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China is also gaining an edge over America in the pharmaceutical industry.

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द न्यूयॉर्क टाइम्स17 मिनट पहले

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शिकागो में कैंसर विशेषज्ञों‎ की सालाना कॉन्फ्रेंस।‎- फाइल फोटो

नई दवाओं के विकास में चीन तेजी से उभरती ‎‎ताकत बनता दिख रहा है। दशकों तक कैंसर ‎‎विशेषज्ञों की सालाना कॉन्फ्रेंस में दवाइयों के ‎‎ट्रायल्स मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोप के ‎‎अस्पताल चलाते थे, लेकिन पिछले सप्ताह‎ शिकागो में आयोजित अमेरिकन सोसायटी ऑफ ‎‎क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी (एएससीओ) की‎ वार्षिक बैठक ने संकेत दिया कि वैश्विक ‎‎बायोटेक्नोलॉजी परिदृश्य बदल रहा है।‎

कभी अपेक्षाकृत छोटी मानी जाने वाली चीन‎ की बायोटेक इंडस्ट्री कुछ ही वर्षों में नई दवाओं ‎के शोध, विकास और क्लीनिकल परीक्षण का‎ बड़ा केंद्र बन गई है। 1989 से एएससीओ ‎सम्मेलन में भाग ले रहे जॉन्स हॉपकिन्स‎ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. ओटिस ब्रॉली के ‎अनुसार, चीन की बायोटेक इंडस्ट्री अब ‎वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज ‎करा चुकी है। हालांकि इस प्रगति ने अमेरिकी‎ अधिकारियों, दवा कंपनियों और चिकित्सा ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎विशेषज्ञों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। उनकी ‎आशंका नई दवाओं के विकास पर नियंत्रण ‎और बायोटेक क्षेत्र में अमेरिका की लंबे समय से‎ बनी बढ़त के कमजोर पड़ने से भी जुड़ी है।‎

अमेरिकी बायोटेक स्टार्टअप्स का कहना है ‎कि उन्हें पेटेंट, रिसर्च पब्लिकेशन और‎ क्लीनिकल ट्रायल्स के क्षेत्र में चीनी कंपनियों से‎ कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। ‎इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या‎ चीन में विकसित दवाएं अमेरिकी मरीजों पर भी‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎ उतनी ही प्रभावी साबित होंगी, जितनी चीनी ‎नागरिकों पर होती हैं। दरअसल, लंग कैंसर के‎ एशियाई मरीज लंबे समय तक जीवित रहते हैं‎ और अन्य नस्ल के लोगों की तुलना में उन्हें‎ इलाज से ज्यादा फायदा होता है। सम्मेलन में सबसे अधिक चर्चा चीनी कंपनी अकेसो ‎बायोफार्मा की कैंसर-रोधी दवा इवोनेसिमैब को‎ लेकर रही। कंपनी इस दवा का अमेरिकी मरीजों‎ पर भी परीक्षण कर रही है।‎

कई बड़ी दवा कंपनियों के चीन से सौदे‎

पिछले कुछ वर्षों से दुनिया की बड़ी फार्मास्युटिकल्स ‎कंपनियां चीन की दवाइयां और कच्चे माल का बड़े पैमाने‎ पर आयात कर रही हैं। इस साल अब तक ऐसे लगभग‎ आधे सौदे चीनी कंपनियों से हुए हैं। ये 2020 से बहुत‎ अधिक हैं। कॉन्फ्रेंस में इवोनेसिमैब सहित कैंसर की अन्य‎ दवाइयों के सौदे फाइजर, मर्क और ब्रिस्टल मायर्स स्क्विब‎ जैसी बड़ी कंपनियों ने किए हैं।‎‎

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शिकागो में कैंसर विशेषज्ञों‎ की सालाना कॉन्फ्रेंस।‎- फाइल फोटो

नई दवाओं के विकास में चीन तेजी से उभरती ‎‎ताकत बनता दिख रहा है। दशकों तक कैंसर ‎‎विशेषज्ञों की सालाना कॉन्फ्रेंस में दवाइयों के ‎‎ट्रायल्स मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोप के ‎‎अस्पताल चलाते थे, लेकिन पिछले सप्ताह‎ शिकागो में आयोजित अमेरिकन सोसायटी ऑफ ‎‎क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी (एएससीओ) की‎ वार्षिक बैठक ने संकेत दिया कि वैश्विक ‎‎बायोटेक्नोलॉजी परिदृश्य बदल रहा है।‎

कभी अपेक्षाकृत छोटी मानी जाने वाली चीन‎ की बायोटेक इंडस्ट्री कुछ ही वर्षों में नई दवाओं ‎के शोध, विकास और क्लीनिकल परीक्षण का‎ बड़ा केंद्र बन गई है। 1989 से एएससीओ ‎सम्मेलन में भाग ले रहे जॉन्स हॉपकिन्स‎ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. ओटिस ब्रॉली के ‎अनुसार, चीन की बायोटेक इंडस्ट्री अब ‎वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज ‎करा चुकी है। हालांकि इस प्रगति ने अमेरिकी‎ अधिकारियों, दवा कंपनियों और चिकित्सा ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎विशेषज्ञों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। उनकी ‎आशंका नई दवाओं के विकास पर नियंत्रण ‎और बायोटेक क्षेत्र में अमेरिका की लंबे समय से‎ बनी बढ़त के कमजोर पड़ने से भी जुड़ी है।‎

अमेरिकी बायोटेक स्टार्टअप्स का कहना है ‎कि उन्हें पेटेंट, रिसर्च पब्लिकेशन और‎ क्लीनिकल ट्रायल्स के क्षेत्र में चीनी कंपनियों से‎ कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। ‎इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या‎ चीन में विकसित दवाएं अमेरिकी मरीजों पर भी‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎ उतनी ही प्रभावी साबित होंगी, जितनी चीनी ‎नागरिकों पर होती हैं। दरअसल, लंग कैंसर के‎ एशियाई मरीज लंबे समय तक जीवित रहते हैं‎ और अन्य नस्ल के लोगों की तुलना में उन्हें‎ इलाज से ज्यादा फायदा होता है। सम्मेलन में सबसे अधिक चर्चा चीनी कंपनी अकेसो ‎बायोफार्मा की कैंसर-रोधी दवा इवोनेसिमैब को‎ लेकर रही। कंपनी इस दवा का अमेरिकी मरीजों‎ पर भी परीक्षण कर रही है।‎

कई बड़ी दवा कंपनियों के चीन से सौदे‎

पिछले कुछ वर्षों से दुनिया की बड़ी फार्मास्युटिकल्स ‎कंपनियां चीन की दवाइयां और कच्चे माल का बड़े पैमाने‎ पर आयात कर रही हैं। इस साल अब तक ऐसे लगभग‎ आधे सौदे चीनी कंपनियों से हुए हैं। ये 2020 से बहुत‎ अधिक हैं। कॉन्फ्रेंस में इवोनेसिमैब सहित कैंसर की अन्य‎ दवाइयों के सौदे फाइजर, मर्क और ब्रिस्टल मायर्स स्क्विब‎ जैसी बड़ी कंपनियों ने किए हैं।‎‎

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