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Javed Akhtar Condemns Taliban Law on Domestic Violence

Javed Akhtar Condemns Taliban Law on Domestic Violence

59 मिनट पहले

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बॉलीवुड के जाने-माने गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने तालिबान के उस नए कानून की कड़ी निंदा की है, जिसमें घरेलू हिंसा को जायज बताया गया है। उन्होंने इसे धर्म के नाम पर इंसानियत का अपमान कहा और भारतीय मौलवियों-मुफ्तियों से बिना शर्त इसे खारिज करने की अपील की।

तालिबान की नई 90 पेज की दंड संहिता के तहत घरेलू हिंसा को बड़े स्तर पर अनुमति दी गई है। इस कानून के मुताबिक यदि पति अपनी पत्नी को बिना हड्डी टूटे या खुले घाव के मारता है, तो वह अपराध नहीं माना जाएगा। इसके अलावा, यदि कोई महिला बिना पति की अनुमति अपने मायके जाती है, तो उसे तीन महीने तक जेल की सजा का सामना भी करना पड़ सकता है।

जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया x पर पोस्ट शेयर कर कहा कि तालिबान ने पत्नी की पिटाई को तभी अपराध माना है जब हड्डी टुटे या गंभीर चोट हो, और इसके लिए भी सबूत का जिम्मा महिला पर डाला है, जो कि एक भयावह सामाजिक चुनौति है। उन्होंने इसके लिए पूरे धार्मिक समुदाय की प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया है ताकि इस तरह के नियमों को धर्म के नाम पर लागू होने से रोका जा सके।

विश्लेषकों का कहना है कि तालिबान द्वारा जारी यह कोड महिलाओं के कानूनी अधिकारों को कमजोर करने वाला है और इससे घरेलू हिंसा जैसी कुप्रथाएं सरकारी मान्यता पाती दिखाई देती हैं। पहले के अधिकार, जैसे कि 2009 का EVAW (Elimination of Violence Against Women) कानून, अब पूरी तरह प्रभावहीन होते जा रहे हैं, जिससे महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में अब न्याय पाना और भी कठिन हो गया है।

तालिबान के इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारी आलोचना बटोरी है। कई मानवाधिकार समूहों और संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय निकायों ने इसे महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ एक गंभीर और विघातक कदम बताया है। आलोचकों का कहना है कि यह कानून सिर्फ महिलाओं के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देगा बल्कि उन्हें सामाजिक और कानूनी रूप से भी असमर्थ बनाएगा।

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59 मिनट पहले

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बॉलीवुड के जाने-माने गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने तालिबान के उस नए कानून की कड़ी निंदा की है, जिसमें घरेलू हिंसा को जायज बताया गया है। उन्होंने इसे धर्म के नाम पर इंसानियत का अपमान कहा और भारतीय मौलवियों-मुफ्तियों से बिना शर्त इसे खारिज करने की अपील की।

तालिबान की नई 90 पेज की दंड संहिता के तहत घरेलू हिंसा को बड़े स्तर पर अनुमति दी गई है। इस कानून के मुताबिक यदि पति अपनी पत्नी को बिना हड्डी टूटे या खुले घाव के मारता है, तो वह अपराध नहीं माना जाएगा। इसके अलावा, यदि कोई महिला बिना पति की अनुमति अपने मायके जाती है, तो उसे तीन महीने तक जेल की सजा का सामना भी करना पड़ सकता है।

जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया x पर पोस्ट शेयर कर कहा कि तालिबान ने पत्नी की पिटाई को तभी अपराध माना है जब हड्डी टुटे या गंभीर चोट हो, और इसके लिए भी सबूत का जिम्मा महिला पर डाला है, जो कि एक भयावह सामाजिक चुनौति है। उन्होंने इसके लिए पूरे धार्मिक समुदाय की प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया है ताकि इस तरह के नियमों को धर्म के नाम पर लागू होने से रोका जा सके।

विश्लेषकों का कहना है कि तालिबान द्वारा जारी यह कोड महिलाओं के कानूनी अधिकारों को कमजोर करने वाला है और इससे घरेलू हिंसा जैसी कुप्रथाएं सरकारी मान्यता पाती दिखाई देती हैं। पहले के अधिकार, जैसे कि 2009 का EVAW (Elimination of Violence Against Women) कानून, अब पूरी तरह प्रभावहीन होते जा रहे हैं, जिससे महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में अब न्याय पाना और भी कठिन हो गया है।

तालिबान के इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारी आलोचना बटोरी है। कई मानवाधिकार समूहों और संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय निकायों ने इसे महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ एक गंभीर और विघातक कदम बताया है। आलोचकों का कहना है कि यह कानून सिर्फ महिलाओं के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देगा बल्कि उन्हें सामाजिक और कानूनी रूप से भी असमर्थ बनाएगा।

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