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Ram Gopal Verma Accused of non payment of 1.25 cr after he spoke against FWICE While supporting Ranveer singh

Ram Gopal Verma Accused of non payment of 1.25 cr after he spoke against FWICE While supporting Ranveer singh

6 मिनट पहले

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फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा, रणवीर सिंह का सपोर्ट कर फंसते नजर आ रहे हैं। हाल ही में राम गोपाल वर्मा ने FWICE (फिल्म फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न सिने एप्लॉई) द्वारा रणवीर पर लगाए गए नॉन कोऑर्परेटिव डायरेक्टिव के आरोप पर कहा था कि फेडरेशन को बैन करना चाहिए, रणवीर को नहीं। अब हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में फेडरेशन ने राम गोपाल वर्मा की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि उन पर फेडरेशन के कर्मचारियों के 1.25 करोड़ पेमेंट बकाया है। साथ ही फेडरेशन के चीफ एडवाइजर अशोक पंडित ने माफी की मांग भी की है।

अशोक पंडित ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राम गोपाल वर्मा की निंदा करते हुए कहा ‘हमारी पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कई लोगों ने फेडरेशन पर टिप्पणी की थी, जिनमें से एक राम गोपाल वर्मा भी थे, जिनका हम बहुत सम्मान करते हैं। उन्होंने एक लंबा ट्वीट कर फेडरेशन की आलोचना की, हमारी अधिकारिता पर सवाल उठाए और हमारे खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।’

आगे उन्होंने कहा, ‘बेशक, हम लोकतंत्र में रहते हैं और हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है। लेकिन हम उन्हें याद दिलाना चाहते हैं कि हमारे टेक्नीशियन्स और कर्मचारियों का 1.25 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान अब भी उन पर बकाया है। हम बिना आधार के आरोप नहीं लगा रहे हैं और न ही कोई हिसाब चुकता करने की कोशिश कर रहे हैं। हम केवल उन्हें उस मामले की याद दिला रहे हैं, जो 2017 से लंबित है। यह मामला उनकी फिल्म ऑफिसर से जुड़ा है, जिसमें नागार्जुन ने अभिनय किया था। हमने कई बार उनसे संपर्क किया और इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की।’

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अशोक पंडित ने राम गोपाल वर्मा पर नॉन पेमेंट का आरोप लगाते हुए कहा, ‘2019 में राम गोपाल वर्मा ने फेडरेशन को पत्र लिखकर स्वीकार किया था कि फेडरेशन के सदस्यों और अन्य विक्रेताओं का भुगतान बकाया है। उन्होंने 4 मार्च 2019 तक का समय मांगा था ताकि सभी देनदारियां चुकाई जा सकें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि यदि ऐसा नहीं हो पाया, तो FWICE अपनी ओर से उचित समझी जाने वाली कोई भी कार्रवाई कर सकता है। अब 2026 आ गया है और वे भुगतान अब तक नहीं किए गए हैं।’

आखिर में राम गोपाल वर्मा को चेतावनी देते हुए अशोक पंडित ने कहा, ‘फेडरेशन के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा पर हमें कड़ी आपत्ति है। संगठन को गाली देने के बजाय उन्हें फेडरेशन से माफी मांगनी चाहिए और इन लंबे समय से लंबित बकायों का निपटारा करना चाहिए।’

क्या था राम गोपाल वर्मा का बयान

रणवीर सिंह पर नॉन कॉर्परेटिव डायरेक्टिव की घोषणा होने के बाद कई लोगों ने इसकी निंदा की। इस पर राम गोपाल वर्मा ने रणवीर का सपोर्ट कर आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा था, ‘FWICE पर प्रतिबंध लगाओ, रणवीर सिंह पर नहीं। गांधीजी की शैली में किया जा रहा तथाकथित “बैन” या “असहयोग” आखिरकार FWICE के लिए एक बड़ा मजाक बनकर रह जाएगा।’

‘यह इंडस्ट्री या उसमें काम करने वालों की सुरक्षा नहीं है, जैसा कि वे दावा कर रहे हैं। यह सिर्फ ताकत दिखाने की कोशिश है, जिसे एक बेहद पुरानी और बेकार यूनियन व्यवस्था अंजाम दे रही है, जो किसी तरह अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है।’

आगे उन्होंने लिखा, ‘चाहे FWICE यह दावा करे कि वह 5 लाख या 50 लाख कर्मचारियों को रिप्रेजेंट करता है, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि उन लाखों लोगों में से ज्यादातर को इस विवाद से जुड़े दोनों पक्षों के अंदरूनी फैक्ट्स की जानकारी तक नहीं है।

FWICE न तो कोई अदालत है, न ही सरकार द्वारा अधिकृत कोई नियामक संस्था। अधिक से अधिक इसे एक “कंगारू कोर्ट” कहा जा सकता है, जो परिभाषा के अनुसार न्याय देने का दिखावा करती है, लेकिन वास्तव में स्थापित कानूनी नियमों, उचित प्रक्रिया और निष्पक्षता की अनदेखी करती है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि इसके फैसले अक्सर पहले से ही एक खास एजेंडा रखने वाले लोगों के समूह द्वारा निजी बैठकों में तय कर लिए जाते हैं। इनमें ऐसे अभिनेता भी शामिल होते हैं, जो रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर की जबरदस्त सफलता से बुरी तरह घबराए हुए हैं।’

अब जानिए क्या है पूरा मामला-

FWICE ने 25 मई को रणवीर सिंह के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन जारी किया था, जिसके तहत संस्था ने अपने सभी सदस्यों से रणवीर के किसी भी प्रोजेक्ट में काम न करने को कहा था।

यह पूरा विवाद रणवीर सिंह के फिल्म डॉन 3 से बाहर होने से जुड़ा था। इस फिल्म को फरहान अख्तर की कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट प्रोड्यूस कर रही थी।

मामले में कहा गया कि फिल्म की तैयारियां पूरी होने और शूटिंग शुरू होने से मात्र तीन हफ्ते पहले रणवीर सिंह प्रोजेक्ट से बाहर हो गए। प्रोजेक्ट छोड़ने से हुए नुकसान के एवज में मेकर्स ने रणवीर से 45 करोड़ रुपए के हर्जाने की मांग की थी।

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अशोक पंडित ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राम गोपाल वर्मा की निंदा करते हुए कहा ‘हमारी पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कई लोगों ने फेडरेशन पर टिप्पणी की थी, जिनमें से एक राम गोपाल वर्मा भी थे, जिनका हम बहुत सम्मान करते हैं। उन्होंने एक लंबा ट्वीट कर फेडरेशन की आलोचना की, हमारी अधिकारिता पर सवाल उठाए और हमारे खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।’

आगे उन्होंने कहा, ‘बेशक, हम लोकतंत्र में रहते हैं और हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है। लेकिन हम उन्हें याद दिलाना चाहते हैं कि हमारे टेक्नीशियन्स और कर्मचारियों का 1.25 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान अब भी उन पर बकाया है। हम बिना आधार के आरोप नहीं लगा रहे हैं और न ही कोई हिसाब चुकता करने की कोशिश कर रहे हैं। हम केवल उन्हें उस मामले की याद दिला रहे हैं, जो 2017 से लंबित है। यह मामला उनकी फिल्म ऑफिसर से जुड़ा है, जिसमें नागार्जुन ने अभिनय किया था। हमने कई बार उनसे संपर्क किया और इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की।’

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अशोक पंडित ने राम गोपाल वर्मा पर नॉन पेमेंट का आरोप लगाते हुए कहा, ‘2019 में राम गोपाल वर्मा ने फेडरेशन को पत्र लिखकर स्वीकार किया था कि फेडरेशन के सदस्यों और अन्य विक्रेताओं का भुगतान बकाया है। उन्होंने 4 मार्च 2019 तक का समय मांगा था ताकि सभी देनदारियां चुकाई जा सकें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि यदि ऐसा नहीं हो पाया, तो FWICE अपनी ओर से उचित समझी जाने वाली कोई भी कार्रवाई कर सकता है। अब 2026 आ गया है और वे भुगतान अब तक नहीं किए गए हैं।’

आखिर में राम गोपाल वर्मा को चेतावनी देते हुए अशोक पंडित ने कहा, ‘फेडरेशन के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा पर हमें कड़ी आपत्ति है। संगठन को गाली देने के बजाय उन्हें फेडरेशन से माफी मांगनी चाहिए और इन लंबे समय से लंबित बकायों का निपटारा करना चाहिए।’

क्या था राम गोपाल वर्मा का बयान

रणवीर सिंह पर नॉन कॉर्परेटिव डायरेक्टिव की घोषणा होने के बाद कई लोगों ने इसकी निंदा की। इस पर राम गोपाल वर्मा ने रणवीर का सपोर्ट कर आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा था, ‘FWICE पर प्रतिबंध लगाओ, रणवीर सिंह पर नहीं। गांधीजी की शैली में किया जा रहा तथाकथित “बैन” या “असहयोग” आखिरकार FWICE के लिए एक बड़ा मजाक बनकर रह जाएगा।’

‘यह इंडस्ट्री या उसमें काम करने वालों की सुरक्षा नहीं है, जैसा कि वे दावा कर रहे हैं। यह सिर्फ ताकत दिखाने की कोशिश है, जिसे एक बेहद पुरानी और बेकार यूनियन व्यवस्था अंजाम दे रही है, जो किसी तरह अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है।’

आगे उन्होंने लिखा, ‘चाहे FWICE यह दावा करे कि वह 5 लाख या 50 लाख कर्मचारियों को रिप्रेजेंट करता है, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि उन लाखों लोगों में से ज्यादातर को इस विवाद से जुड़े दोनों पक्षों के अंदरूनी फैक्ट्स की जानकारी तक नहीं है।

FWICE न तो कोई अदालत है, न ही सरकार द्वारा अधिकृत कोई नियामक संस्था। अधिक से अधिक इसे एक “कंगारू कोर्ट” कहा जा सकता है, जो परिभाषा के अनुसार न्याय देने का दिखावा करती है, लेकिन वास्तव में स्थापित कानूनी नियमों, उचित प्रक्रिया और निष्पक्षता की अनदेखी करती है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि इसके फैसले अक्सर पहले से ही एक खास एजेंडा रखने वाले लोगों के समूह द्वारा निजी बैठकों में तय कर लिए जाते हैं। इनमें ऐसे अभिनेता भी शामिल होते हैं, जो रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर की जबरदस्त सफलता से बुरी तरह घबराए हुए हैं।’

अब जानिए क्या है पूरा मामला-

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यह पूरा विवाद रणवीर सिंह के फिल्म डॉन 3 से बाहर होने से जुड़ा था। इस फिल्म को फरहान अख्तर की कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट प्रोड्यूस कर रही थी।

मामले में कहा गया कि फिल्म की तैयारियां पूरी होने और शूटिंग शुरू होने से मात्र तीन हफ्ते पहले रणवीर सिंह प्रोजेक्ट से बाहर हो गए। प्रोजेक्ट छोड़ने से हुए नुकसान के एवज में मेकर्स ने रणवीर से 45 करोड़ रुपए के हर्जाने की मांग की थी।

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