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क्या है हंता वायरस जिसने ली 3 लोगों की जान? जानें इस घातक वायरस के लक्षण और बचाव से जुड़ी जानकारी

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Hantavirus Outbreak Symptoms Causes : दुनिया अभी महामारियों के दौर से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई है कि एक और वायरस ‘हंता वायरस’ (Hantavirus) ने दस्तक दे दी है. हाल ही में अटलांटिक महासागर में एक क्रूज शिप पर इस वायरस के कारण 3 लोगों की मौत की खबर ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को अलर्ट कर दिया है. यह वायरस चूहों से फैलता है और इसकी मृत्यु दर काफी अधिक है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया ‘डिजीज आउटब्रेक न्यूज’ और विशेषज्ञों के अनुसार, अर्जेंटीना से दक्षिण अफ्रीका जा रहे क्रूज जहाज ‘MV Hondius’ पर यह संक्रमण फैला, जिसमें 3 यात्रियों की जान चली गई. तो चलिए जानते हैं कि यह वायरस क्‍या है, कितना खतरनाक है और बचाव का क्‍या तरीका है.

 हंता वायरस असल में क्या है?
जवाब: हंता वायरस विषाणुओं का एक परिवार है जो मुख्य रूप से चूहों (Rodents) के जरिए फैलता है. यह कोई नया वायरस नहीं है, लेकिन इसकी घातकता इसे डरावना बनाती है. यह इंसान के फेफड़ों (HPS) या किडनी (HFRS) पर सीधा हमला करता है. फेफड़ों में संक्रमण होने पर सांस लेना लगभग नामुमकिन हो जाता है, जिससे मरीज की मौत हो सकती है.

यह चूहों से इंसानों तक कैसे पहुँचता है?
जवाब:
यह वायरस हवा के जरिए फैलता है, जिसे ‘एरोसोल’ (Aerosolization) प्रक्रिया कहते हैं. जब संक्रमित चूहों का मल, मूत्र या लार सूख जाती है और धूल के कणों में मिल जाती है, तो वह हवा में तैरने लगती है. जब कोई व्यक्ति उस हवा में सांस लेता है, तो वायरस सीधे उसके फेफड़ों में चला जाता है. इसके अलावा, संक्रमित सतह को छूने और फिर मुँह या नाक पर हाथ लगाने से भी यह फैल सकता है.

क्या यह कोरोना की तरह एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है?
जवाब:
राहत की बात यह है कि हंता वायरस आमतौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता. यह केवल चूहों के सीधे संपर्क या उनके दूषित वातावरण में रहने से होता है. हालांकि, दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले ‘एंडिस’ (Andes) स्ट्रेन में इंसान से इंसान में फैलने के कुछ दुर्लभ मामले देखे गए हैं, लेकिन फिलहाल के मामले चूहों से ही संबंधित हैं.

हंता वायरस के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
जवाब:
इसके लक्षण शुरू में एक सामान्य फ्लू (Flu) की तरह दिखते हैं, जो भ्रम पैदा कर सकते हैं:

-तेज बुखार और कंपकंपी (Chills).
-हाथों-पैरों और पीठ की मांसपेशियों में तेज दर्द.
-सिरदर्द, चक्कर आना और थकान.
-पेट में दर्द, उल्टी या दस्त (डायरिया).

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

संक्रमण गंभीर होने पर क्या होता है?
जवाब:
संक्रमण के 4 से 10 दिनों के बाद ‘हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम’ (HPS) के लक्षण दिखते हैं:

-फेफड़ों में पानी भर जाना.
-सांस लेने में भारी तकलीफ (ऐसा महसूस होना जैसे छाती पर कोई बैठा हो).
-खांसी और लो ब्लड प्रेशर.
-किडनी का काम बंद करना (HFRS की स्थिति में).

इसका मृत्यु दर (Death Rate) कितना है?
जवाब:
हंता वायरस को बहुत घातक माना जाता है. CDC (Centers for Disease Control) के अनुसार, हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) में मृत्यु दर 38% से 40% के बीच है. यानी, अगर  10 लोग इससे गंभीर रूप से बीमार होते हैं, तो उनमें से 4 की जान जाने का खतरा रहता है.

क्या इसका कोई इलाज या वैक्सीन है?
जवाब:
फिलहाल हंता वायरस का कोई विशेष इलाज, दवा (Specific drug) या टीका (Vaccine) उपलब्ध नहीं है. इलाज पूरी तरह से ‘सपोर्टिव केयर’ पर निर्भर करता है. मरीज को अस्पताल में ऑक्सीजन सपोर्ट, वेंटिलेटर या ‘ECMO’ मशीन पर रखा जाता है ताकि उसके फेफड़ों को काम करने में मदद मिल सके. जितनी जल्दी मेडिकल हेल्प मिलेगी, बचने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी.

चूहों से खुद को कैसे बचाएं?
जवाब:
बचाव ही इसका एकमात्र इलाज है. घर की दीवारों या दरवाजों के छेदों को बंद करें ताकि चूहे अंदर न आ सकें. रसोई और खाने के सामान को हमेशा ढककर या एयरटाइट डिब्बों में रखें. अगर आप किसी पुराने कमरे या कबाड़खाने की सफाई कर रहे हैं, तो N95 मास्क और दस्ताने जरूर पहनें. चूहों के मल पर झाड़ू लगाने की जगह, उस पर ब्लीच या कीटाणुनाशक का छिड़काव करें ताकि धूल न उड़े.

मास्क और सैनिटाइज़र कितने प्रभावी हैं?
जवाब:
हंता वायरस की बाहरी परत (Lipid envelope) बहुत कमजोर होती है. इसे साबुन, डिटर्जेंट या अल्कोहल वाले सैनिटाइज़र से आसानी से खत्म किया जा सकता है. मास्क पहनने से हवा में मौजूद संक्रमित धूल के कण फेफड़ों तक नहीं पहुँच पाते.

डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?
जवाब:
अगर  आप किसी ऐसी जगह गए हैं जहाँ चूहे थे और उसके कुछ दिनों बाद आपको बुखार, शरीर में दर्द और सांस लेने में कठिनाई महसूस हो रही है, तो बिना देरी किए डॉक्टर के पास जाएं और उन्हें चूहों के संपर्क वाली बात जरूर बताएं.

क्या पालतू जानवरों से भी हंता वायरस फैलने का खतरा है
जवाब:
राहत की बात यह है कि कुत्ते, बिल्ली या गाय-भैंस जैसे पालतू जानवर हंता वायरस से संक्रमित होकर इसे इंसानों में नहीं फैलाते. यह वायरस केवल विशिष्ट प्रजाति के जंगली चूहों (जैसे डियर माइस या राइस रैट) में ही पाया जाता है. हालांकि, बिल्लियाँ या कुत्ते शिकार के दौरान संक्रमित चूहों को घर के अंदर ला सकते हैं, जिससे घर के सदस्यों के संपर्क में आने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए अपने पालतू जानवरों की स्वच्छता का भी ध्यान रखें.

क्या हंता वायरस ‘फूड पॉइजनिंग’ जैसा हो सकता है?
जवाब:
हंता वायरस के शुरुआती लक्षण जैसे पेट दर्द, उल्टी और दस्त अक्सर लोगों को ‘फूड पॉइजनिंग’ का भ्रम देते हैं. लेकिन अंतर यह है कि फूड पॉइजनिंग आमतौर पर कुछ घंटों या 1-2 दिन में ठीक हो जाती है, जबकि हंता वायरस के मामले में पेट की समस्याओं के साथ-साथ तेज बुखार बना रहता है और कुछ दिनों बाद सांस लेने में गंभीर तकलीफ शुरू हो जाती है. अगर पेट खराब होने के साथ सांस फूलने लगे, तो इसे साधारण फूड पॉइजनिंग समझने की गलती न करें.

याद रखें कि हंता वायरस बेशक एक खतरनाक बीमारी है, लेकिन यह कोरोना की तरह पूरी दुनिया में एक साथ नहीं फैलती. यह उन्हीं इलाकों में खतरा पैदा करती है जहाँ साफ-सफाई की कमी है और चूहों की संख्या अधिक है. सही जानकारी और थोड़ी सी सावधानी हमें इस जानलेवा वायरस से पूरी तरह सुरक्षित रख सकती है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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 हंता वायरस असल में क्या है?
जवाब: हंता वायरस विषाणुओं का एक परिवार है जो मुख्य रूप से चूहों (Rodents) के जरिए फैलता है. यह कोई नया वायरस नहीं है, लेकिन इसकी घातकता इसे डरावना बनाती है. यह इंसान के फेफड़ों (HPS) या किडनी (HFRS) पर सीधा हमला करता है. फेफड़ों में संक्रमण होने पर सांस लेना लगभग नामुमकिन हो जाता है, जिससे मरीज की मौत हो सकती है.

यह चूहों से इंसानों तक कैसे पहुँचता है?
जवाब:
यह वायरस हवा के जरिए फैलता है, जिसे ‘एरोसोल’ (Aerosolization) प्रक्रिया कहते हैं. जब संक्रमित चूहों का मल, मूत्र या लार सूख जाती है और धूल के कणों में मिल जाती है, तो वह हवा में तैरने लगती है. जब कोई व्यक्ति उस हवा में सांस लेता है, तो वायरस सीधे उसके फेफड़ों में चला जाता है. इसके अलावा, संक्रमित सतह को छूने और फिर मुँह या नाक पर हाथ लगाने से भी यह फैल सकता है.

क्या यह कोरोना की तरह एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है?
जवाब:
राहत की बात यह है कि हंता वायरस आमतौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता. यह केवल चूहों के सीधे संपर्क या उनके दूषित वातावरण में रहने से होता है. हालांकि, दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले ‘एंडिस’ (Andes) स्ट्रेन में इंसान से इंसान में फैलने के कुछ दुर्लभ मामले देखे गए हैं, लेकिन फिलहाल के मामले चूहों से ही संबंधित हैं.

हंता वायरस के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
जवाब:
इसके लक्षण शुरू में एक सामान्य फ्लू (Flu) की तरह दिखते हैं, जो भ्रम पैदा कर सकते हैं:

-तेज बुखार और कंपकंपी (Chills).
-हाथों-पैरों और पीठ की मांसपेशियों में तेज दर्द.
-सिरदर्द, चक्कर आना और थकान.
-पेट में दर्द, उल्टी या दस्त (डायरिया).

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

संक्रमण गंभीर होने पर क्या होता है?
जवाब:
संक्रमण के 4 से 10 दिनों के बाद ‘हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम’ (HPS) के लक्षण दिखते हैं:

-फेफड़ों में पानी भर जाना.
-सांस लेने में भारी तकलीफ (ऐसा महसूस होना जैसे छाती पर कोई बैठा हो).
-खांसी और लो ब्लड प्रेशर.
-किडनी का काम बंद करना (HFRS की स्थिति में).

इसका मृत्यु दर (Death Rate) कितना है?
जवाब:
हंता वायरस को बहुत घातक माना जाता है. CDC (Centers for Disease Control) के अनुसार, हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) में मृत्यु दर 38% से 40% के बीच है. यानी, अगर  10 लोग इससे गंभीर रूप से बीमार होते हैं, तो उनमें से 4 की जान जाने का खतरा रहता है.

क्या इसका कोई इलाज या वैक्सीन है?
जवाब:
फिलहाल हंता वायरस का कोई विशेष इलाज, दवा (Specific drug) या टीका (Vaccine) उपलब्ध नहीं है. इलाज पूरी तरह से ‘सपोर्टिव केयर’ पर निर्भर करता है. मरीज को अस्पताल में ऑक्सीजन सपोर्ट, वेंटिलेटर या ‘ECMO’ मशीन पर रखा जाता है ताकि उसके फेफड़ों को काम करने में मदद मिल सके. जितनी जल्दी मेडिकल हेल्प मिलेगी, बचने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी.

चूहों से खुद को कैसे बचाएं?
जवाब:
बचाव ही इसका एकमात्र इलाज है. घर की दीवारों या दरवाजों के छेदों को बंद करें ताकि चूहे अंदर न आ सकें. रसोई और खाने के सामान को हमेशा ढककर या एयरटाइट डिब्बों में रखें. अगर आप किसी पुराने कमरे या कबाड़खाने की सफाई कर रहे हैं, तो N95 मास्क और दस्ताने जरूर पहनें. चूहों के मल पर झाड़ू लगाने की जगह, उस पर ब्लीच या कीटाणुनाशक का छिड़काव करें ताकि धूल न उड़े.

मास्क और सैनिटाइज़र कितने प्रभावी हैं?
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हंता वायरस की बाहरी परत (Lipid envelope) बहुत कमजोर होती है. इसे साबुन, डिटर्जेंट या अल्कोहल वाले सैनिटाइज़र से आसानी से खत्म किया जा सकता है. मास्क पहनने से हवा में मौजूद संक्रमित धूल के कण फेफड़ों तक नहीं पहुँच पाते.

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अगर  आप किसी ऐसी जगह गए हैं जहाँ चूहे थे और उसके कुछ दिनों बाद आपको बुखार, शरीर में दर्द और सांस लेने में कठिनाई महसूस हो रही है, तो बिना देरी किए डॉक्टर के पास जाएं और उन्हें चूहों के संपर्क वाली बात जरूर बताएं.

क्या पालतू जानवरों से भी हंता वायरस फैलने का खतरा है
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राहत की बात यह है कि कुत्ते, बिल्ली या गाय-भैंस जैसे पालतू जानवर हंता वायरस से संक्रमित होकर इसे इंसानों में नहीं फैलाते. यह वायरस केवल विशिष्ट प्रजाति के जंगली चूहों (जैसे डियर माइस या राइस रैट) में ही पाया जाता है. हालांकि, बिल्लियाँ या कुत्ते शिकार के दौरान संक्रमित चूहों को घर के अंदर ला सकते हैं, जिससे घर के सदस्यों के संपर्क में आने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए अपने पालतू जानवरों की स्वच्छता का भी ध्यान रखें.

क्या हंता वायरस ‘फूड पॉइजनिंग’ जैसा हो सकता है?
जवाब:
हंता वायरस के शुरुआती लक्षण जैसे पेट दर्द, उल्टी और दस्त अक्सर लोगों को ‘फूड पॉइजनिंग’ का भ्रम देते हैं. लेकिन अंतर यह है कि फूड पॉइजनिंग आमतौर पर कुछ घंटों या 1-2 दिन में ठीक हो जाती है, जबकि हंता वायरस के मामले में पेट की समस्याओं के साथ-साथ तेज बुखार बना रहता है और कुछ दिनों बाद सांस लेने में गंभीर तकलीफ शुरू हो जाती है. अगर पेट खराब होने के साथ सांस फूलने लगे, तो इसे साधारण फूड पॉइजनिंग समझने की गलती न करें.

याद रखें कि हंता वायरस बेशक एक खतरनाक बीमारी है, लेकिन यह कोरोना की तरह पूरी दुनिया में एक साथ नहीं फैलती. यह उन्हीं इलाकों में खतरा पैदा करती है जहाँ साफ-सफाई की कमी है और चूहों की संख्या अधिक है. सही जानकारी और थोड़ी सी सावधानी हमें इस जानलेवा वायरस से पूरी तरह सुरक्षित रख सकती है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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