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Kissing Disease What Is; Mononucleosis EBV Virus Symptoms

Kissing Disease What Is; Mononucleosis EBV Virus Symptoms

19 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा

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दोस्त के कप से सिप या प्लेट से बाइट लेना बहुत कॉमन है। लेकिन यह छोटी-सी आदत एक वायरल इन्फेक्शन की वजह बन सकती है। इससे ‘किसिंग डिजीज’ हो सकती है।

यह ‘एप्सटीन बार वायरस’ (EBV) के कारण होती है। यह वायरस किस करने, छींकने, खांसने या खाना-पीना शेयर करने से फैल सकता है।

‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ के मुताबिक, दुनिया की 90% से ज्यादा आबादी कभी-न-कभी EBV से संक्रमित हो चुकी है।

इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में जानेंगे कि-

  • किसिंग डिजीज क्या है?
  • यह क्यों होती है?
  • इसके क्या लक्षण होते हैं?

एक्सपर्ट: डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर

सवाल- हाल ही में हुई एक स्टडी बताती है कि किस (चुंबन) करने से मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) का जोखिम बढ़ता है। इस स्टडी को डिटेल में समझाएं।

जवाब- हां, मोटे तौर पर ये बात ठीक है। लेकिन इसे थोड़ा विस्तार से समझें–

  • इस स्टडी में पाया गया है कि जिन लोगों को जीवन में कभी ‘इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लियोसिस’ (mono) बीमारी हुई थी, उनमें MS का जोखिम 3 गुना ज्यादा पाया गया।
  • Mono एक ऐसी बीमारी है, जो EBV वायरस से फैलती है।
  • ये वायरस हमारे मुंह के सलाइवा में होता है और किसी इन्फेक्टेड व्यक्ति को किस करने यानी चूमने से फैल सकता है।
  • mono को ‘किसिंग डिजीज’ भी कहते हैं।

स्टडी की डिटेल

साल- 2026

संस्थान- मायो क्लिनिक, अमेरिका

सैंपल साइज- 19,000

कहां पब्लिश हुई- न्यूरोलॉजी ओपेन एक्सेस

स्टडी की फाइंडिंग- जिन लोगों को इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लियोसिस (mono) हुआ था, उनमें आगे चलकर मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) का जोखिम लगभग 3 गुना ज्यादा पाया गया।

mono से कभी इन्फेक्ट हुए लोगों में MS का रिस्क- 0.17%

mono न हुए लोगों में रिस्क- 0.07%

सवाल- किसिंग डिजीज क्या है?

जवाब- किसिंग डिजीज एक वायरल इन्फेक्शन है, जिसे मेडिसिन लैंग्वेज में ‘इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लियोसिस’ कहा जाता है। यह वायरस आमतौर पर इन्फेक्टेड व्यक्ति की लार (सलाइवा) से फैलता है। यह बॉडी फ्लूइड से भी फैल सकता है। सभी वजह देखिए-

  • किस करने से
  • ब्लड ट्रांसफ्यूजन से
  • ऑर्गन ट्रांसप्लांट से
  • सेक्सुअल कॉन्टैक्ट से
  • ग्लास या बोतल शेयर करने से
  • छींक-खांसी के ड्रॉपलेट्स से

एक बार इन्फेक्शन होने के बाद यह वायरस शरीर में लाइफटाइम ‘डॉर्मेंट’ (छिपकर) रह सकता है।

सवाल- किसिंग डिजीज कैसे होती है?

जवाब- किसिंग डिजीज 90% से ज्यादा मामलों में ‘एप्सटीन बार वायरस’ की वजह से होती है। हालांकि इसके अलावा भी कुछ दूसरे वायरस और इन्फेक्शन इस बीमारी को ट्रिगर कर सकते हैं। जैसे-

हेपेटाइटिस A- गंदे पानी या दूषित खाने से होने वाला लिवर का इन्फेक्शन।

हेपेटाइटिस B- ब्लड या बॉडी फ्लूइड से फैलने वाला गंभीर लिवर इन्फेक्शन।

हेपेटाइटिस C- धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाने वाला इन्फेक्शन, जो मुख्य रूप से ब्लड से फैलता है।

HIV- यह वायरस इम्यूनिटी कमजोर करता है, एड्स की वजह बन सकता है।

रूबेला- जर्मन खसरा, इसमें हल्का बुखार और लाल चकत्ते होते हैं।

एडेनोवायरस- सर्दी, खांसी वाला कॉमन वायरस है।

सवाल- किस करने से मोनो के अलावा और किन बीमारियों का रिस्क बढ़ता है?

जवाब- किसिंग से कई अन्य इन्फेक्शन का रिस्क भी बढ़ सकता है, जैसे-

ओरल हर्पीज

  • इसमें होठों पर छाले पड़ते हैं।
  • अगर छाले हैं, तो ज्यादा रिस्क है।
  • स्ट्रैप थ्रोट (गले का बैक्टीरियल इन्फेक्शन)
  • गले में दर्द, बुखार हाेता है।
  • बैक्टीरिया सलाइवा से ट्रांसफर हो सकता है।

इन्फ्लुएंजा (फ्लू)

  • सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण दिखते हैं।
  • ड्रॉपलेट्स और लार से आसानी से फैलता है।

सवाल- किन लोगों को किसिंग डिजीज का ज्यादा खतरा रहता है?

जवाब- कुछ लोगों को इसका रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- किसिंग डिजीज के लक्षण क्या होते हैं?

जवाब- इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। वायरस के संपर्क में आने के करीब 4 से 6 हफ्ते बाद इसके लक्षण दिखाई देते हैं। ये 4 हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक बने रह सकते हैं। ग्राफिक में इसके लक्षण देखिए-

सवाल- किसिंग डिजीज की पहचान कैसे होती है?

जवाब- डॉक्टर लक्षणों को देखकर बीमारी डायग्नोज करते हैं। पॉइंटर्स में देखिए-

खासतौर पर डॉक्टर ये चेक करते हैं-

  • गर्दन में सूजन
  • लिम्फ नोड्स (गांठें)
  • तिल्ली (स्पलीन)

इसके बाद करते हैं ये टेस्ट

  • शुरुआती लक्षण दिखने पर डॉक्टर ब्लड टेस्ट करते हैं, ताकि ये पता चल सके कि शरीर एप्सटीन बार वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बना रहा है या नहीं।
  • डॉक्टर ब्लड में व्हाइट ब्लड सेल्स, खासकर लिम्फोसाइट्स की संख्या भी देखते हैं। अगर ये ज्यादा हैं तो किसी इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है।

सवाल- किसिंग डिजीज का इलाज क्या है?

जवाब- इसमें आमतौर पर कोई दवा नहीं दी जाती है। आराम करने, पर्याप्त पानी पीने और सही देखभाल से ही आराम मिल जाता है। इसके लिए अलग से कोई दवा नहीं बनी है। समस्या होने पर डॉक्टर ये सजेशन दे सकते हैं-

गले में दर्द होने पर

  • नमक वाले गुनगुने पानी से गरारे करें और थ्रोट लोजेंज (चूसने वाली गोली) लें।

तिल्ली बढ़ने पर

  • ऐसे में ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी से इसके फटने (रप्चर) का रिस्क बढ़ जाता है।
  • बीमारी के दौरान और ठीक होने के बाद करीब 4 हफ्ते तक भारी एक्सरसाइज और खेलकूद से बचना चाहिए।

सवाल- किसिंग डिजीज से कैसे बचें?

जवाब- यह वायरस आमतौर पर लार (सलाइवा) के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे में जाता है। इसलिए साफ-सफाई बरतें और खाने-पीने की चीजें शेयर न करें। ग्राफिक में बचाव के सभी तरीके देखिए-

सवाल- क्या किसिंग डिजीज जानलेवा हो सकती है?

जवाब- यह आमतौर पर जानलेवा नहीं होती, लेकिन लापरवाही बरतने पर कॉम्प्लिकेशंस हो सकते हैं।

रेयर केस में खतरनाक हो सकती है

  • गले और टॉन्सिल्स की ज्यादा सूजन से सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
  • जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है, उन्हें कॉम्पिलिकेशंस का रिस्क ज्यादा होता है।

…………………

ये खबर भी पढ़ें…

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यह ‘एप्सटीन बार वायरस’ (EBV) के कारण होती है। यह वायरस किस करने, छींकने, खांसने या खाना-पीना शेयर करने से फैल सकता है।

‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ के मुताबिक, दुनिया की 90% से ज्यादा आबादी कभी-न-कभी EBV से संक्रमित हो चुकी है।

इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में जानेंगे कि-

  • किसिंग डिजीज क्या है?
  • यह क्यों होती है?
  • इसके क्या लक्षण होते हैं?

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सवाल- हाल ही में हुई एक स्टडी बताती है कि किस (चुंबन) करने से मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) का जोखिम बढ़ता है। इस स्टडी को डिटेल में समझाएं।

जवाब- हां, मोटे तौर पर ये बात ठीक है। लेकिन इसे थोड़ा विस्तार से समझें–

  • इस स्टडी में पाया गया है कि जिन लोगों को जीवन में कभी ‘इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लियोसिस’ (mono) बीमारी हुई थी, उनमें MS का जोखिम 3 गुना ज्यादा पाया गया।
  • Mono एक ऐसी बीमारी है, जो EBV वायरस से फैलती है।
  • ये वायरस हमारे मुंह के सलाइवा में होता है और किसी इन्फेक्टेड व्यक्ति को किस करने यानी चूमने से फैल सकता है।
  • mono को ‘किसिंग डिजीज’ भी कहते हैं।

स्टडी की डिटेल

साल- 2026

संस्थान- मायो क्लिनिक, अमेरिका

सैंपल साइज- 19,000

कहां पब्लिश हुई- न्यूरोलॉजी ओपेन एक्सेस

स्टडी की फाइंडिंग- जिन लोगों को इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लियोसिस (mono) हुआ था, उनमें आगे चलकर मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) का जोखिम लगभग 3 गुना ज्यादा पाया गया।

mono से कभी इन्फेक्ट हुए लोगों में MS का रिस्क- 0.17%

mono न हुए लोगों में रिस्क- 0.07%

सवाल- किसिंग डिजीज क्या है?

जवाब- किसिंग डिजीज एक वायरल इन्फेक्शन है, जिसे मेडिसिन लैंग्वेज में ‘इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लियोसिस’ कहा जाता है। यह वायरस आमतौर पर इन्फेक्टेड व्यक्ति की लार (सलाइवा) से फैलता है। यह बॉडी फ्लूइड से भी फैल सकता है। सभी वजह देखिए-

  • किस करने से
  • ब्लड ट्रांसफ्यूजन से
  • ऑर्गन ट्रांसप्लांट से
  • सेक्सुअल कॉन्टैक्ट से
  • ग्लास या बोतल शेयर करने से
  • छींक-खांसी के ड्रॉपलेट्स से

एक बार इन्फेक्शन होने के बाद यह वायरस शरीर में लाइफटाइम ‘डॉर्मेंट’ (छिपकर) रह सकता है।

सवाल- किसिंग डिजीज कैसे होती है?

जवाब- किसिंग डिजीज 90% से ज्यादा मामलों में ‘एप्सटीन बार वायरस’ की वजह से होती है। हालांकि इसके अलावा भी कुछ दूसरे वायरस और इन्फेक्शन इस बीमारी को ट्रिगर कर सकते हैं। जैसे-

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HIV- यह वायरस इम्यूनिटी कमजोर करता है, एड्स की वजह बन सकता है।

रूबेला- जर्मन खसरा, इसमें हल्का बुखार और लाल चकत्ते होते हैं।

एडेनोवायरस- सर्दी, खांसी वाला कॉमन वायरस है।

सवाल- किस करने से मोनो के अलावा और किन बीमारियों का रिस्क बढ़ता है?

जवाब- किसिंग से कई अन्य इन्फेक्शन का रिस्क भी बढ़ सकता है, जैसे-

ओरल हर्पीज

  • इसमें होठों पर छाले पड़ते हैं।
  • अगर छाले हैं, तो ज्यादा रिस्क है।
  • स्ट्रैप थ्रोट (गले का बैक्टीरियल इन्फेक्शन)
  • गले में दर्द, बुखार हाेता है।
  • बैक्टीरिया सलाइवा से ट्रांसफर हो सकता है।

इन्फ्लुएंजा (फ्लू)

  • सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण दिखते हैं।
  • ड्रॉपलेट्स और लार से आसानी से फैलता है।

सवाल- किन लोगों को किसिंग डिजीज का ज्यादा खतरा रहता है?

जवाब- कुछ लोगों को इसका रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- किसिंग डिजीज के लक्षण क्या होते हैं?

जवाब- इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। वायरस के संपर्क में आने के करीब 4 से 6 हफ्ते बाद इसके लक्षण दिखाई देते हैं। ये 4 हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक बने रह सकते हैं। ग्राफिक में इसके लक्षण देखिए-

सवाल- किसिंग डिजीज की पहचान कैसे होती है?

जवाब- डॉक्टर लक्षणों को देखकर बीमारी डायग्नोज करते हैं। पॉइंटर्स में देखिए-

खासतौर पर डॉक्टर ये चेक करते हैं-

  • गर्दन में सूजन
  • लिम्फ नोड्स (गांठें)
  • तिल्ली (स्पलीन)

इसके बाद करते हैं ये टेस्ट

  • शुरुआती लक्षण दिखने पर डॉक्टर ब्लड टेस्ट करते हैं, ताकि ये पता चल सके कि शरीर एप्सटीन बार वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बना रहा है या नहीं।
  • डॉक्टर ब्लड में व्हाइट ब्लड सेल्स, खासकर लिम्फोसाइट्स की संख्या भी देखते हैं। अगर ये ज्यादा हैं तो किसी इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है।

सवाल- किसिंग डिजीज का इलाज क्या है?

जवाब- इसमें आमतौर पर कोई दवा नहीं दी जाती है। आराम करने, पर्याप्त पानी पीने और सही देखभाल से ही आराम मिल जाता है। इसके लिए अलग से कोई दवा नहीं बनी है। समस्या होने पर डॉक्टर ये सजेशन दे सकते हैं-

गले में दर्द होने पर

  • नमक वाले गुनगुने पानी से गरारे करें और थ्रोट लोजेंज (चूसने वाली गोली) लें।

तिल्ली बढ़ने पर

  • ऐसे में ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी से इसके फटने (रप्चर) का रिस्क बढ़ जाता है।
  • बीमारी के दौरान और ठीक होने के बाद करीब 4 हफ्ते तक भारी एक्सरसाइज और खेलकूद से बचना चाहिए।

सवाल- किसिंग डिजीज से कैसे बचें?

जवाब- यह वायरस आमतौर पर लार (सलाइवा) के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे में जाता है। इसलिए साफ-सफाई बरतें और खाने-पीने की चीजें शेयर न करें। ग्राफिक में बचाव के सभी तरीके देखिए-

सवाल- क्या किसिंग डिजीज जानलेवा हो सकती है?

जवाब- यह आमतौर पर जानलेवा नहीं होती, लेकिन लापरवाही बरतने पर कॉम्प्लिकेशंस हो सकते हैं।

रेयर केस में खतरनाक हो सकती है

  • गले और टॉन्सिल्स की ज्यादा सूजन से सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
  • जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है, उन्हें कॉम्पिलिकेशंस का रिस्क ज्यादा होता है।

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