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Sunita Williams Space ISS Station Incident; NASA

Sunita Williams Space ISS Station Incident; NASA

वाशिंगटन13 घंटे पहले

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यह तस्वीर जनवरी 2026 की है जब सुनीता विलियम्स नई दिल्ली के अमेरिकन सेंटर में युवाओं के साथ हुए इंटरैक्टिव सेशन में पहुंचीं थीं।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने माना कि सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष में फंसना खतरनाक था। नासा ने इस मिशन को दुर्घटना की टाइप ए कैटेगरी में रखा गया है। इसी कैटेगरी को दुर्घटना की सबसे गंभीर कैटेगरी माना जाता है।

चैलेंजर और कोलंबिया शटल दुर्घटनाओं के लिए भी इसी कैटेगरी का इस्तेमाल किया गया था। कोलंबिया शटल दुर्घटना में ही भारत की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का निधन हुआ था।

19 फरवरी 2026 को जारी 311 पेज की रिपोर्ट में नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमान ने लिखा- सुनीता विलियम्स के मिशन में गंभीर खामियां थी। उन्होंने कमियों को नजरअंदाज करने के लिए एजेंसी और बोइंग की कड़ी आलोचना की।

दरअसल, सुनीता विलियम्स साल 2024 में 8 दिन के मिशन पर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंची थीं, लेकिन तकनीकी कारणों से उनकी वापसी में 9 महीने से ज्यादा समय लग गया था।

सुनीता विलियम्स, बुच विल्मोर के साथ 6 जून 2024 को स्पेस स्टेशन पहुंची थीं। 8 दिन का उनका सफर 9 महीनों में बदल गया।

सुनीता विलियम्स, बुच विल्मोर के साथ 6 जून 2024 को स्पेस स्टेशन पहुंची थीं। 8 दिन का उनका सफर 9 महीनों में बदल गया।

जनवरी में सुनीता विलियम्स ने 27 साल बाद रिटायरमेंट लिया

NASA की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने 27 साल के बाद रिटायरमेंट लिया है। उनका रिटायरमेंट 27 दिसंबर 2025 से लागू हुआ। हालांकि NASA ने इसकी घोषणा 20 जनवरी को की थी।

सुनीता 27 साल पहले 1998 में नासा से जुड़ी थीं। उन्होंने NASA के 3 मिशन में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में 608 दिन बिताए। पहली बार वह 9 दिसंबर 2006 में अंतरिक्ष में गई थी।

सुनीता ने अंतरिक्ष में 9 स्पेसवॉक की। इस दौरान उन्होंने 62 घंटे 6 मिनट तक अंतरिक्ष में चहलकदमी की। यह किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री में सबसे ज्यादा है।

सुनीता बोलीं- स्पेस से धरती देखने पर महसूस होता है कि हम सब एक हैं

सुनीता पिछले महीने भारत दौरे पर आईं थीं। उन्होंने दिल्ली के अमेरिकन सेंटर में ‘आंखें सितारों पर, पैर जमीं पर’ सेमिनार में हिस्सा भी लिया था।

उन्होंने यह भी कहा कि यह काम सबके फायदे, सहयोग और पारदर्शिता के साथ, लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि किसी एक देश का दबदबा न हो और पूरी मानवता को इसका लाभ मिले।

भारत आना घर वापसी जैसा: भारत आना उन्हें घर वापसी जैसा लगता है, क्योंकि उनके पिता गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन गांव से थे। वहीं, चांद पर जाने के NDTV के सवाल पर मजाकिया लहजे में कहा, ‘मैं चंद्रमा पर जाना चाहती हूं, लेकिन मेरे पति मुझे इजाजत नहीं देंगे। घर वापसी और जिम्मेदारी सौंपने का समय आ गया है। अंतरिक्ष खोज में अगली पीढ़ी को अपना स्थान बनाना होगा।

अंतरिक्ष में बिताए दिन पर: क्या स्पेस ट्रैवल ने उनकी जिंदगी के नजरिए को बदला है, तो उन्होंने कहा- हां, बिल्कुल। जब आप धरती को स्पेस से देखते हैं, तो महसूस होता है कि हम सब एक हैं और हमें ज्यादा करीब से मिलकर काम करना चाहिए।

अंतरिक्ष में फैले कचरे पर: पिछले एक दशक में यह एक बड़ी चुनौती बन गई है और इसे मैनेज करने के लिए नई टेक्नोलॉजी की जरूरत है।

अंतरिक्ष मिशन को याद किया: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में बिताए समय और उस वक्त के चुनौतीपूर्ण दौर पर कहा, जब 8 दिन का मिशन तकनीकी दिक्कतों के कारण नौ महीने से ज्यादा का हो गया। इस दौरान ISS पर मल्टी-कल्चरल क्रू के साथ त्योहार मनाने के विजुअल्स भी दिखाए गए।

कल्पना चावला को 16 फरवरी 2003 को वापस धरती पर लौट आना था, लेकिन लैंडिंग से 16 मिनट पहले उनके यान में धमाका हो गया था। तस्वीर- नासा

कल्पना चावला को 16 फरवरी 2003 को वापस धरती पर लौट आना था, लेकिन लैंडिंग से 16 मिनट पहले उनके यान में धमाका हो गया था। तस्वीर- नासा

अब जानिए कल्पना चावला के बारे में…

भारत की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला ने पहली बार 19 नवंबर 1997 को स्पेस के लिए उड़ान भरी थी। अपनी पहली स्पेस यात्रा में वो 372 घंटे अंतरिक्ष में रही थीं। इसके बाद उन्हें 16 जनवरी 2003 को दूसरी बार अंतरिक्ष में जाने का मौका मिला।

1 फरवरी 2003 को कल्पना चावला को सुरक्षित धरती पर वापस लौट आना था, लेकिन उनका यह मिशन फेल हो गया था। चावला के स्पेसक्राफ्ट कोलंबिया शटल STS-107 के टेकऑफ करते वक्त यान के ही फ्यूल टैंक से निकले इंसुलेटिंग फोम के टुकड़े शटल के बाएं पंख से टकरा गए थे।

इस वजह से जैसे ही कल्पना चावला का स्पेसक्राफ्ट धरती के वायुमंडल में पहुंचा तो हवा के तेज घर्षण की गर्मी से एक बड़ा धमाका हुआ और सभी 7 अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें…

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ये खबर भी पढ़ें…

भास्कर से बोलीं सुनीता विलियम्स- भारतीय स्पेस प्रोग्राम से जुड़ना चाहूंगी, अंतरिक्ष से हिमालय देखना शानदार

भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स ने स्पेस से लौटने के बाद पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की। दैनिक भास्कर इकलौता भारतीय न्यूज संस्थान रहा, जिसे सुनीता विलियम्स से सवाल पूछने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि भारत स्पेस प्रोग्राम में अपनी जगह बना रहा है। वह इसका हिस्सा बनना चाहेंगी। पूरी खबर पढ़ें…

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यह तस्वीर जनवरी 2026 की है जब सुनीता विलियम्स नई दिल्ली के अमेरिकन सेंटर में युवाओं के साथ हुए इंटरैक्टिव सेशन में पहुंचीं थीं।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने माना कि सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष में फंसना खतरनाक था। नासा ने इस मिशन को दुर्घटना की टाइप ए कैटेगरी में रखा गया है। इसी कैटेगरी को दुर्घटना की सबसे गंभीर कैटेगरी माना जाता है।

चैलेंजर और कोलंबिया शटल दुर्घटनाओं के लिए भी इसी कैटेगरी का इस्तेमाल किया गया था। कोलंबिया शटल दुर्घटना में ही भारत की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का निधन हुआ था।

19 फरवरी 2026 को जारी 311 पेज की रिपोर्ट में नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमान ने लिखा- सुनीता विलियम्स के मिशन में गंभीर खामियां थी। उन्होंने कमियों को नजरअंदाज करने के लिए एजेंसी और बोइंग की कड़ी आलोचना की।

दरअसल, सुनीता विलियम्स साल 2024 में 8 दिन के मिशन पर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंची थीं, लेकिन तकनीकी कारणों से उनकी वापसी में 9 महीने से ज्यादा समय लग गया था।

सुनीता विलियम्स, बुच विल्मोर के साथ 6 जून 2024 को स्पेस स्टेशन पहुंची थीं। 8 दिन का उनका सफर 9 महीनों में बदल गया।

सुनीता विलियम्स, बुच विल्मोर के साथ 6 जून 2024 को स्पेस स्टेशन पहुंची थीं। 8 दिन का उनका सफर 9 महीनों में बदल गया।

जनवरी में सुनीता विलियम्स ने 27 साल बाद रिटायरमेंट लिया

NASA की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने 27 साल के बाद रिटायरमेंट लिया है। उनका रिटायरमेंट 27 दिसंबर 2025 से लागू हुआ। हालांकि NASA ने इसकी घोषणा 20 जनवरी को की थी।

सुनीता 27 साल पहले 1998 में नासा से जुड़ी थीं। उन्होंने NASA के 3 मिशन में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में 608 दिन बिताए। पहली बार वह 9 दिसंबर 2006 में अंतरिक्ष में गई थी।

सुनीता ने अंतरिक्ष में 9 स्पेसवॉक की। इस दौरान उन्होंने 62 घंटे 6 मिनट तक अंतरिक्ष में चहलकदमी की। यह किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री में सबसे ज्यादा है।

सुनीता बोलीं- स्पेस से धरती देखने पर महसूस होता है कि हम सब एक हैं

सुनीता पिछले महीने भारत दौरे पर आईं थीं। उन्होंने दिल्ली के अमेरिकन सेंटर में ‘आंखें सितारों पर, पैर जमीं पर’ सेमिनार में हिस्सा भी लिया था।

उन्होंने यह भी कहा कि यह काम सबके फायदे, सहयोग और पारदर्शिता के साथ, लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि किसी एक देश का दबदबा न हो और पूरी मानवता को इसका लाभ मिले।

भारत आना घर वापसी जैसा: भारत आना उन्हें घर वापसी जैसा लगता है, क्योंकि उनके पिता गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन गांव से थे। वहीं, चांद पर जाने के NDTV के सवाल पर मजाकिया लहजे में कहा, ‘मैं चंद्रमा पर जाना चाहती हूं, लेकिन मेरे पति मुझे इजाजत नहीं देंगे। घर वापसी और जिम्मेदारी सौंपने का समय आ गया है। अंतरिक्ष खोज में अगली पीढ़ी को अपना स्थान बनाना होगा।

अंतरिक्ष में बिताए दिन पर: क्या स्पेस ट्रैवल ने उनकी जिंदगी के नजरिए को बदला है, तो उन्होंने कहा- हां, बिल्कुल। जब आप धरती को स्पेस से देखते हैं, तो महसूस होता है कि हम सब एक हैं और हमें ज्यादा करीब से मिलकर काम करना चाहिए।

अंतरिक्ष में फैले कचरे पर: पिछले एक दशक में यह एक बड़ी चुनौती बन गई है और इसे मैनेज करने के लिए नई टेक्नोलॉजी की जरूरत है।

अंतरिक्ष मिशन को याद किया: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में बिताए समय और उस वक्त के चुनौतीपूर्ण दौर पर कहा, जब 8 दिन का मिशन तकनीकी दिक्कतों के कारण नौ महीने से ज्यादा का हो गया। इस दौरान ISS पर मल्टी-कल्चरल क्रू के साथ त्योहार मनाने के विजुअल्स भी दिखाए गए।

कल्पना चावला को 16 फरवरी 2003 को वापस धरती पर लौट आना था, लेकिन लैंडिंग से 16 मिनट पहले उनके यान में धमाका हो गया था। तस्वीर- नासा

कल्पना चावला को 16 फरवरी 2003 को वापस धरती पर लौट आना था, लेकिन लैंडिंग से 16 मिनट पहले उनके यान में धमाका हो गया था। तस्वीर- नासा

अब जानिए कल्पना चावला के बारे में…

भारत की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला ने पहली बार 19 नवंबर 1997 को स्पेस के लिए उड़ान भरी थी। अपनी पहली स्पेस यात्रा में वो 372 घंटे अंतरिक्ष में रही थीं। इसके बाद उन्हें 16 जनवरी 2003 को दूसरी बार अंतरिक्ष में जाने का मौका मिला।

1 फरवरी 2003 को कल्पना चावला को सुरक्षित धरती पर वापस लौट आना था, लेकिन उनका यह मिशन फेल हो गया था। चावला के स्पेसक्राफ्ट कोलंबिया शटल STS-107 के टेकऑफ करते वक्त यान के ही फ्यूल टैंक से निकले इंसुलेटिंग फोम के टुकड़े शटल के बाएं पंख से टकरा गए थे।

इस वजह से जैसे ही कल्पना चावला का स्पेसक्राफ्ट धरती के वायुमंडल में पहुंचा तो हवा के तेज घर्षण की गर्मी से एक बड़ा धमाका हुआ और सभी 7 अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें…

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भास्कर से बोलीं सुनीता विलियम्स- भारतीय स्पेस प्रोग्राम से जुड़ना चाहूंगी, अंतरिक्ष से हिमालय देखना शानदार

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