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West Bengal & Tamil Nadu Elections Voting Today

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कोलकाता/चेन्नईकुछ ही क्षण पहले

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पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में आज वोटिंग है। बंगाल में फर्स्ट फेज के 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर चुनाव होंगे। वोटिंग सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगी।

बंगाल में TMC और BJP के बीच मुख्य मुकाबला है। यहां के सभी बूथों पर वेबकास्टिंग (लाइव मॉनीटरिंग) होगी। राज्य की बाकी 142 सीटों पर दूसरे फेज में 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। रिजल्ट 4 मई को आएंगे।

तमिलनाडु में DMK+ कांग्रेस और AIADMK+ BJP के बीच मुकाबला है। तमिल एक्टर थलापति विजय की नई पार्टी TVK इस लड़ाई को त्रिकोणीय बना रही है।

महाराष्ट्र की बारामती सीट पर भी उपचुनाव है। यह सीट महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद से खाली है। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के खिलाफ विपक्षी ‘महा विकास अघाड़ी’ (MVA) की ओर से कोई भी उम्मीदवार मैदान में नहीं है।

चुनाव तैयारी से जुड़ी 2 तस्वीरें…

पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में महिला कर्मचारी ईवीएम लेकिन पोलिंग बूथ पहुंची है।

पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में महिला कर्मचारी ईवीएम लेकिन पोलिंग बूथ पहुंची है।

पश्चिम बंगाल के बालुरघाट में चुनाव कर्मचारी ने धूप से बचने के लिए अपना सिर ढंक लिया।

पश्चिम बंगाल के बालुरघाट में चुनाव कर्मचारी ने धूप से बचने के लिए अपना सिर ढंक लिया।

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की वोटिंग से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे के ब्लॉग से गुजर जाएं…

अपडेट्स

5 मिनट पहले

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पश्चिम बंगाल: कुल 6.80 करोड़ वोटर्स, 5.23 लाख पहली बार मतदान करेंगे

पश्चिम बंगाल में कुल 294 सीटे हैं। जिसमें 210 जनरल सीटें हैं। वहीं 68 सीटें एससी और 10 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। राज्य में कुल 6.8 करोड़ वोटर्स हैं। पांच लाख से ज्यादा लोग पहली बार वोट डालेंगे। वहीं 3.79 लाख वोटर्स 85 से ज्यादा उम्र के हैं। फर्स्ट फेज में 16 जिलों की 152 सीटों पर वोटिंग होगी। 44,376 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं।

5 मिनट पहले

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29 अप्रैल को दूसरे फेज में 142 सीटों पर मतदान होगा

6 मिनट पहले

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पश्चिम बंगाल: पिछले 2 चुनाव से 80% से ज्यादा वोटिंग

7 मिनट पहले

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पश्चिम बंगाल: 3 बार से ममता बनर्जी ही मुख्यमंत्री

बंगाल में 14 साल से CM ममता के सामने BJP मुख्य चुनौती है। 2026 के चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। वे ऐसा करने वाली देश पहली महिला होंगी। जयललिता के नाम 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। हालांकि, वह 1991 से 2016 तक अलग-अलग कार्यकाल (लगातार नहीं) में मुख्यमंत्री पद पर रहीं।

8 मिनट पहले

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पहले फेज में पश्चिम बंगाल की 4 हॉट सीटें

9 मिनट पहले

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ममता ने 34 साल का लेफ्ट शासन खत्म किया, 15 साल से सत्ता में

  • आजादी के बाद शुरुआती दौर (1947–1967) में कांग्रेस का वर्चस्व रहा और राज्य में स्थिर सरकारें रहीं।
  • 1967 के बाद कांग्रेस कमजोर हुई और राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरू हुआ, कई गठबंधन सरकारें बनीं।
  • 1977 में वाम मोर्चा (लेफ्ट फ्रंट) सत्ता में आया और ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने।
  • 1977 से 2011 तक करीब 34 साल तक लेफ्ट फ्रंट का लगातार शासन रहा।
  • 2000 के दशक में औद्योगीकरण (सिंगूर, नंदीग्राम) को लेकर विवाद हुआ, जिससे लेफ्ट की पकड़ कमजोर हुई।
  • ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने किसान आंदोलनों के जरिए बड़ा जनसमर्थन हासिल किया।
  • 2011 में TMC ने लेफ्ट को हराकर सत्ता हासिल की, 34 साल का लेफ्ट शासन खत्म हुआ।
  • 2016 और 2021 में TMC ने दोबारा जीत दर्ज की और ममता बनर्जी का दबदबा कायम रहा।
  • वर्तमान में राजनीति TMC vs BJP के बीच मुख्य मुकाबले में बदल गई है, जबकि कांग्रेस-लेफ्ट सीमित भूमिका में हैं।

10 मिनट पहले

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तमिलनाडु- 12.51 लाख वोटर्स पहली बार वोटिंग करेंगे

10 मिनट पहले

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तमिलनाडु में पिछले 2 चुनाव से 75% से कम वोटिंग

12 मिनट पहले

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तमिलनाडु- कांग्रेस 60 साल से यहां सत्ता में नहीं

आजादी के बाद लगभग दो दशक तक यहां कांग्रेस की सरकार रही। 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई और इसके साथ ही राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। 1967 के बाद से तमिलनाडु की राजनीति मुख्य रूप से AIADMK और DMK के बीच घूमती रही है।

फिलहाल तमिलनाडु में एमके स्टालिन की अगुवाई में DMK की सरकार है, जो 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई। पार्टी ने कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दल के साथ गठबंधन किया है। बीजेपी ने कई चुनावों में AIADMK जैसे दलों के साथ गठबंधन जरूर किया, लेकिन राज्य में उसकी अपनी सरकार नहीं रही।

12 मिनट पहले

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तमिलनाडु की 4 हॉट सीटें: सीएम स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि भी मैदान में

14 मिनट पहले

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1967 में पहली बार DMK ने कांग्रेस को हराया, द्रविड़ विचारधारा पर राजनीति

  • आजादी के बाद (1947–1967) तक राज्य में कांग्रेस का वर्चस्व रहा, के. कामराज प्रमुख नेता थे।
  • इसी दौर में पेरियार के नेतृत्व में द्रविड़ आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें सामाजिक न्याय और हिंदी विरोध मुख्य मुद्दे थे।
  • 1967 में DMK ने कांग्रेस को हराकर पहली बार क्षेत्रीय राजनीति को सत्ता में स्थापित किया।
  • सी.एन. अन्नादुरई पहले द्रविड़ मुख्यमंत्री बने, यहीं से द्रविड़ राजनीति का दौर शुरू हुआ।
  • उनके बाद एम. करुणानिधि ने DMK को मजबूत किया और संस्कृति-भाषा आधारित राजनीति को आगे बढ़ाया।
  • 1972 में एम.जी. रामचंद्रन (MGR) ने AIADMK बनाई, जिससे दो-दलीय राजनीति (DMK vs AIADMK) स्थापित हुई।
  • 1970 के दशक से 2010 तक DMK और AIADMK बारी-बारी से सत्ता में आती रहीं।
  • जयललिता के दौर में AIADMK ने ‘अम्मा स्कीम्स’ के जरिए वेलफेयर पॉलिटिक्स को मजबूत किया।
  • 2016 के बाद जयललिता और करुणानिधि के निधन से नेतृत्व परिवर्तन का दौर शुरू हुआ।
  • 2021 के बाद एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में DMK सत्ता में है, और आज भी राज्य की राजनीति द्रविड़ विचारधारा पर आधारित है।

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पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में आज वोटिंग है। बंगाल में फर्स्ट फेज के 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर चुनाव होंगे। वोटिंग सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगी।

बंगाल में TMC और BJP के बीच मुख्य मुकाबला है। यहां के सभी बूथों पर वेबकास्टिंग (लाइव मॉनीटरिंग) होगी। राज्य की बाकी 142 सीटों पर दूसरे फेज में 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। रिजल्ट 4 मई को आएंगे।

तमिलनाडु में DMK+ कांग्रेस और AIADMK+ BJP के बीच मुकाबला है। तमिल एक्टर थलापति विजय की नई पार्टी TVK इस लड़ाई को त्रिकोणीय बना रही है।

महाराष्ट्र की बारामती सीट पर भी उपचुनाव है। यह सीट महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद से खाली है। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के खिलाफ विपक्षी ‘महा विकास अघाड़ी’ (MVA) की ओर से कोई भी उम्मीदवार मैदान में नहीं है।

चुनाव तैयारी से जुड़ी 2 तस्वीरें…

पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में महिला कर्मचारी ईवीएम लेकिन पोलिंग बूथ पहुंची है।

पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में महिला कर्मचारी ईवीएम लेकिन पोलिंग बूथ पहुंची है।

पश्चिम बंगाल के बालुरघाट में चुनाव कर्मचारी ने धूप से बचने के लिए अपना सिर ढंक लिया।

पश्चिम बंगाल के बालुरघाट में चुनाव कर्मचारी ने धूप से बचने के लिए अपना सिर ढंक लिया।

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की वोटिंग से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे के ब्लॉग से गुजर जाएं…

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पश्चिम बंगाल: कुल 6.80 करोड़ वोटर्स, 5.23 लाख पहली बार मतदान करेंगे

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पहले फेज में पश्चिम बंगाल की 4 हॉट सीटें

9 मिनट पहले

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ममता ने 34 साल का लेफ्ट शासन खत्म किया, 15 साल से सत्ता में

  • आजादी के बाद शुरुआती दौर (1947–1967) में कांग्रेस का वर्चस्व रहा और राज्य में स्थिर सरकारें रहीं।
  • 1967 के बाद कांग्रेस कमजोर हुई और राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरू हुआ, कई गठबंधन सरकारें बनीं।
  • 1977 में वाम मोर्चा (लेफ्ट फ्रंट) सत्ता में आया और ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने।
  • 1977 से 2011 तक करीब 34 साल तक लेफ्ट फ्रंट का लगातार शासन रहा।
  • 2000 के दशक में औद्योगीकरण (सिंगूर, नंदीग्राम) को लेकर विवाद हुआ, जिससे लेफ्ट की पकड़ कमजोर हुई।
  • ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने किसान आंदोलनों के जरिए बड़ा जनसमर्थन हासिल किया।
  • 2011 में TMC ने लेफ्ट को हराकर सत्ता हासिल की, 34 साल का लेफ्ट शासन खत्म हुआ।
  • 2016 और 2021 में TMC ने दोबारा जीत दर्ज की और ममता बनर्जी का दबदबा कायम रहा।
  • वर्तमान में राजनीति TMC vs BJP के बीच मुख्य मुकाबले में बदल गई है, जबकि कांग्रेस-लेफ्ट सीमित भूमिका में हैं।

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10 मिनट पहले

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12 मिनट पहले

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तमिलनाडु- कांग्रेस 60 साल से यहां सत्ता में नहीं

आजादी के बाद लगभग दो दशक तक यहां कांग्रेस की सरकार रही। 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई और इसके साथ ही राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। 1967 के बाद से तमिलनाडु की राजनीति मुख्य रूप से AIADMK और DMK के बीच घूमती रही है।

फिलहाल तमिलनाडु में एमके स्टालिन की अगुवाई में DMK की सरकार है, जो 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई। पार्टी ने कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दल के साथ गठबंधन किया है। बीजेपी ने कई चुनावों में AIADMK जैसे दलों के साथ गठबंधन जरूर किया, लेकिन राज्य में उसकी अपनी सरकार नहीं रही।

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तमिलनाडु की 4 हॉट सीटें: सीएम स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि भी मैदान में

14 मिनट पहले

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1967 में पहली बार DMK ने कांग्रेस को हराया, द्रविड़ विचारधारा पर राजनीति

  • आजादी के बाद (1947–1967) तक राज्य में कांग्रेस का वर्चस्व रहा, के. कामराज प्रमुख नेता थे।
  • इसी दौर में पेरियार के नेतृत्व में द्रविड़ आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें सामाजिक न्याय और हिंदी विरोध मुख्य मुद्दे थे।
  • 1967 में DMK ने कांग्रेस को हराकर पहली बार क्षेत्रीय राजनीति को सत्ता में स्थापित किया।
  • सी.एन. अन्नादुरई पहले द्रविड़ मुख्यमंत्री बने, यहीं से द्रविड़ राजनीति का दौर शुरू हुआ।
  • उनके बाद एम. करुणानिधि ने DMK को मजबूत किया और संस्कृति-भाषा आधारित राजनीति को आगे बढ़ाया।
  • 1972 में एम.जी. रामचंद्रन (MGR) ने AIADMK बनाई, जिससे दो-दलीय राजनीति (DMK vs AIADMK) स्थापित हुई।
  • 1970 के दशक से 2010 तक DMK और AIADMK बारी-बारी से सत्ता में आती रहीं।
  • जयललिता के दौर में AIADMK ने ‘अम्मा स्कीम्स’ के जरिए वेलफेयर पॉलिटिक्स को मजबूत किया।
  • 2016 के बाद जयललिता और करुणानिधि के निधन से नेतृत्व परिवर्तन का दौर शुरू हुआ।
  • 2021 के बाद एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में DMK सत्ता में है, और आज भी राज्य की राजनीति द्रविड़ विचारधारा पर आधारित है।

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