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In Takhatgarh (Pali), Rajasthan, the funeral was held on the same pyre for two friends, April 6, 2026

In Takhatgarh (Pali), Rajasthan, the funeral was held on the same pyre for two friends, April 6, 2026

पाली जिले के तखतगढ़ में 5 घंटे के अंतराल पर दो सहेलियों ने दम तोड़ दिया। इनकी दोस्ती की मिसाल दी जा रही है।

दोस्ती की मिसालें तो बहुत सुनी होंगी, लेकिन पाली जिले के तखतगढ़ में जो हुआ, उसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। यहां सालों पुरानी दो सहेलियों ने अपनी दोस्ती को मौत के बाद भी नहीं टूटने दिया। एक सहेली की मौत हुई, तो दूसरी यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी और

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पाली जिले के तखतगढ़ में 2 बुजुर्ग सहेलियों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया

कहा सच हुआ : पहले कोई भी जाए, दूसरी को साथ लेकर जाए पाली से करीब 78 किमी दूर तखतगढ़ के नागचौक इलाके में जो हुआ, वह लोग सालों तक याद रखेंगे। देवासियों की गली में रहने वाली जेठी बाई (पत्नी स्व. मालाराम कलबी) और उनकी पड़ोसी भीकीबाई (पत्नी स्व. भूराराम कलबी) के बीच दशकों पुरानी दोस्ती थी।

मोहल्ले वाले बताते हैं कि दोनों अक्सर हंसी-मजाक में कहती थीं- अगर हममें से कोई पहले जाए, तो दूसरी को भी अपने साथ ही लेकर जाए। नियति ने इस बात को सच कर दिखाया।

एक को आई मौत, दूसरी को लगा गहरा सदमा 4 अप्रैल को जेठी बाई की तबीयत बिगड़ी और रात को उनका निधन हो गया। 5 अप्रैल की सुबह जैसे ही सहेली की मौत की खबर भीकीबाई तक पहुंची, वे गहरे सदमे में चली गईं। सदमा इतना गहरा था कि उसी दिन सुबह करीब 8 बजे उन्होंने भी दम तोड़ दिया। दोपहर में पूरे कस्बे में खबर फैलते ही मातम छा गया। दोनों परिवारों ने मिलकर फैसला लिया कि जब ये साथ रहीं, तो विदाई भी साथ ही होगी।

पांच घंटे के अंतराल में 2 सहलियों की मौत के बाद उनकी अर्थी भी एक साथ ही उठी।

पांच घंटे के अंतराल में 2 सहलियों की मौत के बाद उनकी अर्थी भी एक साथ ही उठी।

सैकड़ों नम आंखों के बीच एक ही चिता पर विदाई गोगरा रोड स्थित श्मशान घाट पर 5 अप्रैल की दोपहर एक दुर्लभ दृश्य दिखा। दो अर्थियां एक साथ उठीं और दोनों सहेलियों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। श्मशान घाट में मौजूद सैकड़ों लोग इस संयोग और दोस्ती को देखकर भावुक हो गए।

पूरे मोहल्ले में मशहूर थी दोस्ती भीकीबाई के बेटे हंसाराम कहते हैं- दो दिन पहले मां के पैर में दर्द था, लेकिन जैसे ही उन्हें अपनी सहेली जेठी बाई के जाने का पता चला, वे यह दुख सह नहीं पाईं। उनकी दोस्ती पूरे मोहल्ले में मशहूर थी।

दोनों सहेलियों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया।

दोनों सहेलियों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया।

रिश्तों का ऐसा संयोग : पतियों में भी थी गहरी दोस्ती यह संयोग सिर्फ इन दो महिलाओं तक सीमित नहीं था। उनके पति स्व. मालाराम और स्व. भूराराम भी आपस में पक्के दोस्त थे। दोनों सहेलियों का पीहर भी जालोर जिले के आहोर क्षेत्र (हरजी और थुम्बा गांव) में था। जेठीबाई का बेटा पहले ही गुजर चुका था, उनके पोते बाहर से आए। भीकीबाई के पीछे उनका भरा-पूरा परिवार है।

जेठी बाई और उनकी पड़ोसी भीकीबाई की दोस्ती की चर्चा पूरे गांव में होती है। दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया।

जेठी बाई और उनकी पड़ोसी भीकीबाई की दोस्ती की चर्चा पूरे गांव में होती है। दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया।

सीकर में भी दिखा था ऐसा ही प्रेम इलाके के लोग इसे एक संयोग मान रहे हैं। इसी साल जनवरी में सीकर के घसीपुरा में भी ऐसा ही मामला आया था, जहां देवरानी-जेठानी की मौत के बाद उनका एक ही चिता पर अंतिम संस्कार हुआ था। तखतगढ़ में दो सहेलियों का इस तरह साथ जाना कस्बे में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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पाली जिले के तखतगढ़ में 5 घंटे के अंतराल पर दो सहेलियों ने दम तोड़ दिया। इनकी दोस्ती की मिसाल दी जा रही है।

दोस्ती की मिसालें तो बहुत सुनी होंगी, लेकिन पाली जिले के तखतगढ़ में जो हुआ, उसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। यहां सालों पुरानी दो सहेलियों ने अपनी दोस्ती को मौत के बाद भी नहीं टूटने दिया। एक सहेली की मौत हुई, तो दूसरी यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी और

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पाली जिले के तखतगढ़ में 2 बुजुर्ग सहेलियों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया

कहा सच हुआ : पहले कोई भी जाए, दूसरी को साथ लेकर जाए पाली से करीब 78 किमी दूर तखतगढ़ के नागचौक इलाके में जो हुआ, वह लोग सालों तक याद रखेंगे। देवासियों की गली में रहने वाली जेठी बाई (पत्नी स्व. मालाराम कलबी) और उनकी पड़ोसी भीकीबाई (पत्नी स्व. भूराराम कलबी) के बीच दशकों पुरानी दोस्ती थी।

मोहल्ले वाले बताते हैं कि दोनों अक्सर हंसी-मजाक में कहती थीं- अगर हममें से कोई पहले जाए, तो दूसरी को भी अपने साथ ही लेकर जाए। नियति ने इस बात को सच कर दिखाया।

एक को आई मौत, दूसरी को लगा गहरा सदमा 4 अप्रैल को जेठी बाई की तबीयत बिगड़ी और रात को उनका निधन हो गया। 5 अप्रैल की सुबह जैसे ही सहेली की मौत की खबर भीकीबाई तक पहुंची, वे गहरे सदमे में चली गईं। सदमा इतना गहरा था कि उसी दिन सुबह करीब 8 बजे उन्होंने भी दम तोड़ दिया। दोपहर में पूरे कस्बे में खबर फैलते ही मातम छा गया। दोनों परिवारों ने मिलकर फैसला लिया कि जब ये साथ रहीं, तो विदाई भी साथ ही होगी।

पांच घंटे के अंतराल में 2 सहलियों की मौत के बाद उनकी अर्थी भी एक साथ ही उठी।

पांच घंटे के अंतराल में 2 सहलियों की मौत के बाद उनकी अर्थी भी एक साथ ही उठी।

सैकड़ों नम आंखों के बीच एक ही चिता पर विदाई गोगरा रोड स्थित श्मशान घाट पर 5 अप्रैल की दोपहर एक दुर्लभ दृश्य दिखा। दो अर्थियां एक साथ उठीं और दोनों सहेलियों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। श्मशान घाट में मौजूद सैकड़ों लोग इस संयोग और दोस्ती को देखकर भावुक हो गए।

पूरे मोहल्ले में मशहूर थी दोस्ती भीकीबाई के बेटे हंसाराम कहते हैं- दो दिन पहले मां के पैर में दर्द था, लेकिन जैसे ही उन्हें अपनी सहेली जेठी बाई के जाने का पता चला, वे यह दुख सह नहीं पाईं। उनकी दोस्ती पूरे मोहल्ले में मशहूर थी।

दोनों सहेलियों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया।

दोनों सहेलियों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया।

रिश्तों का ऐसा संयोग : पतियों में भी थी गहरी दोस्ती यह संयोग सिर्फ इन दो महिलाओं तक सीमित नहीं था। उनके पति स्व. मालाराम और स्व. भूराराम भी आपस में पक्के दोस्त थे। दोनों सहेलियों का पीहर भी जालोर जिले के आहोर क्षेत्र (हरजी और थुम्बा गांव) में था। जेठीबाई का बेटा पहले ही गुजर चुका था, उनके पोते बाहर से आए। भीकीबाई के पीछे उनका भरा-पूरा परिवार है।

जेठी बाई और उनकी पड़ोसी भीकीबाई की दोस्ती की चर्चा पूरे गांव में होती है। दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया।

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सीकर में भी दिखा था ऐसा ही प्रेम इलाके के लोग इसे एक संयोग मान रहे हैं। इसी साल जनवरी में सीकर के घसीपुरा में भी ऐसा ही मामला आया था, जहां देवरानी-जेठानी की मौत के बाद उनका एक ही चिता पर अंतिम संस्कार हुआ था। तखतगढ़ में दो सहेलियों का इस तरह साथ जाना कस्बे में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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