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benjamin netanyahu gym video| prostate cancer| iran-israel| नेतन्याहू को तो देखिए, कैंसर को मात दे जिम में बना रहे डोले, ईरान कैसे न खौफ खाए

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Israel PM benjamin netanyahu Gym: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वैसे तो हमेशा ही कुछ न कुछ दिलचस्प चीजें करते रहते हैं लेकिन इस बार उनका जिम से आया वीडियो काफी वायरल हो रहा है. 76 की उम्र में, प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे नेतन्याहू का जिम में पसीना बहाते, सीढ़ियां चढ़ते, नाश्ते में उबले अंडे खाते हुए युवाओं को संदेश काफी कुछ कह रहा है. उन्होंने कहा है कि कसरत करें और कभी हार न मानें. यह वीडियो उनकी रिकवरी और मजबूत इरादे का ईरान को साफ संदेश है.

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का हाल ही में जारी जिम का वीडियो काफी वायरल हो रहा है. 76 साल की उम्र में प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे नेता जिम में डंबल उठा रहे हैं, डोले बना रहे हैं और सीढ़ियां चढ़ रहे हैं. वे साफ-साफ बता रहे हैं कि वे एकदम फिट हैं और दुश्मनों को कोई मौका नहीं देना चाहते. उनके मजबूत इरादे निश्चित ही ईरान की पेशानी पर बल डालने के लिए काफी हैं. AI Image

नेतन्याहू ने इस वीडियो में उबले अंडे खाते हुए युवाओं को संदेश भी दिया है कि कसरत करें और कभी हार न मानें. यह वीडियो उनकी रिकवरी और मजबूत इरादे के अलावा उनके टाइट रूटीन अनुशासन का उदाहरण है. वे नियमित रूप से जिम जाते हैं, वेट ट्रेनिंग और कार्डियो करते हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रोस्टेट कैंसर की सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी के बावजूद उनका स्वास्थ्य सामान्य है.जिस कैंसर के होने पर लोग बेड पकड़ लेते हैं, नेतन्याहू का जिम में पसीना बहाना वाकई लोगों को प्रेरित करने वाला है.

नेतन्याहू ने इस वीडियो में उबले अंडे खाते हुए युवाओं को संदेश भी दिया है कि कसरत करें और कभी हार न मानें. यह वीडियो उनकी रिकवरी और मजबूत इरादे के अलावा उनके टाइट रूटीन अनुशासन का उदाहरण है. वे नियमित रूप से जिम जाते हैं, वेट ट्रेनिंग और कार्डियो करते हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रोस्टेट कैंसर की सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी के बावजूद उनका स्वास्थ्य सामान्य है.जिस कैंसर के होने पर लोग बेड पकड़ लेते हैं, नेतन्याहू का जिम में पसीना बहाना वाकई लोगों को प्रेरित करने वाला है.

डॉक्टरों की मानें तो प्रोस्टेट कैंसर से उबरने वाले मरीजों के लिए व्यायाम बेहद जरूरी और फायदेमंद होता है. नियमित एक्सरसाइज मसल स्ट्रेंथ बढ़ाती है, थकान कम करती है और हड्डियों को मजबूत बनाती है. यह दिल की हेल्थ सुधारता है और वजन कंट्रोल रखता है. ADT (हॉर्मोन थेरेपी) के साइड इफेक्ट्स जैसे मसल लॉस और ऑस्टियोपोरोसिस को भी व्यायाम से रोका जा सकता है. कई स्टडी में सक्रिय पुरुषों में रिकरेंस का खतरा कम पाया गया है.

डॉक्टरों की मानें तो प्रोस्टेट कैंसर से उबरने वाले मरीजों के लिए व्यायाम बेहद जरूरी और फायदेमंद होता है. नियमित एक्सरसाइज मसल स्ट्रेंथ बढ़ाती है, थकान कम करती है और हड्डियों को मजबूत बनाती है. यह दिल की हेल्थ सुधारता है और वजन कंट्रोल रखता है. ADT (हॉर्मोन थेरेपी) के साइड इफेक्ट्स जैसे मसल लॉस और ऑस्टियोपोरोसिस को भी व्यायाम से रोका जा सकता है. कई स्टडी में सक्रिय पुरुषों में रिकरेंस का खतरा कम पाया गया है.

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एम्स नई दिल्ली की ही कई स्टडीज बताती हैं कि व्यायाम के फायदे प्रोस्टेट ही नहीं बल्कि कई कैंसर सर्वाइवर्स में स्पष्ट हैं. मॉडरेट एक्सरसाइज (सप्ताह में 150-300 मिनट) कैंसर से मौत का खतरा 25-35 फीसदी तक कम कर सकती है. एक्सरसाइज से मूड बेहतर करता है, नींद सुधरती है और क्वालिटी लाइफ बढ़ती है. नेतन्याहू जैसा रूटीन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के साथ कार्डियो रिकवरी में मददगार साबित होता है.

एम्स नई दिल्ली की ही कई स्टडीज बताती हैं कि व्यायाम के फायदे प्रोस्टेट ही नहीं बल्कि कई कैंसर सर्वाइवर्स में स्पष्ट हैं. मॉडरेट एक्सरसाइज (सप्ताह में 150-300 मिनट) कैंसर से मौत का खतरा 25-35 फीसदी तक कम कर सकती है. एक्सरसाइज से मूड बेहतर करता है, नींद सुधरती है और क्वालिटी लाइफ बढ़ती है. नेतन्याहू जैसा रूटीन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के साथ कार्डियो रिकवरी में मददगार साबित होता है.

हालांकि,एक्सपर्ट कहते हैं कि प्रोस्टेट कैंसर में व्यायाम करते समय सावधानी जरूरी है. डॉक्टर कहते हैं कि हड्डी मेटास्टेसिस वाले मरीजों को हाई इंपैक्ट एक्सरसाइज से बचना चाहिए क्योंकि इससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है. थेरेपी के दौरान थकान या दर्द हो तो व्यायाम की तीव्रता कम रखनी चाहिए. हमेशा डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से ही व्यायाम शुरू करें, जैसा कि नेतन्याहू करते हैं.

हालांकि,एक्सपर्ट कहते हैं कि प्रोस्टेट कैंसर में व्यायाम करते समय सावधानी जरूरी है. डॉक्टर कहते हैं कि हड्डी मेटास्टेसिस वाले मरीजों को हाई इंपैक्ट एक्सरसाइज से बचना चाहिए क्योंकि इससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है. थेरेपी के दौरान थकान या दर्द हो तो व्यायाम की तीव्रता कम रखनी चाहिए. हमेशा डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से ही व्यायाम शुरू करें, जैसा कि नेतन्याहू करते हैं.

हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो प्रोस्टेट कैंसर मरीजों को सप्ताह में कम से कम 2 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और रोजाना मॉडरेट एरोबिक एक्टिविटी करनी चाहिए. वार्म-अप और कूल-डाउन जरूर शामिल करें. नेतन्याहू का संदेश प्रेरणादायक है कि उम्र या बीमारी के बावजूद पॉजिटिव सोच और मेहनत से बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है. नियमित चेकअप के साथ स्वस्थ आदतें अपनाए रखने से बेहतर हेल्थ बनी रहती है.

हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो प्रोस्टेट कैंसर मरीजों को सप्ताह में कम से कम 2 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और रोजाना मॉडरेट एरोबिक एक्टिविटी करनी चाहिए. वार्म-अप और कूल-डाउन जरूर शामिल करें. नेतन्याहू का संदेश प्रेरणादायक है कि उम्र या बीमारी के बावजूद पॉजिटिव सोच और मेहनत से बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है. नियमित चेकअप के साथ स्वस्थ आदतें अपनाए रखने से बेहतर हेल्थ बनी रहती है.

ऐसे में नेतन्याहू का यह वीडियो सिर्फ फिटनेस नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती का भी प्रतीक है जो निश्चित रूप से ईरान और उनके प्रतिद्वंद्वियों को उनके फौलादी इरादों का संकेत दे रहा है. नेतन्याहू का प्रोस्टेट कैंसर जैसी बीमारी से लड़कर वापसी करना लाखों लोगों को प्रेरित करता है. डॉक्टरों का मानना है कि व्यायाम दवा की तरह काम करता है, फायदे ज्यादा, नुकसान कम, बशर्ते सही तरीके से किया जाए. स्वस्थ रहने के लिए अनुशासन और डॉक्टरी सलाह सबसे जरूरी है.

ऐसे में नेतन्याहू का यह वीडियो सिर्फ फिटनेस नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती का भी प्रतीक है जो निश्चित रूप से ईरान और उनके प्रतिद्वंद्वियों को उनके फौलादी इरादों का संकेत दे रहा है. नेतन्याहू का प्रोस्टेट कैंसर जैसी बीमारी से लड़कर वापसी करना लाखों लोगों को प्रेरित करता है. डॉक्टरों का मानना है कि व्यायाम दवा की तरह काम करता है, फायदे ज्यादा, नुकसान कम, बशर्ते सही तरीके से किया जाए. स्वस्थ रहने के लिए अनुशासन और डॉक्टरी सलाह सबसे जरूरी है.

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इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का हाल ही में जारी जिम का वीडियो काफी वायरल हो रहा है. 76 साल की उम्र में प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे नेता जिम में डंबल उठा रहे हैं, डोले बना रहे हैं और सीढ़ियां चढ़ रहे हैं. वे साफ-साफ बता रहे हैं कि वे एकदम फिट हैं और दुश्मनों को कोई मौका नहीं देना चाहते. उनके मजबूत इरादे निश्चित ही ईरान की पेशानी पर बल डालने के लिए काफी हैं. AI Image

नेतन्याहू ने इस वीडियो में उबले अंडे खाते हुए युवाओं को संदेश भी दिया है कि कसरत करें और कभी हार न मानें. यह वीडियो उनकी रिकवरी और मजबूत इरादे के अलावा उनके टाइट रूटीन अनुशासन का उदाहरण है. वे नियमित रूप से जिम जाते हैं, वेट ट्रेनिंग और कार्डियो करते हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रोस्टेट कैंसर की सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी के बावजूद उनका स्वास्थ्य सामान्य है.जिस कैंसर के होने पर लोग बेड पकड़ लेते हैं, नेतन्याहू का जिम में पसीना बहाना वाकई लोगों को प्रेरित करने वाला है.

नेतन्याहू ने इस वीडियो में उबले अंडे खाते हुए युवाओं को संदेश भी दिया है कि कसरत करें और कभी हार न मानें. यह वीडियो उनकी रिकवरी और मजबूत इरादे के अलावा उनके टाइट रूटीन अनुशासन का उदाहरण है. वे नियमित रूप से जिम जाते हैं, वेट ट्रेनिंग और कार्डियो करते हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रोस्टेट कैंसर की सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी के बावजूद उनका स्वास्थ्य सामान्य है.जिस कैंसर के होने पर लोग बेड पकड़ लेते हैं, नेतन्याहू का जिम में पसीना बहाना वाकई लोगों को प्रेरित करने वाला है.

डॉक्टरों की मानें तो प्रोस्टेट कैंसर से उबरने वाले मरीजों के लिए व्यायाम बेहद जरूरी और फायदेमंद होता है. नियमित एक्सरसाइज मसल स्ट्रेंथ बढ़ाती है, थकान कम करती है और हड्डियों को मजबूत बनाती है. यह दिल की हेल्थ सुधारता है और वजन कंट्रोल रखता है. ADT (हॉर्मोन थेरेपी) के साइड इफेक्ट्स जैसे मसल लॉस और ऑस्टियोपोरोसिस को भी व्यायाम से रोका जा सकता है. कई स्टडी में सक्रिय पुरुषों में रिकरेंस का खतरा कम पाया गया है.

डॉक्टरों की मानें तो प्रोस्टेट कैंसर से उबरने वाले मरीजों के लिए व्यायाम बेहद जरूरी और फायदेमंद होता है. नियमित एक्सरसाइज मसल स्ट्रेंथ बढ़ाती है, थकान कम करती है और हड्डियों को मजबूत बनाती है. यह दिल की हेल्थ सुधारता है और वजन कंट्रोल रखता है. ADT (हॉर्मोन थेरेपी) के साइड इफेक्ट्स जैसे मसल लॉस और ऑस्टियोपोरोसिस को भी व्यायाम से रोका जा सकता है. कई स्टडी में सक्रिय पुरुषों में रिकरेंस का खतरा कम पाया गया है.

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हालांकि,एक्सपर्ट कहते हैं कि प्रोस्टेट कैंसर में व्यायाम करते समय सावधानी जरूरी है. डॉक्टर कहते हैं कि हड्डी मेटास्टेसिस वाले मरीजों को हाई इंपैक्ट एक्सरसाइज से बचना चाहिए क्योंकि इससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है. थेरेपी के दौरान थकान या दर्द हो तो व्यायाम की तीव्रता कम रखनी चाहिए. हमेशा डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से ही व्यायाम शुरू करें, जैसा कि नेतन्याहू करते हैं.

हालांकि,एक्सपर्ट कहते हैं कि प्रोस्टेट कैंसर में व्यायाम करते समय सावधानी जरूरी है. डॉक्टर कहते हैं कि हड्डी मेटास्टेसिस वाले मरीजों को हाई इंपैक्ट एक्सरसाइज से बचना चाहिए क्योंकि इससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है. थेरेपी के दौरान थकान या दर्द हो तो व्यायाम की तीव्रता कम रखनी चाहिए. हमेशा डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से ही व्यायाम शुरू करें, जैसा कि नेतन्याहू करते हैं.

हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो प्रोस्टेट कैंसर मरीजों को सप्ताह में कम से कम 2 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और रोजाना मॉडरेट एरोबिक एक्टिविटी करनी चाहिए. वार्म-अप और कूल-डाउन जरूर शामिल करें. नेतन्याहू का संदेश प्रेरणादायक है कि उम्र या बीमारी के बावजूद पॉजिटिव सोच और मेहनत से बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है. नियमित चेकअप के साथ स्वस्थ आदतें अपनाए रखने से बेहतर हेल्थ बनी रहती है.

हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो प्रोस्टेट कैंसर मरीजों को सप्ताह में कम से कम 2 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और रोजाना मॉडरेट एरोबिक एक्टिविटी करनी चाहिए. वार्म-अप और कूल-डाउन जरूर शामिल करें. नेतन्याहू का संदेश प्रेरणादायक है कि उम्र या बीमारी के बावजूद पॉजिटिव सोच और मेहनत से बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है. नियमित चेकअप के साथ स्वस्थ आदतें अपनाए रखने से बेहतर हेल्थ बनी रहती है.

ऐसे में नेतन्याहू का यह वीडियो सिर्फ फिटनेस नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती का भी प्रतीक है जो निश्चित रूप से ईरान और उनके प्रतिद्वंद्वियों को उनके फौलादी इरादों का संकेत दे रहा है. नेतन्याहू का प्रोस्टेट कैंसर जैसी बीमारी से लड़कर वापसी करना लाखों लोगों को प्रेरित करता है. डॉक्टरों का मानना है कि व्यायाम दवा की तरह काम करता है, फायदे ज्यादा, नुकसान कम, बशर्ते सही तरीके से किया जाए. स्वस्थ रहने के लिए अनुशासन और डॉक्टरी सलाह सबसे जरूरी है.

ऐसे में नेतन्याहू का यह वीडियो सिर्फ फिटनेस नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती का भी प्रतीक है जो निश्चित रूप से ईरान और उनके प्रतिद्वंद्वियों को उनके फौलादी इरादों का संकेत दे रहा है. नेतन्याहू का प्रोस्टेट कैंसर जैसी बीमारी से लड़कर वापसी करना लाखों लोगों को प्रेरित करता है. डॉक्टरों का मानना है कि व्यायाम दवा की तरह काम करता है, फायदे ज्यादा, नुकसान कम, बशर्ते सही तरीके से किया जाए. स्वस्थ रहने के लिए अनुशासन और डॉक्टरी सलाह सबसे जरूरी है.

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