Saturday, 10 Oct 2026 | 08:04 AM

Trending :

EXCLUSIVE

IPS Urvashi Sengar Training Halt

IPS Urvashi Sengar Training Halt

13 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

मध्य प्रदेश कैडर की 2023 बैच की आईपीएस अधिकारी उर्वशी सेंगर ने प्रेग्नेंसी के बाद अपनी ट्रेनिंग के लिए अनुमति न मिले पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। दरअसल परिवीक्षा अवधि के दौरान उर्वशी गर्भवती हो गईं। आईपीएस ट्रेनिंग के मौजूदा नियमों के अनुसार, उन्हें अपने मूल बैच के साथ प्रशिक्षण छोड़ना पड़ता है और बच्चे के जन्म के बाद किसी दूसरे बैच में शामिल होना पड़ता है।

प्रेग्नेंट अधिकारियों को घुड़सवारी, लंबी दूरी की दौड़ और युद्ध प्रशिक्षण जैसी शारीरिक रूप से कठिन गतिविधियों से भी छूट दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या पूछा?

मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा नियमों के पीछे के तर्क पर सवाल उठाए। बेंच ने केंद्र से पूछा कि डिलीवरी के बाद मेडिकली फिट घोषित की गई और ट्रेनिंग लेने की इच्छुक महिला अधिकारी को अपनी परिवीक्षा अवधि पूरी करने से क्यों रोका जाना चाहिए।

अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या मातृत्व किसी अधिकारी की करियर प्रगति में बाधा बन जाना चाहिए, खासकर तब जब ट्रेनिंग फिर से शुरू करने में बाधा डालने वाली कोई मेडिकल प्रॉब्लम न हो।

QuoteImage

Supreme Court hears challenge to a 1993 Office Memorandum of the Ministry of Home Affairs that prevents women IPS probationers from joining training for a year after childbirth despite claiming to be medically fit. (Urvashi Sengar v. Union of India). Bench: Justices Manoj Misra… pic.twitter.com/AyFySaZOyr— Bar and Bench (@barandbench) July 10, 2026

QuoteImage

कोर्ट ने सुनवाई बंद की

सुप्रीम कोर्ट ने उर्वशी सेंगर को फिलहाल चल रही ट्रेनिंग में शामिल करने का आदेश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि 9 हफ्ते में से तीन हफ्ते की ट्रेनिंग हो चुकी है। इससे साफ है कि आप अच्छी तरह से ट्रेनिंग नहीं कर पाएंगी। हालांकि, अदालत ने केंद्र सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया कि इससे महिला IPS की सीनियरिटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) महिला IPS की मूल याचिका पर मेरिट के आधार पर सुनवाई करे।

1993 के पुराने नियम को चुनौती क्यों?

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा है कि आज के समय में ऐसे फैसले पुराने नियमों के बजाय आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और व्यक्तिगत मेडिकल फिटनेस के आधार पर होने चाहिए।

1993 का यह नियम सभी गर्भवती अधिकारियों पर बिना किसी भेदभाव के समान रूप से लागू होता है और इसमें फेज-1 और फेज-2 की ट्रेनिंग के बीच कोई अंतर नहीं किया गया है।

फेज-2 में मुख्य रूप से कक्षा आधारित पढ़ाई, अकादमिक मॉड्यूल और संस्थागत प्रशिक्षण होता है, जो शारीरिक रूप से ज्यादा कठिन नहीं है। इसलिए केवल गर्भावस्था के आधार पर बाहर करना ठीक नहीं है।

साल 2004 में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने महिला IAS अधिकारियों के लिए इस पुराने नियम में बदलाव कर दिया था, जिसके तहत अब IAS महिला प्रोबेशनरों को मेडिकल फिटनेस के आधार पर ट्रेनिंग पूरी करने की इजाजत मिलती है। ऐसे में IPS अधिकारियों के लिए 1993 का पुराना नियम लागू रखना समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।

पूरी खबर यहां पढ़ें

500 आवेदन के बाद भी नहीं मिली नौकरी:कंप्यूटर साइंस में फर्स्ट डिवीजन की डिग्री के साथ ग्रेजुएट, अब रैपिडो से कर रहा कमाई

कंप्यूटर साइंस से पढ़ाई करने के बाद जब नौकरी न मिले तो हारकर बैठ जाने के बजाय नए जॉब के अवसर तलाशने में ही समझदारी है। ये बात इस रैपिडो राइडर की कहानी से समझी जा सकती है। इसकी कहानी एक ट्विटर यूजर ने अपने अकाउंट पर शेयर की। इस यूजर का नाम नीरज है। पूरी खबर यहां पढ़ें

खबरें और भी हैं…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
अरिजीत सिंह के सपोर्ट में आए अदनान सामी:सिंगर बोले- प्लेबैक सिंगिंग छोड़ने का फैसला सोच-समझकर लिया, उनकी प्राइवेसी का सम्मान करें

May 17, 2026/
3:58 pm

सिंगर और कंपोजर अदनान सामी ने अरिजीत सिंह के प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास लेने के फैसले का समर्थन किया है।...

संजय कपूर की ₹30,000 करोड़ की संपत्ति बेचने पर रोक:करिश्मा कपूर के बच्चों का वसीयत में जालसाजी का आरोप; दिल्ली HC ने संपत्ति को फ्रीज किया

April 30, 2026/
6:12 pm

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्ट्रेस करिश्मा कपूर के पूर्व पति और दिवंगत इंडस्ट्रियलिस्ट संजय कपूर की करीब 30 हजार करोड़...

बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी से पहले भारत दौरे पर आएगी ऑस्ट्रेलिया-A टीम:सितंबर-अक्टूबर में पुडुचेरी में होंगे 5 मैच; महिला और अंडर-19 टीमें भी खेलेंगी

May 7, 2026/
12:09 pm

अगले साल जनवरी में होने वाली बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की तैयारियों के लिए ऑस्ट्रेलिया की ‘A’ टीम भारत का दौरा करेगी।...

Chennai Super Kings' Khaleel Ahmed, second right, celebrates with teammates the wicket of Kolkata Knight Riders' Sunil Narine during the Indian Premier League cricket match between Chennai Super Kings and Kolkata Knight Riders in Chennai, India, Tuesday, April 14, 2026. (AP Photo)

April 14, 2026/
11:48 pm

आखरी अपडेट:14 अप्रैल, 2026, 23:48 IST सूत्रों ने कहा कि भाजपा नेता सम्राट चौधरी की कटौती का एक और कारण...

Latur Coaching Centre, Doctors Under CBI Scanner

May 18, 2026/
12:02 pm

नई दिल्ली/मुंबई3 मिनट पहले कॉपी लिंक CBI ने 15 मई को रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस (RCC) के संस्थापक शिवराज मोटेगांवकर से...

बुधवार को महाकाल के भस्म आरती दर्शन:पंचामृत अभिषेक, भांग-चंदन से श्रृंगार… अलौकिक रूप में सजे बाबा महाकाल

April 15, 2026/
6:49 am

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ। मंदिर के कपाट खुलते ही परंपरा...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

IPS Urvashi Sengar Training Halt

IPS Urvashi Sengar Training Halt

13 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

मध्य प्रदेश कैडर की 2023 बैच की आईपीएस अधिकारी उर्वशी सेंगर ने प्रेग्नेंसी के बाद अपनी ट्रेनिंग के लिए अनुमति न मिले पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। दरअसल परिवीक्षा अवधि के दौरान उर्वशी गर्भवती हो गईं। आईपीएस ट्रेनिंग के मौजूदा नियमों के अनुसार, उन्हें अपने मूल बैच के साथ प्रशिक्षण छोड़ना पड़ता है और बच्चे के जन्म के बाद किसी दूसरे बैच में शामिल होना पड़ता है।

प्रेग्नेंट अधिकारियों को घुड़सवारी, लंबी दूरी की दौड़ और युद्ध प्रशिक्षण जैसी शारीरिक रूप से कठिन गतिविधियों से भी छूट दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या पूछा?

मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा नियमों के पीछे के तर्क पर सवाल उठाए। बेंच ने केंद्र से पूछा कि डिलीवरी के बाद मेडिकली फिट घोषित की गई और ट्रेनिंग लेने की इच्छुक महिला अधिकारी को अपनी परिवीक्षा अवधि पूरी करने से क्यों रोका जाना चाहिए।

अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या मातृत्व किसी अधिकारी की करियर प्रगति में बाधा बन जाना चाहिए, खासकर तब जब ट्रेनिंग फिर से शुरू करने में बाधा डालने वाली कोई मेडिकल प्रॉब्लम न हो।

QuoteImage

Supreme Court hears challenge to a 1993 Office Memorandum of the Ministry of Home Affairs that prevents women IPS probationers from joining training for a year after childbirth despite claiming to be medically fit. (Urvashi Sengar v. Union of India). Bench: Justices Manoj Misra… pic.twitter.com/AyFySaZOyr— Bar and Bench (@barandbench) July 10, 2026

QuoteImage

कोर्ट ने सुनवाई बंद की

सुप्रीम कोर्ट ने उर्वशी सेंगर को फिलहाल चल रही ट्रेनिंग में शामिल करने का आदेश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि 9 हफ्ते में से तीन हफ्ते की ट्रेनिंग हो चुकी है। इससे साफ है कि आप अच्छी तरह से ट्रेनिंग नहीं कर पाएंगी। हालांकि, अदालत ने केंद्र सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया कि इससे महिला IPS की सीनियरिटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) महिला IPS की मूल याचिका पर मेरिट के आधार पर सुनवाई करे।

1993 के पुराने नियम को चुनौती क्यों?

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा है कि आज के समय में ऐसे फैसले पुराने नियमों के बजाय आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और व्यक्तिगत मेडिकल फिटनेस के आधार पर होने चाहिए।

1993 का यह नियम सभी गर्भवती अधिकारियों पर बिना किसी भेदभाव के समान रूप से लागू होता है और इसमें फेज-1 और फेज-2 की ट्रेनिंग के बीच कोई अंतर नहीं किया गया है।

फेज-2 में मुख्य रूप से कक्षा आधारित पढ़ाई, अकादमिक मॉड्यूल और संस्थागत प्रशिक्षण होता है, जो शारीरिक रूप से ज्यादा कठिन नहीं है। इसलिए केवल गर्भावस्था के आधार पर बाहर करना ठीक नहीं है।

साल 2004 में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने महिला IAS अधिकारियों के लिए इस पुराने नियम में बदलाव कर दिया था, जिसके तहत अब IAS महिला प्रोबेशनरों को मेडिकल फिटनेस के आधार पर ट्रेनिंग पूरी करने की इजाजत मिलती है। ऐसे में IPS अधिकारियों के लिए 1993 का पुराना नियम लागू रखना समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।

पूरी खबर यहां पढ़ें

500 आवेदन के बाद भी नहीं मिली नौकरी:कंप्यूटर साइंस में फर्स्ट डिवीजन की डिग्री के साथ ग्रेजुएट, अब रैपिडो से कर रहा कमाई

कंप्यूटर साइंस से पढ़ाई करने के बाद जब नौकरी न मिले तो हारकर बैठ जाने के बजाय नए जॉब के अवसर तलाशने में ही समझदारी है। ये बात इस रैपिडो राइडर की कहानी से समझी जा सकती है। इसकी कहानी एक ट्विटर यूजर ने अपने अकाउंट पर शेयर की। इस यूजर का नाम नीरज है। पूरी खबर यहां पढ़ें

खबरें और भी हैं…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.