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अमेरिका के 50 फाइटर जेट मिडिल ईस्ट रवाना:इनमें F-22, F-35 और F-16 शामिल, अमेरिका बोला- ईरान शर्तें नहीं मान रहा, हमारे पास दूसरे रास्ते मौजूद

अमेरिका के 50 फाइटर जेट मिडिल ईस्ट रवाना:इनमें F-22, F-35 और F-16 शामिल, अमेरिका बोला- ईरान शर्तें नहीं मान रहा, हमारे पास दूसरे रास्ते मौजूद

अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में पिछले 24 घंटों में 50 से ज्यादा फाइटर जेट भेजे हैं। इंडिपेंडेंट फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा और मिलिट्री एविएशन मॉनिटर्स ने कई F-22, F-35 और F-16 फाइटर जेट को मिडिल ईस्ट की ओर जाते हुए रिकॉर्ड किया है। यह जानकारी अमेरिका और ईरान के बीच मंगलवार को जिनेवा में हुई दूसरी दौर की बातचीत के दौरान सामने आई है। दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते से जुड़े मुद्दों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तय की गई शर्तों को ईरान मानने को तैयार नहीं है। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि बातचीत के कुछ हिस्से सकारात्मक रहे, लेकिन कई अहम मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बनी है। इन बयानों से साफ है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत अभी भी नाजुक दौर में है। ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि अगर ईरान अमेरिकी मांगें नहीं मानता, तो अमेरिका ताकत का इस्तेमाल करेगा। अमेरिका ने रिफ्यूलिंग टैंकर भी मिडिल ईस्ट भेजे अमेरिकी फाइटर जेट्स के साथ कई एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर भी मिडिल ईस्ट की ओर जाते देखे गए हैं। इससे संकेत मिलता है कि विमान लंबे समय तक ऑपरेशन की तैयारी में हैं। इस बीच, अमेरिकी अधिकारी ने मीडिया को बताया कि USS जेराल्ड आर. फोर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप कैरिबियन से रवाना होकर मिड-अटलांटिक में पहुंच चुका है और मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है। अगले चार-पांच दिन में उसके पहुंचने की उम्मीद है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, सुरक्षा कारणों से नाम न बताने की शर्त पर अधिकारी ने कहा कि फोर्ड के साथ तीन गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर, USS माहान, USS बैनब्रिज और USS विन्सटन चर्चिल भी हैं। इससे पहले USS अब्राहम लिंकन और अन्य महत्वपूर्ण अमेरिकी एयर और नेवल एसेट्स भी इस साल की शुरुआत में क्षेत्र में तैनात किए जा चुके हैं। इससे अमेरिका की मिडिल ईस्ट में सैन्य मौजूदगी और मजबूत हुई है। F-35 और F-16 फाइटर जेट के बारे में जानिए… ईरान ने ऑपरेशनल क्षमताओं की जांच के लिए नौसैनिक अभ्यास शुरू किया ईरान ने मंगलवार को दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक हॉर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। यह कदम लाइव-फायर सैन्य अभ्यास के दौरान उठाया गया। ईरान ने सोमवार को इस नए अभ्यास की घोषणा की थी। इसे ‘स्मार्ट कंट्रोल ऑफ द स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ नाम दिया गया। ईरानी न्यूज एजेंसियों के मुताबिक, फारस की खाड़ी के संकरे हिस्से में मिसाइल परीक्षण किए गए। ईरानी मीडिया ने सुरक्षा और समुद्री कारणों का हवाला देते हुए कहा कि यह बंदी कुछ घंटों के लिए रहेगी। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक, इसका मकसद खुफिया और ऑपरेशनल क्षमताओं की जांच करना है। समुद्री सुरक्षा कंपनी ईओएस रिस्क ग्रुप ने कहा कि इस इलाके से गुजरने वाले जहाजों को पहले ही रेडियो पर चेतावनी दी गई थी। जनवरी के अंत में हुए इसी तरह के अभ्यास के दौरान अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कड़ा बयान जारी किया था। उसने कहा था कि ईरान को अंतरराष्ट्रीय हवाई और समुद्री क्षेत्र में पेशेवर तरीके से काम करने का अधिकार है, लेकिन वह अमेरिकी वॉरशिप या ट्रेड जहाजों को परेशान न करें। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल कारोबार के लिए अहम रास्ता हॉर्मुज जलडमरूमध्य अपनी सबसे संकरी जगह पर करीब 33 किलोमीटर (21 मील) चौड़ा है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे वैश्विक बाजारों से जोड़ता है। दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, यूएई और ईरान का तेल और गैस यहीं से बाहर जाता है। ज्यादातर खेप एशिया के लिए होती है। अमेरिकी एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, इस रास्ते का कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं है, हालांकि सऊदी अरब और यूएई ने कुछ पाइपलाइन बनाई हैं जो इस मार्ग को बायपास करती हैं। हालांकि जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता है और सभी जहाजों के लिए खुला है, लेकिन इसके किनारों के क्षेत्रीय पानी पर ईरान और ओमान का नियंत्रण है। ईरान-अमेरिका के बीच बैलिस्टिक मिसाइल पर विवाद अटका ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बन गया है। ईरान इस पर बिल्कुल भी समझौता करने को तैयार नहीं है और इसे अपनी रेड लाइन मानता है। ईरान का कहना है कि यह उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रक्षा के लिए जरूरी है। ईरान का कहना है कि जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु साइटों पर हमला किया, तब ईरान की मिसाइलों ने ही उसकी रक्षा की। इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि ईरान हिजबुल्लाह, हूती जैसे प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन देना बंद करे। अमेरिका इस मुद्दे को भी शामिल करना चाहता है, लेकिन ईरान मुख्य रूप से सिर्फ परमाणु मुद्दे पर फोकस रखना चाहता है। ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी। यह ईरान की रक्षात्मक क्षमता है और इसे छोड़ना मतलब खुद को कमजोर करना होगा। ईरान कहता है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी, मिसाइल या क्षेत्रीय समूहों पर नहीं। वेंस बोले- बातचीत का अंतिम फैसला ट्रम्प के हाथ में है वेंस ने कहा कि बातचीत कितने समय तक जारी रखनी है, इसका अंतिम फैसला राष्ट्रपति ट्रम्प करेंगे। उन्होंने कहा- हम कोशिश जारी रखेंगे। लेकिन राष्ट्रपति के पास यह अधिकार है कि वे तय करें कि कूटनीति अपनी सीमा तक पहुंच गई है या नहीं। हमें उम्मीद है कि इस बार बातचीत बुरे अंजाम तक नहीं पहुंचेगी, लेकिन अगर पहुंचती है तो फैसला राष्ट्रपति ही करेंगे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान अगले दो हफ्तों में ज्यादा बड़ा प्रस्ताव देगा, जिससे दोनों पक्षों के बीच मतभेद कम किए जा सकें। ईरानी विदेश मंत्री बोले- हमला हुआ तो इसका असर दूसरों पर भी पड़ेगा दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने बातचीत को लेकर उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि समझौते की दिशा में नई खिड़की खुली है। बातचीत के बाद संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में अरागची ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि बातचीत से टिकाऊ और सहमति वाला समाधान निकलेगा, जो सभी संबंधित पक्षों और पूरे क्षेत्र के हित में होगा।’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान किसी भी खतरे या हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो इसके नतीजे अकेले वह नहीं भुगतेंगे, बल्कि दूसरों पर भी इसका असर पड़ेगा। ————————- ये खबर पढ़ें… ट्रम्प बोले- ईरान के साथ बातचीत में इनडायरेक्टली शामिल रहूंगा: पिछले साल परमाणु ठिकानों पर बमबारी से इन्हें अक्ल आई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत में इनडायरेक्ट रूप से शामिल रहेंगे। उन्होंने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही। पूरी खबर पढ़ें…

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है कि विमान लंबे समय तक ऑपरेशन की तैयारी में हैं। इस बीच, अमेरिकी अधिकारी ने मीडिया को बताया कि USS जेराल्ड आर. फोर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप कैरिबियन से रवाना होकर मिड-अटलांटिक में पहुंच चुका है और मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है। अगले चार-पांच दिन में उसके पहुंचने की उम्मीद है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, सुरक्षा कारणों से नाम न बताने की शर्त पर अधिकारी ने कहा कि फोर्ड के साथ तीन गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर, USS माहान, USS बैनब्रिज और USS विन्सटन चर्चिल भी हैं। इससे पहले USS अब्राहम लिंकन और अन्य महत्वपूर्ण अमेरिकी एयर और नेवल एसेट्स भी इस साल की शुरुआत में क्षेत्र में तैनात किए जा चुके हैं। इससे अमेरिका की मिडिल ईस्ट में सैन्य मौजूदगी और मजबूत हुई है। F-35 और F-16 फाइटर जेट के बारे में जानिए… ईरान ने ऑपरेशनल क्षमताओं की जांच के लिए नौसैनिक अभ्यास शुरू किया ईरान ने मंगलवार को दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक हॉर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। यह कदम लाइव-फायर सैन्य अभ्यास के दौरान उठाया गया। ईरान ने सोमवार को इस नए अभ्यास की घोषणा की थी। इसे ‘स्मार्ट कंट्रोल ऑफ द स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ नाम दिया गया। ईरानी न्यूज एजेंसियों के मुताबिक, फारस की खाड़ी के संकरे हिस्से में मिसाइल परीक्षण किए गए। ईरानी मीडिया ने सुरक्षा और समुद्री कारणों का हवाला देते हुए कहा कि यह बंदी कुछ घंटों के लिए रहेगी। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक, इसका मकसद खुफिया और ऑपरेशनल क्षमताओं की जांच करना है। समुद्री सुरक्षा कंपनी ईओएस रिस्क ग्रुप ने कहा कि इस इलाके से गुजरने वाले जहाजों को पहले ही रेडियो पर चेतावनी दी गई थी। जनवरी के अंत में हुए इसी तरह के अभ्यास के दौरान अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कड़ा बयान जारी किया था। उसने कहा था कि ईरान को अंतरराष्ट्रीय हवाई और समुद्री क्षेत्र में पेशेवर तरीके से काम करने का अधिकार है, लेकिन वह अमेरिकी वॉरशिप या ट्रेड जहाजों को परेशान न करें। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल कारोबार के लिए अहम रास्ता हॉर्मुज जलडमरूमध्य अपनी सबसे संकरी जगह पर करीब 33 किलोमीटर (21 मील) चौड़ा है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे वैश्विक बाजारों से जोड़ता है। दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। सऊदी अरब, कुवैत, इराक, 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इस मुद्दे को भी शामिल करना चाहता है, लेकिन ईरान मुख्य रूप से सिर्फ परमाणु मुद्दे पर फोकस रखना चाहता है। ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी। यह ईरान की रक्षात्मक क्षमता है और इसे छोड़ना मतलब खुद को कमजोर करना होगा। ईरान कहता है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी, मिसाइल या क्षेत्रीय समूहों पर नहीं। वेंस बोले- बातचीत का अंतिम फैसला ट्रम्प के हाथ में है वेंस ने कहा कि बातचीत कितने समय तक जारी रखनी है, इसका अंतिम फैसला राष्ट्रपति ट्रम्प करेंगे। उन्होंने कहा- हम कोशिश जारी रखेंगे। लेकिन राष्ट्रपति के पास यह अधिकार है कि वे तय करें कि कूटनीति अपनी सीमा तक पहुंच गई है या नहीं। हमें उम्मीद है कि इस बार बातचीत बुरे अंजाम तक नहीं पहुंचेगी, लेकिन अगर पहुंचती है तो फैसला राष्ट्रपति ही करेंगे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान अगले दो हफ्तों में ज्यादा बड़ा प्रस्ताव देगा, जिससे दोनों पक्षों के बीच मतभेद कम किए जा सकें। ईरानी विदेश मंत्री बोले- हमला हुआ तो इसका असर दूसरों पर भी पड़ेगा दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने बातचीत को लेकर उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि समझौते की दिशा में नई खिड़की खुली है। बातचीत के बाद संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में अरागची ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि बातचीत से टिकाऊ और सहमति वाला समाधान निकलेगा, जो सभी संबंधित पक्षों और पूरे क्षेत्र के हित में होगा।’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान किसी भी खतरे या हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो इसके नतीजे अकेले वह नहीं भुगतेंगे, बल्कि दूसरों पर भी इसका असर पड़ेगा। ————————- ये खबर पढ़ें… ट्रम्प बोले- ईरान के साथ बातचीत में इनडायरेक्टली शामिल रहूंगा: पिछले साल परमाणु ठिकानों पर बमबारी से इन्हें अक्ल आई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत में इनडायरेक्ट रूप से शामिल रहेंगे। उन्होंने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही। पूरी खबर पढ़ें…

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