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Bone Weakness Signs; Bone Loss After 40 Reason & Health Tips

Bone Weakness Signs; Bone Loss After 40 Reason & Health Tips
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1 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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40 की उम्र के बाद हड्डियों में कमजोरी एक ‘साइलेंट’ प्रॉब्लम है, जो धीरे-धीरे बढ़ती है। यह अक्सर तब सामने आती है, जब फ्रैक्चर या दर्द होता है। दरअसल उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कैल्शियम का अवशोषण कम हो जाता है और बोन डेंसिटी घटने लगती है।

महिलाओं में मेनोपॉज के बाद यह प्रक्रिया और तेज हो जाती है। खराब लाइफस्टाइल, विटामिन D की कमी, एक्सरसाइज की कमी और गलत खानपान इस खतरे को बढ़ा सकते हैं।

परेशानी की बात यह है कि शुरुआत में इसके लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते। इसलिए लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। अगर समय रहते इस पर ध्यान दिया जाए तो बोन लॉस की प्रक्रिया को थोड़ा स्लो किया जा सकता है।

आज ‘जरूरत की खबर’ में बोन हेल्थ पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे-

  • हड्डियों की कमजोरी के क्या संकेत हैं?
  • स्ट्रॉन्ग बोन हेल्थ के लिए लाइफस्टाइल कैसी होनी चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा, सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक्स एंड स्पाइन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली

सवाल- 40 की उम्र के बाद हड्डियां कमजोर क्यों होने लगती हैं?

जवाब- 40 की उम्र के बाद हड्डियों का कमजोर होना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन यह अचानक नहीं होता। इसके पीछे कई कारण हैं। सभी कारण ग्राफिक में देखिए-

आइए अब इन कारणों को डिटेल में समझते हैं-

कैल्शियम की कमी

  • उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कैल्शियम का अवशोषण कम हो जाता है।
  • अगर डाइट से पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिलता तो शरीर हड्डियों से कैल्शियम लेने लगता है। इससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।

विटामिन D की कमी

  • विटामिन D कैल्शियम को शरीर में एब्जॉर्ब करने में मदद करता है।
  • धूप में कम समय बिताने और खराब लाइफस्टाइल के कारण इसकी कमी हो जाती है। इससे हड्डियां कमजोर होती हैं।

हाॅर्मोनल बदलाव (खासकर महिलाओं में)

  • महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजेन हाॅर्मोन तेजी से घटता है।
  • यह हाॅर्मोन हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है।
  • इसकी कमी से बोन लॉस बढ़ सकता है।

बोन रिमॉडलिंग इंबैलेंस

  • हमारी हड्डियां लगातार टूटती और बनती रहती हैं।
  • 30-35 साल की उम्र तक ये अपनी पीक स्ट्रेंथ पर होती हैं।
  • 40 के बाद हड्डियां घिसने की प्रक्रिया तेज और बनने की प्रक्रिया स्लो हो जाती है
  • इसके कारण हड्डियां धीरे-धीरे पतली और कमजोर होने लगती हैं।

लो फिजिकल एक्टिविटी

  • 40 के बाद ज्यादातर लोग एक्टिव नहीं रहते हैं।
  • हड्डियों की मजबूती के लिए फिजिकल एक्टिविटी जरूरी है।
  • इसकी कमी से हड्डियां कमजोर पड़ती हैं।

खराब लाइफस्टाइल

  • ज्यादा नमक, जंक फूड, कैफीन, शराब और स्मोकिंग हड्डियों से कैल्शियम कम करती हैं और बोन डेंसिटी घटाती हैं।

कुछ बीमारियां और दवाएं

  • थायरॉइड, किडनी डिजीज जैसी बीमारियां हड्डियों को कमजोर बना सकती हैं।
  • लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने से भी हड्डियां कमजाेर हो सकती हैं।

सवाल- हड्डियों की कमजोरी के क्या संकेत हैं?

जवाब- हड्डियों की कमजोरी के शुरुआती संकेत बहुत हल्के होते हैं। इसलिए लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन समय रहते ये लक्षण पहचान लिए जाएं तो बड़ी समस्या से बचा जा सकता है।

सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- 40+ एज में किन लोगों को बोन लॉस का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- कुछ लोगों को इसका रिस्क ज्यादा होता है। इसके पीछे शरीर, लाइफस्टाइल और मेडिकल फैक्टर्स जिम्मेदार हैं। पॉइंटर्स में देखिए किन्हें ज्यादा रिस्क है-

  • जिन्हें कैल्शियम/विटामिन D की कमी है।
  • जो फिजिकली कम एक्टिव रहते हैं।
  • जो स्मोकिंग/ड्रिंकिग करते हैं।
  • जिनका BMI बहुत कम है।
  • जिनकी बोन डिजीज की फैमिली हिस्ट्री है।
  • जिन्हें थायरॉइड है।
  • जिन्हें किडनी डिजीज है।
  • जिन्हें रूमेटाइड आर्थराइटिस है।
  • जो मेडिकेशन पर हैं।
  • जिनका सनलाइट एक्सपोजर कम है।
  • जिनकी लाइफस्टाल खराब है।
  • जिनकी उम्र 50 से ऊपर है।
  • जिन महिलाओं को मेनोपॉज हो चुका है।

सवाल- हड्डियां कमजोर होने से किन बीमारियाें का रिस्क बढ़ता है?

जवाब- कमजोर हड्डियां दर्द या थकान के साथ कई गंभीर बीमारियों का रिस्क बढ़ा सकती हैं। 40+ उम्र में यह रिस्क और ज्यादा हो जाता है। सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- बोन हेल्थ का पता कैसे लगाया जाता है?

जवाब- बोन हेल्थ का सही आकलन सिर्फ लक्षणों से नहीं लगाया जा सकता है। इसके साथ टेस्ट और मेडिकल एसेसमेंट की भी जरूरत होती है। जैसेकि-

BMD (बोन मिनरल डेंसिटी) टेस्ट

  • इसमें हड्डियों की डेंसिटी मापी जाती है।
  • DEXA (डुअल-एनर्जी एक्स-रे एब्जॉर्प्टियोमेट्री) स्कैन किया जाता है।
  • इससे पता चलता है कि हड्डियां नॉर्मल हैं, कमजोर हैं या ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियां पतली या कमजोर होना) है।

एक्स-रे

  • इससे हड्डियों के स्ट्रक्चर और फ्रैक्चर का पता चलता है।
  • हालांकि शुरुआती बोन लॉस इसमें नहीं दिखता है।

ब्लड टेस्ट

  • कैल्शियम और विटामिन D का लेवल जांचा जाता है।
  • थायरॉइड या अन्य समस्याओं का भी पता चलता है।
  • इससे हड्डियों की कमजोरी की वजह समझने में मदद मिलती है।

FRAX स्कोर (फ्रैक्चर रिस्क एसेसमेंट टूल)

  • यह एक कैलकुलेशन टूल है।
  • यह उम्र, वजन, लाइफस्टाइल और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर फ्रैक्चर रिस्क बताता है।

शारीरिक संकेत

डॉक्टर कुछ लक्षणों के आधार पर अंदाजा लगाते हैं। जैसे-

  • बार-बार फ्रैक्चर
  • लगातार हड्डियों में दर्द
  • लाइफस्टाइल (डाइट, एक्सरसाइज)
  • मेडिकल हिस्ट्री

सवाल- मजबूत बोन्स के लिए किन पोषक तत्वों की जरूरत होती है?

जवाब- कई पोषक तत्व मिलकर हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। बोन हेल्थ के जरूरी सभी पोषक तत्वों की लिस्ट ग्राफिक में देखिए-

सवाल- लाइफस्टाइल का बोन हेल्थ पर क्या प्रभाव पड़ता है?

जवाब- संतुलित डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और पर्याप्त धूप लेने से हड्डियां मजबूत होती हैं। जबकि खराब खानपान, लो फिजिकल एक्टिविटी, स्मोकिंग और ड्रिंकिंग हड्डियों को कमजोर करते हैं। गलत आदतें धीरे-धीरे बोन डेंसिटी कम करती हैं और समय के साथ ऑस्टियोपोरोसिस का रिस्क बढ़ा सकती हैं।

सवाल- स्ट्रॉन्ग बोन हेल्थ के लिए लाइफस्टाइल कैसी होनी चाहिए?

जवाब- हेल्दी लाइफस्टाइल और सही आदतें बोन हेल्थ को स्ट्रॉन्ग बनाने में मदद करती हैं। इसे ग्राफिक में देखिए-

बोन हेल्थ से जुड़े कॉमन सवाल और जवाब

सवाल- क्या बिना टेस्ट के भी बोन हेल्थ का पता चल सकता है?

जवाब- नहीं, केवल लक्षणों से सटीक पता नहीं चलता। सही आकलन के लिए टेस्ट जरूरी होते हैं।

सवाल- क्या बोन लॉस को पूरी तरह रोका जा सकता है?

जवाब- पूरी तरह तो नहीं, लेकिन सही डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल से इसे काफी हद तक धीमा किया जा सकता है।

सवाल- क्या हर व्यक्ति को 40 के बाद बोन डेंसिटी टेस्ट कराना चाहिए?

जवाब- हां, लेकिन जिन्हें ज्यादा रिस्क है, उन्हें जरूर कराना चाहिए। जैसेकि-

  • मेनोपॉज होने पर।
  • जिन्हें पहले फ्रैक्चर हो चुका हो।
  • जिन्हें कैल्शियम/विटामिन D की कमी है।
  • जो लंबे समय से स्टेरॉयड ले रहे हैं।

सवाल- क्या सिर्फ सप्लीमेंट लेने से हड्डियां मजबूत हो सकती हैं?

जवाब- नहीं, सप्लीमेंट के साथ संतुलित डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल भी जरूरी है।

सवाल- किन स्थितियों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है?

जवाब- इन स्थितियों में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है-

  • किसी खास कारण के बिना लगातार हड्डियों में दर्द बना रहे।
  • मामूली झटके में हड्डी टूट जाए।
  • चलने-फिरने में दिक्कत या बैलेंस खराब हो।
  • कमजोरी, थकान या मसल्स में दर्द हो।
  • अगर बोन डिजीज की फैमिली हिस्ट्री हो।
  • लंबे समय से स्टेरॉयड या अन्य दवाएं ले रहे हों।
  • 50 साल से ज्यादा उम्र हो।

…………………..

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1 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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40 की उम्र के बाद हड्डियों में कमजोरी एक ‘साइलेंट’ प्रॉब्लम है, जो धीरे-धीरे बढ़ती है। यह अक्सर तब सामने आती है, जब फ्रैक्चर या दर्द होता है। दरअसल उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कैल्शियम का अवशोषण कम हो जाता है और बोन डेंसिटी घटने लगती है।

महिलाओं में मेनोपॉज के बाद यह प्रक्रिया और तेज हो जाती है। खराब लाइफस्टाइल, विटामिन D की कमी, एक्सरसाइज की कमी और गलत खानपान इस खतरे को बढ़ा सकते हैं।

परेशानी की बात यह है कि शुरुआत में इसके लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते। इसलिए लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। अगर समय रहते इस पर ध्यान दिया जाए तो बोन लॉस की प्रक्रिया को थोड़ा स्लो किया जा सकता है।

आज ‘जरूरत की खबर’ में बोन हेल्थ पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे-

  • हड्डियों की कमजोरी के क्या संकेत हैं?
  • स्ट्रॉन्ग बोन हेल्थ के लिए लाइफस्टाइल कैसी होनी चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा, सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक्स एंड स्पाइन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली

सवाल- 40 की उम्र के बाद हड्डियां कमजोर क्यों होने लगती हैं?

जवाब- 40 की उम्र के बाद हड्डियों का कमजोर होना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन यह अचानक नहीं होता। इसके पीछे कई कारण हैं। सभी कारण ग्राफिक में देखिए-

आइए अब इन कारणों को डिटेल में समझते हैं-

कैल्शियम की कमी

  • उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कैल्शियम का अवशोषण कम हो जाता है।
  • अगर डाइट से पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिलता तो शरीर हड्डियों से कैल्शियम लेने लगता है। इससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।

विटामिन D की कमी

  • विटामिन D कैल्शियम को शरीर में एब्जॉर्ब करने में मदद करता है।
  • धूप में कम समय बिताने और खराब लाइफस्टाइल के कारण इसकी कमी हो जाती है। इससे हड्डियां कमजोर होती हैं।

हाॅर्मोनल बदलाव (खासकर महिलाओं में)

  • महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजेन हाॅर्मोन तेजी से घटता है।
  • यह हाॅर्मोन हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है।
  • इसकी कमी से बोन लॉस बढ़ सकता है।

बोन रिमॉडलिंग इंबैलेंस

  • हमारी हड्डियां लगातार टूटती और बनती रहती हैं।
  • 30-35 साल की उम्र तक ये अपनी पीक स्ट्रेंथ पर होती हैं।
  • 40 के बाद हड्डियां घिसने की प्रक्रिया तेज और बनने की प्रक्रिया स्लो हो जाती है
  • इसके कारण हड्डियां धीरे-धीरे पतली और कमजोर होने लगती हैं।

लो फिजिकल एक्टिविटी

  • 40 के बाद ज्यादातर लोग एक्टिव नहीं रहते हैं।
  • हड्डियों की मजबूती के लिए फिजिकल एक्टिविटी जरूरी है।
  • इसकी कमी से हड्डियां कमजोर पड़ती हैं।

खराब लाइफस्टाइल

  • ज्यादा नमक, जंक फूड, कैफीन, शराब और स्मोकिंग हड्डियों से कैल्शियम कम करती हैं और बोन डेंसिटी घटाती हैं।

कुछ बीमारियां और दवाएं

  • थायरॉइड, किडनी डिजीज जैसी बीमारियां हड्डियों को कमजोर बना सकती हैं।
  • लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने से भी हड्डियां कमजाेर हो सकती हैं।

सवाल- हड्डियों की कमजोरी के क्या संकेत हैं?

जवाब- हड्डियों की कमजोरी के शुरुआती संकेत बहुत हल्के होते हैं। इसलिए लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन समय रहते ये लक्षण पहचान लिए जाएं तो बड़ी समस्या से बचा जा सकता है।

सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- 40+ एज में किन लोगों को बोन लॉस का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- कुछ लोगों को इसका रिस्क ज्यादा होता है। इसके पीछे शरीर, लाइफस्टाइल और मेडिकल फैक्टर्स जिम्मेदार हैं। पॉइंटर्स में देखिए किन्हें ज्यादा रिस्क है-

  • जिन्हें कैल्शियम/विटामिन D की कमी है।
  • जो फिजिकली कम एक्टिव रहते हैं।
  • जो स्मोकिंग/ड्रिंकिग करते हैं।
  • जिनका BMI बहुत कम है।
  • जिनकी बोन डिजीज की फैमिली हिस्ट्री है।
  • जिन्हें थायरॉइड है।
  • जिन्हें किडनी डिजीज है।
  • जिन्हें रूमेटाइड आर्थराइटिस है।
  • जो मेडिकेशन पर हैं।
  • जिनका सनलाइट एक्सपोजर कम है।
  • जिनकी लाइफस्टाल खराब है।
  • जिनकी उम्र 50 से ऊपर है।
  • जिन महिलाओं को मेनोपॉज हो चुका है।

सवाल- हड्डियां कमजोर होने से किन बीमारियाें का रिस्क बढ़ता है?

जवाब- कमजोर हड्डियां दर्द या थकान के साथ कई गंभीर बीमारियों का रिस्क बढ़ा सकती हैं। 40+ उम्र में यह रिस्क और ज्यादा हो जाता है। सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- बोन हेल्थ का पता कैसे लगाया जाता है?

जवाब- बोन हेल्थ का सही आकलन सिर्फ लक्षणों से नहीं लगाया जा सकता है। इसके साथ टेस्ट और मेडिकल एसेसमेंट की भी जरूरत होती है। जैसेकि-

BMD (बोन मिनरल डेंसिटी) टेस्ट

  • इसमें हड्डियों की डेंसिटी मापी जाती है।
  • DEXA (डुअल-एनर्जी एक्स-रे एब्जॉर्प्टियोमेट्री) स्कैन किया जाता है।
  • इससे पता चलता है कि हड्डियां नॉर्मल हैं, कमजोर हैं या ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियां पतली या कमजोर होना) है।

एक्स-रे

  • इससे हड्डियों के स्ट्रक्चर और फ्रैक्चर का पता चलता है।
  • हालांकि शुरुआती बोन लॉस इसमें नहीं दिखता है।

ब्लड टेस्ट

  • कैल्शियम और विटामिन D का लेवल जांचा जाता है।
  • थायरॉइड या अन्य समस्याओं का भी पता चलता है।
  • इससे हड्डियों की कमजोरी की वजह समझने में मदद मिलती है।

FRAX स्कोर (फ्रैक्चर रिस्क एसेसमेंट टूल)

  • यह एक कैलकुलेशन टूल है।
  • यह उम्र, वजन, लाइफस्टाइल और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर फ्रैक्चर रिस्क बताता है।

शारीरिक संकेत

डॉक्टर कुछ लक्षणों के आधार पर अंदाजा लगाते हैं। जैसे-

  • बार-बार फ्रैक्चर
  • लगातार हड्डियों में दर्द
  • लाइफस्टाइल (डाइट, एक्सरसाइज)
  • मेडिकल हिस्ट्री

सवाल- मजबूत बोन्स के लिए किन पोषक तत्वों की जरूरत होती है?

जवाब- कई पोषक तत्व मिलकर हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। बोन हेल्थ के जरूरी सभी पोषक तत्वों की लिस्ट ग्राफिक में देखिए-

सवाल- लाइफस्टाइल का बोन हेल्थ पर क्या प्रभाव पड़ता है?

जवाब- संतुलित डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और पर्याप्त धूप लेने से हड्डियां मजबूत होती हैं। जबकि खराब खानपान, लो फिजिकल एक्टिविटी, स्मोकिंग और ड्रिंकिंग हड्डियों को कमजोर करते हैं। गलत आदतें धीरे-धीरे बोन डेंसिटी कम करती हैं और समय के साथ ऑस्टियोपोरोसिस का रिस्क बढ़ा सकती हैं।

सवाल- स्ट्रॉन्ग बोन हेल्थ के लिए लाइफस्टाइल कैसी होनी चाहिए?

जवाब- हेल्दी लाइफस्टाइल और सही आदतें बोन हेल्थ को स्ट्रॉन्ग बनाने में मदद करती हैं। इसे ग्राफिक में देखिए-

बोन हेल्थ से जुड़े कॉमन सवाल और जवाब

सवाल- क्या बिना टेस्ट के भी बोन हेल्थ का पता चल सकता है?

जवाब- नहीं, केवल लक्षणों से सटीक पता नहीं चलता। सही आकलन के लिए टेस्ट जरूरी होते हैं।

सवाल- क्या बोन लॉस को पूरी तरह रोका जा सकता है?

जवाब- पूरी तरह तो नहीं, लेकिन सही डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल से इसे काफी हद तक धीमा किया जा सकता है।

सवाल- क्या हर व्यक्ति को 40 के बाद बोन डेंसिटी टेस्ट कराना चाहिए?

जवाब- हां, लेकिन जिन्हें ज्यादा रिस्क है, उन्हें जरूर कराना चाहिए। जैसेकि-

  • मेनोपॉज होने पर।
  • जिन्हें पहले फ्रैक्चर हो चुका हो।
  • जिन्हें कैल्शियम/विटामिन D की कमी है।
  • जो लंबे समय से स्टेरॉयड ले रहे हैं।

सवाल- क्या सिर्फ सप्लीमेंट लेने से हड्डियां मजबूत हो सकती हैं?

जवाब- नहीं, सप्लीमेंट के साथ संतुलित डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल भी जरूरी है।

सवाल- किन स्थितियों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है?

जवाब- इन स्थितियों में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है-

  • किसी खास कारण के बिना लगातार हड्डियों में दर्द बना रहे।
  • मामूली झटके में हड्डी टूट जाए।
  • चलने-फिरने में दिक्कत या बैलेंस खराब हो।
  • कमजोरी, थकान या मसल्स में दर्द हो।
  • अगर बोन डिजीज की फैमिली हिस्ट्री हो।
  • लंबे समय से स्टेरॉयड या अन्य दवाएं ले रहे हों।
  • 50 साल से ज्यादा उम्र हो।

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