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39 वर्षीय नडाल ने चोटों को लेकर किए खुलासे:कहा- दर्द से ज्यादा बड़ा था टेनिस के लिए जुनून, इंजेक्शन लगाकर जीता था 22वां ग्रैंडस्लैम

39 वर्षीय नडाल ने चोटों को लेकर किए खुलासे:कहा- दर्द से ज्यादा बड़ा था टेनिस के लिए जुनून, इंजेक्शन लगाकर जीता था 22वां ग्रैंडस्लैम

साल 2024 में पेरिस की लाल मिट्टी पर जब राफेल नडाल आखिरी बार उतरे, तब दुनिया उन्हें सिर्फ एक महान टेनिस खिलाड़ी के रूप में नहीं देख रही थी। लोग उस इंसान को देख रहे थे, जिसने दो दशक तक दर्द के साथ जीते हुए खेल को अपना सब कुछ दिया। नेटफ्लिक्स की एक नई सीरीज में, 39 वर्षीय स्पेनिश स्टार नडाल ने इस बात का खुलासा किया है कि महानता हासिल करने के लिए उन्होंने अपनी सेहत के साथ कितने जोखिम उठाए। साल 2005 में 19 वर्षीय नडाल ने पहली बार फ्रेंच ओपन खेला और पहले ही प्रयास में खिताब जीत लिया। लंबे बाल, जबरदस्त ताकत और कभी हार न मानने वाले जज्बे ने दुनिया को अपना दीवाना बना लिया, लेकिन उसी साल एक ऐसी समस्या सामने आई, जिसने उनके पूरे करियर में पीछा नहीं छोड़ा। मैड्रिड ओपन के दौरान उनके बाएं पैर में गंभीर चोट लगी। पता चला कि उन्हें म्यूलर-वाईस सिंड्रोम नाम की दुर्लभ बीमारी है। इसमें पैर की हड्डियों में असहनीय दर्द होता है। डॉक्टरों को डर था कि शायद वे दोबारा टेनिस नहीं खेल पाएंगे, लेकिन नडाल ने हार नहीं मानी। विशेष इनसोल (जूते के अंदर का पैड) की मदद से उन्होंने कोर्ट पर वापसी की। हालांकि इसके बाद उन्हें लगभग हर मैच दर्द के साथ खेलना पड़ा। नडाल को हमेशा लगता था कि शायद यह उनका आखिरी सीजन हो। यही सोच उन्हें रुकने नहीं देती थी। वह दर्द सहते रहे, क्योंकि उनके लिए खेल के प्रति जुनून हर तकलीफ से बड़ा था। पैर की समस्या का असर धीरे-धीरे शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी पड़ने लगा। घुटनों में गंभीर चोटें हुईं। दर्द कम करने के लिए उन्हें लगातार दवाइयों का सहारा लेना पड़ता था। ज्यादा पेनकिलर दवाओं के कारण उनकी आंतों में भी परेशानी पैदा हो गई, लेकिन नडाल का सफर यहीं नहीं रुका। फ्रेंच ओपन 2022 में उनके पैर का दर्द इतना बढ़ चुका था कि डॉक्टरों ने नस को सुन्न करने वाले इंजेक्शन लगाए। हालत यह थी कि उन्हें अपने पैर का एहसास तक नहीं हो रहा था। फिर भी उन्होंने रोलां गैरो का 14वां और अपने करियर का आखिरी फ्रेंच ओपन खिताब जीत लिया। नडाल की यह जिद बचपन से ही उनके स्वभाव का हिस्सा थी। उनके कोच और चाचा टोनी नडाल उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में अभ्यास कराते थे। बचपन में टूटी अंगुली के साथ भी उन्होंने एक टूर्नामेंट जीता था। हालांकि लगातार दबाव और तनाव का असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ा। एक समय उन्हें मनोचिकित्सक की मदद लेनी पड़ी। बाद में उन्होंने अपने खेल और सोच में बदलाव किया। 2016 में कार्लोस मोया को कोचिंग टीम में शामिल किया और जीवन को थोड़ा खुलकर जीना सीखा। 2017 से 2024 के बीच उन्होंने आठ और ग्रैंड स्लैम जीते। कुल 22 ग्रैंड स्लैम खिताबों के साथ उन्होंने करियर को अलविदा कहा। नडाल मानते हैं कि अगर उन्होंने दर्द और जोखिम के साथ जीने का फैसला नहीं किया होता, तो शायद उनके नाम 10-12 ग्रैंड स्लैम कम होते।

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39 वर्षीय नडाल ने चोटों को लेकर किए खुलासे:कहा- दर्द से ज्यादा बड़ा था टेनिस के लिए जुनून, इंजेक्शन लगाकर जीता था 22वां ग्रैंडस्लैम

39 वर्षीय नडाल ने चोटों को लेकर किए खुलासे:कहा- दर्द से ज्यादा बड़ा था टेनिस के लिए जुनून, इंजेक्शन लगाकर जीता था 22वां ग्रैंडस्लैम

साल 2024 में पेरिस की लाल मिट्टी पर जब राफेल नडाल आखिरी बार उतरे, तब दुनिया उन्हें सिर्फ एक महान टेनिस खिलाड़ी के रूप में नहीं देख रही थी। लोग उस इंसान को देख रहे थे, जिसने दो दशक तक दर्द के साथ जीते हुए खेल को अपना सब कुछ दिया। नेटफ्लिक्स की एक नई सीरीज में, 39 वर्षीय स्पेनिश स्टार नडाल ने इस बात का खुलासा किया है कि महानता हासिल करने के लिए उन्होंने अपनी सेहत के साथ कितने जोखिम उठाए। साल 2005 में 19 वर्षीय नडाल ने पहली बार फ्रेंच ओपन खेला और पहले ही प्रयास में खिताब जीत लिया। लंबे बाल, जबरदस्त ताकत और कभी हार न मानने वाले जज्बे ने दुनिया को अपना दीवाना बना लिया, लेकिन उसी साल एक ऐसी समस्या सामने आई, जिसने उनके पूरे करियर में पीछा नहीं छोड़ा। मैड्रिड ओपन के दौरान उनके बाएं पैर में गंभीर चोट लगी। पता चला कि उन्हें म्यूलर-वाईस सिंड्रोम नाम की दुर्लभ बीमारी है। इसमें पैर की हड्डियों में असहनीय दर्द होता है। डॉक्टरों को डर था कि शायद वे दोबारा टेनिस नहीं खेल पाएंगे, लेकिन नडाल ने हार नहीं मानी। विशेष इनसोल (जूते के अंदर का पैड) की मदद से उन्होंने कोर्ट पर वापसी की। हालांकि इसके बाद उन्हें लगभग हर मैच दर्द के साथ खेलना पड़ा। नडाल को हमेशा लगता था कि शायद यह उनका आखिरी सीजन हो। यही सोच उन्हें रुकने नहीं देती थी। वह दर्द सहते रहे, क्योंकि उनके लिए खेल के प्रति जुनून हर तकलीफ से बड़ा था। पैर की समस्या का असर धीरे-धीरे शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी पड़ने लगा। घुटनों में गंभीर चोटें हुईं। दर्द कम करने के लिए उन्हें लगातार दवाइयों का सहारा लेना पड़ता था। ज्यादा पेनकिलर दवाओं के कारण उनकी आंतों में भी परेशानी पैदा हो गई, लेकिन नडाल का सफर यहीं नहीं रुका। फ्रेंच ओपन 2022 में उनके पैर का दर्द इतना बढ़ चुका था कि डॉक्टरों ने नस को सुन्न करने वाले इंजेक्शन लगाए। हालत यह थी कि उन्हें अपने पैर का एहसास तक नहीं हो रहा था। फिर भी उन्होंने रोलां गैरो का 14वां और अपने करियर का आखिरी फ्रेंच ओपन खिताब जीत लिया। नडाल की यह जिद बचपन से ही उनके स्वभाव का हिस्सा थी। उनके कोच और चाचा टोनी नडाल उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में अभ्यास कराते थे। बचपन में टूटी अंगुली के साथ भी उन्होंने एक टूर्नामेंट जीता था। हालांकि लगातार दबाव और तनाव का असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ा। एक समय उन्हें मनोचिकित्सक की मदद लेनी पड़ी। बाद में उन्होंने अपने खेल और सोच में बदलाव किया। 2016 में कार्लोस मोया को कोचिंग टीम में शामिल किया और जीवन को थोड़ा खुलकर जीना सीखा। 2017 से 2024 के बीच उन्होंने आठ और ग्रैंड स्लैम जीते। कुल 22 ग्रैंड स्लैम खिताबों के साथ उन्होंने करियर को अलविदा कहा। नडाल मानते हैं कि अगर उन्होंने दर्द और जोखिम के साथ जीने का फैसला नहीं किया होता, तो शायद उनके नाम 10-12 ग्रैंड स्लैम कम होते।

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