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फुल स्टॉप जरूरी, पर प्यार को कॉमा दें:कैमरे के सामने झूठ नहीं चलता, मृणाल और सिद्धांत ने जिंदगी, जजमेंट पर रखी अपनी राय

फुल स्टॉप जरूरी, पर प्यार को कॉमा दें:कैमरे के सामने झूठ नहीं चलता, मृणाल और सिद्धांत ने जिंदगी, जजमेंट पर रखी अपनी राय


मृणाल ठाकुर और सिद्धांत चतुर्वेदी की अपकमिंग रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘दो दीवाने शहर में’ कल यानी कि 20 फरवरी 2026 को रिलीज होने वाली है। मृणाल और सिद्धांत ने हाल ही में दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। मृणाल जहां खुद से प्यार करना, धीमी जिंदगी और भावनात्मक संतुलन की बात करती हैं, वहीं सिद्धांत इंडस्ट्री में जजमेंट, भाषा के कॉम्प्लेक्स और अपनी जड़ों पर गर्व का खुलकर जिक्र किया। पेश है बातचीत के कुछ प्रमुख अंश.. सवाल: मृणाल, इस फिल्म से पहले आप ब्रेकअप की स्थिति में थीं। उस दौर को आप कैसे देखती हैं? जवाब / मृणाल: मेरे लिए वह वही समय और वही मुकाम था, जब यह चीज मेरी जिंदगी में होनी थी। मुझे लगता है कि मेरे भीतर बहुत सारी जटिलताएं, असुरक्षाएं और डर थे। लेकिन आज उन्हीं कमजोरियों को मैंने अपनी ताकत बना लिया है। सवाल: आपने अपनी भाषा और एक्सेंट को लेकर भी असुरक्षा की बात की थी। आज उस डर को कैसे देखती हैं? जवाब / मृणाल:शुरुआत में मुझे बहुत डर लगता था कि अगर मैं हिंदी या अंग्रेजी में बात करूंगी, तो मेरी मराठी एक्सेंट सामने आ जाएगी। लेकिन आज जब मैं मराठी में बात करती हूं, तो वही लोग उसे पसंद करते हैं और बहुत प्यार मिलता है। यह मेरे लिए बहुत बड़ा आत्मविश्वास है। सवाल: इस फिल्म ने आपको जीवन को किस तरह देखने का नजरिया दिया? जवाब / मृणाल: इस फिल्म ने मुझे सिखाया कि जैसे हैं, वैसे ही रहना सबसे जरूरी है। आप से बेहतर आप कोई और नहीं हो सकता। यह एक यात्रा है, एक आत्म-खोज है। मैंने इस फिल्म को एक एक्ट्रेस के तौर पर इसलिए चुना क्योंकि इसकी कहानी अलग और साहसी थी। लेकिन कब यह फिल्म मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गई, मुझे पता ही नहीं चला। सवाल: आज की तेज रफ्तार जिंदगी पर यह फिल्म क्या सवाल उठाती है? जवाब / मृणाल: आज हम हर वक्त जल्दी में रहते हैं। खाना खाते समय भी मोबाइल देखते हैं। सुबह क्या होती है, यह हम भूल चुके हैं। यह फिल्म हमें सिखाती है कि कभी-कभी रुकना जरूरी है, खुद को समझना जरूरी है। अपनी कमजोरियों, अपनी ताकतों और अपने लोगों से प्यार करना जरूरी है। सवाल: सिद्धांत, शूटिंग के दौरान आप निजी तौर पर मुश्किल दौर से गुजर रहे थे। उस अनुभव ने आपके अभिनय को कैसे प्रभावित किया? जवाब / सिद्धांत: जो भी मेरे दिल में चल रहा था, मैंने उसे पर्दे पर उतार दिया है। जब दर्शक फिल्म देखेंगे, तो उन्हें वह महसूस होगा। मैं हमेशा कोशिश करता हूं कि अपने निजी अनुभवों को अपने काम में सच्चाई के साथ डाल सकूं, क्योंकि कैमरे के सामने आप झूठ नहीं बोल सकते। सवाल : क्या वह निजी संघर्ष आपके लिए नुकसानदायक था या मददगार? जवाब / सिद्धांत: इस फिल्म के दौरान मेरी जिंदगी में कुछ चल रहा था, दुर्भाग्य से भी और सौभाग्य से भी। लेकिन मुझे लगता है कि जिंदगी में जो होता है, किसी कारण से होता है। आज पूरी टीम फिल्म से खुश है और मुझे संतोष है कि जो भी दर्द था, वह सही जगह इस्तेमाल हुआ। सवाल: मृणाल, किसी किरदार की तैयारी आप किस तरह करती हैं? जवाब / मृणाल: मेरे लिए तैयारी बहुत आंतरिक होती है। मैं ज्यादातर इंडस्ट्री से बाहर के लोगों से बातचीत करके प्रेरणा लेती हूं। चाहे वह ट्रेन में मिलने वाला कोई यात्री हो, फ्लाइट का सहयात्री हो, या रोजमर्रा की जिंदगी में मिलने वाले लोग, उनकी कहानियां मुझे बहुत कुछ सिखाती हैं। सवाल : रोशनी जैसे किरदार को गढ़ने में किन चीजों ने मदद की? जवाब / मृणाल: हर किरदार के पीछे कोई न कोई असली इंसान होता है। रोशनी कई चीजों का मेल है। जिसमें लेखक की सोच, निर्देशक का नजरिया और मेरी निजी समझ शामिल है। सबसे जरूरी बात यह है कि कलाकार को बहना आना चाहिए, फ्लो में रहना चाहिए और निर्देशक के विजन पर भरोसा करना चाहिए। सवाल: शशांक का किरदार आपके असली जीवन से कितना मेल खाता है? जवाब/ सिद्धांत: बहुत ज्यादा नहीं। अनुभव मिलते-जुलते हो सकते हैं, लेकिन हर इंसान उन्हें अलग तरह से जीता है। मैं जानबूझकर ऐसे किरदार चुनता हूं जो मुझसे काफी अलग हों। अपनी जिंदगी तो मैं जी ही रहा हूं, मुझे दूसरों की जिंदगी को करीब से देखने में दिलचस्पी है। यही मेरी जिज्ञासा है। सवाल : आपके लिए अब तक का सबसे मुश्किल किरदार कौन सा रहा? जवाब / मृणाल: मेरे लिए सबसे मुश्किल किरदार ‘लव सोनिया’ का रहा है। वह मेरी पहली फिल्म थी और मैंने बहुत गहरे अनुभव देखे। उस फिल्म ने मुझे अंदर से तोड़ा भी और आज जो मैं हूं, उसे गढ़ा भी। उस किरदार से निकलना आसान नहीं था। सवाल : सिद्धांत, आपके लिए सबसे कठिन किरदार कौन सा रहा? जवाब / सिद्धांत: मेरे लिए ‘धड़क’ सबसे मुश्किल रही। ट्रैजिक किरदार आपके साथ रह जाते हैं। उस किरदार से निकलने में मुझे लगभग एक साल लग गया। उस दौरान मैं बहुत गुस्से में रहता था, लेकिन एक हल्की और सकारात्मक फिल्म ने मुझे उस अंधेरे से बाहर निकाला। सवाल: इंडस्ट्री में भाषा, पहनावे और पहचान को लेकर होने वाले जजमेंट को आप कैसे देखते हैं? जवाब / सिद्धांत: मुझे बचपन में महंगे कपड़े न पहनने पर चिढ़ाया गया, लेकिन मेरे माता-पिता ने सिखाया कि पहचान काम से बनती है, ब्रांड से नहीं। इंडस्ट्री में कई जगह टैलेंट से ज्यादा भाषा, एक्सेंट और पहनावे को महत्व दिया जाता है, लेकिन हमें अपनी जड़ों और अपनी भाषाओं पर गर्व होना चाहिए। सवाल : सोशल मीडिया की अफवाहों और खबरों को आप कैसे संभालती हैं? जवाब / मृणाल: मैं ध्यान नहीं देती। अगर मुझे कुछ कहना होगा, तो मैं खुद अपने सोशल मीडिया पर कहूंगी। मैं चाहती हूं कि मुझे मेरे काम के लिए जाना जाए. एक ऐसे एक्ट्रेस के रूप में जिसने अलग और मुश्किल रास्ते चुने। सवाल: इस फिल्म में एक संवाद है कि कुछ रिश्तों को फुल स्टॉप लगा देना चाहिए। कब पता चलता है? जवाब / मृणाल : किसी को नहीं पता। जब प्यार में चीजें बहुत बिगड़ जाएं, तो फुल स्टॉप जरूरी होता है। लेकिन अगर दोनों मिलकर समस्याओं से निपट सकते हैं, तो कॉमा लगाइए, प्यार को एक मौका दीजिए। सवाल: वर्ल्ड कप शुरू हो गया है। टीम इंडिया को संदेश और अगर किसी क्रिकेटर की बायोपिक करनी हो तो? जवाब/सिद्धांत: टीम इंडिया को ढेर सारी शुभकामनाएं। हमें पूरा भरोसा है कि आप ट्रॉफी लेकर आएंगे। बायोपिक मैं युवराज सिंह की करना चाहूंगा। उनकी जिंदगी रोलर कोस्टर रही है। संघर्ष, जीत, बीमारी, सब कुछ। दुनिया को उनकी कहानी जाननी चाहिए। मृणाल ठाकुर: ऑल द बेस्ट। ट्रॉफी देश लेकर आइए।

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जवाब / मृणाल: इस फिल्म ने मुझे सिखाया कि जैसे हैं, वैसे ही रहना सबसे जरूरी है। आप से बेहतर आप कोई और नहीं हो सकता। यह एक यात्रा है, एक आत्म-खोज है। मैंने इस फिल्म को एक एक्ट्रेस के तौर पर इसलिए चुना क्योंकि इसकी कहानी अलग और साहसी थी। लेकिन कब यह फिल्म मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गई, मुझे पता ही नहीं चला। सवाल: आज की तेज रफ्तार जिंदगी पर यह फिल्म क्या सवाल उठाती है? जवाब / मृणाल: आज हम हर वक्त जल्दी में रहते हैं। खाना खाते समय भी मोबाइल देखते हैं। सुबह क्या होती है, यह हम भूल चुके हैं। यह फिल्म हमें सिखाती है कि कभी-कभी रुकना जरूरी है, खुद को समझना जरूरी है। अपनी कमजोरियों, अपनी ताकतों और अपने लोगों से प्यार करना जरूरी है। सवाल: सिद्धांत, शूटिंग के दौरान आप निजी तौर पर मुश्किल दौर से गुजर रहे थे। उस अनुभव ने आपके अभिनय को कैसे प्रभावित किया? जवाब / सिद्धांत: जो भी मेरे दिल में चल रहा था, मैंने उसे पर्दे पर उतार दिया है। जब दर्शक फिल्म देखेंगे, तो उन्हें वह महसूस होगा। मैं हमेशा कोशिश करता हूं कि अपने निजी अनुभवों को अपने काम में सच्चाई के साथ डाल सकूं, क्योंकि कैमरे के सामने आप झूठ नहीं बोल सकते। सवाल : क्या वह निजी संघर्ष आपके लिए नुकसानदायक था या मददगार? 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जवाब / मृणाल: मेरे लिए सबसे मुश्किल किरदार ‘लव सोनिया’ का रहा है। वह मेरी पहली फिल्म थी और मैंने बहुत गहरे अनुभव देखे। उस फिल्म ने मुझे अंदर से तोड़ा भी और आज जो मैं हूं, उसे गढ़ा भी। उस किरदार से निकलना आसान नहीं था। सवाल : सिद्धांत, आपके लिए सबसे कठिन किरदार कौन सा रहा? जवाब / सिद्धांत: मेरे लिए ‘धड़क’ सबसे मुश्किल रही। ट्रैजिक किरदार आपके साथ रह जाते हैं। उस किरदार से निकलने में मुझे लगभग एक साल लग गया। उस दौरान मैं बहुत गुस्से में रहता था, लेकिन एक हल्की और सकारात्मक फिल्म ने मुझे उस अंधेरे से बाहर निकाला। सवाल: इंडस्ट्री में भाषा, पहनावे और पहचान को लेकर होने वाले जजमेंट को आप कैसे देखते हैं? जवाब / सिद्धांत: मुझे बचपन में महंगे कपड़े न पहनने पर चिढ़ाया गया, लेकिन मेरे माता-पिता ने सिखाया कि पहचान काम से बनती है, ब्रांड से नहीं। इंडस्ट्री में कई जगह टैलेंट से ज्यादा भाषा, एक्सेंट और पहनावे को महत्व दिया जाता है, लेकिन हमें अपनी जड़ों और अपनी भाषाओं पर गर्व होना चाहिए। सवाल : सोशल मीडिया की अफवाहों और खबरों को आप कैसे संभालती हैं? जवाब / मृणाल: मैं ध्यान नहीं देती। अगर मुझे कुछ कहना होगा, तो मैं खुद अपने सोशल मीडिया पर कहूंगी। मैं चाहती हूं कि मुझे मेरे काम के लिए जाना जाए. एक ऐसे एक्ट्रेस के रूप में जिसने अलग और मुश्किल रास्ते चुने। सवाल: इस फिल्म में एक संवाद है कि कुछ रिश्तों को फुल स्टॉप लगा देना चाहिए। कब पता चलता है? जवाब / मृणाल : किसी को नहीं पता। जब प्यार में चीजें बहुत बिगड़ जाएं, तो फुल स्टॉप जरूरी होता है। लेकिन अगर दोनों मिलकर समस्याओं से निपट सकते हैं, तो कॉमा लगाइए, प्यार को एक मौका दीजिए। सवाल: वर्ल्ड कप शुरू हो गया है। टीम इंडिया को संदेश और अगर किसी क्रिकेटर की बायोपिक करनी हो तो? जवाब/सिद्धांत: टीम इंडिया को ढेर सारी शुभकामनाएं। हमें पूरा भरोसा है कि आप ट्रॉफी लेकर आएंगे। बायोपिक मैं युवराज सिंह की करना चाहूंगा। उनकी जिंदगी रोलर कोस्टर रही है। संघर्ष, जीत, बीमारी, सब कुछ। दुनिया को उनकी कहानी जाननी चाहिए। मृणाल ठाकुर: ऑल द बेस्ट। ट्रॉफी देश लेकर आइए।

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