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Iran War Impact: Household Expenses Rise

Iran War Impact: Household Expenses Rise
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  • Iran War Impact: Household Expenses Rise | Kitchen Appliances Cost Up 15%

मुंबई11 मिनट पहले

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ईरान समेत पूरे पश्चिम एशिया में तनाव से जो हालात पैदा हुए हैं, उसके चलते आम भारतीयों का घरेलू खर्च बढ़ रहा है। रसोई से लेकर कपड़े और घरेलू उपकरणों तक, हर चीज या तो महंगी हो गई है या उनके दाम बढ़ने की आशंका गहरा रही है।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने एक साथ कई मोर्चों पर दबाव बनाया है। ईवाई इंडिया का विश्लेषण कहता है कि यह असर अगले दो साल तक बना रह सकता है। खाने के तेल के दाम 7% से ज्यादा बढ़ गए हैं। भारत जरूरत का 57% खाद्य तेल आयात करता है। इनमें पाम ऑयल, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल शामिल है।

इस बीच पैकेजिंग, ढुलाई और कच्चे माल की लागत बढ़ने से साबुन, पेस्ट, बिस्किट जैसे FMCG प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियां या तो दाम बढ़ाएंगी या पैकेट छोटे करेंगी। इसे ‘श्रिंकफ्लेशन’ कहा जाता है। पेंट, टेक्सटाइल और पर्सनल केयर कंपनियां भी लागत बढ़ने का हवाला देकर कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं।

FMCG: साबुन, शैंपू, बिस्किट जैसे प्रोडक्ट्स की सप्लाई भी बाधित हो रही

पश्चिम एशिया संकट पर ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत विफल होने से कच्चे तेल की आपूर्ति घटी है। इसके चलते सोमवार को क्रूड के दाम 8% से ज्यादा बढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गए। इससे सर्फैक्टेंट और पेट्रोकेमिकल डेरिवेटिव की किल्लत हो गई। नतीजतन शैंपू, साबुन जैसे उत्पादों की आपूर्ति बाधित हुई है। ऐसे में कंपनियां दाम बढ़ाने से बचने के लिए इनके पैकेट छोटे कर रही हैं।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स: लागत 10-15% तक बढ़ गई घरेलू उपकरणों की मैन्युफैक्चरिंग लागत 10-15% तक बढ़ चुकी है। इसका 70% हिस्सा कंपनियां पहले ही ग्राहकों पर डाल चुकी हैं। वॉशिंग मशीन, फ्रिज, पंखे और एलईडी सब के दाम बढ़े हैं। अब भीषण गर्मी की आशंका से वोल्टास और ब्लू स्टार जैसी एसी कंपनियों के शेयर चढ़ने लगे हैं क्योंकि इनकी बिक्री तेजी से बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।

कपड़ा-पेंट: इस साल दाम 5% तक बढ़ सकते हैं क्रूड के दाम बढ़ने से प्लास्टिक की उत्पादन लागत करीब 50% बढ़ गई है। टेक्सटाइल सेक्टर में पॉलिएस्टर, नायलॉन और कलर-केमिकल्स 20-25% महंगे हो गए हैं। भारत के कपड़ा उत्पादन में 60% हिस्सा सिंथेटिक फाइबर का है। ईवाई की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके चलते 1 अप्रैल से शुरू वित्त वर्ष 2026-27 में कपड़े और पेंट के दाम 2-5% तक बढ़ने की संभावना हैं।

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ईरान समेत पूरे पश्चिम एशिया में तनाव से जो हालात पैदा हुए हैं, उसके चलते आम भारतीयों का घरेलू खर्च बढ़ रहा है। रसोई से लेकर कपड़े और घरेलू उपकरणों तक, हर चीज या तो महंगी हो गई है या उनके दाम बढ़ने की आशंका गहरा रही है।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने एक साथ कई मोर्चों पर दबाव बनाया है। ईवाई इंडिया का विश्लेषण कहता है कि यह असर अगले दो साल तक बना रह सकता है। खाने के तेल के दाम 7% से ज्यादा बढ़ गए हैं। भारत जरूरत का 57% खाद्य तेल आयात करता है। इनमें पाम ऑयल, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल शामिल है।

इस बीच पैकेजिंग, ढुलाई और कच्चे माल की लागत बढ़ने से साबुन, पेस्ट, बिस्किट जैसे FMCG प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियां या तो दाम बढ़ाएंगी या पैकेट छोटे करेंगी। इसे ‘श्रिंकफ्लेशन’ कहा जाता है। पेंट, टेक्सटाइल और पर्सनल केयर कंपनियां भी लागत बढ़ने का हवाला देकर कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं।

FMCG: साबुन, शैंपू, बिस्किट जैसे प्रोडक्ट्स की सप्लाई भी बाधित हो रही

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कंज्यूमर ड्यूरेबल्स: लागत 10-15% तक बढ़ गई घरेलू उपकरणों की मैन्युफैक्चरिंग लागत 10-15% तक बढ़ चुकी है। इसका 70% हिस्सा कंपनियां पहले ही ग्राहकों पर डाल चुकी हैं। वॉशिंग मशीन, फ्रिज, पंखे और एलईडी सब के दाम बढ़े हैं। अब भीषण गर्मी की आशंका से वोल्टास और ब्लू स्टार जैसी एसी कंपनियों के शेयर चढ़ने लगे हैं क्योंकि इनकी बिक्री तेजी से बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।

कपड़ा-पेंट: इस साल दाम 5% तक बढ़ सकते हैं क्रूड के दाम बढ़ने से प्लास्टिक की उत्पादन लागत करीब 50% बढ़ गई है। टेक्सटाइल सेक्टर में पॉलिएस्टर, नायलॉन और कलर-केमिकल्स 20-25% महंगे हो गए हैं। भारत के कपड़ा उत्पादन में 60% हिस्सा सिंथेटिक फाइबर का है। ईवाई की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके चलते 1 अप्रैल से शुरू वित्त वर्ष 2026-27 में कपड़े और पेंट के दाम 2-5% तक बढ़ने की संभावना हैं।

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