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रूसी राष्ट्रपति पुतिन 25वीं बार चीन पहुंचे:चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग से मुलाकात करेंगे; पिछले हफ्ते ट्रम्प ने भी बीजिंग का दौरा किया था

रूसी राष्ट्रपति पुतिन 25वीं बार चीन पहुंचे:चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग से मुलाकात करेंगे; पिछले हफ्ते ट्रम्प ने भी बीजिंग का दौरा किया था

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मंगलवार रात दो दिन के दौरे पर चीन पहुंचे। बीजिंग एयरपोर्ट पर चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पुतिन का स्वागत किया। इस दौरान वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब 5 दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी बीजिंग दौरे पर गए थे। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस दौरे में शी और पुतिन दोनों देशों के रिश्तों, व्यापार-रणनीतिक सहयोग और दुनिया के मौजूदा हालात पर चर्चा करेंगे। पुतिन बोले- रिश्ते अभूतपूर्व स्तर पर चीन पहुंचने से पहले जारी वीडियो संदेश में पुतिन ने कहा कि रूस और चीन के रिश्ते अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच भरोसा, आपसी समझ और बराबरी के सहयोग का रिश्ता है। पुतिन ने कहा कि दोनों देश संप्रभुता और राष्ट्रीय एकता जैसे मुद्दों पर एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। उनके मुताबिक, रूस और चीन राजनीति, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। पुतिन 40 से ज्यादा बार जिनपिंग से मिल चुके रूस के राष्ट्रपति पुतिन अब तक 20 से ज्यादा बार चीन का दौरा कर चुके हैं। दोनों नेता अब तक 40 से ज्यादा बार मुलाकात कर चुके हैं। पुतिन और जिनपिंग की दोस्ती दुनिया की सबसे मजबूत राजनीतिक साझेदारियों में मानी जाती है। 2013 में राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग ने अपनी पहली विदेश यात्रा रूस की की थी। वहीं पुतिन भी कई बार चीन को अपनी शुरुआती विदेशी यात्राओं में प्राथमिकता देते रहे हैं। दोनों नेता सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे को करीबी दोस्त और रणनीतिक साझेदार बता चुके हैं। क्रेमलिन के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच सिर्फ औपचारिक कूटनीति नहीं, बल्कि लगातार निजी संवाद भी होता रहा है। फरवरी 2026 में हुई वीडियो बैठक में शी जिनपिंग ने पुतिन को चीन आने का न्योता दिया था, जिसे पुतिन ने तुरंत स्वीकार कर लिया। दोनों नेता BRICS, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और एशिया-प्रशांत मंचों पर भी अक्सर साथ नजर आते हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों में अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबाव के मुकाबले रूस और चीन खुद को मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर के समर्थक के रूप में पेश करते रहे हैं। मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर यानी ऐसी दुनिया, जहां ताकत सिर्फ एक देश नहीं बल्कि कई बड़े देशों में बंटी हो। चीन-रूस के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हुए अमेरिकी प्रभाव को लेकर साझा चिंता के चलते चीन और रूस ने पिछले कुछ सालों में अपने रिश्ते काफी मजबूत किए हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, विदेश नीति, कानून व्यवस्था और आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर लगातार उच्च स्तरीय बैठकें होती रही हैं। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद चीन और रूस के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है। चीन ने रूस से तेल, कोयला और गैस की खरीद बढ़ाई है। वहीं, चीन रूस को कार, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरी बड़ी वस्तुओं का निर्यात भी कर रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल दोनों देशों के बीच व्यापार 228.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था। रूस को इसमें 21.49 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस मिला, जो 2024 के मुकाबले 55% ज्यादा है। हालांकि, पश्चिमी देशों ने चीन पर आरोप लगाया है कि वह यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस को आर्थिक सहारा दे रहा है। पावर ऑफ साइबेरिया-2 पाइपलाइन पर भी नजर माना जा रहा है कि पुतिन और शी जिनपिंग की आगामी बैठक में इस प्रोजेक्ट पर भी चर्चा हो सकती है। रूस लंबे समय से ‘पावर ऑफ साइबेरिया-2’ गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। यह एक बहुत बड़ा गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट है, जिसे रूस और चीन मिलकर बना रहे हैं। इसका मकसद रूस की गैस सीधे चीन तक पहुंचाना है, ताकि दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग और मजबूत हो सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पाइपलाइन के जरिए रूस के यामाल प्रायद्वीप से हर साल करीब 50 अरब क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस मंगोलिया के रास्ते उत्तरी चीन भेजी जा सकेगी। इतनी गैस से 15 से 20 करोड़ घरों की एक साल की जरूरत पूरी हो सकती है। दोनों देशों के बीच पहले से एक पाइपलाइन चल रही है, जिसका नाम पावर ऑफ साइबेरिया-1 है। यह रूस के पूर्वी हिस्से से चीन को गैस देती है, जो दिसंबर 2019 में शुरू हुई थी। दूसरी पाइपलाइन रूस के पश्चिमी हिस्से से गैस लाएगी। ईरान संकट और तेल कीमतों से रूस को राहत अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब दुनिया के ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है। होर्मुज स्ट्रेट के लगभग बंद होने जैसी स्थिति से तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इससे दुनियाभर में आर्थिक मंदी का खतरा भी गहराया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से फिलहाल रूस को कुछ फायदा मिला है। रूस दुनिया के सबसे बड़े तेल और प्राकृतिक गैस भंडार वाले देशों में शामिल है। हालांकि, यूक्रेन युद्ध के कारण रूस अब भी अमेरिका और यूरोपीय देशों के आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। इन प्रतिबंधों का असर रूसी अर्थव्यवस्था पर लगातार बना हुआ है।

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रूसी राष्ट्रपति पुतिन 25वीं बार चीन पहुंचे:चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग से मुलाकात करेंगे; पिछले हफ्ते ट्रम्प ने भी बीजिंग का दौरा किया था

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मंगलवार रात दो दिन के दौरे पर चीन पहुंचे। बीजिंग एयरपोर्ट पर चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पुतिन का स्वागत किया। इस दौरान वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब 5 दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी बीजिंग दौरे पर गए थे। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस दौरे में शी और पुतिन दोनों देशों के रिश्तों, व्यापार-रणनीतिक सहयोग और दुनिया के मौजूदा हालात पर चर्चा करेंगे। पुतिन बोले- रिश्ते अभूतपूर्व स्तर पर चीन पहुंचने से पहले जारी वीडियो संदेश में पुतिन ने कहा कि रूस और चीन के रिश्ते अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच भरोसा, आपसी समझ और बराबरी के सहयोग का रिश्ता है। पुतिन ने कहा कि दोनों देश संप्रभुता और राष्ट्रीय एकता जैसे मुद्दों पर एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। उनके मुताबिक, रूस और चीन राजनीति, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। पुतिन 40 से ज्यादा बार जिनपिंग से मिल चुके रूस के राष्ट्रपति पुतिन अब तक 20 से ज्यादा बार चीन का दौरा कर चुके हैं। दोनों नेता अब तक 40 से ज्यादा बार मुलाकात कर चुके हैं। पुतिन और जिनपिंग की दोस्ती दुनिया की सबसे मजबूत राजनीतिक साझेदारियों में मानी जाती है। 2013 में राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग ने अपनी पहली विदेश यात्रा रूस की की थी। वहीं पुतिन भी कई बार चीन को अपनी शुरुआती विदेशी यात्राओं में प्राथमिकता देते रहे हैं। दोनों नेता सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे को करीबी दोस्त और रणनीतिक साझेदार बता चुके हैं। क्रेमलिन के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच सिर्फ औपचारिक कूटनीति नहीं, बल्कि लगातार निजी संवाद भी होता रहा है। फरवरी 2026 में हुई वीडियो बैठक में शी जिनपिंग ने पुतिन को चीन आने का न्योता दिया था, जिसे पुतिन ने तुरंत स्वीकार कर लिया। दोनों नेता BRICS, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और एशिया-प्रशांत मंचों पर भी अक्सर साथ नजर आते हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों में अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबाव के मुकाबले रूस और चीन खुद को मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर के समर्थक के रूप में पेश करते रहे हैं। मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर यानी ऐसी दुनिया, जहां ताकत सिर्फ एक देश नहीं बल्कि कई बड़े देशों में बंटी हो। चीन-रूस के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हुए अमेरिकी प्रभाव को लेकर साझा चिंता के चलते चीन और रूस ने पिछले कुछ सालों में अपने रिश्ते काफी मजबूत किए हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, विदेश नीति, कानून व्यवस्था और आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर लगातार उच्च स्तरीय बैठकें होती रही हैं। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद चीन और रूस के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है। चीन ने रूस से तेल, कोयला और गैस की खरीद बढ़ाई है। वहीं, चीन रूस को कार, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरी बड़ी वस्तुओं का निर्यात भी कर रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल दोनों देशों के बीच व्यापार 228.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था। रूस को इसमें 21.49 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस मिला, जो 2024 के मुकाबले 55% ज्यादा है। हालांकि, पश्चिमी देशों ने चीन पर आरोप लगाया है कि वह यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस को आर्थिक सहारा दे रहा है। पावर ऑफ साइबेरिया-2 पाइपलाइन पर भी नजर माना जा रहा है कि पुतिन और शी जिनपिंग की आगामी बैठक में इस प्रोजेक्ट पर भी चर्चा हो सकती है। रूस लंबे समय से ‘पावर ऑफ साइबेरिया-2’ गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। यह एक बहुत बड़ा गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट है, जिसे रूस और चीन मिलकर बना रहे हैं। इसका मकसद रूस की गैस सीधे चीन तक पहुंचाना है, ताकि दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग और मजबूत हो सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पाइपलाइन के जरिए रूस के यामाल प्रायद्वीप से हर साल करीब 50 अरब क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस मंगोलिया के रास्ते उत्तरी चीन भेजी जा सकेगी। इतनी गैस से 15 से 20 करोड़ घरों की एक साल की जरूरत पूरी हो सकती है। दोनों देशों के बीच पहले से एक पाइपलाइन चल रही है, जिसका नाम पावर ऑफ साइबेरिया-1 है। यह रूस के पूर्वी हिस्से से चीन को गैस देती है, जो दिसंबर 2019 में शुरू हुई थी। दूसरी पाइपलाइन रूस के पश्चिमी हिस्से से गैस लाएगी। ईरान संकट और तेल कीमतों से रूस को राहत अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब दुनिया के ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है। होर्मुज स्ट्रेट के लगभग बंद होने जैसी स्थिति से तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इससे दुनियाभर में आर्थिक मंदी का खतरा भी गहराया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से फिलहाल रूस को कुछ फायदा मिला है। रूस दुनिया के सबसे बड़े तेल और प्राकृतिक गैस भंडार वाले देशों में शामिल है। हालांकि, यूक्रेन युद्ध के कारण रूस अब भी अमेरिका और यूरोपीय देशों के आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। इन प्रतिबंधों का असर रूसी अर्थव्यवस्था पर लगातार बना हुआ है।

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