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Mukesh Choudhary IPL 2026 Heroics

Mukesh Choudhary IPL 2026 Heroics

झुंझुनूं के मुकुल चौधरी ने इंडियन प्रीमियर लीग के अपने तीसरे ही मैच में 27 गेंद पर नाबाद 54 रन बनाकर लखनऊ सुपर जायंट्स को शानदार जीत दिलाई। उनकी यह पारी उस समय आई, जब मैच लखनऊ की पकड़ से दूर जा रहा था। कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के खिलाफ इस पारी के लि

.

21 साल के मुकुल चौधरी ने कहा- गुरुवार को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में 182 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए हमारी टीम 16 ओवर में 128 रन पर 7 विकेट खो चुकी थी। मेरा प्लान साफ था कि डिफेंसिव नहीं खेलना है।

मैं तय करके आया था कि आक्रामक पारी खेलनी है, तब ही टीम जीत पाएगी और दबाव भी खत्म होगा। आखिरी ओवरों में सात सिक्स लगाकर मैच अपनी टीम की झोली में डाल दिया।

बकौल मुकुल, पिता का सपना था कि बेटा होगा तो उसे क्रिकेटर बनाएंगे। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण क्रिकेट की प्रैक्टिस थोड़ी देर से शुरू हुई। 12 साल की उम्र में पहली बार गेंद और बल्ला पकड़ा था।

दिसंबर 2025 में IPL के मिनी ऑक्शन में लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) ने मुकुल को 2.60 करोड़ रुपए में खरीदा था। जबकि उनकी बेस प्राइस 30 लाख रुपए थी।

पढ़िए मुकुल चौधरी से खास बातचीत…

आक्रामक अप्रोच से जिता पाया मैच

मुकुल ने कहा- जिस सिचुएशन में मैं क्रीज पर आया था, तब जानता था कि अगर रुककर खेला तो दबाव और बढ़ेगा, इसलिए शुरुआत से ही गेंदबाजों पर अटैक करने किया। मौके मिलते ही बड़े शॉट खेले। इसी रणनीति के तहत मैदान के चारों ओर छक्के जड़े।

मुकुल ने आवेश खान के साथ साझेदारी को भी अहम बताया। दोनों ने मिलकर 8वें विकेट के लिए सिर्फ 24 गेंदों पर 54 रन जोड़े, जिससे दबाव पूरी तरह KKR पर चला गया।

मुकुल के मुताबिक, यही आक्रामक अप्रोच और सही टाइम पर लिए गए फैसले मैच का असली टर्निंग पॉइंट बने।

पापा की शादी भी नहीं हुई थी, तब से उनका सपना था बेटे को क्रिकेट खिलाएंगे

मुकुल ने कहा- जब मेरे पापा की शादी भी नहीं हुई थी, तभी उन्होंने सोच लिया था कि जब मेरा बेटा होगा तो उसे क्रिकेट खिलाऊंगा। यह उनका सपना था। उस समय फैमिली कंडीशन इतनी अच्छी नहीं थी कि बचपन में ही मुझे क्रिकेट शुरू करा सकें, इसलिए मैंने 12-13 साल की उम्र में खेलना शुरू किया।

वहां उस समय ज्यादा एकेडमी भी नहीं थीं। सीकर में एक एकेडमी खुली थी, SBS क्रिकेट एकेडमी। मैंने वहां 5-6 साल तक तैयारी की। इसके बाद मैं जयपुर आया, क्योंकि अगर आपको आगे अच्छे लेवल पर खेलना है तो आगे बढ़ना पड़ता है। पिछले चार साल से मैं जयपुर में प्रैक्टिस कर रहा हूं।

पिछले साल मुझे लगा कि टी-20 क्रिकेट बहुत तेज हो गया है, इसलिए मुझे मैच खेलने चाहिए। इसके लिए मैं 3-4 महीने गुरुग्राम (हरियाणा) में रहा और दिल्ली में मैच खेले। इससे मुझे टी-20 के फास्ट गेम को समझने में काफी मदद मिली। यही मेरी जर्नी रही है।

लो स्कोरिंग मैच की इनिंग से पापा का भरोसा जीता

मुकुल ने बताया- मेरे पापा मुझे बताते हैं कि एक मैच था हमारा अंडर-19 का, यूपी के खिलाफ। वो लो स्कोरिंग मैच था, किसी ने खास परफॉर्म नहीं किया था, लेकिन मैंने वहां रन बनाए थे। उस इनिंग को वो आज भी याद करते हैं। वो कहते हैं कि उसी दिन उन्हें ट्रस्ट हो गया था कि मैं लाइफ में कुछ कर सकता हूं।

बेस्ट बॉलर बनने का सपना था, अब अटैकिंग बैटर

मुकुल का जन्म 6 अगस्त 2004 को झुंझुनूं में हुआ। उनके पिता का नाम दलिप कुमार चौधरी है, जो क्रिकेट के दीवाने हैं। पिता पहले निजी स्कूल में टीचर थे, बाद में रियल एस्टेट के बिजनेस में आए। मुकुल की एक छोटी बहन है।

लगभग 10 साल पहले मुकुल ने सीकर में SBS क्रिकेट एकेडमी जॉइन की। यहां पूर्व इंटरनेशनल क्रिकेटर दिनेश मोंगिया कोच रह चुके हैं। तब मुकुल मीडियम फास्ट बॉल करते थे। उनका सपना दुनिया का बेस्ट बॉलर बनना था।

मुकुल बताते हैं कि एक मैच में टीम को विकेटकीपर की जरूरत पड़ी तो उन्होंने ग्लव्स पहने और उस दिन से विकेटकीपिंग उनकी जिंदगी बन गई। बाद में वे जयपुर शिफ्ट हो गए और अरावली क्रिकेट एकेडमी में ट्रेनिंग करने लगे। यहां वे राजस्थान के साथी खिलाड़ियों कार्तिक शर्मा और अशोक शर्मा के साथ प्रैक्टिस करते थे।

मां ने मुकुल का पूरा साथ दिया। जब मुकुल जयपुर शिफ्ट हुए तो मां बहन के साथ वहां चली गईं, ताकि मुकुल बिना किसी टेंशन के सिर्फ क्रिकेट पर फोकस कर सकें।

धोनी हैं मुकुल के आइडल

मुकुल का सफर आसान नहीं रहा। छोटे जिले में संसाधनों की कमी और आर्थिक चुनौतियां थीं। पिता ने हरसंभव कोशिश की, लेकिन शुरुआत मुश्किल थी। रणजी डेब्यू (2023 में छत्तीसगढ़ के खिलाफ) में सिर्फ 2 रन बनाए, जिसके बाद सिलेक्शन नहीं मिला।

कुछ टी20 मैच भी यादगार नहीं रहे। मुकुल कहते हैं- ‘तब मैं काफी फ्रस्टेट हो गया था, लेकिन परिवार की मदद से टिका रहा। इसके बाद गुरुग्राम में शिफ्ट हो गया था।’

मुकुल क्लीन हिटिंग फिनिशर हैं। एमएस धोनी उनके आइडल हैं।

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Mukesh Choudhary IPL 2026 Heroics

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21 साल के मुकुल चौधरी ने कहा- गुरुवार को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में 182 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए हमारी टीम 16 ओवर में 128 रन पर 7 विकेट खो चुकी थी। मेरा प्लान साफ था कि डिफेंसिव नहीं खेलना है।

मैं तय करके आया था कि आक्रामक पारी खेलनी है, तब ही टीम जीत पाएगी और दबाव भी खत्म होगा। आखिरी ओवरों में सात सिक्स लगाकर मैच अपनी टीम की झोली में डाल दिया।

बकौल मुकुल, पिता का सपना था कि बेटा होगा तो उसे क्रिकेटर बनाएंगे। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण क्रिकेट की प्रैक्टिस थोड़ी देर से शुरू हुई। 12 साल की उम्र में पहली बार गेंद और बल्ला पकड़ा था।

दिसंबर 2025 में IPL के मिनी ऑक्शन में लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) ने मुकुल को 2.60 करोड़ रुपए में खरीदा था। जबकि उनकी बेस प्राइस 30 लाख रुपए थी।

पढ़िए मुकुल चौधरी से खास बातचीत…

आक्रामक अप्रोच से जिता पाया मैच

मुकुल ने कहा- जिस सिचुएशन में मैं क्रीज पर आया था, तब जानता था कि अगर रुककर खेला तो दबाव और बढ़ेगा, इसलिए शुरुआत से ही गेंदबाजों पर अटैक करने किया। मौके मिलते ही बड़े शॉट खेले। इसी रणनीति के तहत मैदान के चारों ओर छक्के जड़े।

मुकुल ने आवेश खान के साथ साझेदारी को भी अहम बताया। दोनों ने मिलकर 8वें विकेट के लिए सिर्फ 24 गेंदों पर 54 रन जोड़े, जिससे दबाव पूरी तरह KKR पर चला गया।

मुकुल के मुताबिक, यही आक्रामक अप्रोच और सही टाइम पर लिए गए फैसले मैच का असली टर्निंग पॉइंट बने।

पापा की शादी भी नहीं हुई थी, तब से उनका सपना था बेटे को क्रिकेट खिलाएंगे

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वहां उस समय ज्यादा एकेडमी भी नहीं थीं। सीकर में एक एकेडमी खुली थी, SBS क्रिकेट एकेडमी। मैंने वहां 5-6 साल तक तैयारी की। इसके बाद मैं जयपुर आया, क्योंकि अगर आपको आगे अच्छे लेवल पर खेलना है तो आगे बढ़ना पड़ता है। पिछले चार साल से मैं जयपुर में प्रैक्टिस कर रहा हूं।

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लो स्कोरिंग मैच की इनिंग से पापा का भरोसा जीता

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बेस्ट बॉलर बनने का सपना था, अब अटैकिंग बैटर

मुकुल का जन्म 6 अगस्त 2004 को झुंझुनूं में हुआ। उनके पिता का नाम दलिप कुमार चौधरी है, जो क्रिकेट के दीवाने हैं। पिता पहले निजी स्कूल में टीचर थे, बाद में रियल एस्टेट के बिजनेस में आए। मुकुल की एक छोटी बहन है।

लगभग 10 साल पहले मुकुल ने सीकर में SBS क्रिकेट एकेडमी जॉइन की। यहां पूर्व इंटरनेशनल क्रिकेटर दिनेश मोंगिया कोच रह चुके हैं। तब मुकुल मीडियम फास्ट बॉल करते थे। उनका सपना दुनिया का बेस्ट बॉलर बनना था।

मुकुल बताते हैं कि एक मैच में टीम को विकेटकीपर की जरूरत पड़ी तो उन्होंने ग्लव्स पहने और उस दिन से विकेटकीपिंग उनकी जिंदगी बन गई। बाद में वे जयपुर शिफ्ट हो गए और अरावली क्रिकेट एकेडमी में ट्रेनिंग करने लगे। यहां वे राजस्थान के साथी खिलाड़ियों कार्तिक शर्मा और अशोक शर्मा के साथ प्रैक्टिस करते थे।

मां ने मुकुल का पूरा साथ दिया। जब मुकुल जयपुर शिफ्ट हुए तो मां बहन के साथ वहां चली गईं, ताकि मुकुल बिना किसी टेंशन के सिर्फ क्रिकेट पर फोकस कर सकें।

धोनी हैं मुकुल के आइडल

मुकुल का सफर आसान नहीं रहा। छोटे जिले में संसाधनों की कमी और आर्थिक चुनौतियां थीं। पिता ने हरसंभव कोशिश की, लेकिन शुरुआत मुश्किल थी। रणजी डेब्यू (2023 में छत्तीसगढ़ के खिलाफ) में सिर्फ 2 रन बनाए, जिसके बाद सिलेक्शन नहीं मिला।

कुछ टी20 मैच भी यादगार नहीं रहे। मुकुल कहते हैं- ‘तब मैं काफी फ्रस्टेट हो गया था, लेकिन परिवार की मदद से टिका रहा। इसके बाद गुरुग्राम में शिफ्ट हो गया था।’

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