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कौन है मिनाक्षी, जिसने विनेश को हराया:रिश्तेदारों ने मारे ताने, जॉन सीना से प्रेरित होकर 10 साल की उम्र से खेल रही कुश्ती

कौन है मिनाक्षी, जिसने विनेश को हराया:रिश्तेदारों ने मारे ताने, जॉन सीना से प्रेरित होकर 10 साल की उम्र से खेल रही कुश्ती

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल खेल स्टेडियम में चल रहे एशियन गेम्स 2026 के सिलेक्शन ट्रायल्स में शनिवार को कुश्ती जगत का सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला। अदालती जंग जीतकर 53 किलोग्राम भारवर्ग के मैट पर उतरीं दिग्गज ओलंपियन विनेश फोगाट को हरियाणा के जींद की रहने वाली युवा पहलवान मीनाक्षी ने सेमीफाइनल मुकाबले में 6-4 से करारी शिकस्त दे दी। विनेश जैसी धाकड़ पहलवान को हराकर मीनाक्षी ने न केवल सबको हैरान कर दिया, बल्कि विनेश का एशियन गेम्स खेलने का सपना भी तोड़ दिया। इस ऐतिहासिक जीत के बाद अचानक सुर्खियों में आईं मीनाक्षी की सफलता के पीछे कड़े संघर्ष, रिश्तेदारों के तानों और माता-पिता के बेजोड़ त्याग की एक बेहद प्रेरणादायक कहानी छिपी है। सेमीफाइनल में दिखाया आक्रामक और रक्षात्मक खेल का बेजोड़ संतुलन ट्रायल्स में लगातार दो बाउट जीतकर आत्मविश्वास से लबरेज विनेश फोगाट के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में मीनाक्षी ने शुरुआत से ही आक्रामक और रक्षात्मक (डिफेंसिव) रणनीति का बेजोड़ संतुलन दिखाया। विनेश जैसी अनुभवी और अंतरराष्ट्रीय स्तर की दिग्गज पहलवान के सामने मीनाक्षी ने जरा भी दबाव महसूस नहीं किया। पूरे मैच के दौरान दोनों के बीच एक-एक अंक बटोरने की कड़ी जंग चली। लेकिन मीनाक्षी ने अपनी फुर्ती और बेहतरीन दांव-पेंच के दम पर विनेश को बैकफुट पर धकेल दिया और यह हाई-वोल्टेज मुकाबला 6-4 से जीतकर इतिहास रच दिया। अब यहां पढ़िए, मीनाक्षी के करियर की कहानी… WWE के ‘जॉन सीना’ हैं फेवरेट, 10 साल की उम्र से शुरू की कुश्ती अपनी इस कामयाबी पर मीनाक्षी बताती हैं कि कुश्ती के प्रति उनका जुनून बचपन से ही था। उन्होंने कहा, “WWE के मशहूर रेसलर जॉन सीना मेरे सबसे पसंदीदा खिलाड़ी हैं। टीवी पर उन्हें देखकर ही मुझे प्रेरणा मिली और मैंने महज 10 साल की उम्र से ही कुश्ती की बारीकियां सीखनी और ट्रेनिंग शुरू कर दी थी।” मीनाक्षी ने शुरुआत में जींद जिले के अपने पैतृक गांव नडानी के स्थानीय कुश्ती सेंटर से प्रैक्टिस शुरू की थी। रिश्तेदार कहते थे- लड़की को बाहर भेजना सही नहीं मीनाक्षी के लिए इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था। समाज और रिश्तेदारों की रूढ़िवादी सोच उनके रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा बनी। मीनाक्षी ने बताया, जब मेरे माता-पिता ने मुझे बेहतर ट्रेनिंग दिलाने के लिए घर से दूर हॉस्टल भेजने का फैसला किया, तो रिश्तेदारों ने इसका कड़ा विरोध किया। वे मेरे पैरंट्स को ताने मारते थे कि लड़की को कुश्ती सिखाना और घर से बाहर भेजना ठीक नहीं है। लेकिन मीनाक्षी ने हार नहीं मानी। जब दंगल में जीतने लगी पैसे, तो रिश्तेदारों के बदले सुर जल्द ही उन्होंने कैडेट वर्ग में मेडल जीता, जिसके बाद हरियाणा सरकार की ओर से उन्हें कैश अवॉर्ड (नकद पुरस्कार) मिलने लगे। मीनाक्षी जब दंगल में जाकर पैसे जीतने लगीं, तो रिश्तेदारों ने फिर सुर बदल लिए और ताना मारा कि पैरंट्स अपनी लड़की को सिर्फ पैसे कमाने के लिए कुश्ती में भेजते हैं। हालांकि, मीनाक्षी और उनके माता-पिता ने इन नकारात्मक बातों को हमेशा नजरअंदाज किया। बेटी के सपनों के लिए पिता ने बदली जगह, सोनीपत में चलाते हैं डेयरी मीनाक्षी तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। अपनी होनहार बेटी की कुश्ती में गहरी रुचि और प्रतिभा को देखकर उनके परिवार ने एक बड़ा फैसला लिया। मीनाक्षी को देश के सबसे बेहतरीन रेसलिंग हब (सोनीपत) में ट्रेनिंग मिल सके, इसके लिए पूरा परिवार जींद छोड़कर सोनीपत शिफ्ट हो गया। मीनाक्षी के घर का पूरा खर्च और उनकी डाइट का जिम्मा उनके पिता उठाते हैं, जो सोनीपत में ही एक डेयरी चलाते हैं। मीनाक्षी ने खेलों के साथ-साथ अपनी पढ़ाई को भी प्रभावित नहीं होने दिया, उन्होंने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से बीए (BA) की डिग्री हासिल की है।

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