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तमिल में चुनाव से पहले हिंदी फिर से नागरिकता! शिक्षा नीति को लेकर स्टालिन और डेमोक्रेट प्रधान में घटिया बहस

तमिल में चुनाव से पहले हिंदी फिर से नागरिकता! शिक्षा नीति को लेकर स्टालिन और डेमोक्रेट प्रधान में घटिया बहस

तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर एक बार फिर से हिंदी को लेकर विवाद शुरू हो गया है. इसी मामले पर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री डेमोक्रेट प्रधान के बीच भी बहस हुई। सीएम स्टालिन ने नई शिक्षा नीति पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा था कि यह शिक्षा सुधार नहीं बल्कि एक चालाक तरीके से हिंदी को पूरे देश में फैलाने की कोशिश है। इसी पर जवाब देते हुए डेमोक्रेट प्रधान ने कहा कि ‘हिंदी पेंटिंग’ वाली बात पुरानी और थकी हुई राजनीति है। एनईपी में हिंदी को अनिवार्य नहीं किया गया है, यह स्टालिन की गलत व्याख्या है।

यह मामला राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का है, जिसे केंद्र सरकार ने लागू कर दिया है. इसी शिक्षा नीति में विद्यार्थियों के लिए प्राथमिक नियम हैं- तीन भाषा सूत्र, यानी स्कूल के बच्चों को तीन भाषाएँ सिखानी चाहिए। इनमें से दो भारतीय समुद्र तटों का होना अनिवार्य है। दक्षिण भारत की राज्य केंद्र सरकार पर आरोप लगाया गया है कि नई शिक्षा नीति के जरिए वे अपने ऊपर हिंदी गैजेट की कोशिश कर रही हैं।

नई शिक्षा नीति पर क्या बोले सीएम स्टाइलिस्ट?

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और शिक्षकों के प्रमुख एमके स्टालिन ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यह शिक्षा सुधार नहीं बल्कि एक चालाक तरीके से हिंदी को पूरे देश में फैलाने की कोशिश है। उन्होंने प्रश्न किया कि यह नियम अप्रासंगिक क्यों है? दक्षिण के बच्चों को हिंदी सीखनी है, लेकिन हिंदी भाषा वाले राज्यों में तमिल या माध्यमिक पढ़ाई कैसे की जाती है? उत्तर है नहीं.

स्टालिन ने आरोप लगाया कि सेंट्रल स्कूल में तमिल मछुआरों के लिए सचिवालय तक नहीं हैं। फिर लेखकों को भारतीय भाषा सीखने का उपदेश देना ठीक नहीं लगता। टीचर्स के प्रमुख ने कहा कि बिना पैसा और बिना तैयारी के टीचर्स के लिए यह नीतिगत ताकत जा रही है। इससे दस्तावेज़ में भी नुकसान होगा. अंग्रेजी वाले राज्यों के बच्चों को फायदा होगा और राज्यों के बच्चे पीछे रह जाएंगे।

डेमोक्रेट प्रधान ने स्टालिन को दिया ये जवाब

तमिलनाडु के सीएम की ओर से दिए गए पोर्टफोलियो पर शिक्षा मंत्री पेट्रोलियम प्रधान ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी पेंटिंग वाली बात पुरानी और थकी हुई राजनीति है। नई शिक्षा नीति में हिंदी को अनिवार्य नहीं किया गया है, यह स्टालिन की गलत व्याख्या है। उन्होंने कहा कि एनईपी से हर बच्चे को अपनी मातृभाषा में पढ़ने का मौका मिलता है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तमिल भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर बहुत सम्मान मिला है। काशी तमिल संगमम जैसे आयोजन इसके जीते-जागते उदाहरण हैं। स्टालिन पर पलटवार करते हुए प्रधान ने कहा कि बच्चों के विकास में असली भेदभाव तो डीएमके सरकार ही है। तमिल ने अच्छे स्कूल निर्माण के लिए एक एक्ट पर हस्ताक्षर करने का वादा किया था, लेकिन बाद में वो खुद मुकर गया। न्यायालय के सर्वोच्च आदेश के बाद भी नवोदय अभिलेखों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

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तमिल में चुनाव से पहले हिंदी फिर से नागरिकता! शिक्षा नीति को लेकर स्टालिन और डेमोक्रेट प्रधान में घटिया बहस

तमिल में चुनाव से पहले हिंदी फिर से नागरिकता! शिक्षा नीति को लेकर स्टालिन और डेमोक्रेट प्रधान में घटिया बहस

तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर एक बार फिर से हिंदी को लेकर विवाद शुरू हो गया है. इसी मामले पर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री डेमोक्रेट प्रधान के बीच भी बहस हुई। सीएम स्टालिन ने नई शिक्षा नीति पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा था कि यह शिक्षा सुधार नहीं बल्कि एक चालाक तरीके से हिंदी को पूरे देश में फैलाने की कोशिश है। इसी पर जवाब देते हुए डेमोक्रेट प्रधान ने कहा कि ‘हिंदी पेंटिंग’ वाली बात पुरानी और थकी हुई राजनीति है। एनईपी में हिंदी को अनिवार्य नहीं किया गया है, यह स्टालिन की गलत व्याख्या है।

यह मामला राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का है, जिसे केंद्र सरकार ने लागू कर दिया है. इसी शिक्षा नीति में विद्यार्थियों के लिए प्राथमिक नियम हैं- तीन भाषा सूत्र, यानी स्कूल के बच्चों को तीन भाषाएँ सिखानी चाहिए। इनमें से दो भारतीय समुद्र तटों का होना अनिवार्य है। दक्षिण भारत की राज्य केंद्र सरकार पर आरोप लगाया गया है कि नई शिक्षा नीति के जरिए वे अपने ऊपर हिंदी गैजेट की कोशिश कर रही हैं।

नई शिक्षा नीति पर क्या बोले सीएम स्टाइलिस्ट?

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और शिक्षकों के प्रमुख एमके स्टालिन ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यह शिक्षा सुधार नहीं बल्कि एक चालाक तरीके से हिंदी को पूरे देश में फैलाने की कोशिश है। उन्होंने प्रश्न किया कि यह नियम अप्रासंगिक क्यों है? दक्षिण के बच्चों को हिंदी सीखनी है, लेकिन हिंदी भाषा वाले राज्यों में तमिल या माध्यमिक पढ़ाई कैसे की जाती है? उत्तर है नहीं.

स्टालिन ने आरोप लगाया कि सेंट्रल स्कूल में तमिल मछुआरों के लिए सचिवालय तक नहीं हैं। फिर लेखकों को भारतीय भाषा सीखने का उपदेश देना ठीक नहीं लगता। टीचर्स के प्रमुख ने कहा कि बिना पैसा और बिना तैयारी के टीचर्स के लिए यह नीतिगत ताकत जा रही है। इससे दस्तावेज़ में भी नुकसान होगा. अंग्रेजी वाले राज्यों के बच्चों को फायदा होगा और राज्यों के बच्चे पीछे रह जाएंगे।

डेमोक्रेट प्रधान ने स्टालिन को दिया ये जवाब

तमिलनाडु के सीएम की ओर से दिए गए पोर्टफोलियो पर शिक्षा मंत्री पेट्रोलियम प्रधान ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी पेंटिंग वाली बात पुरानी और थकी हुई राजनीति है। नई शिक्षा नीति में हिंदी को अनिवार्य नहीं किया गया है, यह स्टालिन की गलत व्याख्या है। उन्होंने कहा कि एनईपी से हर बच्चे को अपनी मातृभाषा में पढ़ने का मौका मिलता है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तमिल भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर बहुत सम्मान मिला है। काशी तमिल संगमम जैसे आयोजन इसके जीते-जागते उदाहरण हैं। स्टालिन पर पलटवार करते हुए प्रधान ने कहा कि बच्चों के विकास में असली भेदभाव तो डीएमके सरकार ही है। तमिल ने अच्छे स्कूल निर्माण के लिए एक एक्ट पर हस्ताक्षर करने का वादा किया था, लेकिन बाद में वो खुद मुकर गया। न्यायालय के सर्वोच्च आदेश के बाद भी नवोदय अभिलेखों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

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