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SBI Research: Global Uncertainty, Crude Oil Impact RBI Repo Rate

SBI Research: Global Uncertainty, Crude Oil Impact RBI Repo Rate
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  • SBI Research: Global Uncertainty, Crude Oil Impact RBI Repo Rate | 5.25%

नई दिल्ली17 मिनट पहले

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 6-8 अप्रैल को होने वाली है। बाजार को उम्मीद थी कि इस बार शायद ब्याज दरों में कुछ राहत मिले, लेकिन पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में बढ़ते तनाव ने समीकरण बदल दिए हैं।

SBI रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल को देखते हुए RBI फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। इससे पहले फरवरी में हुई मीटिंग में भी ब्याज दर में बदलाव नहीं हुआ था। अभी ब्याज दर 5.25% पर है।

दुनियाभर में उथल-पुथल, सप्लाई चेन पर असर

SBI रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया है। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने जैसी स्थिति से ग्लोबल ऑयल मार्केट में 1973 के बाद का सबसे बड़ा व्यवधान पैदा हुआ है। युद्ध की शुरुआत के बाद यह पहली पॉलिसी समीक्षा है, इसलिए RBI काफी फूंक-फूंक कर कदम उठाएगा।

डॉलर के मुकाबले रुपया 93 के पार, बढ़ेगी ‘इंपोर्टेड इन्फ्लेशन’

भारत इस ग्लोबल संकट से अछूता नहीं है। कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे भारत में ‘इंपोर्टेड इन्फ्लेशन’ (आयातित महंगाई) बढ़ रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, डॉलर के मुकाबले रुपया 93 के स्तर को पार कर गया है। इसके साथ ही ‘सुपर अल नीनो’ का खतरा भी बना हुआ है, जो आने वाले समय में महंगाई की स्थिति को और बिगाड़ सकता है।

अगले 3 क्वार्टर तक 4.5% से ऊपर रह सकती है महंगाई

घरेलू मोर्चे पर भी चुनौतियां कम नहीं हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आयातित महंगाई पहले ही 5.4% पर पहुंच चुकी है और इसके आगे भी बढ़ने के आसार हैं। अनुमान है कि अगले तीन तिमाहियों तक कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई 4.5% से ऊपर बनी रह सकती है। ऐसे माहौल में RBI के लिए ब्याज दरों में कटौती करना जोखिम भरा हो सकता है।

लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर रहेगा फोकस, ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ की चर्चा

रिपोर्ट का सुझाव है कि RBI अभी केवल ब्याज दरों पर ध्यान देने के बजाय मार्केट लिक्विडिटी और माइक्रोस्ट्रक्चर को सुधारने पर काम कर सकता है। सरकारी बॉन्ड की यील्ड को मैनेज करने के लिए केंद्रीय बैंक ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ (लंबे समय के बॉन्ड खरीदना और कम समय के बॉन्ड बेचना) जैसे कदम उठा सकता है। इसके अलावा, मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी रोकने के लिए हाल ही में उठाए गए कड़े कदमों से बैंकों के लिए कुछ ऑपरेशनल चुनौतियां भी आ सकती हैं।

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 6-8 अप्रैल को होने वाली है। बाजार को उम्मीद थी कि इस बार शायद ब्याज दरों में कुछ राहत मिले, लेकिन पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में बढ़ते तनाव ने समीकरण बदल दिए हैं।

SBI रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल को देखते हुए RBI फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। इससे पहले फरवरी में हुई मीटिंग में भी ब्याज दर में बदलाव नहीं हुआ था। अभी ब्याज दर 5.25% पर है।

दुनियाभर में उथल-पुथल, सप्लाई चेन पर असर

SBI रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया है। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने जैसी स्थिति से ग्लोबल ऑयल मार्केट में 1973 के बाद का सबसे बड़ा व्यवधान पैदा हुआ है। युद्ध की शुरुआत के बाद यह पहली पॉलिसी समीक्षा है, इसलिए RBI काफी फूंक-फूंक कर कदम उठाएगा।

डॉलर के मुकाबले रुपया 93 के पार, बढ़ेगी ‘इंपोर्टेड इन्फ्लेशन’

भारत इस ग्लोबल संकट से अछूता नहीं है। कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे भारत में ‘इंपोर्टेड इन्फ्लेशन’ (आयातित महंगाई) बढ़ रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, डॉलर के मुकाबले रुपया 93 के स्तर को पार कर गया है। इसके साथ ही ‘सुपर अल नीनो’ का खतरा भी बना हुआ है, जो आने वाले समय में महंगाई की स्थिति को और बिगाड़ सकता है।

अगले 3 क्वार्टर तक 4.5% से ऊपर रह सकती है महंगाई

घरेलू मोर्चे पर भी चुनौतियां कम नहीं हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आयातित महंगाई पहले ही 5.4% पर पहुंच चुकी है और इसके आगे भी बढ़ने के आसार हैं। अनुमान है कि अगले तीन तिमाहियों तक कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई 4.5% से ऊपर बनी रह सकती है। ऐसे माहौल में RBI के लिए ब्याज दरों में कटौती करना जोखिम भरा हो सकता है।

लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर रहेगा फोकस, ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ की चर्चा

रिपोर्ट का सुझाव है कि RBI अभी केवल ब्याज दरों पर ध्यान देने के बजाय मार्केट लिक्विडिटी और माइक्रोस्ट्रक्चर को सुधारने पर काम कर सकता है। सरकारी बॉन्ड की यील्ड को मैनेज करने के लिए केंद्रीय बैंक ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ (लंबे समय के बॉन्ड खरीदना और कम समय के बॉन्ड बेचना) जैसे कदम उठा सकता है। इसके अलावा, मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी रोकने के लिए हाल ही में उठाए गए कड़े कदमों से बैंकों के लिए कुछ ऑपरेशनल चुनौतियां भी आ सकती हैं।

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