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Terror Shielding Nations Reputation Damaged; Pakistan-China Operation Sindoor

Terror Shielding Nations Reputation Damaged; Pakistan-China Operation Sindoor
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10 मिनट पहले

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साप्ताहिक बैठक के दौरान विदेश मंत्रालय (MEA) ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर पूछे गए सवालों के जवाब दिए।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान चीन के पाकिस्तान को समर्थन देने पर कहा कि आतंकवाद की रक्षा करने वाले देशों को दुनिया देख रही है कि वे खुद को किसके साथ जोड़ रहे हैं। उन्हें इस बात पर विचार करना चाहिए कि ऐसे काम से उनकी प्रतिष्ठा पर क्या प्रभाव पड़ता है।

मंगलवार को विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान उन रिपोर्ट्स का जिक्र हुआ, जिनमें चीन ने स्वीकार किया था कि उसने मई 2025 के सैन्य संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को तकनीकी मदद दी थी। MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस बारे में कहा कि हमने ऐसी रिपोर्टें देखी हैं जो इस बात की पुष्टि करती हैं।

आपरेशन सिंदूर सोची-समझी कार्रवाई

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए आतंकवादियों पर हमला करता है। पहलगाम में हुए आतंकी हमलों के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए करारा जवाब दिया है। यह एक सोची-समझी कार्रवाई थी, जिसका मकसद पाकिस्तान की मदद से चल रहे आतंकी अड्डों को पूरी तरह खत्म करना था।

हाल ही में 7 मई को भारत ने ऑपरेशन की पहली वर्षगांठ मनाई है। ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 भारतीय नागरिकों की हत्या कर दी गई थी।

चीनी इंजीनियर ने माना- विमानों को टेक्निकली तैयार किया

चीन ने शनिवार को पहली बार सार्वजनिक तौर पर माना है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसने पाकिस्तान को मदद दी थी।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी सरकारी मीडिया CCTV पर प्रसारित इंटरव्यू में चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के इंजीनियर झांग हेंग ने कहा कि उनकी टीम पाकिस्तान में तकनीकी सहायता दे रही थी।

उन्होंने बताया कि उनका काम लड़ाकू विमानों और उनसे जुड़े सिस्टम को पूरी तरह युद्ध के लिए तैयार रखना था। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान एयरफोर्स चीन में बने J-10CE लड़ाकू विमान इस्तेमाल करती है। ये विमान AVIC की सहायक कंपनी बनाती है।

भारतीय सेना के डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह जुलाई 2025 में दावा कर चुके हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को महत्वपूर्ण सहायता दी थी।

पाक ने गुजरात से कश्मीर तक 900 ड्रोन दागे थे

भारतीय सेना ने 7 मई को जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें DGMO जनरल राजीव घई और एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने मीडिया को जानकारी दी।

भारतीय सेना ने 7 मई को जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें DGMO जनरल राजीव घई और एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने मीडिया को जानकारी दी।

ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने पर भारतीय सैन्य बलों की समीक्षा में कई अहम खुलासे हुए हैं। पाकिस्तान, चीन और तुर्किये की तिकड़ी ने 7 और 8 मई की रात को 900 ड्रोन दागे थे। कश्मीर में LOC से लेकर गुजरात में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कुछ घंटों में स्वॉर्म ड्रोन दागे गए थे।

भारतीय वायुसेना के एयर कमांड और कंट्रोल सिस्टम ने पाकिस्तान के स्वॉर्म ड्रोन को तबाह कर दिया। पाकिस्तान भारत के एक भी अहम सैन्य बेस को नुकसान पहुंचाने में सफल नहीं हो पाया।

पाकिस्तान ने यूक्रेन-रूस युद्ध में इस्तेमाल किए गए स्वॉर्म ड्रोन अटैक को कॉपी किया था। बता दें कि यह रणनीति अक्सर नाटो देशों की तरफ से एडवांस वॉर में अपनाई जाती है।

पाकिस्तान ने 4 मंसूबों के साथ प्लान बनाया था…

भारतीय एयर डिफेंस को सस्ते ड्रोन से परेशान करना: भारत की एयर डिफेंस क्षमता को सस्ते ड्रोन मार गिराने में एग्जॉस्ट करना था। नए आकलन के अनुसार पाक को सस्ते ड्रोन उपलब्ध कराने में तुर्किये का पूरा योगदान था।

ड्रोन हमलों से भारत पर महंगे युद्ध का भार थोपना: पाक, चीन व तुर्किये सस्ते एरियल हमलों से भारत पर बेहद महंगा आर्थिक युद्ध थोपने की फिराक में था। 30 से 50 हजार रुपए कीमत के ड्रोन दागकर भारत को आत्मरक्षा में ढाई करोड़ या फिर अधिक कीमत वाली मिसाइलें चलाने का मजबूर करना था।

रडार और अन्य टोही नेटवर्क में घुसपैठ करना: भारत के रडार एवं अन्य सर्विलांस नेटवर्क को एक्सपोज करने के लिए मजबूर करना था। पाकिस्तान सिर्फ भारतीय कार्रवाई का जवाब देने के बजाय नेटवर्क वारफेयर की तैयारी कर चुका था। इसके लिए पाक को चीन ने अपना सर्विलांस सिस्टम बायडू भी दिया था।

एरियल सर्विलांस में कमियों को उजागर करना: भारतीय एरियल सर्विलांस और डिफेंस में गैप और कर्मियों को उजागर करना था। लेकिन भारतीय वायु सेना के एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (आईएसीसीएस) की सफलता भी सामने आई है। सैन्य समीक्षा के अनुसार आईएसीसीएस से नेटवर्क सेंट्रिक वारफेयर की क्षमता साबित हुई।

सेना बोली- ऑपरेशन सिंदूर में 100+ पाकिस्तानी जवान मारे गए

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना ने गुरुवार को कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साफ संदेश दिया कि पाकिस्तान में कोई भी आतंकवादी ठिकाना सुरक्षित नहीं है। यह अभियान अंत नहीं, बल्कि शुरुआत थी। भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ता रहेगा।

जयपुर में गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेना ने बताया, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के 100 से ज्यादा जवानों और टेररिस्ट कैंप में 100 से ज्यादा आतंकियों की मौत हुई है।

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पूरी खबर पढ़ें…

भारत- पहली बार 50 हजार जवानों की अलग ड्रोन फोर्स:BSF और ITBP में भी बनेंगी, किसी भी सैन्य हमले में सबसे पहले यही प्रहार करेंगी

ऑपरेशन सिंदूर और वैश्विक युद्धों (रूस-यूक्रेन व पश्चिम एशिया) से सबक लेते हुए भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान ने एक ‘ड्रोन फोर्स’ बनाने का निर्णय लिया है। यह फोर्स किसी भी सैन्य कार्रवाई में ‘फर्स्ट रेस्पोंडर’ (पहली जवाबी कार्रवाई) के तौर पर तैनात की जाएगी। इसे डेटा और कॉग्निटिव वारफेयर फोर्स का तकनीकी समर्थन होगा। पढ़ें पूरी खबर…

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हाल ही में 7 मई को भारत ने ऑपरेशन की पहली वर्षगांठ मनाई है। ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 भारतीय नागरिकों की हत्या कर दी गई थी।

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भारतीय वायुसेना के एयर कमांड और कंट्रोल सिस्टम ने पाकिस्तान के स्वॉर्म ड्रोन को तबाह कर दिया। पाकिस्तान भारत के एक भी अहम सैन्य बेस को नुकसान पहुंचाने में सफल नहीं हो पाया।

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रडार और अन्य टोही नेटवर्क में घुसपैठ करना: भारत के रडार एवं अन्य सर्विलांस नेटवर्क को एक्सपोज करने के लिए मजबूर करना था। पाकिस्तान सिर्फ भारतीय कार्रवाई का जवाब देने के बजाय नेटवर्क वारफेयर की तैयारी कर चुका था। इसके लिए पाक को चीन ने अपना सर्विलांस सिस्टम बायडू भी दिया था।

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सेना बोली- ऑपरेशन सिंदूर में 100+ पाकिस्तानी जवान मारे गए

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना ने गुरुवार को कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साफ संदेश दिया कि पाकिस्तान में कोई भी आतंकवादी ठिकाना सुरक्षित नहीं है। यह अभियान अंत नहीं, बल्कि शुरुआत थी। भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ता रहेगा।

जयपुर में गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेना ने बताया, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के 100 से ज्यादा जवानों और टेररिस्ट कैंप में 100 से ज्यादा आतंकियों की मौत हुई है।

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ऑपरेशन सिंदूर और वैश्विक युद्धों (रूस-यूक्रेन व पश्चिम एशिया) से सबक लेते हुए भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान ने एक ‘ड्रोन फोर्स’ बनाने का निर्णय लिया है। यह फोर्स किसी भी सैन्य कार्रवाई में ‘फर्स्ट रेस्पोंडर’ (पहली जवाबी कार्रवाई) के तौर पर तैनात की जाएगी। इसे डेटा और कॉग्निटिव वारफेयर फोर्स का तकनीकी समर्थन होगा। पढ़ें पूरी खबर…

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