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इंजेक्शन वाला तरबूज कैसे होता है, डॉक्टर डॉ. समीर भाटी से अभी जान लीजिए पहचान ताकि लाल जहर न बने काल

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हम जितनी चीजें खा रहे हैं उनमें कितनी में केमिकल है, हमें बिल्कुल पता नहीं है. पर यह बात तो सच है कि आजकल ज्याादातर खाद्य पदार्थों में केमिकल मिलाए जाते हैं. मुंबई की घटना ने इन चीजों को लेकर नई बहस छेड़ दी है. दरअसल, मुंबई में तरबूज खाने के बाद एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत हो गई. इसके बाद सवाल यही उठता है कि अगर किसी तरबूज में केमिकल वाला इंजेक्शन दिया जाता है तो इसकी पहचान कैसे करें. केमिकल वाला इंजेक्शन इसलिए दिया जाता है ताकि तरबूज पक जाय और उसके अंदर लाल ज्यादा दिखें. लेकिन यही लाल जहर बन जाता है. खेत में भी कई तरह के केमिकल दिए जाते हैं ताकि तरबूज जल्दी से बड़ा हो जाए. पर असली सवाल यही है कि हम इसे कैसे पहचानें. इसी सवाल को जानने के लिए न्यूज 18 ने पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. समीरभाटी से बात की.

कैसे पहचानें कि तरबूज नैचुरल है या केमिकल से पका हुआ
पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. समीर भाटी कहते हैं कि तरबूज खरीदते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि आप केमिकल या इंजेक्शन से पके फल से बच सकें.

1. रंग और धारियां देखें : नैचुरल तरबूज का रंग गहरा हरा होता है और उस पर हल्की-गहरी धारियां साफ दिखती हैं. केमिकल से पका तरबूज अक्सर बहुत चमकीला या एक जैसा हरा दिखता है. इसलिए जब भी तरबूज खरीदें, इन बातों का ध्यान रखें.

2. नीचे का पीला धब्बा (Field Spot) : जब तरबूज असली हो यानी खेत में ही बिना केमिकल के पका हो तो तरबूज में नीचे पीला या क्रीम रंग का धब्बा बन जाता है क्योंकि तरबूज का जो हिस्सा जमीन की तरफ होता है वहां धब्बा बनने लगता है. अगर यह धब्बा नहीं है या बहुत हल्का है, तो तरबूज कच्चा या आर्टिफिशियल रूप से पकाया गया हो सकता है

3. थपथपाने पर आवाज : खेत या कुदरती तौर पर पका हुआ तरबूज थपथपाने पर खोखली आवाज देती है. अगर आवाज भारी या दबी हुई लगे, तो इसका मतलब है कि तरबूज सही से पका नहीं है. यह केमिकलयुक्त भी हो सकता है.

4. वजन और साइज : अच्छा तरबूज अपने आकार के हिसाब से भारी होता है क्योंकि उसमें पानी भरपूर होता है. हल्का तरबूज अंदर से सूखा या खराब हो सकता है.

5. कटने पर अंदर का रंग : नेचुरल तरबूज का रंग गहरा लाल या गुलाबी होता है. अगर रंग बहुत ज्यादा चमकीला लाल है या उसमें सफेद या पीली नसें जैसी दिखाई दे तो इसका मतलब है कि तरबूज खराब है.

6. स्वाद और गंध : असली तरबूज मीठा और ताजगी भरा होता है. अगर तरबूज का स्वाद बेतरतीब, बेस्वाद और खराब हो, जीभ पर हल्की खटास लगे तो इसका मतलब है तरबूज में केमिकल मिलाया हो.

7. कॉटन से जांच : तरबूज को काटने के बाद उसे कॉटन से पोछें, अगर कॉटन में गहरा लाल रंग दिखाई दें यानी लाल कलर कॉटन में लग जाए तो समझिए इसमें केमिकल मिलाया हुआ है. इसे कतई न खरीदें.

फलों को खाते समय क्या रखें सावधानियां

अगर तरबूज आप सड़क से खरीद रहे हैं और वह पहले से कटा हुआ है तो किसी भी कीमत पर इसे न खरीदें. तरबूज खरीदने के बाद घर लाकर हमेशा अच्छे से धोएं. बच्चों और बुजुर्गों को तरबूज देने से पहले खास ध्यान रखें. तरबूज को खाने से पहले उसे अच्छी तरीके से धो लें.

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कैसे पहचानें कि तरबूज नैचुरल है या केमिकल से पका हुआ
पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. समीर भाटी कहते हैं कि तरबूज खरीदते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि आप केमिकल या इंजेक्शन से पके फल से बच सकें.

1. रंग और धारियां देखें : नैचुरल तरबूज का रंग गहरा हरा होता है और उस पर हल्की-गहरी धारियां साफ दिखती हैं. केमिकल से पका तरबूज अक्सर बहुत चमकीला या एक जैसा हरा दिखता है. इसलिए जब भी तरबूज खरीदें, इन बातों का ध्यान रखें.

2. नीचे का पीला धब्बा (Field Spot) : जब तरबूज असली हो यानी खेत में ही बिना केमिकल के पका हो तो तरबूज में नीचे पीला या क्रीम रंग का धब्बा बन जाता है क्योंकि तरबूज का जो हिस्सा जमीन की तरफ होता है वहां धब्बा बनने लगता है. अगर यह धब्बा नहीं है या बहुत हल्का है, तो तरबूज कच्चा या आर्टिफिशियल रूप से पकाया गया हो सकता है

3. थपथपाने पर आवाज : खेत या कुदरती तौर पर पका हुआ तरबूज थपथपाने पर खोखली आवाज देती है. अगर आवाज भारी या दबी हुई लगे, तो इसका मतलब है कि तरबूज सही से पका नहीं है. यह केमिकलयुक्त भी हो सकता है.

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