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SC Sabarimala Case: Justice Nagaratna on Road Blocks

SC Sabarimala Case: Justice Nagaratna on Road Blocks

नई दिल्ली13 मिनट पहले

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केरलम के सबरीमाला मंदिर सहित अन्य संप्रदायों के धार्मिक स्थलों में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को 10 वें दिन सुनवाई हो रही है।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस बी वी नागरत्ना ने कहा कि धार्मिक कामों के नाम पर सड़कें ब्लॉक नहीं की जा सकतीं।

हिंदू धर्म आचार्य सभा की ओर से पेश वकील अक्षय नागराजन ने दलील दी कि सरकार आर्टिकल 25(2)(a) का आधार बताकर किसी धार्मिक पंथ के अधिकारों में दखल नहीं दे सकती। राज्य को धार्मिक रीति-रिवाजों से जुड़ी आर्थिक, फाइनेंशियल, राजनीतिक या दूसरी सेक्युलर एक्टिविटी को रेगुलेट या रोकने का अधिकार है।

आर्टिकल 25 के तहत सुरक्षा सिर्फ धार्मिक विश्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि आस्था के बाहरी रूपों, जैसे किसी खास देवता की पूजा से जुड़े रीति-रिवाजों, समारोहों और प्रथाओं तक भी फैली हुई है।

7 सवाल, जिन पर सुप्रीम कोर्ट में बहस हो रही

सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई हुई

सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

पिछली 8 सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए…

7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत

8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा

9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा

15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता

17 अप्रैल- SC बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी

21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं

22 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- हिंदू एकजुट रहें, संप्रदायों में बंटे नहीं

23 अप्रैल- इस्लाम में महिलाओं के मस्जिद आने पर रोक नहीं

28 अप्रैल- धार्मिक प्रथाओं के नाम पर सड़कें ब्लॉक नहीं कर सकते

सुनवाई से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

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SC Sabarimala Case: Justice Nagaratna on Road Blocks

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नई दिल्ली13 मिनट पहले

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केरलम के सबरीमाला मंदिर सहित अन्य संप्रदायों के धार्मिक स्थलों में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को 10 वें दिन सुनवाई हो रही है।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस बी वी नागरत्ना ने कहा कि धार्मिक कामों के नाम पर सड़कें ब्लॉक नहीं की जा सकतीं।

हिंदू धर्म आचार्य सभा की ओर से पेश वकील अक्षय नागराजन ने दलील दी कि सरकार आर्टिकल 25(2)(a) का आधार बताकर किसी धार्मिक पंथ के अधिकारों में दखल नहीं दे सकती। राज्य को धार्मिक रीति-रिवाजों से जुड़ी आर्थिक, फाइनेंशियल, राजनीतिक या दूसरी सेक्युलर एक्टिविटी को रेगुलेट या रोकने का अधिकार है।

आर्टिकल 25 के तहत सुरक्षा सिर्फ धार्मिक विश्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि आस्था के बाहरी रूपों, जैसे किसी खास देवता की पूजा से जुड़े रीति-रिवाजों, समारोहों और प्रथाओं तक भी फैली हुई है।

7 सवाल, जिन पर सुप्रीम कोर्ट में बहस हो रही

सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई हुई

सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

पिछली 8 सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए…

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8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा

9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा

15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता

17 अप्रैल- SC बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी

21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं

22 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- हिंदू एकजुट रहें, संप्रदायों में बंटे नहीं

23 अप्रैल- इस्लाम में महिलाओं के मस्जिद आने पर रोक नहीं

28 अप्रैल- धार्मिक प्रथाओं के नाम पर सड़कें ब्लॉक नहीं कर सकते

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