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Delhi CM Argues Own Case

Delhi CM Argues Own Case

नई दिल्ली3 घंटे पहले

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27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट से बरी होने के बाद केजरीवाल अपने घर पहुंचे और पत्नी को गले लगाकर रोने लगे।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) संयोजक अरविंद केजरीवाल सोमवार को शराब घोटाले मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में खुद अपनी दलील रखेंगे।

यह मामला CBI की उस याचिका पर से जुड़ा है, जिसमें ट्रायल कोर्ट से केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को राहत देने के आदेश को चुनौती दी गई है।

रविवार को केजरीवाल और अन्य 22 पूर्व आरोपियों ने इस मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को मामले से अलग (रिक्यूज) करने की मांग करते हुए आवेदन दाखिल किया है।

आरोपियों ने कहा कि उन्हें शक है कि इस मामले की सुनवाई निष्पक्ष और तटस्थ तरीके से हो पाएगी। इसलिए मामले को दूसरी बेंच में ट्रांसफर किया जाए।

रीक्यूजल का मतलब होता है कि कोई जज संभावित हितों के टकराव, पक्षपात या निष्पक्षता पर सवाल उठने की स्थिति में खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर ले।

ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल सहित 23 आरोपियों को बरी किया था

27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपियों को राहत दे दी थी। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में CBI की जांच की कड़ी आलोचना भी की थी।

ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ CBI की याचिका पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई की थी। उन्होंने 9 मार्च को कहा था प्राइमा फेसी (पहली नजर में) ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां गलत लगती हैं और उन पर विचार जरूरी है।

साथ ही, जस्टिस शर्मा की बेंच ने ट्रायल कोर्ट की ओर से CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश पर भी रोक लगा दी थी।

केजरीवाल सुप्रीम कोर्ट तक जज बदलने की मांग कर चुके

इसके बाद केजरीवाल ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय को लेटर लिखकर जज बदलने की मांग की और कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ टिप्पणी करने का कोई स्पष्ट कारण दर्ज नहीं किया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि जस्टिस शर्मा पहले इस मामले में कई आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर चुकी हैं, जबकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत दी।

हालांकि, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पहले ही केजरीवाल की यह मांग खारिज कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि खुद जज ही तय करेंगे कि उन्हें सुनवाई से अलग होना है या नहीं।

इसके बाद केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा की टिप्पणियों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अलग से विशेष अनुमति याचिका (SLP) भी दाखिल की है।

केजरीवाल 156 दिन, सिसोदिया 530 दिन तक जेल में रहे

दिल्ली सरकार ने 2021 में राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के लिए आबकारी नीति बनाई थी, जिसे बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया।

इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसमें भ्रष्टाचार हुआ।

इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे।

27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट के बाहर बयान देते समय केजरीवाल रोने लगे। मनीष सिसोदिया ने उन्हें ढाढस बंधाया था।

27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट के बाहर बयान देते समय केजरीवाल रोने लगे। मनीष सिसोदिया ने उन्हें ढाढस बंधाया था।

बरी होने पर केजरीवाल ने कहा था- मैंने सिर्फ ईमानदारी कमाई

27 फरवरी को बरी होने के बाद कोर्ट से बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान केजरीवाल भावुक हो गए। उन्होंने कहा- मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई है। आज ये साबित हो गया कि केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी कट्टर ईमानदार हैं।

वहीं, कोर्ट के फैसले पर मनीष सिसोदिया ने कहा- हमें एक बार फिर गर्व हो रहा हैं अपने संविधान पर और बी.आर. अंबेडकर पर, जिन्होंने हमें ऐसा संविधान दिया। सच की फिर से जीत हुई है। पूरी खबर पढ़ें…

———————-

ये खबर भी पढ़ें…

केजरीवाल बोले- कोर्ट का फैसला भाजपा के मुंह पर तमाचा:हमें खत्म करने के लिए मोदी खुद इस केस की मॉनिटरिंग कर रहे थे

आम आदमी पार्टी(AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि शराब घोटाले में कोर्ट का फैसला भारतीय जनता पार्टी के मुंह पर जोरदार तमाचा है। उन्होंने दिल्ली के जंतर मंतर पर 1 मार्च को एक रैली में कहा कि AAP को खत्म करने के लिए मोदी जी खुद इस केस की मॉनिटरिंग कर रहे थे। उन्होंने मोदी और शाह पर 4 साल तक परेशान करने का आरोप लगाया। पूरी खबर पढ़ें…

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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) संयोजक अरविंद केजरीवाल सोमवार को शराब घोटाले मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में खुद अपनी दलील रखेंगे।

यह मामला CBI की उस याचिका पर से जुड़ा है, जिसमें ट्रायल कोर्ट से केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को राहत देने के आदेश को चुनौती दी गई है।

रविवार को केजरीवाल और अन्य 22 पूर्व आरोपियों ने इस मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को मामले से अलग (रिक्यूज) करने की मांग करते हुए आवेदन दाखिल किया है।

आरोपियों ने कहा कि उन्हें शक है कि इस मामले की सुनवाई निष्पक्ष और तटस्थ तरीके से हो पाएगी। इसलिए मामले को दूसरी बेंच में ट्रांसफर किया जाए।

रीक्यूजल का मतलब होता है कि कोई जज संभावित हितों के टकराव, पक्षपात या निष्पक्षता पर सवाल उठने की स्थिति में खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर ले।

ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल सहित 23 आरोपियों को बरी किया था

27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपियों को राहत दे दी थी। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में CBI की जांच की कड़ी आलोचना भी की थी।

ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ CBI की याचिका पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई की थी। उन्होंने 9 मार्च को कहा था प्राइमा फेसी (पहली नजर में) ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां गलत लगती हैं और उन पर विचार जरूरी है।

साथ ही, जस्टिस शर्मा की बेंच ने ट्रायल कोर्ट की ओर से CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश पर भी रोक लगा दी थी।

केजरीवाल सुप्रीम कोर्ट तक जज बदलने की मांग कर चुके

इसके बाद केजरीवाल ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय को लेटर लिखकर जज बदलने की मांग की और कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ टिप्पणी करने का कोई स्पष्ट कारण दर्ज नहीं किया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि जस्टिस शर्मा पहले इस मामले में कई आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर चुकी हैं, जबकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत दी।

हालांकि, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पहले ही केजरीवाल की यह मांग खारिज कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि खुद जज ही तय करेंगे कि उन्हें सुनवाई से अलग होना है या नहीं।

इसके बाद केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा की टिप्पणियों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अलग से विशेष अनुमति याचिका (SLP) भी दाखिल की है।

केजरीवाल 156 दिन, सिसोदिया 530 दिन तक जेल में रहे

दिल्ली सरकार ने 2021 में राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के लिए आबकारी नीति बनाई थी, जिसे बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया।

इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसमें भ्रष्टाचार हुआ।

इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे।

27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट के बाहर बयान देते समय केजरीवाल रोने लगे। मनीष सिसोदिया ने उन्हें ढाढस बंधाया था।

27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट के बाहर बयान देते समय केजरीवाल रोने लगे। मनीष सिसोदिया ने उन्हें ढाढस बंधाया था।

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