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तरबूज के अंदर था जिंक फॉस्फाइड, पेट में बन गया केमिकल बम, इस कारण मुंबई में गई पति-पत्नी और बच्चे की जान

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Mumbai Watermelon Deaths: मुंबई में जिस तरबूज को खाने से एक ही परिवार में पति-पत्नी और उनके दो बच्चों की मौत हुई थी, अब उनकी जांच रिपोर्ट में पाया गया है कि तरबूज के अंदर जिंक फॉस्फाइड मौजूद था. जिंक फॉस्फाइड बेहद घातक जहर होता है. यह न सिर्फ बच्चे बल्कि वयस्क इंसान का भी काम तमाम कर सकता है. आइए विस्तार से जानते हैं कि जिंक फॉस्फाइड होता क्या है.

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तरबूज से नहीं मौत की वजह कुछ और.

Mumbai Watermelon Deaths: 26 अप्रैल को मुंबई में एक ही परिवार में पति-पत्नी और उनके दो बच्चों की मौत हो गई थी. कहा गया कि सभी मृतक ने पहले विरयानी खाई और उसके बाद तरबूज खाकर सो गए. इसके बाद मौत हो गई. हमने 27 अप्रैल को न्यूज 18 एक खबर की थी कि क्या वाकई तरबूज के इंफेक्शन से किसी की मौत हो जाती है. इसके लिए हमने सी के बिड़ला अस्पताल में इंटरनल मेडिसीन के वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. तुषार तायल से बात की थी. डॉ. तुषार तायल ने स्पष्ट बताया था कि तरबूज के इंफेक्शन से मौत रेयरेस्ट ऑफ द रेयरेस्ट केस में हो सकती है लेकिन जितने कम समय में मुंबई के इस परिवार की मौत हुई, उतने कम समय में असंभव है, इसलिए इसका कुछ दूसरा कारण हो सकता है. अब जबकि जांच से स्पष्ट हो गया है कि मौत की असली वजह तरबूज नहीं बल्कि तरबूज के अंदर मिलाया गया जिंक फॉस्फाइड था. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि जिंक फॉस्फाइड होता क्या है.

क्या होता है जिंक फॉस्फाइड 

जिंक फॉस्फाइड जिंक और फॉस्फोरस से मिलकर बना है. यह एक अकार्बनिक रसायन है जो दोनों तत्व के मिलने से अत्यंत खतरनाक हो जाता है. इसका रासायनिक फॉर्मूला होता है Zn3p2. यानी इसमें जिंक के तीन परमाणु और फॉस्फोरस के दो परमाणु मिलकर एक बंधन बनाकर नया यौगिक बना देता है. जब जिंक और फॉस्फोरस इस बॉन्ड से जुड़ते हैं, तो उनके अपने व्यक्तिगत गुण खत्म हो जाते हैं और एक नया पदार्थ बनता है जिसकी विशेषताएं एकदम अलग होती हैं. दोनों मिलकर जिंक फॉस्फाइड बनाता है. यह बेहद खतरनाक कंपाउड है. आमतौर पर खेतों में चूहों को मारने के लिए जिंक फॉस्फाइड का इस्तेमाल किया जाता है. यह अत्यधिक घातक श्रेणी में आता है. यह आमतौर पर काले रंग के पाउडर के रूप में होता है.

कितना घातक है जिंक फॉस्फाइड

जिंक एक सुरक्षित धातु है लेकिन फॉस्फोरस ज्वलनशील पदार्थ है. इसलिए इसका उपयोग माचिस से आग निकालने में होता है. लेकिन जब जिंक और फॉस्फोरस मिल जाता जाता है तो घातक जहर बन जाता है. जैसे ही यह पेट में पहुंचता है इसका कमजोर बॉन्ड टूट जाता है और पेट के एसिड में मिल जाता है. इससे फॉस्फीन गैस रिलीज होती है. पेट में यह केमिकल रेसिपी की तरह काम करता है जहां जिंक के 3 और फॉस्फोरस के 2 परमाणु मजबूत बिजली जैसे खिंचाव बनाता है और उससे फॉस्फोनी गैस निकलती है. आप समझ सकते हैं कि जब यह पेट में जाता होगा कि कितना घातक असर डालता होगा.

किस तरह अंदरुनी अंगों को नुकसान पहुंचाता

डॉ. तुषार तायल कहते हैं कि जिंक फॉस्फाइड जब पेट में जाता है तो पेट में यह केमिकल बम फटने जैसा होता है. इससे निकली फॉस्फीन गैस जब पेट के एसिड हाइड्रोक्लोरिक एसिड में घुलती है तो तेजी से खून में पहुच जाती है और शरीर के सभी महत्वपूर्ण अंगों में घुसने लगती है. यह दूषित खून जब शरीर की सभी कोशिकाओं में पहुंचती है तो सबसे पहले यह गैस कोशिकाओं की सांस को ही ब्लॉक कर देती है. फॉस्फीन गैस कोशिकाओं के भीतर मौजूद माइटोकॉन्ड्रिया पर हमला करती है. माइटोकॉन्ड्रिया में ही एनर्जी बनती है. इससे शरीर में ऑक्सीजन होने के बावजूद कोशिकाएं दम घुटने से मरने लगती हैं. यह हार्ट पर तत्काल नुकसान पहुंचाता है. माइटोकॉन्ड्रिया जैसे ही डैमेज होगा हार्ट में सूजन होने लगेगी और इससे धड़कन बहुत तेज गति से बिगड़ने लगेगी. इस स्थिति में बीपी गिर जाएगी और हार्ट को शॉक लेगगा. अंततः कार्डियोजेनिक शॉक के कारण दिल काम करना बंद कर देगा. जब यह गैस लंग्स में पहुंचेगी तो लंग्स में एयर को भरकर रखने वाली छोटी-छोटी थैलियां यानी एल्वॉयली में लिक्विड भर जाएगा जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाएगा. खून में ऑक्सीजन पहुंचना कम हो जाएगा. व्यक्ति धीरे-धीरे नीले पड़ने लगेगा. इसी तरह लिवर, किडनी और आंत की हालत होगी. ऐसे में समझा जा सकता है कि जिंक फॉस्फाइड अगर किसी के पेट में चला जाए तो उसका क्या अंजाम होगा.

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Lakshmi Narayan

18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें

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Mumbai Watermelon Deaths: 26 अप्रैल को मुंबई में एक ही परिवार में पति-पत्नी और उनके दो बच्चों की मौत हो गई थी. कहा गया कि सभी मृतक ने पहले विरयानी खाई और उसके बाद तरबूज खाकर सो गए. इसके बाद मौत हो गई. हमने 27 अप्रैल को न्यूज 18 एक खबर की थी कि क्या वाकई तरबूज के इंफेक्शन से किसी की मौत हो जाती है. इसके लिए हमने सी के बिड़ला अस्पताल में इंटरनल मेडिसीन के वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. तुषार तायल से बात की थी. डॉ. तुषार तायल ने स्पष्ट बताया था कि तरबूज के इंफेक्शन से मौत रेयरेस्ट ऑफ द रेयरेस्ट केस में हो सकती है लेकिन जितने कम समय में मुंबई के इस परिवार की मौत हुई, उतने कम समय में असंभव है, इसलिए इसका कुछ दूसरा कारण हो सकता है. अब जबकि जांच से स्पष्ट हो गया है कि मौत की असली वजह तरबूज नहीं बल्कि तरबूज के अंदर मिलाया गया जिंक फॉस्फाइड था. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि जिंक फॉस्फाइड होता क्या है.

क्या होता है जिंक फॉस्फाइड 

जिंक फॉस्फाइड जिंक और फॉस्फोरस से मिलकर बना है. यह एक अकार्बनिक रसायन है जो दोनों तत्व के मिलने से अत्यंत खतरनाक हो जाता है. इसका रासायनिक फॉर्मूला होता है Zn3p2. यानी इसमें जिंक के तीन परमाणु और फॉस्फोरस के दो परमाणु मिलकर एक बंधन बनाकर नया यौगिक बना देता है. जब जिंक और फॉस्फोरस इस बॉन्ड से जुड़ते हैं, तो उनके अपने व्यक्तिगत गुण खत्म हो जाते हैं और एक नया पदार्थ बनता है जिसकी विशेषताएं एकदम अलग होती हैं. दोनों मिलकर जिंक फॉस्फाइड बनाता है. यह बेहद खतरनाक कंपाउड है. आमतौर पर खेतों में चूहों को मारने के लिए जिंक फॉस्फाइड का इस्तेमाल किया जाता है. यह अत्यधिक घातक श्रेणी में आता है. यह आमतौर पर काले रंग के पाउडर के रूप में होता है.

कितना घातक है जिंक फॉस्फाइड

जिंक एक सुरक्षित धातु है लेकिन फॉस्फोरस ज्वलनशील पदार्थ है. इसलिए इसका उपयोग माचिस से आग निकालने में होता है. लेकिन जब जिंक और फॉस्फोरस मिल जाता जाता है तो घातक जहर बन जाता है. जैसे ही यह पेट में पहुंचता है इसका कमजोर बॉन्ड टूट जाता है और पेट के एसिड में मिल जाता है. इससे फॉस्फीन गैस रिलीज होती है. पेट में यह केमिकल रेसिपी की तरह काम करता है जहां जिंक के 3 और फॉस्फोरस के 2 परमाणु मजबूत बिजली जैसे खिंचाव बनाता है और उससे फॉस्फोनी गैस निकलती है. आप समझ सकते हैं कि जब यह पेट में जाता होगा कि कितना घातक असर डालता होगा.

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