- Hindi News
- Career
- Ragini Ballia Student Tricycle Demand | RPwD Act 2016 Disability Rights
6 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
यूपी के बलिया में 7 साल की बच्ची रागिनी का स्कूल जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रागिनी इस वीडियो में प्रशासन से ट्राईसाइकिल की मांग कर रही हैं।
दरअसल रागिनी का एक पैर खराब है और उसको रोज गांव के कच्चे रास्ते से इसी तरह से स्कूल जाना पड़ता है।
ये वीडियो बलिया जिले के मनियर ब्लॉक में आने वाले दिघेड़ा ग्राम का है। क्लास-1 में पढ़ने वाली रागिनी का एक पैर खराब है और वो रोज गांव के कच्चे रास्ते से इसी तरह से कूदते हुए स्कूल जाती है।
6 महीने की उम्र में हादसे क शिकार हुई
रागिनी जब 6 महीने की थी तब एक हादसे में उसका पैर खराब ही गया था। परिवार ने इलाज की कोशिश लेकिन सुविधाओं की कमी और गरीबी की वजह से इलाज ठीक से नहीं हुआ और अब रागिनी इसी तरह चलती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, रागिनी जब छोटे बच्चों को स्कूल जाते देखती थी तो रोने लगती थी। इसी वजह से उसका स्कूल में एडमिशन करवा दिया गया। लेकिन मजदूरी करने वाले मां-बाप उसे रोज स्कूल लेने और छोड़ने नहीं जा सकते।
आर्टिफिशियल पैर या ट्राईसाइकिल की सख्त जरूरत
स्कूल प्रिंसिपल अमित पाल के मुताबिक रागिनी को स्कूल आने जाने में बहुत परेशानी होती है। उसे सरकारी मदद की जरूरत है। आर्टिफिशियल पैर या ट्राईसाइकिल की सख्त जरूरत है।
प्रिंसिपल ने बताया कि लेट एडमिशन की वजह से रागिनी को पिछली योजना का लाभ नहीं मिल सका था, लेकिन अब रजिस्ट्रेशन हो गया है. मामला संज्ञान में आते ही डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर मंगला प्रसाद ने दिव्यांग अधिकारी और डॉक्टर की टीम को रागिनी से मिलने भेजा है।
2000 रुपए की स्कॉलरशिप देगा एजुकेशन डिपार्टमेंट
रागिनी की कहानी सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने रागिनी को आर्टिफिशियल पैर उपलब्ध कराने के साथ ही प्रतिमाह 2000 रुपए की स्कॉलरशिप दिलाने का भरोसा दिया है।
RPwD एक्ट 2016 के तहत दिव्यांग छात्रों को मिलने वाली सुविधाएं

- दिव्यांग बच्चों को RPwD एक्ट 2016 (द राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज एक्ट, 2016) के तहत 6 से 18 साल तक की उम्र तक मुफ्त शिक्षा का अधिकार है।
- आर्टिकल 16 के तहत स्कूल-कॉलेज में दिव्यांग बच्चों को बिना किसी भेदभाव के एडमिशन का अधिकार देता है।
- स्कूलों में रैंप, रेलिंग,स्पेशल टॉयलेट और आने-जाने के लिए सरल व्यवस्था करना अनिवार्य है। ताकि बच्चों को स्कूल आने-जाने या कक्षा में जाने में कठिनाई न हो।
- पात्र दिव्यांग स्टूडेंट्स (रेगुलर क्लास 1 से हाई स्कूल तक)को 40% या उससे ज्यादा दिव्यांगता वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप स्कीम का फायदा देना।
- स्कूल लेवल पर दिव्यांग स्टूडेंट्स को आर्टिफिशियल जैसे हियरिंग मशीन, ब्रेल बुक्स और आईसीटी रिसोर्स (जैसे JAWS और SAFA सॉफ्टवेयर) उपलब्ध कराए जाएं।
- दिव्यांग स्टूडेंट्स की जरूरत के लिए स्पेशल टीचर को सामान्य टीचर्स को ट्रेनिंग लेने के साथ-साथ स्पेशल टीचर की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
———————–
ये खबर भी पढ़ें..
बच्चे स्कूल के बाहर तिरपाल के नीचे पढ़ रहे:शिक्षक बोले- स्कूल कभी भी गिर सकता है, छत से पानी भी टपक रहा; वीडियो वायरल

मप्र के मंडला के एक स्कूल का वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में स्कूल के बच्चे, स्कूल के जर्जर भवन के बाहर तिरपाल (पॉलिथीन की छत) लगाकर पढ़ रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें..















































