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टेक्सास में हनुमान जी की मूर्ति से ट्रम्प समर्थक नाराज:कहा- ये दिल्ली नहीं, पिछड़े देशों के लोग अमेरिका पर कब्जा कर रहे

टेक्सास में हनुमान जी की मूर्ति से ट्रम्प समर्थक नाराज:कहा- ये दिल्ली नहीं, पिछड़े देशों के लोग अमेरिका पर कब्जा कर रहे


अमेरिका के टेक्सास राज्य में हनुमान जी की मूर्ति पर ट्रम्प समर्थक नेता कार्लोस टुर्सियोस ने नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया X पर लिखा कि यह इस्लामाबाद या नई दिल्ली नहीं है। यह शुगर लैंड, टेक्सास है। टुर्सियोस ने कहा कि पिछड़े देशों के प्रावासी धीरे-धीरे टेक्सास और अमेरिका पर कब्जा कर रहे हैं। यह अमेरिका की तीसरी सबसे बड़ी मूर्ति क्यों है? हमला रोकिए। बता दें कि हनुमान की 90 फीट ऊंची मूर्ति टेक्सास राज्य के ‘श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर’ में लगी है और इसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ कहा जाता है। टुर्सियोस पर नस्लभेदी सोच फैलाने का आरोप कई लोग सोशल मीडिया पर टुर्सियोस के इस बयान का विरोध कर रहे हैं। कुछने उन पर नस्लभेदी सोच फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि प्रवासी समुदाय और अलग-अलग धर्मों के लोगों ने अमेरिकी समाज को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है। कार्तिक गडा नाम के एक यूजर ने अमेरिका में बोली जाने वाली भाषाओं का चार्ट शेयर किया। उन्होंने लिखा कि अमेरिका में 4.1 करोड़ घरों में स्पेनिश बोली जाती है, जबकि भारतीय भाषाएं टॉप 10 में भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि घर में बोली जाने वाली भाषा समाज में घुलने-मिलने का बड़ा संकेत है और भारतीय-अमेरिकी समुदाय काफी हद तक मुख्यधारा में शामिल हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि जब किसी भारतीय भाषा के बोलने वालों की संख्या स्पेनिश से ज्यादा हो जाएगी, तब यह देखा जाएगा कि कौन कितना घुला-मिला है। नूरी सुन्नाह नाम के एक यूजर ने लिखा कि यह मूर्ति करीब डेढ़ साल से वहीं है। मंदिर में आने वाले हिंदुओं को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है। अगर किसी को यह पसंद नहीं है, तो वह इसे नजरअंदाज कर सकता है। टेक्सास में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची मूर्ति अमेरिका के टेक्सास राज्य के शुगर लैंड में मौजूद श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची कांसे की मूर्ति है। इसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ कहा जाता है। यह भारत के बाहर हनुमानजी की सबसे ऊंची मूर्ति है। मूर्ति का वजन 90 टन है और इसे पांच धातुओं के मिश्रण से बनाया गया है। हनुमानजी को अभय मुद्रा में हाथ आगे करके और गदा के साथ दिखाया गया है। यह कमल के तख्त पर खड़ी है, जिसे हाथी की मूर्तियों से सजाया गया है। अमेरिका में यह तीसरी सबसे ऊंची मूर्ति है, जो स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी (151 फीट) और फ्लोरिडा की पेगासस एंड ड्रैगन (110 फीट) के बाद आती है। मूर्ति की स्थापना के लिए 15 से 18 अगस्त 2024 को तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा समारोह हुआ था जिसमें हजारों लोग शामिल हुए थे। ट्रम्प समर्थक नेता ने पिछले साल भी विवादित बयान दिया था यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प समर्थक नेता ने हनुमान जी की मूर्ति को लेकर इस तरह का बयान दिया हो। पिछले साल ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के नेता अलेक्जेंडर डंकन ने भगवान हनुमान की प्रतिमा पर विवादित बयान दिया था। उन्होंने इसे झूठे भगवान की झूठी प्रतिमा कहा था। डंकन ने X पर लिखा था- हम टेक्सास में एक झूठे हिंदू भगवान की झूठी मूर्ति क्यों लगने दे रहे हैं? हम एक ईसाई राष्ट्र हैं। कई अन्य संगठनों ने भी इसे धार्मिक आस्था पर हमला बताते हुए माफी की मांग की थी। अमेरिकी नागरिकों ने भी इसकी घोर निंदा की थी। भारतवंशियों के खिलाफ हेट क्राइम बढ़ा ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में भारतवंशियों के खिलाफ हेट क्राइम के मामले बढ़े हैं। बाइडेन कार्यकाल में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों के खिलाफ ऑनलाइन नफरत व हिंसा सीमित रही। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2024 तक 46,000 ट्रोलिंग और 884 धमकियां दर्ज हुईं। लेकिन ट्रम्प के लौटते ही हालात बिगड़ गए। अक्टूबर 2025 तक ट्रोलिंग बढ़कर 88,000 तक पहुंची, यानी इसमें 91% की वृद्धि दर्ज की गई। दिसंबर में वीजा और माइग्रेंट मामले में ट्रम्प-मस्क-रामास्वामी बहस के बाद 76% धमकियां ‘नौकरियां छीनने’ से जुड़ी रहीं। ट्रम्प सरकार के H-1B वीजा फीस बढ़ाने और 104 भारतीयों को डिपोर्ट करने के फैसले ने माहौल भड़काया। कई शहरों में निशाने पर भारतीय समुदाय के लोग नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच अमेरिका के शहरों में भारतीय समुदाय को निशाना बनाते हुए हिंसक वारदातों की एक शृंखला सामने आई। फरवरी 2025 में वर्जीनिया में एक भारतीय-अमेरिकी कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मार्च 2025 में एक किराना स्टोर पर हुए हमले में पिता-पुत्री की जान चली गई। सितंबर 2025 में टेक्सास के डलास में दो छात्रों और श्रमिकों की हत्या कर दी गई। इसी महीने चंद्रमौली नागमल्लैया की सिर काटकर हत्या ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। अक्टूबर 2025 में पेंसिल्वेनिया के पिट्सबर्ग में एक मोटेल पर गोलीबारी में भारतीय मूल के मालिक और कर्मचारियों को निशाना बनाया गया। वहीं ओहायो, इलिनॉय और इंडियाना राज्यों में छात्रों से हेट क्राइम के मामले सामने आए। ‘भारतीयों को देश से निकालो’ जैसे नारे बढ़ें रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ते नस्लभेद का यह ट्रेंड सिर्फ भारतीयों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई समुदाय को निशाना बना रहा है। इसमें धर्म, नागरिकता या जातीय पहचान का कोई फर्क नहीं किया जा रहा। रिपोर्ट में इसके चार प्रमुख कारण बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में प्रवासियों के खिलाफ जो वैश्विक नाराजगी बढ़ी है, वह इस नस्लभेदी ट्रेंड का पहला बड़ा कारण है। यह भावना दुनियाभर में उभर रही दक्षिणपंथी राजनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है। ट्रम्प की नीतियों से भारतीयों पर नस्लभेदी पोस्ट बढ़े H-1B पर अमेरिकी हैं गुस्सा अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर गुस्सा भी इस ट्रेंड को बढ़ा रहा है। दक्षिणपंथी समूहों का आरोप है कि भारतीय ‘कम योग्य’ होते हुए भी अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छीन रहे हैं। इससे सोशल मीडिया पर ‘भारतीयों को देश से निकालो’ जैसे नारों में इजाफा हुआ। श्वेत वर्चस्ववाद अपने चरम पर भारतीयों के खिलाफ नस्लभेद एशियाई समुदायों के खिलाफ व्यापक भेदभाव का हिस्सा है। ट्रम्प की जीत के बाद श्वेत वर्चस्ववादी गतिविधियां चरम पर पहुंच जाती हैं। जबकि, चुनावी दौर में हेट क्राइम में करीब 80% की बढ़ोतरी देखी जाती है। ट्रेड डील पर तनाव का भी असर भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर तनाव से नफरत को हवा मिली है। फ्लोरिडा में एक सिख ट्रक ड्राइवर की वजह से हुए एक्सीडेंट में तीन लोगों की मौत जैसे मामलों को कुछ लोग बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं ताकि उनके खिलाफ नफरत फैलाई जा सके। एंटी-इंडियन नस्लवाद से जुड़े पोस्ट्स में 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद तेजी दिखी। पहला कारण श्रीराम कृष्णन को ट्रम्प प्रशासन में अहम सलाहकार बनाए जाने पर विरोध रहा। दूसरा, विवेक रामास्वामी की पोस्ट रही। उन्होंने प्रवासी कामगारों के लिए ज्यादा वीजा की बात कही थी। ————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी सांसद बोले- कुत्तों-मुसलमानों में से एक को चुनना आसान:फिलिस्तीनी एक्टिविस्ट ने लिखा था- न्यूयॉर्क इस्लाम की ओर बढ़ रहा, कुत्ते घर में नहीं रखें अमेरिकी सांसद रैंडी फाइन के एक सोशल मीडिया पोस्ट से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने मंगलवार को X पर लिखा कि अगर कुत्तों और मुसलमानों में से एक को चुनना पड़े तो यह मुश्किल फैसला नहीं है। पढ़ें पूरी खबर…

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टेक्सास में हनुमान जी की मूर्ति से ट्रम्प समर्थक नाराज:कहा- ये दिल्ली नहीं, पिछड़े देशों के लोग अमेरिका पर कब्जा कर रहे

टेक्सास में हनुमान जी की मूर्ति से ट्रम्प समर्थक नाराज:कहा- ये दिल्ली नहीं, पिछड़े देशों के लोग अमेरिका पर कब्जा कर रहे


अमेरिका के टेक्सास राज्य में हनुमान जी की मूर्ति पर ट्रम्प समर्थक नेता कार्लोस टुर्सियोस ने नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया X पर लिखा कि यह इस्लामाबाद या नई दिल्ली नहीं है। यह शुगर लैंड, टेक्सास है। टुर्सियोस ने कहा कि पिछड़े देशों के प्रावासी धीरे-धीरे टेक्सास और अमेरिका पर कब्जा कर रहे हैं। यह अमेरिका की तीसरी सबसे बड़ी मूर्ति क्यों है? हमला रोकिए। बता दें कि हनुमान की 90 फीट ऊंची मूर्ति टेक्सास राज्य के ‘श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर’ में लगी है और इसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ कहा जाता है। टुर्सियोस पर नस्लभेदी सोच फैलाने का आरोप कई लोग सोशल मीडिया पर टुर्सियोस के इस बयान का विरोध कर रहे हैं। कुछने उन पर नस्लभेदी सोच फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि प्रवासी समुदाय और अलग-अलग धर्मों के लोगों ने अमेरिकी समाज को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है। कार्तिक गडा नाम के एक यूजर ने अमेरिका में बोली जाने वाली भाषाओं का चार्ट शेयर किया। उन्होंने लिखा कि अमेरिका में 4.1 करोड़ घरों में स्पेनिश बोली जाती है, जबकि भारतीय भाषाएं टॉप 10 में भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि घर में बोली जाने वाली भाषा समाज में घुलने-मिलने का बड़ा संकेत है और भारतीय-अमेरिकी समुदाय काफी हद तक मुख्यधारा में शामिल हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि जब किसी भारतीय भाषा के बोलने वालों की संख्या स्पेनिश से ज्यादा हो जाएगी, तब यह देखा जाएगा कि कौन कितना घुला-मिला है। नूरी सुन्नाह नाम के एक यूजर ने लिखा कि यह मूर्ति करीब डेढ़ साल से वहीं है। मंदिर में आने वाले हिंदुओं को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है। अगर किसी को यह पसंद नहीं है, तो वह इसे नजरअंदाज कर सकता है। टेक्सास में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची मूर्ति अमेरिका के टेक्सास राज्य के शुगर लैंड में मौजूद श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची कांसे की मूर्ति है। इसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ कहा जाता है। यह भारत के बाहर हनुमानजी की सबसे ऊंची मूर्ति है। मूर्ति का वजन 90 टन है और इसे पांच धातुओं के मिश्रण से बनाया गया है। हनुमानजी को अभय मुद्रा में हाथ आगे करके और गदा के साथ दिखाया गया है। यह कमल के तख्त पर खड़ी है, जिसे हाथी की मूर्तियों से सजाया गया है। अमेरिका में यह तीसरी सबसे ऊंची मूर्ति है, जो स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी (151 फीट) और फ्लोरिडा की पेगासस एंड ड्रैगन (110 फीट) के बाद आती है। मूर्ति की स्थापना के लिए 15 से 18 अगस्त 2024 को तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा समारोह हुआ था जिसमें हजारों लोग शामिल हुए थे। ट्रम्प समर्थक नेता ने पिछले साल भी विवादित बयान दिया था यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प समर्थक नेता ने हनुमान जी की मूर्ति को लेकर इस तरह का बयान दिया हो। पिछले साल ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के नेता अलेक्जेंडर डंकन ने भगवान हनुमान की प्रतिमा पर विवादित बयान दिया था। उन्होंने इसे झूठे भगवान की झूठी प्रतिमा कहा था। डंकन ने X पर लिखा था- हम टेक्सास में एक झूठे हिंदू भगवान की झूठी मूर्ति क्यों लगने दे रहे हैं? हम एक ईसाई राष्ट्र हैं। कई अन्य संगठनों ने भी इसे धार्मिक आस्था पर हमला बताते हुए माफी की मांग की थी। अमेरिकी नागरिकों ने भी इसकी घोर निंदा की थी। भारतवंशियों के खिलाफ हेट क्राइम बढ़ा ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में भारतवंशियों के खिलाफ हेट क्राइम के मामले बढ़े हैं। बाइडेन कार्यकाल में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों के खिलाफ ऑनलाइन नफरत व हिंसा सीमित रही। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2024 तक 46,000 ट्रोलिंग और 884 धमकियां दर्ज हुईं। लेकिन ट्रम्प के लौटते ही हालात बिगड़ गए। अक्टूबर 2025 तक ट्रोलिंग बढ़कर 88,000 तक पहुंची, यानी इसमें 91% की वृद्धि दर्ज की गई। दिसंबर में वीजा और माइग्रेंट मामले में ट्रम्प-मस्क-रामास्वामी बहस के बाद 76% धमकियां ‘नौकरियां छीनने’ से जुड़ी रहीं। ट्रम्प सरकार के H-1B वीजा फीस बढ़ाने और 104 भारतीयों को डिपोर्ट करने के फैसले ने माहौल भड़काया। कई शहरों में निशाने पर भारतीय समुदाय के लोग नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच अमेरिका के शहरों में भारतीय समुदाय को निशाना बनाते हुए हिंसक वारदातों की एक शृंखला सामने आई। फरवरी 2025 में वर्जीनिया में एक भारतीय-अमेरिकी कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मार्च 2025 में एक किराना स्टोर पर हुए हमले में पिता-पुत्री की जान चली गई। सितंबर 2025 में टेक्सास के डलास में दो छात्रों और श्रमिकों की हत्या कर दी गई। इसी महीने चंद्रमौली नागमल्लैया की सिर काटकर हत्या ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। अक्टूबर 2025 में पेंसिल्वेनिया के पिट्सबर्ग में एक मोटेल पर गोलीबारी में भारतीय मूल के मालिक और कर्मचारियों को निशाना बनाया गया। वहीं ओहायो, इलिनॉय और इंडियाना राज्यों में छात्रों से हेट क्राइम के मामले सामने आए। ‘भारतीयों को देश से निकालो’ जैसे नारे बढ़ें रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ते नस्लभेद का यह ट्रेंड सिर्फ भारतीयों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई समुदाय को निशाना बना रहा है। इसमें धर्म, नागरिकता या जातीय पहचान का कोई फर्क नहीं किया जा रहा। रिपोर्ट में इसके चार प्रमुख कारण बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में प्रवासियों के खिलाफ जो वैश्विक नाराजगी बढ़ी है, वह इस नस्लभेदी ट्रेंड का पहला बड़ा कारण है। यह भावना दुनियाभर में उभर रही दक्षिणपंथी राजनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है। ट्रम्प की नीतियों से भारतीयों पर नस्लभेदी पोस्ट बढ़े H-1B पर अमेरिकी हैं गुस्सा अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर गुस्सा भी इस ट्रेंड को बढ़ा रहा है। दक्षिणपंथी समूहों का आरोप है कि भारतीय ‘कम योग्य’ होते हुए भी अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छीन रहे हैं। इससे सोशल मीडिया पर ‘भारतीयों को देश से निकालो’ जैसे नारों में इजाफा हुआ। श्वेत वर्चस्ववाद अपने चरम पर भारतीयों के खिलाफ नस्लभेद एशियाई समुदायों के खिलाफ व्यापक भेदभाव का हिस्सा है। ट्रम्प की जीत के बाद श्वेत वर्चस्ववादी गतिविधियां चरम पर पहुंच जाती हैं। जबकि, चुनावी दौर में हेट क्राइम में करीब 80% की बढ़ोतरी देखी जाती है। ट्रेड डील पर तनाव का भी असर भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर तनाव से नफरत को हवा मिली है। फ्लोरिडा में एक सिख ट्रक ड्राइवर की वजह से हुए एक्सीडेंट में तीन लोगों की मौत जैसे मामलों को कुछ लोग बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं ताकि उनके खिलाफ नफरत फैलाई जा सके। एंटी-इंडियन नस्लवाद से जुड़े पोस्ट्स में 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद तेजी दिखी। पहला कारण श्रीराम कृष्णन को ट्रम्प प्रशासन में अहम सलाहकार बनाए जाने पर विरोध रहा। दूसरा, विवेक रामास्वामी की पोस्ट रही। उन्होंने प्रवासी कामगारों के लिए ज्यादा वीजा की बात कही थी। ————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी सांसद बोले- कुत्तों-मुसलमानों में से एक को चुनना आसान:फिलिस्तीनी एक्टिविस्ट ने लिखा था- न्यूयॉर्क इस्लाम की ओर बढ़ रहा, कुत्ते घर में नहीं रखें अमेरिकी सांसद रैंडी फाइन के एक सोशल मीडिया पोस्ट से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने मंगलवार को X पर लिखा कि अगर कुत्तों और मुसलमानों में से एक को चुनना पड़े तो यह मुश्किल फैसला नहीं है। पढ़ें पूरी खबर…

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