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जंग के बीच ट्रम्प सरकार में उथल-पुथल:24 घंटे में निकाले गए आर्मी चीफ और अटॉर्नी जनरल; काश पटेल-तुलसी गबार्ड को भी हटाने की चर्चा

जंग के बीच ट्रम्प सरकार में उथल-पुथल:24 घंटे में निकाले गए आर्मी चीफ और अटॉर्नी जनरल; काश पटेल-तुलसी गबार्ड को भी हटाने की चर्चा

अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी को हटाए जाने के बाद अब ट्रम्प सरकार में कुछ और बड़े अफसरों को निकाले जाने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी वेबसाइट द अटलांटिक की रिपोर्ट के मुताबिक अगला नंबर FBI चीफ काश पटेल और नेशनल इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड का हो सकता है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने गुरुवार को आर्मी चीफ जनरल रैंडी जॉर्ज को तुरंत रिटायर होने का आदेश दिया। व्हाइट हाउस के प्लान से जुड़े कई लोगों ने बताया कि और भी अधिकारियों को हटाने पर चर्चा चल रही है। इसमें आर्मी सेक्रेटरी डेनियल ड्रिस्कॉल और लेबर सेक्रेटरी लोरी चावेज-डीरेमर का नाम भी शामिल है। ट्रम्प अपने दूसरे कार्यकाल में बड़े अधिकारियों को हटाने से बचते रहे थे। उन्हें लगता था कि ऐसा करना डेमोक्रेट्स और मीडिया के सामने झुकना होगा। पिछले कुछ महीनों तक यह आदेश था कि मिडटर्म चुनाव से पहले किसी कैबिनेट अधिकारी को नहीं हटाया जाएगा, लेकिन ईरान युद्ध के बाद ट्रम्प की लोकप्रियता घटने से स्थिति बदल गई है। क्रिस्टी नोएम- बर्खास्त होने वाली पहली अधिकारी ईरान से जंग के बीच अमेरिकी सरकार में तेजी से प्रशासनिक बदलाव हो रहे हैं। सबसे पहले होमलैंड सिक्योरिटी चीफ क्रिस्टी नोएम को बेदखल किए जाने से इसकी शुरुआत हुई। उन्हें किस वजह से हटाया गया इस बारे में आधिकारिक तौर पर कोई वजह नहीं बताई गई है। कुछ समय से उनकी काम करने की शैली और फैसलों पर सवाल उठ रहे थे। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की जिम्मेदारी होती है कि देश को अंदर और बाहर से आने वाले खतरों से सुरक्षित रखा जाए। उनकी राजनीतिक छवि भी विवादों में रही, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ रहा था। आलोचकों का कहना था कि वे ज्यादा राजनीतिक बयानबाजी कर रही हैं। पैम बॉन्डी- एपस्टीन फाइल्स की भेंट चढ़ीं व्हाइट हाउस के एक करीबी ने द अटलांटिक से कहा कि क्रिस्टी नोएम को हटाने पर जो प्रतिक्रिया मिली, उससे ट्रम्प को हिम्मत मिली और उन्होंने बॉन्डी को हटाने का फैसला आगे बढ़ाया। माना जा रहा है कि पैम बॉन्डी ने एपस्टीन मामले को ठीक से नहीं संभाला। दरअसल, एपस्टीन मामले से जुड़ी सच्चाई सामने लाने की मांग लंबे समय से हो रही थी, खासकर ‘क्लाइंट लिस्ट’ को लेकर, जिसमें यह बताया जाता है कि किन-किन प्रभावशाली लोगों का उससे संबंध था। एपस्टीन पर आरोप था कि वह नाबालिग लड़कियों का शोषण करता था और एक बड़ा नेटवर्क चलाता था, जिसमें ताकतवर और अमीर लोग शामिल हो सकते थे। इसी वजह से लोग यह जानना चाहते हैं कि उस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था। इसी दबाव में बॉन्डी ने कुछ लोगों को व्हाइट हाउस बुलाया और उन्हें एपस्टीन फाइल्स फेज 1 नाम का फोल्डर दिया। फोल्डर देने के बाद मामला उल्टा बॉन्डी के लिए परेशानी बन गया। दरअसल उम्मीद थी कि कोई बड़ी जानकारी या खुलासा सामने आएगा। लेकिन जब लोगों ने उन्हें देखा, तो पता चला कि उनमें कोई नई या चौंकाने वाली जानकारी नहीं थी। इससे एपस्टीन का मामला फिर से सुर्खियों में आ गया। फिर ऐसी स्थिति बन गई कि खुद ट्रम्प को इसे जारी करने वाले बिल पर साइन करना पड़ा। रैंडी जॉर्ज- समय से एक साल पहले जबरिया निकाले गए अमेरिकी सेना के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज को भी तुरंत रिटायर होने का आदेश दिया गया है। CNN ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने यह आदेश दिया। रैंडी का पद साल 2027 में समाप्त होने वाला था। उनके जाने के बाद वाइस चीफ ऑफ स्टाफ जनरल क्रिस्टोफर ला नेव कार्यवाहक आर्मी चीफ की जिम्मेदारी संभालेंगे। ला नेव पहले हेगसेथ के सहायक रह चुके हैं। इस पूरे मामले में आधिकारिक तौर पर कोई वजह नहीं दी गई है। पेंटागन ने सिर्फ इतना कहा कि वह रिटायर हो रहे हैं और उनकी सेवा के लिए धन्यवाद दिया। लेकिन जो संकेत मिलते हैं, उनसे लगता है कि यह फैसला व्यक्तिगत गलती की वजह से नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर हो रहे बदलाव का हिस्सा है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ अपने पद संभालने के बाद कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हटा या बदल चुके हैं। यानी सेना के टॉप लेवल पर नई टीम बनाई जा रही है। एक और बात यह है कि रैंडी जॉर्ज को पिछली सरकार के समय नियुक्त किया गया था। नई सरकार अक्सर अपने भरोसे के लोगों को लाना चाहती है, इसलिए पुराने अधिकारियों को हटाया जाता है। काश पटेल- सरकारी पैसे पर अय्याशी करने का आरोप क्रिस्टी और बॉन्डी के हटने के बाद अगर किसी को हटाए जाने की सबसे ज्यादा चर्चा है तो वे ट्रम्प के खास माने जाने वाले FBI चीफ काश पटेल हैं। वे ट्रम्प सरकार के सबसे ज्यादा नजर में रहने वाले अधिकारियों में रहे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने FBI के सरकारी जेट का इस्तेमाल निजी काम के लिए किया। कहा गया कि वे खेल देखने जैसे निजी कार्यक्रमों में जाने के लिए सरकारी विमान का उपयोग कर रहे थे। उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने अपनी गर्लफ्रेंड एलेक्सिस विल्किंस को SWAT कमांडो (स्पेशल वेपन एंड टेक्टिस) सुरक्षा दी और सरकारी रिसोर्स का गलत इस्तेमाल किया। इससे यह सवाल उठा कि क्या वे अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। दूसरा बड़ा विवाद उनके फैसलों को लेकर है। आरोप है कि उनके नेतृत्व में FBI से कई अधिकारियों को हटा दिया गया। खासकर वे अधिकारी, जो ट्रम्प से जुड़े मामलों की जांच में शामिल थे या जिन्हें ट्रम्प के प्रति पूरी तरह वफादार नहीं माना जाता था। इससे यह आरोप लगा कि एजेंसी को राजनीतिक तरीके से चलाया जा रहा है। तीसरा मामला अदालत तक पहुंच गया है। कुछ बर्खास्त FBI एजेंटों ने केस किया है और कहा है कि उन्हें गलत तरीके से नौकरी से निकाला गया। उनका आरोप है कि यह उनके खिलाफ बदले की कार्रवाई थी, क्योंकि वे ट्रम्प से जुड़े मामलों की जांच कर रहे थे। पूर्व FBI एजेंट काइल सेराफिन ने एक रेडियो शो में दावा किया कि ट्रम्प जल्द ही काश पटेल को हटाने का फैसला ले सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हो सकता है कि आज ही काश पटेल को हटा दिया जाए। तुलसी गबार्ड- युद्ध विरोधी अधिकारी का बचाव किया तुलसी गबार्ड के भविष्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। एक सुनवाई के दौरान उन्होंने अपने पूर्व डिप्टी जो केंट की आलोचना नहीं की, जिन्होंने ट्रम्प के ईरान युद्ध के विरोध में इस्तीफा दिया था। गबार्ड ने ट्रम्प के कुछ दावों का विरोध भी किया। उन्होंने सीनेट से कहा कि ईरान ने अपनी यूरेनियम एनरिचमेंट क्षमता फिर से विकसित नहीं की है, जबकि ट्रम्प ने इसी को सैन्य कार्रवाई की बड़ी वजह बताया था। द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने निजी तौर पर अपने वरिष्ठ मंत्रियों से गबार्ड को बदलने की संभावना पर बात की है। वह इस बात से नाराज बताए जाते हैं कि गबार्ड ने ऐसे पूर्व अधिकारी का बचाव किया जो ईरान युद्ध को लेकर उनसे असहमत था। जब ट्रम्प से पूछा गया कि क्या उन्हें गबार्ड पर भरोसा है, तो उन्होंने मिला-जुला जवाब दिया। उन्होंने कहा, “हां, जरूर। उनका सोचने का तरीका मुझसे थोड़ा अलग है, लेकिन इससे यह नहीं होता कि वे सेवा नहीं दे सकतीं।” गबार्ड, जो पहले डेमोक्रेटिक सांसद रह चुकी हैं, को अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की जिम्मेदारी संभालने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि वह विदेशों में सैन्य हस्तक्षेप को लेकर अपने पुराने संदेह और प्रशासन के आक्रामक रुख के बीच तालमेल बैठाने में कभी-कभी मुश्किल महसूस करती हैं। पिछले साल भी ट्रम्प ने गबार्ड के बयान का सार्वजनिक रूप से विरोध किया था, जब उन्होंने कहा था कि ईरान ने परमाणु बम बनाने का फैसला नहीं किया है। ट्रम्प ने कहा था, “वह गलत हैं,” और इसके बाद ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले की मंजूरी दी थी।

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जंग के बीच ट्रम्प सरकार में उथल-पुथल:24 घंटे में निकाले गए आर्मी चीफ और अटॉर्नी जनरल; काश पटेल-तुलसी गबार्ड को भी हटाने की चर्चा

अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी को हटाए जाने के बाद अब ट्रम्प सरकार में कुछ और बड़े अफसरों को निकाले जाने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी वेबसाइट द अटलांटिक की रिपोर्ट के मुताबिक अगला नंबर FBI चीफ काश पटेल और नेशनल इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड का हो सकता है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने गुरुवार को आर्मी चीफ जनरल रैंडी जॉर्ज को तुरंत रिटायर होने का आदेश दिया। व्हाइट हाउस के प्लान से जुड़े कई लोगों ने बताया कि और भी अधिकारियों को हटाने पर चर्चा चल रही है। इसमें आर्मी सेक्रेटरी डेनियल ड्रिस्कॉल और लेबर सेक्रेटरी लोरी चावेज-डीरेमर का नाम भी शामिल है। ट्रम्प अपने दूसरे कार्यकाल में बड़े अधिकारियों को हटाने से बचते रहे थे। उन्हें लगता था कि ऐसा करना डेमोक्रेट्स और मीडिया के सामने झुकना होगा। पिछले कुछ महीनों तक यह आदेश था कि मिडटर्म चुनाव से पहले किसी कैबिनेट अधिकारी को नहीं हटाया जाएगा, लेकिन ईरान युद्ध के बाद ट्रम्प की लोकप्रियता घटने से स्थिति बदल गई है। क्रिस्टी नोएम- बर्खास्त होने वाली पहली अधिकारी ईरान से जंग के बीच अमेरिकी सरकार में तेजी से प्रशासनिक बदलाव हो रहे हैं। सबसे पहले होमलैंड सिक्योरिटी चीफ क्रिस्टी नोएम को बेदखल किए जाने से इसकी शुरुआत हुई। उन्हें किस वजह से हटाया गया इस बारे में आधिकारिक तौर पर कोई वजह नहीं बताई गई है। कुछ समय से उनकी काम करने की शैली और फैसलों पर सवाल उठ रहे थे। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की जिम्मेदारी होती है कि देश को अंदर और बाहर से आने वाले खतरों से सुरक्षित रखा जाए। उनकी राजनीतिक छवि भी विवादों में रही, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ रहा था। आलोचकों का कहना था कि वे ज्यादा राजनीतिक बयानबाजी कर रही हैं। पैम बॉन्डी- एपस्टीन फाइल्स की भेंट चढ़ीं व्हाइट हाउस के एक करीबी ने द अटलांटिक से कहा कि क्रिस्टी नोएम को हटाने पर जो प्रतिक्रिया मिली, उससे ट्रम्प को हिम्मत मिली और उन्होंने बॉन्डी को हटाने का फैसला आगे बढ़ाया। माना जा रहा है कि पैम बॉन्डी ने एपस्टीन मामले को ठीक से नहीं संभाला। दरअसल, एपस्टीन मामले से जुड़ी सच्चाई सामने लाने की मांग लंबे समय से हो रही थी, खासकर ‘क्लाइंट लिस्ट’ को लेकर, जिसमें यह बताया जाता है कि किन-किन प्रभावशाली लोगों का उससे संबंध था। एपस्टीन पर आरोप था कि वह नाबालिग लड़कियों का शोषण करता था और एक बड़ा नेटवर्क चलाता था, जिसमें ताकतवर और अमीर लोग शामिल हो सकते थे। इसी वजह से लोग यह जानना चाहते हैं कि उस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था। इसी दबाव में बॉन्डी ने कुछ लोगों को व्हाइट हाउस बुलाया और उन्हें एपस्टीन फाइल्स फेज 1 नाम का फोल्डर दिया। फोल्डर देने के बाद मामला उल्टा बॉन्डी के लिए परेशानी बन गया। दरअसल उम्मीद थी कि कोई बड़ी जानकारी या खुलासा सामने आएगा। लेकिन जब लोगों ने उन्हें देखा, तो पता चला कि उनमें कोई नई या चौंकाने वाली जानकारी नहीं थी। इससे एपस्टीन का मामला फिर से सुर्खियों में आ गया। फिर ऐसी स्थिति बन गई कि खुद ट्रम्प को इसे जारी करने वाले बिल पर साइन करना पड़ा। रैंडी जॉर्ज- समय से एक साल पहले जबरिया निकाले गए अमेरिकी सेना के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज को भी तुरंत रिटायर होने का आदेश दिया गया है। CNN ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने यह आदेश दिया। रैंडी का पद साल 2027 में समाप्त होने वाला था। उनके जाने के बाद वाइस चीफ ऑफ स्टाफ जनरल क्रिस्टोफर ला नेव कार्यवाहक आर्मी चीफ की जिम्मेदारी संभालेंगे। ला नेव पहले हेगसेथ के सहायक रह चुके हैं। इस पूरे मामले में आधिकारिक तौर पर कोई वजह नहीं दी गई है। पेंटागन ने सिर्फ इतना कहा कि वह रिटायर हो रहे हैं और उनकी सेवा के लिए धन्यवाद दिया। लेकिन जो संकेत मिलते हैं, उनसे लगता है कि यह फैसला व्यक्तिगत गलती की वजह से नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर हो रहे बदलाव का हिस्सा है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ अपने पद संभालने के बाद कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हटा या बदल चुके हैं। यानी सेना के टॉप लेवल पर नई टीम बनाई जा रही है। एक और बात यह है कि रैंडी जॉर्ज को पिछली सरकार के समय नियुक्त किया गया था। नई सरकार अक्सर अपने भरोसे के लोगों को लाना चाहती है, इसलिए पुराने अधिकारियों को हटाया जाता है। काश पटेल- सरकारी पैसे पर अय्याशी करने का आरोप क्रिस्टी और बॉन्डी के हटने के बाद अगर किसी को हटाए जाने की सबसे ज्यादा चर्चा है तो वे ट्रम्प के खास माने जाने वाले FBI चीफ काश पटेल हैं। वे ट्रम्प सरकार के सबसे ज्यादा नजर में रहने वाले अधिकारियों में रहे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने FBI के सरकारी जेट का इस्तेमाल निजी काम के लिए किया। कहा गया कि वे खेल देखने जैसे निजी कार्यक्रमों में जाने के लिए सरकारी विमान का उपयोग कर रहे थे। उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने अपनी गर्लफ्रेंड एलेक्सिस विल्किंस को SWAT कमांडो (स्पेशल वेपन एंड टेक्टिस) सुरक्षा दी और सरकारी रिसोर्स का गलत इस्तेमाल किया। इससे यह सवाल उठा कि क्या वे अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। दूसरा बड़ा विवाद उनके फैसलों को लेकर है। आरोप है कि उनके नेतृत्व में FBI से कई अधिकारियों को हटा दिया गया। खासकर वे अधिकारी, जो ट्रम्प से जुड़े मामलों की जांच में शामिल थे या जिन्हें ट्रम्प के प्रति पूरी तरह वफादार नहीं माना जाता था। इससे यह आरोप लगा कि एजेंसी को राजनीतिक तरीके से चलाया जा रहा है। तीसरा मामला अदालत तक पहुंच गया है। कुछ बर्खास्त FBI एजेंटों ने केस किया है और कहा है कि उन्हें गलत तरीके से नौकरी से निकाला गया। उनका आरोप है कि यह उनके खिलाफ बदले की कार्रवाई थी, क्योंकि वे ट्रम्प से जुड़े मामलों की जांच कर रहे थे। पूर्व FBI एजेंट काइल सेराफिन ने एक रेडियो शो में दावा किया कि ट्रम्प जल्द ही काश पटेल को हटाने का फैसला ले सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हो सकता है कि आज ही काश पटेल को हटा दिया जाए। तुलसी गबार्ड- युद्ध विरोधी अधिकारी का बचाव किया तुलसी गबार्ड के भविष्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। एक सुनवाई के दौरान उन्होंने अपने पूर्व डिप्टी जो केंट की आलोचना नहीं की, जिन्होंने ट्रम्प के ईरान युद्ध के विरोध में इस्तीफा दिया था। गबार्ड ने ट्रम्प के कुछ दावों का विरोध भी किया। उन्होंने सीनेट से कहा कि ईरान ने अपनी यूरेनियम एनरिचमेंट क्षमता फिर से विकसित नहीं की है, जबकि ट्रम्प ने इसी को सैन्य कार्रवाई की बड़ी वजह बताया था। द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने निजी तौर पर अपने वरिष्ठ मंत्रियों से गबार्ड को बदलने की संभावना पर बात की है। वह इस बात से नाराज बताए जाते हैं कि गबार्ड ने ऐसे पूर्व अधिकारी का बचाव किया जो ईरान युद्ध को लेकर उनसे असहमत था। जब ट्रम्प से पूछा गया कि क्या उन्हें गबार्ड पर भरोसा है, तो उन्होंने मिला-जुला जवाब दिया। उन्होंने कहा, “हां, जरूर। उनका सोचने का तरीका मुझसे थोड़ा अलग है, लेकिन इससे यह नहीं होता कि वे सेवा नहीं दे सकतीं।” गबार्ड, जो पहले डेमोक्रेटिक सांसद रह चुकी हैं, को अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की जिम्मेदारी संभालने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि वह विदेशों में सैन्य हस्तक्षेप को लेकर अपने पुराने संदेह और प्रशासन के आक्रामक रुख के बीच तालमेल बैठाने में कभी-कभी मुश्किल महसूस करती हैं। पिछले साल भी ट्रम्प ने गबार्ड के बयान का सार्वजनिक रूप से विरोध किया था, जब उन्होंने कहा था कि ईरान ने परमाणु बम बनाने का फैसला नहीं किया है। ट्रम्प ने कहा था, “वह गलत हैं,” और इसके बाद ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले की मंजूरी दी थी।

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