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केदारनाथ में खराब मौसम के चलते उड़ानों पर असर:4000 बुकिंग कैंसिल, DGCA बोला- कोई चांस नहीं ले; IRCTC के जरिए टिकट

केदारनाथ में खराब मौसम के चलते उड़ानों पर असर:4000 बुकिंग कैंसिल, DGCA बोला- कोई चांस नहीं ले; IRCTC के जरिए टिकट

केदारनाथ जाने के लिए हेली सेवाओं पर खराब मौसम के चलते बार-बार असर पड़ रहा है। अब तक 4 हजार से ज्यादा हेलिकॉप्टर बुकिंग रद्द कर दी गई। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UCADA) को सख्त निर्देश दिए हैं कि खराब मौसम में कोई भी उड़ान पहाड़ों पर ना जाए। DGCA ने केदारनाथ यात्रा शुरू होने से दो महीने पहले ही हेली यात्रा संबंधित गाइडलाइन पर सख्ती से अमल करने के निर्देश दिए थे। 2025 में चारधाम यात्रा में 5 हेली हादसों में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद यात्रा मानकों पर सवाल उठे थे। इस बार DGCA ने UCADA को कोई भी रिस्क लेने से मना किया है। मई में बारिश, बर्फबारी और तेजी से बदलते मौसम के कारण लगभग 40% उड़ानें प्रभावित हुई हैं। अभी केदारनाथ यात्रा में आठ हेली कंपनियां अपनी सेवाएं दे रही हैं, जिसकी बुकिंग IRCTC कर रही है। केदारनाथ में दोपहर बाद लगातार मौसम खराब हो रहा है, जिससे हेली सेवाओं को रोक दिया जा रहा है। ‘मौसम खराब होते ही हेली सेवा रोक देते’ UCADA के सीईओ आशीष चौहान ने बताया कि इस बार सुरक्षा को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि रुद्रप्रयाग की मंदाकिनी वैली में कुछ ऐसी जगहें हैं जहां बादल ऊपर से नीचे नहीं, बल्कि नीचे से ऊपर की तरफ आते हैं। हम कैमरों के जरिए लगातार निगरानी कर रहे हैं। जैसे ही मौसम खराब होने का पहला इंडिकेशन मिलता है, हम तुरंत फ्लाइंग बंद कर देते हैं। पिछले अनुभवों में देखा गया है कि बादलों के बीच से निकलने का चांस लेने पर अनहोनी हुई है। इस बार हम ऐसा कोई चांस नहीं ले रहे हैं। यात्रियों के फंसने पर अतिरिक्त उड़ानें भारी संख्या में टिकट कैंसिलेशन और रिफंड के सवाल पर चौहान ने बताया कि टिकट और रिफंड की प्रक्रिया हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों के स्तर पर होती है, लेकिन नियमों के तहत रिफंड सुनिश्चित किया जा रहा है। मौसम के कारण जो यात्री खरसाली या अन्य जगहों पर फंस जाते हैं, उनका बैकलॉग क्लियर करने के लिए UCADA ऑपरेटरों को अतिरिक्त उड़ानें भरने की परमिशन दे रहा है, ताकि दर्शन में कोई बाधा न आए। DGCA के मानकों पर पायलटों की विशेष ट्रेनिंग सीतापुर के संकरे हवाई मार्ग (बॉटलनेक) और 10,000 फीट से ऊपर की ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए पायलटों की ट्रेनिंग सख्त की गई है। सीईओ ने बताया, DGCA ने यहां उड़ान भरने के लिए 8 टेकऑफ और लैंडिंग का मानक तय किया है, लेकिन UCADA ने सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसे बढ़ाकर 10 टेकऑफ-लैंडिंग और 10 घंटे की अनिवार्य फ्लाइंग कर दिया है। इसके बाद ही पायलटों को यहां उड़ान की अनुमति मिल रही है। पायलट भटके या स्पीड तोड़ी तो खैर नहीं इस बार यात्रा में सुरक्षा के लिहाज से तीन बड़े तकनीकी बदलाव किए गए हैं। साफ और खराब मौसम के लिए अलग-अलग रूट (किलो रूट्स) बनाए गए हैं। सभी पायलटों को इन्हीं तय रास्तों से जाना होता है, जिससे उड़ान और लैंडिंग का समय बिल्कुल सटीक रहता है। सभी चॉपर में विशेष ट्रैकिंग डिवाइस लगाए गए हैं। यदि कोई पायलट तय रूट से थोड़ा भी लेफ्ट या राइट होता है, या स्पीड लिमिट क्रॉस करता है, तो तुरंत चेतावनी दी जाती है। यह डिवाइस एक महीने तक का पूरा डेटा (टेकऑफ का समय, रूट, स्पीड) स्टोर रखता है। केदारनाथ और बद्रीनाथ में परमानेंट एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के निर्माण के लिए एनओसी मिल गई है और काम शुरू हो गया है। फिलहाल टेंपरेरी एटीसी काम कर रहे हैं। ऑपरेटरों की मनमानी और नियमों के उल्लंघन पर आशीष चौहान ने सख्त लहजे में कहा, सभी 8 ऑपरेटर 100% एसओपी का पालन कर रहे हैं। जो भी इधर-उधर करने की कोशिश करता है, उसे तुरंत ग्राउंडेड कर दिया जाता है और उसकी फ्लाइंग रोक दी जाती है। अब तक फाइन लगाने की नौबत नहीं आई है क्योंकि फ्लाइंग बंद करने की कार्रवाई ही असरदार साबित हो रही है। धामों पर बनेंगे 2 से 3 नए हेलीपैड यात्रियों की बढ़ती संख्या और हेलिकॉप्टर की लैंडिंग में आ रही दिक्कतों पर UCADA ने बड़ा प्लान तैयार किया है। चौहान ने बताया कि जब तक यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ (एंड पॉइंट्स) पर जमीन नहीं बढ़ेगी, तब तक उड़ानें बढ़ाने का फायदा नहीं है। इसलिए, हर धाम के लिए 2 से 3 नए हेलिपैड बनाने के सर्वे पूरे कर लिए गए हैं। जैसे-जैसे ये हेलीपैड तैयार होते जाएंगे, उन्हें परमिशन दी जाती रहेगी। वहीं रुद्रप्रयाग के जिला पर्यटन अधिकारी एवं हेली नोडल अधिकारी राहुल चौबे ने बताया कि इस बार हेली सेवाओं के जरिए लगभग 12,100 यात्री बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं।

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