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एक गलती से बढ़ेगा पित्त-कफ! बैसाख में अपनाएं ये देसी डाइट प्लान, एक्सपर्ट से समझें सब

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कोरबा : 3 अप्रैल से बैसाख महीने की शुरुआत हो चुकी है जो की 1 मई तक चलेगा.बैसाख माह वसंत के अंत एवं ग्रीष्म की शुरुआत का संक्रमणकाल है.इस अवधि में मौसम धीरे‑धीरे गरम व शुष्क होता है, जिससे कफ‑पित्त दोनो दोष असंतुलित हो सकते हैं और संक्रामक रोगों की सम्भावना बढ़ती है.आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा, जो छत्तीसगढ़ के प्रख्यात नाड़ी वैद्य हैं, उन्होंने इस ऋतु में विशेष आहार‑विधान की महत्ता को बताया.

वनस्पति तेल से परहेज, बेल‑सत्तू को प्राथमिकता
डॉ. शर्मा के अनुसार, बैसाख माह मे भारी, तेलीय व मसालेदार भोजन से बचना चाहिए.वनस्पति तेल शरीर में कफ को बढ़ाता है और पित्त दोष को असंतुलित कर देता है.इस समय तेल‑रहित, हल्का एवं ताजा भोजन ही स्वास्थ्य के लिये लाभदायक है.

वहीं, बेल साबूदाना और सत्तू को इस माह के प्रमुख पोषक माना गया है.बेल में आसानी से पचने वाले कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो गर्मी में शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं.सत्तू में प्रोटीन, फाइबर और आयरन की भरपूर मात्रा होती है, जिससे पाचन‑तंत्र मजबूत रहता है और शारीरिक शक्ति बनी रहती है.

क्या खाएं
जौ, दलिया, चावल, मक्क, मोंठ, मूंग, चना, तुअर दाल,बेल, संतरा, तरबूज, खरबुज, आम, मौसंबी, सेव, लौकी, ककड़ी, कद्दू, हरा धनिया, तरोई, करेला, जिमीकंद, सहजन की फली, पुदीना, चौलाई,जीरा, सूखा धनिया, मीठा नीम, हल्दी, इलायची, पतली दालचीनी.इन पदार्थों में जल संतुलन, एंटी‑ऑक्सीडेंट और पाचन‑सहायक गुण होते हैं, जो गर्मी के तापमान से शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं.गर्म मौसम में पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पानी एवं नारियल पानी सेवन करें, जिससे डिहाइड्रेशन से बचाव होगा.खाने में हल्का व ताज़ा रखना, देर रात का भोजन न करना और बासी भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए.

क्या न खाएं
वनस्पति तेल, बाजरा, पुराना गेहूँ, उड़द दाल, मसूर, साथ ही मेथी, बैंगन, मूली, फूल‑गोभी, पत्ता‑गोभी, अरबी, पपीते तथा अधिक तीखा‑तेज़ मसालेदार व्यंजन.इनसे कफ‑पित्त की वृद्धि, अपच, उल्टी और डिहाइड्रेशन की शंका बढ़ती है.

डॉ. शर्मा ने बताया की बैसाख में आयुर्वेदिक नियमों का पालन कर हम न केवल संक्रमण‑रोगों से बच सकते हैं, बल्कि शरीर को संतुलित रख कर गर्मी के सत्र में ऊर्जा भी बनाए रख सकते हैं.बेल, सत्तू और मौसमी फल‑सब्जियों को अपने थाली में शामिल कर स्वस्थ बेसाख का आनंद उठाएं.

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वनस्पति तेल से परहेज, बेल‑सत्तू को प्राथमिकता
डॉ. शर्मा के अनुसार, बैसाख माह मे भारी, तेलीय व मसालेदार भोजन से बचना चाहिए.वनस्पति तेल शरीर में कफ को बढ़ाता है और पित्त दोष को असंतुलित कर देता है.इस समय तेल‑रहित, हल्का एवं ताजा भोजन ही स्वास्थ्य के लिये लाभदायक है.

वहीं, बेल साबूदाना और सत्तू को इस माह के प्रमुख पोषक माना गया है.बेल में आसानी से पचने वाले कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो गर्मी में शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं.सत्तू में प्रोटीन, फाइबर और आयरन की भरपूर मात्रा होती है, जिससे पाचन‑तंत्र मजबूत रहता है और शारीरिक शक्ति बनी रहती है.

क्या खाएं
जौ, दलिया, चावल, मक्क, मोंठ, मूंग, चना, तुअर दाल,बेल, संतरा, तरबूज, खरबुज, आम, मौसंबी, सेव, लौकी, ककड़ी, कद्दू, हरा धनिया, तरोई, करेला, जिमीकंद, सहजन की फली, पुदीना, चौलाई,जीरा, सूखा धनिया, मीठा नीम, हल्दी, इलायची, पतली दालचीनी.इन पदार्थों में जल संतुलन, एंटी‑ऑक्सीडेंट और पाचन‑सहायक गुण होते हैं, जो गर्मी के तापमान से शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं.गर्म मौसम में पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पानी एवं नारियल पानी सेवन करें, जिससे डिहाइड्रेशन से बचाव होगा.खाने में हल्का व ताज़ा रखना, देर रात का भोजन न करना और बासी भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए.

क्या न खाएं
वनस्पति तेल, बाजरा, पुराना गेहूँ, उड़द दाल, मसूर, साथ ही मेथी, बैंगन, मूली, फूल‑गोभी, पत्ता‑गोभी, अरबी, पपीते तथा अधिक तीखा‑तेज़ मसालेदार व्यंजन.इनसे कफ‑पित्त की वृद्धि, अपच, उल्टी और डिहाइड्रेशन की शंका बढ़ती है.

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