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गर्मी के मौसम में बुजुर्गों की कैसे करें देखभाल, शिवपुरी के एक्सपर्ट डॉक्टर की खास सलाह

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शिवपुरी. मध्य प्रदेश के चंबल अंचल में इन दिनों तापमान तेजी से बढ़ रहा है. तेज धूप, लू और उमस भरा मौसम खासकर बुजुर्गों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम लेकर आता है. ऐसे मौसम में जरा-सी लापरवाही डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और अन्य जटिलताओं का कारण बन सकती है. इस विषय पर जिला अस्पताल शिवपुरी के सिविल सर्जन डॉ बीएल यादव ने लोकल 18 के साथ विशेष जानकारी साझा की और बताया कि गर्मी में बुजुर्गों की देखभाल किन सरल लेकिन जरूरी तरीकों से की जा सकती है. डॉ यादव बताते हैं कि सामान्यतः मानव शरीर का तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस रहता है. जब बाहरी तापमान बहुत बढ़ जाता है, तो बुजुर्गों का शरीर उसे संतुलित करने में उतनी तेजी से सक्षम नहीं रह पाता. उम्र बढ़ने के साथ उनकी प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) और शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कमजोर हो जाती है. यही कारण है कि तेज गर्मी में बुजुर्ग जल्दी थक जाते हैं, चक्कर आने लगते हैं, घबराहट होती है और कई बार अचानक बेहोशी जैसी स्थिति भी बन जाती है.

वह आगे बताते हैं कि सबसे बड़ा खतरा डिहाइड्रेशन का होता है. बुजुर्ग अक्सर प्यास कम लगने के कारण पर्याप्त पानी नहीं पीते, जिससे शरीर में पानी और जरूरी लवणों की कमी हो जाती है. ऐसी स्थिति में शरीर के अंगों पर असर पड़ने लगता है और हालत तेजी से बिगड़ सकती है.

बचाव के लिए क्या करें?
डॉ बीएल यादव के अनुसार, गर्मी के मौसम में बुजुर्गों को नियमित अंतराल पर तरल पदार्थ देते रहना चाहिए, भले ही उन्हें प्यास न लगे. सादा पानी, नींबू-नमक-शक्कर की शिकंजी, छाछ और सबसे महत्वपूर्ण ओआरएस का घोल बहुत फायदेमंद होता है. ओआरएस का एक पैकेट एक लीटर साफ पानी में घोलकर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पिलाते रहें. इससे शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बना रहता है. यदि बुजुर्ग किसी दूरस्थ गांव या जंगल क्षेत्र में रहते हों और तुरंत अस्पताल पहुंचना संभव न हो, तो प्राथमिक उपचार के रूप में उन्हें ठंडी, हवादार जगह पर लिटाएं या बैठाएं. शरीर पर सूती, हल्के कपड़े रखें. सिर, हाथ और पैरों जैसे खुले हिस्सों को ढककर रखें ताकि शरीर का तापमान नियंत्रित रहे. पंखा, कूलर या प्राकृतिक हवा का इंतजाम करें.

कपड़े और दिनचर्या पर ध्यान
गर्मी में बुजुर्गों को सिंथेटिक कपड़ों के बजाय केवल ढीले और सूती कपड़े पहनने चाहिए. दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच उन्हें बाहर निकलने से बचना चाहिए. यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो सिर पर गमछा या टोपी रखें और पानी साथ लेकर चलें.

लक्षण दिखें तो तुरंत सावधानी
यदि किसी को तेज पसीना, चक्कर, सिरदर्द, उल्टी, घबराहट या कमजोरी महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें. यह हीट एग्जॉशन या हीट स्ट्रोक के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. तुरंत तरल पदार्थ दें, ठंडे स्थान पर रखें और जरूरत पड़ने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें.

डॉ बीएल यादव ने कहा कि थोड़ी सी सतर्कता और समय पर देखभाल से गर्मी के इस खतरनाक मौसम में बुजुर्गों को सुरक्षित रखा जा सकता है. परिवार के सदस्य यदि नियमित ध्यान रखें, तो बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है.

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शिवपुरी. मध्य प्रदेश के चंबल अंचल में इन दिनों तापमान तेजी से बढ़ रहा है. तेज धूप, लू और उमस भरा मौसम खासकर बुजुर्गों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम लेकर आता है. ऐसे मौसम में जरा-सी लापरवाही डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और अन्य जटिलताओं का कारण बन सकती है. इस विषय पर जिला अस्पताल शिवपुरी के सिविल सर्जन डॉ बीएल यादव ने लोकल 18 के साथ विशेष जानकारी साझा की और बताया कि गर्मी में बुजुर्गों की देखभाल किन सरल लेकिन जरूरी तरीकों से की जा सकती है. डॉ यादव बताते हैं कि सामान्यतः मानव शरीर का तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस रहता है. जब बाहरी तापमान बहुत बढ़ जाता है, तो बुजुर्गों का शरीर उसे संतुलित करने में उतनी तेजी से सक्षम नहीं रह पाता. उम्र बढ़ने के साथ उनकी प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) और शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कमजोर हो जाती है. यही कारण है कि तेज गर्मी में बुजुर्ग जल्दी थक जाते हैं, चक्कर आने लगते हैं, घबराहट होती है और कई बार अचानक बेहोशी जैसी स्थिति भी बन जाती है.

वह आगे बताते हैं कि सबसे बड़ा खतरा डिहाइड्रेशन का होता है. बुजुर्ग अक्सर प्यास कम लगने के कारण पर्याप्त पानी नहीं पीते, जिससे शरीर में पानी और जरूरी लवणों की कमी हो जाती है. ऐसी स्थिति में शरीर के अंगों पर असर पड़ने लगता है और हालत तेजी से बिगड़ सकती है.

बचाव के लिए क्या करें?
डॉ बीएल यादव के अनुसार, गर्मी के मौसम में बुजुर्गों को नियमित अंतराल पर तरल पदार्थ देते रहना चाहिए, भले ही उन्हें प्यास न लगे. सादा पानी, नींबू-नमक-शक्कर की शिकंजी, छाछ और सबसे महत्वपूर्ण ओआरएस का घोल बहुत फायदेमंद होता है. ओआरएस का एक पैकेट एक लीटर साफ पानी में घोलकर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पिलाते रहें. इससे शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बना रहता है. यदि बुजुर्ग किसी दूरस्थ गांव या जंगल क्षेत्र में रहते हों और तुरंत अस्पताल पहुंचना संभव न हो, तो प्राथमिक उपचार के रूप में उन्हें ठंडी, हवादार जगह पर लिटाएं या बैठाएं. शरीर पर सूती, हल्के कपड़े रखें. सिर, हाथ और पैरों जैसे खुले हिस्सों को ढककर रखें ताकि शरीर का तापमान नियंत्रित रहे. पंखा, कूलर या प्राकृतिक हवा का इंतजाम करें.

कपड़े और दिनचर्या पर ध्यान
गर्मी में बुजुर्गों को सिंथेटिक कपड़ों के बजाय केवल ढीले और सूती कपड़े पहनने चाहिए. दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच उन्हें बाहर निकलने से बचना चाहिए. यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो सिर पर गमछा या टोपी रखें और पानी साथ लेकर चलें.

लक्षण दिखें तो तुरंत सावधानी
यदि किसी को तेज पसीना, चक्कर, सिरदर्द, उल्टी, घबराहट या कमजोरी महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें. यह हीट एग्जॉशन या हीट स्ट्रोक के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. तुरंत तरल पदार्थ दें, ठंडे स्थान पर रखें और जरूरत पड़ने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें.

डॉ बीएल यादव ने कहा कि थोड़ी सी सतर्कता और समय पर देखभाल से गर्मी के इस खतरनाक मौसम में बुजुर्गों को सुरक्षित रखा जा सकता है. परिवार के सदस्य यदि नियमित ध्यान रखें, तो बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है.

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