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Asha Bhosle Death: दिग्गज गायिका आशा भोसले का मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में निधन हो गया है. उनकी उम्र 92 साल थी और उन्हें कार्डियक अरेस्ट के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था. आशा भोसले की पोती जनाई भोसले ने अपने इंस्टाग्राम में बताया कि सिंगर को थकावट और चेस्ट इंफेक्शन के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था. कार्डियोलॉजिस्ट की मानें तो चेस्ट इंफेक्शन के कारण भी कार्डियक अरेस्ट आ सकता है और यह जानलेवा हो सकता है.
92 साल की उम्र में दिग्गज गायिका आशा भोसले का निधन हो गया है.
Asha Bhosle Death News: दिग्गज सिंगर आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है. शनिवार को उन्हें कार्डियक अरेस्ट के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. हालांकि रविवार को उनके परिजनों ने अस्पताल में भर्ती होने की वजह अत्यधिक थकान और सीने में इंफेक्शन बताया था. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो अगर किसी व्यक्ति को सीने में इंफेक्शन हो जाए, तो इसकी वजह से भी कार्डियक अरेस्ट आ सकता है और जान जा सकती है. खासतौर से बुजुर्गों में सीने का इंफेक्शन ज्यादा घातक हो सकता है और कार्डियक इश्यूज की वजह बन सकता है. इस बारे में डॉक्टर से जरूरी बातें जान लेते हैं.
नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल की सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वनीता अरोरा ने News18 को बताया कि अगर किसी व्यक्ति को सीने में सीवियर इंफेक्शन हो जाए, तो इससे हार्ट पर दबाव बढ़ सकता है. इससे सडन कार्डियक अरेस्ट आ सकता है. अगर किसी शख्स की उम्र 90 साल से ज्यादा है, तो इस कंडीशन में कार्डियक इश्यूज हो जाते हैं और ऐसे में इंफेक्शन जानलेवा हो सकता है. इससे सेप्सिस हो सकता है, जिसकी वजह से कार्डियक अरेस्ट आ जाता है. हालांकि जांच के बाद इसका सटीक कारण पता चल सकता है. कार्डियक अरेस्ट के अधिकतर मामलों में मरीज की मौत हो जाती है.
क्या होता है कार्डियक अरेस्ट?
डॉक्टर वनीता अरोरा ने बताया कि कार्डियक अरेस्ट में हार्ट स्टैंड स्टिल पोजीशन में चला जाता है. हार्ट एक पंप की तरह होता है और जिस तरह से इलेक्ट्रिकल शार्ट शर्किट की वजह से पंप कार्य करना बंद कर देता है ठीक उसी तरह से कार्डियक अरेस्ट में हार्ट काम करना बंद कर देता है. जो नार्मल हार्ट बीट 70 से 90 रहती है वो कार्डियक अरेस्ट की कंडीशन में 300 से 400 पहुंच जाती है. कार्डियक अरेस्ट होने पर सिर्फ कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन यानी सीपीआर के जरिए ही मरीज की जान बचाई जा सकती है. अगर कार्डियक अरेस्ट होने पर 10 मिनट के अंदर सीपीआर नहीं शुरू किया गया तो मरीज को बचाना संभव नहीं है. कार्डियक अरेस्ट से बचने का एक मात्र तरीका सीपीआर ही है.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें














































