Friday, 11 Sep 2026 | 08:44 PM

Trending :

IRGC vs President Pezeshkian Control Crisis

IRGC vs President Pezeshkian Control Crisis

तेहरान2 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

ईरान में सरकार और धार्मिक सेना (IRGC) के बीच टकराव बढ़ने की खबर है। तेहरान टाइम्स रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ताकतवर सेना जैसी संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और राष्ट्रपति मसूद पजशकियान के बीच सत्ता को लेकर खींचतान चल रही है।

अखबार के मुताबिक IRGC ने देश का कंट्रोल अब अपने हाथ में ले लिया है। दावा यह भी है कि राष्ट्रपति पजशकियान की मुलाकात सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई से नहीं हो पा रही है।

दरअसल इस हफ्ते की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को लेकर एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत जारी है। ट्रम्प के मुताबिक, उनकी टीम कुछ ‘समझदार’ ईरानी नेताओं के संपर्क में है और बातचीत के जरिए हालात को शांत करने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि, ईरान ने ट्रम्प के इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया। ईरानी अधिकारियों ने साफ कहा कि किसी भी तरह की सीधी बातचीत नहीं चल रही है। ट्रम्प का दावा खारिज होने के बाद यह सवाल उठने लगा कि आखिर ईरान में असली कंट्रोल किसके पास है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान। (फाइल फोटो)

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान। (फाइल फोटो)

राष्ट्रपति के फैसलों में दखल दे रही IRCG

रिपोर्ट के मुताबिक पजशकियान कोई बड़ा फैसला नहीं ले पा रहे हैं। IRGC जिसका काम अमेरिका के हमलों का जवाब देना था, अब सरकार की अहम फैसले भी ले रहा है।

अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पजशकियान ने 26 मार्च को नया खुफिया मंत्री नियुक्त करने की कोशिश की थी। वे हुसैन देहगान को यह पद देना चाहते थे, लेकिन IRGC चीफ अहमद वहीदी ने इसे रोक दिया।

वहीदी ने यह पद तब संभाला था, जब युद्ध की शुरुआत में पिछले कमांडर मोहम्मद पाकपुर मारे गए थे। वहीदी का कहना है कि युद्ध की स्थिति में सभी अहम और संवेदनशील पदों पर नियुक्ति IRGC ही करेगा और वही उन्हें संभालेगा।

आमतौर पर ईरान की व्यवस्था में राष्ट्रपति खुफिया मंत्री का नाम तभी तय करते हैं, जब सुप्रीम लीडर की मंजूरी मिल जाती है, क्योंकि सुरक्षा से जुड़े मामलों में अंतिम अधिकार उन्हीं के पास होता है।

ईरान की धार्मिक सेना IRGC के चीफ अहमद वहीदी। (फाइल फोटो)

ईरान की धार्मिक सेना IRGC के चीफ अहमद वहीदी। (फाइल फोटो)

IRGC सिस्टम पर पकड़ मजबूत कर रहा

अखबार लिखता है कि ईरान में सुप्रीम लीडर कौन है, इसे लेकर स्थिति साफ नहीं है। 28 फरवरी को जब जंग शुरू हुई उसी दिन अयातुल्लाह अली खामेनेई और कई बड़े नेता मारे गए थे।

कुछ दिनों बाद खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को सर्वोच्च नेता बनाया गया, लेकिन तब से वे न तो सामने आए हैं और न ही सीधे कोई बयान दिया है। उनके संदेश सिर्फ टीवी पर पढ़कर सुनाए जा रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अब IRGC के बड़े अधिकारियों की एक ‘मिलिट्री काउंसिल’ रोज के फैसले ले रही है। इतना ही नहीं, IRGC ने मुजतबा के चारों तरफ कड़ी सुरक्षा लगा दी है। यहां तक कि देश की स्थिति से जुड़े सरकारी रिपोर्ट भी उन तक नहीं पहुंचने दी जा रही हैं।

अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि राष्ट्रपति पजशकियान और खामेनेई के बीच हाल के दिनों में कोई संपर्क नहीं हुआ है। पजशकियान ने कई बार सुप्रीम लीडर से मिलने की कोशिश की, लेकिन IRGC ने उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया।

राष्ट्रपति और IRGC के बीच मतभेद पहले से ही सामने आने लगे थे। पजशकियान इस बात से नाराज थे कि IRGC पड़ोसी देशों को निशाना बनाकर तनाव बढ़ा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक बुरा असर पड़ेगा। पहले से ही कई हफ्तों के युद्ध के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था कमजोर हो चुकी है और गोला-बारूद भी कम होता जा रहा है।

होर्मुज पर भी IRGC का कंट्रोल

ईरान में सत्ता का खालीपन पैदा हो गया है यही वजह है कि अब IRGC, जो नियमित सेना से अलग काम करता है, देश की कमान संभालता हुआ दिख रहा है।

IRGC की शुरुआत 1979 की क्रांति के बाद एक अर्धसैनिक बल के रूप में हुई थी, लेकिन समय के साथ यह बहुत ताकतवर बन गया। आज यह तेल, ट्रांसपोर्ट, बैंकिंग और रियल एस्टेट जैसे बड़े सेक्टर में भी काम करता है और अपनी कमाई से खुद को मजबूत बनाता है।

अब होर्मुज जैसे अहम तेल मार्ग का नियंत्रण भी IRGC के पास है, जिसे ईरान ने प्रभावी रूप से बंद कर रखा है। मुजतबा खामेनेई कहां हैं, यह भी साफ नहीं है। इसी वजह से IRGC ने अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है।

कुछ लोगों का कहना है कि मुजतबा की मौत हो चुकी है। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वे शायद कोमा में हैं। ट्रम्प ने भी इशारा किया है कि उनकी हालत गंभीर हो सकती है, जबकि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि उनका चेहरा बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
सोना ₹177 बढ़कर ₹1.42 लाख पर पहुंचा:इस साल ₹9 हजार महंगा हो चुका, चांदी की कीमत ₹789 कम होकर ₹2.17 लाख किलो हुई

July 30, 2026/
12:24 pm

सोने की कीमत में आज यानी 30 जुलाई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10...

authorimg

April 7, 2026/
6:37 am

Last Updated:April 07, 2026, 06:37 IST Health Tips: सीतामढ़ी के मशहरू आयुर्वेद एक्सपर्ट भाग्यनारायण सिंह ने गुम्मा द्रोणपुष्पी को पीलिया...

खोया गुलाब जामुन रेसिपी: इस सीक्रेट तरीके से बनाएं हलवाई जैसा परफेक्ट खोया गुलाब जामुन, नोट करें आसान रेसिपी

May 31, 2026/
11:06 pm

खोया गुलाब जामुन रेसिपी: त्योहार का मौका हो या घर में छोटी मोटी पार्टी, मिठास का ज़िक्र होता ही है...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

IRGC vs President Pezeshkian Control Crisis

IRGC vs President Pezeshkian Control Crisis

तेहरान2 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

ईरान में सरकार और धार्मिक सेना (IRGC) के बीच टकराव बढ़ने की खबर है। तेहरान टाइम्स रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ताकतवर सेना जैसी संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और राष्ट्रपति मसूद पजशकियान के बीच सत्ता को लेकर खींचतान चल रही है।

अखबार के मुताबिक IRGC ने देश का कंट्रोल अब अपने हाथ में ले लिया है। दावा यह भी है कि राष्ट्रपति पजशकियान की मुलाकात सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई से नहीं हो पा रही है।

दरअसल इस हफ्ते की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को लेकर एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत जारी है। ट्रम्प के मुताबिक, उनकी टीम कुछ ‘समझदार’ ईरानी नेताओं के संपर्क में है और बातचीत के जरिए हालात को शांत करने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि, ईरान ने ट्रम्प के इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया। ईरानी अधिकारियों ने साफ कहा कि किसी भी तरह की सीधी बातचीत नहीं चल रही है। ट्रम्प का दावा खारिज होने के बाद यह सवाल उठने लगा कि आखिर ईरान में असली कंट्रोल किसके पास है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान। (फाइल फोटो)

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान। (फाइल फोटो)

राष्ट्रपति के फैसलों में दखल दे रही IRCG

रिपोर्ट के मुताबिक पजशकियान कोई बड़ा फैसला नहीं ले पा रहे हैं। IRGC जिसका काम अमेरिका के हमलों का जवाब देना था, अब सरकार की अहम फैसले भी ले रहा है।

अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पजशकियान ने 26 मार्च को नया खुफिया मंत्री नियुक्त करने की कोशिश की थी। वे हुसैन देहगान को यह पद देना चाहते थे, लेकिन IRGC चीफ अहमद वहीदी ने इसे रोक दिया।

वहीदी ने यह पद तब संभाला था, जब युद्ध की शुरुआत में पिछले कमांडर मोहम्मद पाकपुर मारे गए थे। वहीदी का कहना है कि युद्ध की स्थिति में सभी अहम और संवेदनशील पदों पर नियुक्ति IRGC ही करेगा और वही उन्हें संभालेगा।

आमतौर पर ईरान की व्यवस्था में राष्ट्रपति खुफिया मंत्री का नाम तभी तय करते हैं, जब सुप्रीम लीडर की मंजूरी मिल जाती है, क्योंकि सुरक्षा से जुड़े मामलों में अंतिम अधिकार उन्हीं के पास होता है।

ईरान की धार्मिक सेना IRGC के चीफ अहमद वहीदी। (फाइल फोटो)

ईरान की धार्मिक सेना IRGC के चीफ अहमद वहीदी। (फाइल फोटो)

IRGC सिस्टम पर पकड़ मजबूत कर रहा

अखबार लिखता है कि ईरान में सुप्रीम लीडर कौन है, इसे लेकर स्थिति साफ नहीं है। 28 फरवरी को जब जंग शुरू हुई उसी दिन अयातुल्लाह अली खामेनेई और कई बड़े नेता मारे गए थे।

कुछ दिनों बाद खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को सर्वोच्च नेता बनाया गया, लेकिन तब से वे न तो सामने आए हैं और न ही सीधे कोई बयान दिया है। उनके संदेश सिर्फ टीवी पर पढ़कर सुनाए जा रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अब IRGC के बड़े अधिकारियों की एक ‘मिलिट्री काउंसिल’ रोज के फैसले ले रही है। इतना ही नहीं, IRGC ने मुजतबा के चारों तरफ कड़ी सुरक्षा लगा दी है। यहां तक कि देश की स्थिति से जुड़े सरकारी रिपोर्ट भी उन तक नहीं पहुंचने दी जा रही हैं।

अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि राष्ट्रपति पजशकियान और खामेनेई के बीच हाल के दिनों में कोई संपर्क नहीं हुआ है। पजशकियान ने कई बार सुप्रीम लीडर से मिलने की कोशिश की, लेकिन IRGC ने उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया।

राष्ट्रपति और IRGC के बीच मतभेद पहले से ही सामने आने लगे थे। पजशकियान इस बात से नाराज थे कि IRGC पड़ोसी देशों को निशाना बनाकर तनाव बढ़ा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक बुरा असर पड़ेगा। पहले से ही कई हफ्तों के युद्ध के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था कमजोर हो चुकी है और गोला-बारूद भी कम होता जा रहा है।

होर्मुज पर भी IRGC का कंट्रोल

ईरान में सत्ता का खालीपन पैदा हो गया है यही वजह है कि अब IRGC, जो नियमित सेना से अलग काम करता है, देश की कमान संभालता हुआ दिख रहा है।

IRGC की शुरुआत 1979 की क्रांति के बाद एक अर्धसैनिक बल के रूप में हुई थी, लेकिन समय के साथ यह बहुत ताकतवर बन गया। आज यह तेल, ट्रांसपोर्ट, बैंकिंग और रियल एस्टेट जैसे बड़े सेक्टर में भी काम करता है और अपनी कमाई से खुद को मजबूत बनाता है।

अब होर्मुज जैसे अहम तेल मार्ग का नियंत्रण भी IRGC के पास है, जिसे ईरान ने प्रभावी रूप से बंद कर रखा है। मुजतबा खामेनेई कहां हैं, यह भी साफ नहीं है। इसी वजह से IRGC ने अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है।

कुछ लोगों का कहना है कि मुजतबा की मौत हो चुकी है। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वे शायद कोमा में हैं। ट्रम्प ने भी इशारा किया है कि उनकी हालत गंभीर हो सकती है, जबकि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि उनका चेहरा बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.