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Emotional Manipulation: Relationship Stress Advice

Emotional Manipulation: Relationship Stress Advice
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41 मिनट पहले

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सवाल- मैं एक सरकारी बैंक में कैशियर हूं। कुछ महीनों से एक लड़की के साथ रिलेशनशिप में हूं। हमारे बीच सब अच्छा है, लेकिन वो अपनी जरूरतें सीधे बोलने की बजाय इशारों में कहती है। जैसे-

‘मेरे पास बाहर जाने के लिए अच्छे कपड़े नहीं हैं।’

‘उस लड़की की वॉच कितनी अच्छी है।’

‘उस लड़की का बैग कितना प्यारा लग रहा है।’

कई बार वो अपने फाइनेंशियल या पर्सनल स्ट्रेस भी ऐसे ही बताती है, ताकि मैं खुद मदद की पेशकश करूं। शुरू में मैंने किया भी, लेकिन अब मैं मेंटली थक गया हूं। क्या वह जानबूझकर ऐसा करती है ताकि मैं गिल्ट महसूस करूं? क्या ये इमोशनल इंफ्लुएंस है? मुझे क्या करना चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा

जवाब- सबसे पहले तो शुक्रिया कि आपने इतने स्पष्ट शब्दों में सवाल पूछा। इसी तरह हेल्दी रिलेशनशिप के लिए भी स्पष्ट संवाद जरूरी है। आपने लिखा कि आपकी पार्टनर हर बात इशारों में कहती है। ऐसी स्थिति में थकान महसूस होना स्वाभाविक है। चलिए आपकी सिचुएशन को समझते हैं और प्रैक्टिकल सॉल्यूशन पर बात करते हैं।

पार्टनर बता रहा है या पहेली बुझा रहा है?

रिलेशनशिप में अपनी बात रखना हर किसी का हक है, लेकिन उसे कहने का तरीका स्पष्ट होना चाहिए। बार-बार बातों को घुमाना और खुद को ‘बेचारा’ दिखाना इमोशनल मैनिपुलेशन है। यह स्थिति धीरे-धीरे रिश्ते की सहजता को खत्म कर सकती है।

ग्राफिक में दिए उदाहरणों से समझें कि ‘मैनिपुलेशन’ और ‘हेल्दी कम्युनिकेशन’ में क्या फर्क है-

मैनिपुलेशन की साइकोलॉजी

अगर किसी रिलेशनशिप में एक पार्टनर हर बार इशारों में बात कहता है, तो दूसरा ‘डिकोडिंग मोड’ में चला जाता है। इसे ‘डिसीजन फटीग’ भी कहते हैं, जहां व्यक्ति हर वक्त यह सोचकर तनाव में रहता है कि सामने वाले की किस बात का क्या मतलब है। आपने लिखा कि आपकी गर्लफ्रेंड अपनी डिमांड्स इसी तरह रखती है। इसके बावजूद अगर आप सभी डिमांड्स पूरी कर रहे हैं तो आपको सेल्फ-एसेसमेंट करना चाहिए।

कहीं आप ‘गिल्ट ट्रिप’ के शिकार तो नहीं, अपना सेल्फ-एसेसमेंट करें

रिश्तों में कभी-कभी हम वह सब भी करने लगते हैं, जो नहीं करना चाहते। इसकी वजह ‘गिल्ट’ हो सकती है। नीचे दिए एसेसमेंट टेस्ट से समझिए कि कहीं आप ‘गिल्ट ट्रिप’ में तो नहीं जा रहे हैं।

कैसे करें?

नीचे ग्राफिक में 7 सवाल दिए गए हैं। हर सवाल को ध्यान से पढ़ें और अपनी स्थिति के अनुसार खुद को 0 से 3 के बीच नंबर दें-

0: बिल्कुल नहीं

1: कभी-कभार

2: अक्सर

3: हमेशा/हर बार

फिर स्कोर एनालिसिस करें-

सभी सवालों के नंबरों को जोड़ लें और अपना टोटल स्कोर देखें। अगर स्कोर 15 से ऊपर है, तो यह ‘क्रॉनिक गिल्ट ट्रिप’ का संकेत है। इसका मतलब है कि आपको अपनी बाउंड्रीज तय करने और खुद पर काम करने की सख्त जरूरत है।

अगर स्कोर 6-14 के बीच है तो सतर्क हो जाएं और सुधार करें। अगर स्कोर 1-5 के बीच है तो कोई समस्या नहीं है।

प्रेम का मतलब अटकलें लगाना नहीं है

आपने लिखा कि वह अपनी पर्सनल बातें शेयर करते समय भी यही तरीका फॉलो करती है। साइकोलॉजी के मुताबिक, कुछ लोग ऐसा इसलिए करते हैं, ताकि ‘ना’ की गुंजाइश खत्म हो जाए। उन्हें लगता है कि चीजें सीधे मांगने पर मना किया जा सकता है। इसलिए वे अपनी बात कहने के लिए इशारों का सहारा लेते हैं। लेकिन किसी भी रिश्ते में यह तरीका हेल्दी नहीं है।

रिलेशनशिप में यह तरीका टॉक्सिक है

कभी-कभी लोग अनजाने में भी इस तरह बिहेव करते हैं। ऐसा हो सकता है कि उन्होंने बचपन से इसी तरह अपनी बातें मनवाई हों। इसे ‘लर्न्ड बिहेवियर’ कहते हैं। लेकिन एडल्ट रिलेशनशिप में यह तरीका ‘टॉक्सिक’ है। आपको भी यह समझना होगा कि हेल्दी और टॉक्सिक बिहेवियर में क्या फर्क है-

समझदार आदमी को क्या करना चाहिए?

नीचे दिए 6 पॉइंट्स से समझें कि इस सिचुशन में क्या करना चाहिए-

बाउंड्री सेट करें: अपनी आर्थिक और मानसिक सीमाओं को स्पष्ट करें। बताएं कि आप क्या कर सकते हैं और क्या आपकी क्षमता से बाहर है।

खुलकर बातचीत करें: जब वह इशारों में बात करे तो बहुत ही सौम्यता से कहें, “मैं समझ नहीं पा रहा कि तुम क्या कहना चाह रही हो, क्या तुम खुलकर बताओगी?” पार्टनर को अपनी बात सीधे कहने के लिए प्रोत्साहित करें।

पैसे का दिखावा न करें: रिश्ते में गिफ्ट्स से ज्यादा अहमियत समय और इमोशनल सपोर्ट को दें।

शर्मिंदगी महसूस न करें: अगर आप कोई डिमांड पूरी नहीं कर पाते तो उसे अपनी असफलता न मानें।

गर्लफ्रेंड को ‘क्राउन’ न समझें: उसे अपना पार्टनर मानें। एक साथी अपनी जरूरतों के लिए दूसरे पर दबाव नहीं डालता, बल्कि मिलकर समाधान निकालता है।

शोशेबाजी न करें: बाहरी चमक-धमक की बजाय रिश्ते की गहराई और सच्चाई पर ध्यान दें।

अंतिम सलाह

कोई रिश्ता ‘माइंड रीडिंग’ से नहीं, बल्कि ‘स्पष्ट संवाद’ से सुंदर बनता है। अगर पार्टनर की बातें पहेली बन जाएं, तो उन्हें सुलझाने की बजाय खुलकर बात करें। विनम्रता से अपनी बाउंड्रीज बताएं और खुद को भी अनावश्यक गिल्ट से मुक्त रखें।

……………… ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- कहीं मुझे प्यार तो नहीं हो गया: हमेशा बस उसका ही ख्याल, न देखूं तो बेचैनी, ये प्यार है या सिर्फ अट्रैक्शन

आप जीवन के उस पड़ाव पर हैं, जहां भावनाएं बहुत तीव्र होती हैं। इस उम्र में किसी की तरफ अट्रैक्ट होना, हर वक्त उसके बारे में सोचना, बेचैनी होना बहुत स्वाभाविक है। ये अच्छी बात है कि आप अपनी भावनाओं को लेकर अवेयर हैं और जल्दबाजी में किसी फैसले से पहले इसे समझना चाहते हैं। आगे पढ़िए…

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सवाल- मैं एक सरकारी बैंक में कैशियर हूं। कुछ महीनों से एक लड़की के साथ रिलेशनशिप में हूं। हमारे बीच सब अच्छा है, लेकिन वो अपनी जरूरतें सीधे बोलने की बजाय इशारों में कहती है। जैसे-

‘मेरे पास बाहर जाने के लिए अच्छे कपड़े नहीं हैं।’

‘उस लड़की की वॉच कितनी अच्छी है।’

‘उस लड़की का बैग कितना प्यारा लग रहा है।’

कई बार वो अपने फाइनेंशियल या पर्सनल स्ट्रेस भी ऐसे ही बताती है, ताकि मैं खुद मदद की पेशकश करूं। शुरू में मैंने किया भी, लेकिन अब मैं मेंटली थक गया हूं। क्या वह जानबूझकर ऐसा करती है ताकि मैं गिल्ट महसूस करूं? क्या ये इमोशनल इंफ्लुएंस है? मुझे क्या करना चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा

जवाब- सबसे पहले तो शुक्रिया कि आपने इतने स्पष्ट शब्दों में सवाल पूछा। इसी तरह हेल्दी रिलेशनशिप के लिए भी स्पष्ट संवाद जरूरी है। आपने लिखा कि आपकी पार्टनर हर बात इशारों में कहती है। ऐसी स्थिति में थकान महसूस होना स्वाभाविक है। चलिए आपकी सिचुएशन को समझते हैं और प्रैक्टिकल सॉल्यूशन पर बात करते हैं।

पार्टनर बता रहा है या पहेली बुझा रहा है?

रिलेशनशिप में अपनी बात रखना हर किसी का हक है, लेकिन उसे कहने का तरीका स्पष्ट होना चाहिए। बार-बार बातों को घुमाना और खुद को ‘बेचारा’ दिखाना इमोशनल मैनिपुलेशन है। यह स्थिति धीरे-धीरे रिश्ते की सहजता को खत्म कर सकती है।

ग्राफिक में दिए उदाहरणों से समझें कि ‘मैनिपुलेशन’ और ‘हेल्दी कम्युनिकेशन’ में क्या फर्क है-

मैनिपुलेशन की साइकोलॉजी

अगर किसी रिलेशनशिप में एक पार्टनर हर बार इशारों में बात कहता है, तो दूसरा ‘डिकोडिंग मोड’ में चला जाता है। इसे ‘डिसीजन फटीग’ भी कहते हैं, जहां व्यक्ति हर वक्त यह सोचकर तनाव में रहता है कि सामने वाले की किस बात का क्या मतलब है। आपने लिखा कि आपकी गर्लफ्रेंड अपनी डिमांड्स इसी तरह रखती है। इसके बावजूद अगर आप सभी डिमांड्स पूरी कर रहे हैं तो आपको सेल्फ-एसेसमेंट करना चाहिए।

कहीं आप ‘गिल्ट ट्रिप’ के शिकार तो नहीं, अपना सेल्फ-एसेसमेंट करें

रिश्तों में कभी-कभी हम वह सब भी करने लगते हैं, जो नहीं करना चाहते। इसकी वजह ‘गिल्ट’ हो सकती है। नीचे दिए एसेसमेंट टेस्ट से समझिए कि कहीं आप ‘गिल्ट ट्रिप’ में तो नहीं जा रहे हैं।

कैसे करें?

नीचे ग्राफिक में 7 सवाल दिए गए हैं। हर सवाल को ध्यान से पढ़ें और अपनी स्थिति के अनुसार खुद को 0 से 3 के बीच नंबर दें-

0: बिल्कुल नहीं

1: कभी-कभार

2: अक्सर

3: हमेशा/हर बार

फिर स्कोर एनालिसिस करें-

सभी सवालों के नंबरों को जोड़ लें और अपना टोटल स्कोर देखें। अगर स्कोर 15 से ऊपर है, तो यह ‘क्रॉनिक गिल्ट ट्रिप’ का संकेत है। इसका मतलब है कि आपको अपनी बाउंड्रीज तय करने और खुद पर काम करने की सख्त जरूरत है।

अगर स्कोर 6-14 के बीच है तो सतर्क हो जाएं और सुधार करें। अगर स्कोर 1-5 के बीच है तो कोई समस्या नहीं है।

प्रेम का मतलब अटकलें लगाना नहीं है

आपने लिखा कि वह अपनी पर्सनल बातें शेयर करते समय भी यही तरीका फॉलो करती है। साइकोलॉजी के मुताबिक, कुछ लोग ऐसा इसलिए करते हैं, ताकि ‘ना’ की गुंजाइश खत्म हो जाए। उन्हें लगता है कि चीजें सीधे मांगने पर मना किया जा सकता है। इसलिए वे अपनी बात कहने के लिए इशारों का सहारा लेते हैं। लेकिन किसी भी रिश्ते में यह तरीका हेल्दी नहीं है।

रिलेशनशिप में यह तरीका टॉक्सिक है

कभी-कभी लोग अनजाने में भी इस तरह बिहेव करते हैं। ऐसा हो सकता है कि उन्होंने बचपन से इसी तरह अपनी बातें मनवाई हों। इसे ‘लर्न्ड बिहेवियर’ कहते हैं। लेकिन एडल्ट रिलेशनशिप में यह तरीका ‘टॉक्सिक’ है। आपको भी यह समझना होगा कि हेल्दी और टॉक्सिक बिहेवियर में क्या फर्क है-

समझदार आदमी को क्या करना चाहिए?

नीचे दिए 6 पॉइंट्स से समझें कि इस सिचुशन में क्या करना चाहिए-

बाउंड्री सेट करें: अपनी आर्थिक और मानसिक सीमाओं को स्पष्ट करें। बताएं कि आप क्या कर सकते हैं और क्या आपकी क्षमता से बाहर है।

खुलकर बातचीत करें: जब वह इशारों में बात करे तो बहुत ही सौम्यता से कहें, “मैं समझ नहीं पा रहा कि तुम क्या कहना चाह रही हो, क्या तुम खुलकर बताओगी?” पार्टनर को अपनी बात सीधे कहने के लिए प्रोत्साहित करें।

पैसे का दिखावा न करें: रिश्ते में गिफ्ट्स से ज्यादा अहमियत समय और इमोशनल सपोर्ट को दें।

शर्मिंदगी महसूस न करें: अगर आप कोई डिमांड पूरी नहीं कर पाते तो उसे अपनी असफलता न मानें।

गर्लफ्रेंड को ‘क्राउन’ न समझें: उसे अपना पार्टनर मानें। एक साथी अपनी जरूरतों के लिए दूसरे पर दबाव नहीं डालता, बल्कि मिलकर समाधान निकालता है।

शोशेबाजी न करें: बाहरी चमक-धमक की बजाय रिश्ते की गहराई और सच्चाई पर ध्यान दें।

अंतिम सलाह

कोई रिश्ता ‘माइंड रीडिंग’ से नहीं, बल्कि ‘स्पष्ट संवाद’ से सुंदर बनता है। अगर पार्टनर की बातें पहेली बन जाएं, तो उन्हें सुलझाने की बजाय खुलकर बात करें। विनम्रता से अपनी बाउंड्रीज बताएं और खुद को भी अनावश्यक गिल्ट से मुक्त रखें।

……………… ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- कहीं मुझे प्यार तो नहीं हो गया: हमेशा बस उसका ही ख्याल, न देखूं तो बेचैनी, ये प्यार है या सिर्फ अट्रैक्शन

आप जीवन के उस पड़ाव पर हैं, जहां भावनाएं बहुत तीव्र होती हैं। इस उम्र में किसी की तरफ अट्रैक्ट होना, हर वक्त उसके बारे में सोचना, बेचैनी होना बहुत स्वाभाविक है। ये अच्छी बात है कि आप अपनी भावनाओं को लेकर अवेयर हैं और जल्दबाजी में किसी फैसले से पहले इसे समझना चाहते हैं। आगे पढ़िए…

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