती है और उसकी कार्यक्षमता में सुधार आता है, जो फैटी लिवर के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.

एक्सपर्ट के मुताबिक वेट लॉस की दवा देने का एक क्राइटेरिया होता है. अगर किसी व्यक्ति का बॉडी मास इंडेक्स यानी BMI 30 से ऊपर है, तो वह इन दवाओं के लिए एलिजिबल होता है. अगर बीएमआई 27 से ज्यादा है और साथ में अन्य बीमारियां जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या फैटी लिवर की समस्या है, तब भी डॉक्टर वेट लॉस ट्रीटमेंट या जीएलपी दवाओं की सलाह दे सकते हैं. यह ट्रीटमेंट केवल वजन कम करने के लिए नहीं, बल्कि शरीर की अन्य जटिलताओं को ठीक करने के लिए दिया जाता है. फैटी लिवर का इलाज समय पर न होने से यह सिरोसिस जैसी गंभीर स्थिति में बदल सकता है, इसलिए वजन नियंत्रित करना प्राइमरी ट्रीटमेंट जाता है. हालांकि ये दवाएं सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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Diabetes-Fatty Liver Connection: लिवर हमारे शरीर के सबसे जरूरी ऑर्गन्स में शुमार है. आजकल लाइफस्टाइल और खानपान बिगड़ गया है, जिसका सीधा असर लिवर की सेहत पर देखने को मिल रहा है. बड़ी संख्या में लोग फैटी लिवर का शिकार हो रहे हैं. खासतौर से डायबिटीज के अधिकतर मरीजों में यह समस्या देखी जाती है. डॉक्टर्स की मानें तो फैटी लिवर और डायबिटीज इंटरलिंक है. जिन लोगों को फैटी लिवर है, उन्हें टाइप 2 डायबिटीज का रिस्क ज्यादा होता है. डायबिटीज के मरीजों को फैटी लिवर का खतरा ज्यादा होता है. कई मरीज डायबिटीज और फैटी लिवर दोनों से जूझ रहे हैं. ऐसे में वेट लॉस ड्रग्स दोनों ही परेशानियों से राहत दिलाने में बेहद असरदार साबित हो सकते हैं.

गुरुग्राम के मारेंगो एशिया हॉस्पिटल के एंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ. पारस अग्रवाल ने News18 को बताया कि जिन दवाओं को हम वेट लॉस ड्रग्स कहते हैं, वे दरअसल टाइप 2 डायबिटीज के ट्रीटमेंट के लिए डेवलप की गई हैं. ये दवाएं वजन कम करती हैं और डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद करती हैं. कई रिसर्च में पता चला है कि ये ड्रग्स डायबिटीज के अलावा फैटी लिवर से राहत दिलाने में भी असरदार साबित हो रहे हैं. दरअसल फैटी लिवर और डायबिटीज का गहरा संबंध है. लिवर शरीर में ग्लूकोज को स्टोर करता है. जब किसी व्यक्ति को डायबिटीज होती है, तो इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण लिवर में फैट का जमाव होने लगता है, जिसे फैटी लिवर कहते हैं. एक बीमारी दूसरी को बढ़ावा देती है. इसलिए दोनों का मैनेजमेंट जरूरी है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर अग्रवाल ने बताया कि जिन लोगों को सिर्फ फैटी लिवर की समस्या है, वे भी वेट लॉस ड्रग्स ले सकते हैं. इससे उन्हें न सिर्फ फैटी लिवर से राहत मिलेगी, बल्कि टाइप 2 डायबिटीज का रिस्क भी कम हो जाएगा. वजन घटाने वाली दवाएं, खासकर GLP-1) श्रेणी की दवाएं शरीर में इंसुलिन के स्राव को संतुलित करती हैं और भूख को कम करती हैं. जब इन दवाओं के प्रभाव से शरीर का वजन कम होना शुरू होता है, तो सबसे सकारात्मक असर लिवर पर पड़ता है. वजन घटने की प्रक्रिया में शरीर सबसे पहले लिवर में जमा अतिरिक्त फैट को फ्यूल के रूप में इस्तेमाल करता है. इससे लिवर की सूजन कम होती है और उसकी कार्यक्षमता में सुधार आता है, जो फैटी लिवर के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.

एक्सपर्ट के मुताबिक वेट लॉस की दवा देने का एक क्राइटेरिया होता है. अगर किसी व्यक्ति का बॉडी मास इंडेक्स यानी BMI 30 से ऊपर है, तो वह इन दवाओं के लिए एलिजिबल होता है. अगर बीएमआई 27 से ज्यादा है और साथ में अन्य बीमारियां जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या फैटी लिवर की समस्या है, तब भी डॉक्टर वेट लॉस ट्रीटमेंट या जीएलपी दवाओं की सलाह दे सकते हैं. यह ट्रीटमेंट केवल वजन कम करने के लिए नहीं, बल्कि शरीर की अन्य जटिलताओं को ठीक करने के लिए दिया जाता है. फैटी लिवर का इलाज समय पर न होने से यह सिरोसिस जैसी गंभीर स्थिति में बदल सकता है, इसलिए वजन नियंत्रित करना प्राइमरी ट्रीटमेंट जाता है. हालांकि ये दवाएं सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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