Monday, 12 Oct 2026 | 08:50 AM

Trending :

PM Modi Inauguration Ceremony & India Air Exercise डॉ. श्रीराम नेने की हेल्थ पर पहली किताब लॉन्च:बोले- 21 किलो वजन घटाया, बताया पत्नी माधुरी दीक्षित की फिटनेस का राज डॉ. श्रीराम नेने की हेल्थ पर पहली किताब लॉन्च:बोले- 21 किलो वजन घटाया, बताया पत्नी माधुरी दीक्षित की फिटनेस का राज मुंबई में मैट्रिक्स वेलनेस में पहुंचे बॉलीवुड सेलेब्स:परिवार के साथ पहुंचे जैकी श्रॉफ, दिशा पाटनी भी शामिल हुईं; 84वें जन्मदिन पर अमिताभ के 'संडे दर्शन' फिल्म रामायण की रिलीज डेट का ऐलान:5 नवंबर को 5 भाषाओं में आएगी फिल्म; नए पोस्टर में दिखे रावण बने यश और रणबीर एक्टर इमरान खान पर मुंबई में FIR दर्ज:CJP प्रदर्शन में पुलिस ने डिटेन किया था; रिहाई के बाद गर्लफ्रेंड बोलीं- पुलिस ने कैब नहीं करने दी
EXCLUSIVE

दिल्ली के युवाओं में बढ़ रहे कोलोरेक्टल कैंसर के मामले, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज, जल्द कराएं जांच

authorimg

Colon Caner Early Warning Signs: दिल्ली के युवाओं में कोलोरेक्टल कैंसर यानी आंतों के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. पहले इसे बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन बदलती लाइफस्टाइल और खान-पान की गलत आदतों के कारण अब 25 से 65 वर्ष की आयु के कामकाजी लोग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं. हालिया गट हेल्थ अवेयरनेस सर्वे से यह साफ हुआ है कि बड़ी संख्या में लोग कोलोरेक्टल कैंसर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण बीमारी का पता अक्सर एडवांस स्टेज में चलता है और इलाज करना मुश्किल हो जाता है.

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक इस सर्वे में 14 भारतीय शहरों के 10,000 से अधिक लोगों को शामिल किया गया, जिसमें दिल्ली के आंकड़े सबसे अधिक चिंताजनक सामने आए. यहां 80% से ज्यादा लोग मल में खून आने जैसे गंभीर लक्षण को भी सामान्य समस्या समझते हैं और इसे कैंसर की चेतावनी नहीं मानते. विशेषज्ञ इसे लक्षणों का खतरनाक सामान्यीकरण बताते हैं, जहां लोग शरीर के संकेतों को हल्के में लेकर नजरअंदाज कर देते हैं. यही लापरवाही बीमारी को गंभीर रूप देने में बड़ी भूमिका निभाती है.

डॉक्टर्स के अनुसार इस स्थिति के पीछे सेल्फ-मेडिकेशन की आदत भी एक बड़ी वजह है. सर्वे में पाया गया कि लगभग 90% लोग कब्ज, दस्त या पेट दर्द जैसी समस्याओं के लिए डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय घरेलू उपाय, इंटरनेट पर मिली जानकारी या मेडिकल स्टोर से दवाइयां लेना पसंद करते हैं. इससे असली बीमारी छिप जाती है और सही समय पर जांच नहीं हो पाती. केवल 10% लोग ही समय रहते विशेषज्ञ से संपर्क करते हैं, बीमारी को छिपाना एक चिंताजनक संकेत है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर्स का कहना है कि भारत में हर साल करीब 65000 कोलोरेक्टल कैंसर के नए मामले सामने आते हैं, जिनमें से 50% से अधिक मामलों में देरी से पहचान के कारण मृत्यु हो जाती है. सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अब यह बीमारी युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है. सर्वे में शामिल करीब 40% युवाओं ने माना कि उन्होंने पाचन से जुड़ी समस्याओं को सामान्य मानकर टाल दिया, जिससे बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती गई और जब तक जांच कराई गई, तब तक यह गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी थी.

इस बढ़ते खतरे के पीछे खराब लाइफस्टाइल एक प्रमुख कारण बनकर उभरी है. सर्वे के अनुसार 86% लोग नियमित रूप से बाहर का या पैकेज्ड फूड खाते हैं, जिसमें फाइबर की कमी और प्रिजर्वेटिव्स की ज्यादा मात्रा होती है. केवल 35.5% लोग नियमित रूप से व्यायाम करते हैं और लगभग 40% लोग तंबाकू का सेवन करते हैं, जो कैंसर के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है. इसके अलावा लंबे समय तक बैठे रहने की आदत, तनाव और अनियमित दिनचर्या भी पाचन तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं.

डॉक्टर्स ने यह भी चेतावनी दी है कि कोलोरेक्टल कैंसर हमेशा दर्द के साथ नहीं होता, जिससे इसकी पहचान और भी कठिन हो जाती है. लगातार पेट फूलना, मल त्याग की आदतों में बदलाव, अधूरा पेट साफ होने का एहसास, वजन कम होना या मल में खून आना जैसे संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. खासकर जिन लोगों के परिवार में कैंसर का इतिहास है, उन्हें अधिक सतर्क रहने की जरूरत है. समय पर जांच, सही जीवनशैली और डॉक्टर की सलाह से इस गंभीर बीमारी को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकता है. शुरुआती स्टेज में इस कैंसर का इलाज ज्यादा सफल रहता है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Khabar hatke- Bihar Girl Tower Reel

April 28, 2026/
4:30 am

बिहार में एक लड़की शादी के लिए टावर पर चढ़ गई, वहां रील बनाकर पोस्ट कर दी, 11 हजार व्यूज...

नुसरत भरूचा की सर्जरी होगी:अनु अग्रवाल हादसे के बाद 29 दिन कोमा में थीं, महिमा चौधरी के चेहरे से निकाले गए थे कांच के टुकड़े

October 4, 2026/
6:00 am

एक्ट्रेस नुसरत भरूचा हाल ही में बाली में एक हादसे का शिकार हो गईं। वह काम और छुट्टियों से जुड़े...

काश पटेल पर गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार के आरोप:हॉकी के दीवाने हैं FBI चीफ, रंगबिरंगे मोजों और भारत से सिलवाए सूट का मजाक उड़ाते थे दोस्त

April 26, 2026/
12:49 pm

एफबीआई चीफ के तौर पर काश पटेल का सफर जितना तेजी से ऊपर चढ़ा, उनके निजी शौक और विवादों ने...

जंग के बीच ट्रम्प सरकार में उथल-पुथल:24 घंटे में निकाले गए आर्मी चीफ और अटॉर्नी जनरल; काश पटेल-तुलसी गबार्ड को भी हटाने की चर्चा

April 3, 2026/
12:46 pm

अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी को हटाए जाने के बाद अब ट्रम्प सरकार में कुछ और बड़े अफसरों को...

यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू:सरकार बोली- राजधानी सना को कब्जे में लेंगे; हूतियों का दावा- सऊदी एयरपोर्ट और अरामको को निशाना बनाया

September 8, 2026/
11:20 am

यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच फिर जंग तेज हो गई है। सरकार ने हूतियों के कब्जे वाली...

ICAI CA Final Result 2026 Declared

June 18, 2026/
12:29 pm

11 मिनट पहले कॉपी लिंक इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ICAI की ओर से ICAI CA Final Result 2026...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

दिल्ली के युवाओं में बढ़ रहे कोलोरेक्टल कैंसर के मामले, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज, जल्द कराएं जांच

authorimg

Colon Caner Early Warning Signs: दिल्ली के युवाओं में कोलोरेक्टल कैंसर यानी आंतों के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. पहले इसे बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन बदलती लाइफस्टाइल और खान-पान की गलत आदतों के कारण अब 25 से 65 वर्ष की आयु के कामकाजी लोग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं. हालिया गट हेल्थ अवेयरनेस सर्वे से यह साफ हुआ है कि बड़ी संख्या में लोग कोलोरेक्टल कैंसर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण बीमारी का पता अक्सर एडवांस स्टेज में चलता है और इलाज करना मुश्किल हो जाता है.

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक इस सर्वे में 14 भारतीय शहरों के 10,000 से अधिक लोगों को शामिल किया गया, जिसमें दिल्ली के आंकड़े सबसे अधिक चिंताजनक सामने आए. यहां 80% से ज्यादा लोग मल में खून आने जैसे गंभीर लक्षण को भी सामान्य समस्या समझते हैं और इसे कैंसर की चेतावनी नहीं मानते. विशेषज्ञ इसे लक्षणों का खतरनाक सामान्यीकरण बताते हैं, जहां लोग शरीर के संकेतों को हल्के में लेकर नजरअंदाज कर देते हैं. यही लापरवाही बीमारी को गंभीर रूप देने में बड़ी भूमिका निभाती है.

डॉक्टर्स के अनुसार इस स्थिति के पीछे सेल्फ-मेडिकेशन की आदत भी एक बड़ी वजह है. सर्वे में पाया गया कि लगभग 90% लोग कब्ज, दस्त या पेट दर्द जैसी समस्याओं के लिए डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय घरेलू उपाय, इंटरनेट पर मिली जानकारी या मेडिकल स्टोर से दवाइयां लेना पसंद करते हैं. इससे असली बीमारी छिप जाती है और सही समय पर जांच नहीं हो पाती. केवल 10% लोग ही समय रहते विशेषज्ञ से संपर्क करते हैं, बीमारी को छिपाना एक चिंताजनक संकेत है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर्स का कहना है कि भारत में हर साल करीब 65000 कोलोरेक्टल कैंसर के नए मामले सामने आते हैं, जिनमें से 50% से अधिक मामलों में देरी से पहचान के कारण मृत्यु हो जाती है. सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अब यह बीमारी युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है. सर्वे में शामिल करीब 40% युवाओं ने माना कि उन्होंने पाचन से जुड़ी समस्याओं को सामान्य मानकर टाल दिया, जिससे बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती गई और जब तक जांच कराई गई, तब तक यह गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी थी.

इस बढ़ते खतरे के पीछे खराब लाइफस्टाइल एक प्रमुख कारण बनकर उभरी है. सर्वे के अनुसार 86% लोग नियमित रूप से बाहर का या पैकेज्ड फूड खाते हैं, जिसमें फाइबर की कमी और प्रिजर्वेटिव्स की ज्यादा मात्रा होती है. केवल 35.5% लोग नियमित रूप से व्यायाम करते हैं और लगभग 40% लोग तंबाकू का सेवन करते हैं, जो कैंसर के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है. इसके अलावा लंबे समय तक बैठे रहने की आदत, तनाव और अनियमित दिनचर्या भी पाचन तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं.

डॉक्टर्स ने यह भी चेतावनी दी है कि कोलोरेक्टल कैंसर हमेशा दर्द के साथ नहीं होता, जिससे इसकी पहचान और भी कठिन हो जाती है. लगातार पेट फूलना, मल त्याग की आदतों में बदलाव, अधूरा पेट साफ होने का एहसास, वजन कम होना या मल में खून आना जैसे संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. खासकर जिन लोगों के परिवार में कैंसर का इतिहास है, उन्हें अधिक सतर्क रहने की जरूरत है. समय पर जांच, सही जीवनशैली और डॉक्टर की सलाह से इस गंभीर बीमारी को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकता है. शुरुआती स्टेज में इस कैंसर का इलाज ज्यादा सफल रहता है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.