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Health News: अक्सर आपने सुना होगा कि मदार का पौधा काफी जहरीला होता है और ये जान भी ले सकता है, लेकिन आयुर्वेद में इसके फायदे के बारे में भी बताया गया है. यह दर्द, सूजन, त्वचा रोग और सांस संबंधी परेशानियों में राहत देने की क्षमता रखता है. आइए इसके आयुर्वेदिक फायदों के बारे में जानते हैं.
बलिया: अक्सर गांव-देहात की पगडंडियों, खेतों की मेड़ों और सड़कों के किनारे खासतौर से जनपद बलिया में मदार का पौधा देखने को मिल जाता है. इसको आक या अकौआ के नाम से भी जाना जाता है. यह न केवल एक जंगली पौधा है, बल्कि देसी इलाजों का पुराना खजाना भी है. सदियों से इसका आयुर्वेद चिकित्सा में इस्तेमाल किया जाता रहा है. यह दर्द, सूजन, त्वचा रोग और सांस संबंधी परेशानियों में राहत देने की क्षमता रखता है. मदार के बड़े-बड़े पत्ते और सफेद दूधनुमा रस इसे खास पहचान देते हैं. गांवों में बुजुर्ग आज भी जोड़ों के दर्द या कमर की तकलीफ होने पर इसके पत्तों को हल्का गर्म करके बांधने की सलाह देते हैं. यह भगवान शिव को बहुत पसंद है.
सूजन कम और दर्द में जल्द आराम
बलिया जनपद की फेमस सात साल अनुभवी आयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रियंका सिंह के अनुसार, मदार से सूजन कम और दर्द में जल्द आराम मिलता है. इसके अलावा, मदार के दूध यानी लेटेक्स का उपयोग दाद, खुजली, फोड़े-फुंसी और त्वचा संक्रमण जैसी समस्याओं में बाहर से और सावधानी से किया जा सकता है. मदार/आक के सूखे फूलों और जड़ का इस्तेमाल खांसी, कफ और अस्थमा जैसी दिक्कतों में भी घरेलू नुस्खों के रूप में किया जाता है. अगर आप भी दांत दर्द से परेशान हैं, तो इसके दूध का हल्का इस्तेमाल कर सकते हैं. पुराने समय में घाव सुखाने और संक्रमण कम करने के लिए इसके पत्तों का लेप लगाने की परंपरा भी रही है.
तंत्रिका तंत्र पर कर सकता है असर
उन्होंने आगे कहा कि मदार का पौधा जितना फायदेमंद है, उतना ही खतरनाक भी साबित हो सकता है. मदार का सफेद दूध विषैला होता है. अगर यह आंखों में चला जाए, तो गंभीर नुकसान या अंधापन की समस्या तक हो सकती है. इसको त्वचा पर अधिक मात्रा में लगाने से जलन, खुजली और छाले पड़ सकते हैं. इसका सेवन नहीं किया जाता है, गलती से सेवन करने पर उल्टी, दस्त, दिल की धड़कन में गड़बड़ी और तंत्रिका तंत्र पर असर पड़ने का खतरा रहता है. इसका केवल बाहरी उपयोग ही किया जाता है. मदार का इस्तेमाल बिना जानकारी या विशेषज्ञ की देख-रेख के नहीं करना चाहिए. अपने मन से इसका प्रयोग लाभकारी नहीं, बल्कि जहर समान हो सकता है.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.













































