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Uterine Fibroids Symptoms; Reasons & Risk Factors

Uterine Fibroids Symptoms; Reasons & Risk Factors

4 दिन पहलेलेखक: अदिति ओझा

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जैसे ही पीरियड्स की डेट नजदीक आती है, दिल में एक अनकहा डर बैठने लगता है। कहीं फिर से हैवी ब्लीडिंग न हो, कहीं वही असहनीय दर्द दोबारा न झेलना पड़े। कई महिलाओं के लिए ये सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि हर महीने लौटने वाली चिंता बन जाती है।

अक्सर इन तकलीफों को ‘नॉर्मल’ मान लिया जाता है। लेकिन हर बार ऐसा होना सामान्य नहीं है। कई मामलों में इसकी वजह यूटेरिन फाइब्रॉइड्स होते हैं। दरअसल, यूटेरिन की वॉल्स पर जब छोटी गांठें बन जाती हैं तो उन्हें ही यूटेरिन फाइब्रॉइड्स कहते हैं।

बदलती लाइफस्टाइल, मोटापा और हॉर्मोनल इंबैलेंस की वजह से महिलाओं में यूटेरिन फाइब्रॉइड्स के मामले बढ़ रहे हैं। जर्नल ऑफ कंटेम्पररी क्लिनिकल प्रैक्टिस (JCCP) की रिसर्च के मुताबिक, दुनिया भर में 50 साल की उम्र तक हर 10 में से लगभग 7-8 महिलाओं को फाइब्रॉइड हो सकते हैं। यानी इस उम्र तक ज्यादातर महिलाओं में कभी-न-कभी फाइब्रॉइड बन सकते हैं।

ऐसे में आज हम फिजिकल हेल्थ में जानेंगे कि–

  • यूटेरिन फाइब्रॉइड्स क्या होते हैं?
  • इनके लक्षण और कारण क्या हैं?
  • कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

एक्सपर्ट: डॉ. गीता जैन, HOD, ऑब्स्टेट्रिक्स, गायनेकोलॉजी एंड आईवीएफ, मैक्योर हॉस्पिटल, दिल्ली

सवाल- फाइब्रॉइड क्या होते हैं?

जवाब- फाइब्रॉइड गर्भाशय यानी यूटेरस में या उसके आसपास बनने वाली नॉन-कैंसरस गांठें होती हैं। ये मांसपेशियों और फाइब्रस टिशू से बनी होती हैं। इन्हें यूटेरिन मायोमा या लियोमायोमा कहा जाता है। फाइब्रॉइड का आकार अलग-अलग हो सकता है। कुछ फाइब्रॉइड मटर के दाने जितने छोटे होते हैं। लेकिन कुछ इतने बड़े हो जाते हैं कि पेट में सूजन या उभार साफ नजर आने लगता है।

सवाल- फाइब्रॉइड कैसे बनते हैं?

जवाब- फाइब्रॉइड बनने का सटीक कारण अब तक पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन डॉक्टर कुछ अहम वजहें मानते हैं। ग्राफिक से समझिए-

एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन फाइब्रॉइड्स की ग्रोथ को बढ़ावा देते हैं। यही वजह है कि मेनोपॉज (मेनोपॉज वह समय होता है, जब पीरियड्स आना बंद हो जाते हैं और शरीर में प्रेग्नेंसी की प्रोसेस रुक जाती है।) के बाद जब हॉर्मोन का लेवल गिरता है, तो कई बार फाइब्रॉइड खुद ही छोटे हो जाते हैं। फाइब्रॉइड हर महिला में अलग गति से बढ़ते हैं। कुछ फाइब्रॉइड धीरे-धीरे बढ़ते हैं, कुछ तेजी से और कुछ लंबे समय तक एक ही आकार में बने रहते हैं।

सवाल- फाइब्रॉइड कितनी तरह के होते हैं?

जवाब- फाइब्रॉइड्स को उनकी जगह के आधार पर चार मुख्य प्रकारों में बांटा जाता है।

इंट्राम्यूरल फाइब्रॉइड: ये गर्भाशय की मसल वॉल के अंदर होते हैं और सबसे कॉमन टाइप के होते हैं।

सबम्यूकोसल फाइब्रॉइड: ये गर्भाशय की सबसे अंदर वाली परत के ठीक नीचे बढ़ते हैं। यही वह परत है, जो पीरियड के लिए जिम्मेदार होती है।

सबसीरोसल फाइब्रॉइड: ये गर्भाशय की बाहरी सतह पर बनते हैं और बाहर की तरफ बढ़ते हैं। अगर ये बड़े हो जाएं, तो पेट के निचले हिस्से में इंफ्लेमेशन या उभार दिख सकता है और पेशाब की थैली या आंतों पर दबाव पड़ सकता है।

पेडन्क्युलेटेड फाइब्रॉइड: ये कम पाए जाते हैं। ये गर्भाशय की दीवार से एक पतले जोड़ (जिसे पेडिकल कहते हैं) के जरिए जुड़े होते हैं।

सवाल- फाइब्रॉइड के लक्षण क्या हैं?

जवाब- फाइब्रॉइड के लक्षण हर महिला में एक जैसे नहीं होते। कई बार ये धीरे-धीरे बढ़ते हैं और शुरुआत में कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती। लेकिन जैसे-जैसे फाइब्रॉइड का आकार बढ़ता है, शरीर इसके संकेत देने लगता है। नीचे ग्राफिक से फाइब्रॉइड के कुछ कॉमन लक्षणों के बारे में समझिए-

सवाल- डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

जवाब- अगर पेल्विक पेन (पेट के निचले हिस्से में दर्द) लगातार बना रहे, पीरियड्स बहुत ज्यादा या पेनफुल हों, फ्रिक्वेंट पीरियड आए या फिर लगातार कमजोरी महसूस हो, तो डॉक्टर से मिलना जरूरी है। अचानक ज्यादा ब्लीडिंग या तेज पेल्विक पेन हो तो तुरंत मेडिकल हेल्प लें।

सवाल- फाइब्रॉइड के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं?

जवाब- कुछ कंडीशंस में फाइब्रॉइड होने का रिस्क बढ़ जाता है। ये कंडीशन्स हॉर्मोनल बैलेंस और लाइफस्टाइल से जुड़ी होती हैं। अगर किसी महिला में ग्राफिक में दिए गए ये रिस्क फैक्टर्स मौजूद हों, तो यूटेरिन फाइब्रॉइड होने का रिस्क हो सकता है।

सवाल- यूटेरिन फाइब्रॉइड का इलाज कैसे होता है?

जवाब- इलाज फाइब्रॉइड के आकार, संख्या, जगह और लक्षणों पर निर्भर करता है। बिना लक्षण वाले छोटे फाइब्रॉइड्स में अक्सर सिर्फ नियमित जांच की सलाह दी जाती है। जरूरत पड़ने पर दवाएं, हॉर्मोनल थेरेपी या सर्जरी का विकल्प अपनाया जाता है।

सवाल- क्या फाइब्रॉइड अल्ट्रासाउंड में हमेशा साफ दिखाई देते हैं?

जवाब- ज्यादातर मामलों में फाइब्रॉइड साधारण अल्ट्रासाउंड में दिख जाते हैं। लेकिन कभी-कभी उनका आकार बहुत छोटा होता है या उनकी जगह ऐसी होती है कि वे साफ नजर नहीं आते। ऐसे केस में डॉक्टर ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड या MRI जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं।

सवाल- फाइब्रॉइड के रिस्क को कैसे कम किया जा सकता है?

जवाब- फाइब्रॉइड के रिस्क को कम करने के लिए लाइफस्टाइल और खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। नीचे ग्राफिक में दिए पॉइंट्स को ध्यान से पढ़ें और इसे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करें।

हरी सब्जियों और साबुत अनाज में फाइबर होता है, जो हॉर्मोनल संतुलन में मदद करता है। बेरीज और हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। अलसी और हेल्दी फैट्स शरीर की ओवरऑल हेल्थ को सपोर्ट करते हैं।

फाइब्रॉइड से जुड़े कुछ कॉमन सवाल और जवाब

सवाल- क्या फाइब्रॉइड से एनीमिया हो सकता है? जवाब- हां, बार-बार या बहुत ज्यादा पीरियड्स होने पर एनीमिया हो सकता है। अगर फाइब्रॉइड के साथ एनीमिया के लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से तुरंत बात करें।

सवाल- क्या फाइब्रॉइड कैंसरस होते हैं? जवाब- नहीं, ज्यादातर मामलों में ये नॉन-कैंसरस होते हैं।

सवाल- क्या फाइब्रॉइड दवाओं से खत्म हो जाते हैं? जवाब- दवाएं फाइब्रॉइड को पूरी तरह खत्म नहीं करतीं, लेकिन इनके लक्षणों को कंट्रोल करने और ग्रोथ को धीमा करने में मदद कर सकती हैं।

सवाल- क्या फाइब्रॉइड दोबारा हो सकते हैं? जवाब- हां, कुछ मामलों में इलाज के बाद भी नए फाइब्रॉइड बन सकते हैं। इसलिए नियमित फॉलो-अप जरूरी है।

यूटेरिन फाइब्रॉइड को सही समय पर जांच, बैलेंस लाइफस्टाइल और डॉक्टर की सलाह से बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है।

……………………………….

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अक्सर इन तकलीफों को ‘नॉर्मल’ मान लिया जाता है। लेकिन हर बार ऐसा होना सामान्य नहीं है। कई मामलों में इसकी वजह यूटेरिन फाइब्रॉइड्स होते हैं। दरअसल, यूटेरिन की वॉल्स पर जब छोटी गांठें बन जाती हैं तो उन्हें ही यूटेरिन फाइब्रॉइड्स कहते हैं।

बदलती लाइफस्टाइल, मोटापा और हॉर्मोनल इंबैलेंस की वजह से महिलाओं में यूटेरिन फाइब्रॉइड्स के मामले बढ़ रहे हैं। जर्नल ऑफ कंटेम्पररी क्लिनिकल प्रैक्टिस (JCCP) की रिसर्च के मुताबिक, दुनिया भर में 50 साल की उम्र तक हर 10 में से लगभग 7-8 महिलाओं को फाइब्रॉइड हो सकते हैं। यानी इस उम्र तक ज्यादातर महिलाओं में कभी-न-कभी फाइब्रॉइड बन सकते हैं।

ऐसे में आज हम फिजिकल हेल्थ में जानेंगे कि–

  • यूटेरिन फाइब्रॉइड्स क्या होते हैं?
  • इनके लक्षण और कारण क्या हैं?
  • कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

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सवाल- फाइब्रॉइड क्या होते हैं?

जवाब- फाइब्रॉइड गर्भाशय यानी यूटेरस में या उसके आसपास बनने वाली नॉन-कैंसरस गांठें होती हैं। ये मांसपेशियों और फाइब्रस टिशू से बनी होती हैं। इन्हें यूटेरिन मायोमा या लियोमायोमा कहा जाता है। फाइब्रॉइड का आकार अलग-अलग हो सकता है। कुछ फाइब्रॉइड मटर के दाने जितने छोटे होते हैं। लेकिन कुछ इतने बड़े हो जाते हैं कि पेट में सूजन या उभार साफ नजर आने लगता है।

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जवाब- फाइब्रॉइड बनने का सटीक कारण अब तक पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन डॉक्टर कुछ अहम वजहें मानते हैं। ग्राफिक से समझिए-

एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन फाइब्रॉइड्स की ग्रोथ को बढ़ावा देते हैं। यही वजह है कि मेनोपॉज (मेनोपॉज वह समय होता है, जब पीरियड्स आना बंद हो जाते हैं और शरीर में प्रेग्नेंसी की प्रोसेस रुक जाती है।) के बाद जब हॉर्मोन का लेवल गिरता है, तो कई बार फाइब्रॉइड खुद ही छोटे हो जाते हैं। फाइब्रॉइड हर महिला में अलग गति से बढ़ते हैं। कुछ फाइब्रॉइड धीरे-धीरे बढ़ते हैं, कुछ तेजी से और कुछ लंबे समय तक एक ही आकार में बने रहते हैं।

सवाल- फाइब्रॉइड कितनी तरह के होते हैं?

जवाब- फाइब्रॉइड्स को उनकी जगह के आधार पर चार मुख्य प्रकारों में बांटा जाता है।

इंट्राम्यूरल फाइब्रॉइड: ये गर्भाशय की मसल वॉल के अंदर होते हैं और सबसे कॉमन टाइप के होते हैं।

सबम्यूकोसल फाइब्रॉइड: ये गर्भाशय की सबसे अंदर वाली परत के ठीक नीचे बढ़ते हैं। यही वह परत है, जो पीरियड के लिए जिम्मेदार होती है।

सबसीरोसल फाइब्रॉइड: ये गर्भाशय की बाहरी सतह पर बनते हैं और बाहर की तरफ बढ़ते हैं। अगर ये बड़े हो जाएं, तो पेट के निचले हिस्से में इंफ्लेमेशन या उभार दिख सकता है और पेशाब की थैली या आंतों पर दबाव पड़ सकता है।

पेडन्क्युलेटेड फाइब्रॉइड: ये कम पाए जाते हैं। ये गर्भाशय की दीवार से एक पतले जोड़ (जिसे पेडिकल कहते हैं) के जरिए जुड़े होते हैं।

सवाल- फाइब्रॉइड के लक्षण क्या हैं?

जवाब- फाइब्रॉइड के लक्षण हर महिला में एक जैसे नहीं होते। कई बार ये धीरे-धीरे बढ़ते हैं और शुरुआत में कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती। लेकिन जैसे-जैसे फाइब्रॉइड का आकार बढ़ता है, शरीर इसके संकेत देने लगता है। नीचे ग्राफिक से फाइब्रॉइड के कुछ कॉमन लक्षणों के बारे में समझिए-

सवाल- डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

जवाब- अगर पेल्विक पेन (पेट के निचले हिस्से में दर्द) लगातार बना रहे, पीरियड्स बहुत ज्यादा या पेनफुल हों, फ्रिक्वेंट पीरियड आए या फिर लगातार कमजोरी महसूस हो, तो डॉक्टर से मिलना जरूरी है। अचानक ज्यादा ब्लीडिंग या तेज पेल्विक पेन हो तो तुरंत मेडिकल हेल्प लें।

सवाल- फाइब्रॉइड के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं?

जवाब- कुछ कंडीशंस में फाइब्रॉइड होने का रिस्क बढ़ जाता है। ये कंडीशन्स हॉर्मोनल बैलेंस और लाइफस्टाइल से जुड़ी होती हैं। अगर किसी महिला में ग्राफिक में दिए गए ये रिस्क फैक्टर्स मौजूद हों, तो यूटेरिन फाइब्रॉइड होने का रिस्क हो सकता है।

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सवाल- क्या फाइब्रॉइड अल्ट्रासाउंड में हमेशा साफ दिखाई देते हैं?

जवाब- ज्यादातर मामलों में फाइब्रॉइड साधारण अल्ट्रासाउंड में दिख जाते हैं। लेकिन कभी-कभी उनका आकार बहुत छोटा होता है या उनकी जगह ऐसी होती है कि वे साफ नजर नहीं आते। ऐसे केस में डॉक्टर ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड या MRI जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं।

सवाल- फाइब्रॉइड के रिस्क को कैसे कम किया जा सकता है?

जवाब- फाइब्रॉइड के रिस्क को कम करने के लिए लाइफस्टाइल और खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। नीचे ग्राफिक में दिए पॉइंट्स को ध्यान से पढ़ें और इसे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करें।

हरी सब्जियों और साबुत अनाज में फाइबर होता है, जो हॉर्मोनल संतुलन में मदद करता है। बेरीज और हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। अलसी और हेल्दी फैट्स शरीर की ओवरऑल हेल्थ को सपोर्ट करते हैं।

फाइब्रॉइड से जुड़े कुछ कॉमन सवाल और जवाब

सवाल- क्या फाइब्रॉइड से एनीमिया हो सकता है? जवाब- हां, बार-बार या बहुत ज्यादा पीरियड्स होने पर एनीमिया हो सकता है। अगर फाइब्रॉइड के साथ एनीमिया के लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से तुरंत बात करें।

सवाल- क्या फाइब्रॉइड कैंसरस होते हैं? जवाब- नहीं, ज्यादातर मामलों में ये नॉन-कैंसरस होते हैं।

सवाल- क्या फाइब्रॉइड दवाओं से खत्म हो जाते हैं? जवाब- दवाएं फाइब्रॉइड को पूरी तरह खत्म नहीं करतीं, लेकिन इनके लक्षणों को कंट्रोल करने और ग्रोथ को धीमा करने में मदद कर सकती हैं।

सवाल- क्या फाइब्रॉइड दोबारा हो सकते हैं? जवाब- हां, कुछ मामलों में इलाज के बाद भी नए फाइब्रॉइड बन सकते हैं। इसलिए नियमित फॉलो-अप जरूरी है।

यूटेरिन फाइब्रॉइड को सही समय पर जांच, बैलेंस लाइफस्टाइल और डॉक्टर की सलाह से बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है।

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फिजिकल हेल्थ- क्या आपको पीरियड्स के समय बुखार आता है:डॉक्टर से जानें क्या है पीरियड फ्लू, किन्हें ज्यादा जोखिम, कैसे करें बचाव

पीरियड साइकल में काफी असहज अनुभव होता है। खासतौर पर उन महिलाओं के लिए अधिक असहज होता है, जिनका मेंस्ट्रुअल साइकल अनियमित रहता है। जिन महिलाओं को हर महीने पीरियड फ्लू होता है, उनके लिए यह अनुभव और भी ज्यादा तकलीफदेह हो सकता है। इसमें हर बार पीरियड्स में फ्लू जैसे लक्षणों का सामना करना पड़ता है। पूरी खबर पढ़ें…

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