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40% Companies Prefer Degree+AI Skills; China Scraps 12K Degrees, Launches AI Courses

40% Companies Prefer Degree+AI Skills; China Scraps 12K Degrees, Launches AI Courses
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नई दिल्ली5 मिनट पहले

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देश में आईटी, कानून, वाणिज्य, अनुवाद, डिजाइन और पुस्तकालय विज्ञान जैसे क्षेत्रों में बड़ा उलटफेर शुरू हो चुका है। AI के टूल्स ने उन कामों को या तो खत्म कर दिया है या बेहद सिकोड़ दिया है, जिनके लिए लाखों छात्र हर साल डिग्रियां लेते हैं।

टीमलीज जैसी बड़ी एचआर कंपनी का कहना है कि 40% कंपनियां ‘हाइब्रिड स्किल’ यानी डिग्री के साथ AI टूल्स की जानकारी को अनिवार्य मानती हैं। नैस्कॉम की 2024 की रिपोर्ट कहती है कि देश में 82% बीसीए और एमसीए स्नातकों को AI टूल्स की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के अनुसार, नौकरियां उन लोगों के पास रहेंगी जो AI टूल का उपयोग करके उत्पादकता 40% तक बढ़ा सकते हैं।

आईबीएम इंस्टीट्यूट फॉर बिजनेस वैल्यू की रिपोर्ट कहती है कि AI लोगों की जगह नहीं लेगा, पर जो AI का उपयोग करते हैं, वे उनकी जगह ले लेंगे जो ऐसा नहीं करते। ‘फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, 2030 तक 22% नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।

इधर, चीन ने 2021 और 2025 के बीच अपने विश्वविद्यालयों ने 12,200 से अधिक स्नातक (अंडरग्रेजुएट) कार्यक्रमों को रद्द या निलंबित कर दिया, जबकि लगभग 10,200 नए कार्यक्रम शुरू किए।

एक्सपर्ट बोले- तरीका नहीं बदला तो डिग्रियों की कोई वैल्यू नहीं रहेगी

दैनिक भास्कर ने टेक कंपनी ‘पीपुलस्ट्रॉन्ग’ और ‘टैग्ड’ के सह-संस्थापक और एचआर पंकज बंसल से AI के असर पर चर्चा की और उनके 10 सवाल किए, जिन्हें उन्होंने जवाब दिए हैं।

  1. पारंपरिक डिग्री वालों का क्या होगा?पारंपरिक डिग्रियां पूरी तरह बेकार नहीं होंगी, लेकिन उनका स्वरूप अप्रासंगिक हो रहा है। पढ़ाई का तरीका और कंटेंट न बदला, तो उन डिग्रियों की कोई वैल्यू नहीं बचेगी। बाजार में केवल थ्योरी या रट्टा वाले औसत छात्रों की जरूरत खत्म हो रही है। अपग्रेड करना होगा।
  2. जो डिग्री ले रहे हैं, वे क्या कर सकते हैं?जो छात्र अभी सेकंड या थर्ड ईयर में हैं, वे लाइव प्रोजेक्ट पर काम शुरू करें। AI टूल्स का प्रोफेशनल लाइसेंस लें, उस पर 6 महीने रात-दिन काम करें और सॉफ्टवेयर या वेबसाइट्स बनाएं।
  3. जो डिग्री पूरी कर चुके हैं, वे क्या करें?सबसे बेहतरीन रास्ता है- इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट। अगर आपको किसी बड़ी कंपनी में मौका नहीं मिल रहा है, तो छोटे स्टार्टअप, एनजीओ या अपने स्थानीय क्षेत्र की किसी फैक्ट्री या दुकान के पास जाएं। उनकी समस्याओं को समझें और AI से उन्हें सुलझाएं।
  4. ‘ग्रेजुएशन’ की वैल्यू कितनी बचेगी?भारत में अभी नौकरी के आवेदन शॉर्टलिस्ट करने के लिए ग्रेजुएशन की ‘स्टैम्पिंग’ जरूरी है और यह स्थिति अगले 3 से 5 साल तक बनी रहेगी। लेकिन इसके बाद न्यू एजुकेशन पॉलिसी (NEP) का ‘5.5 क्रेडिट स्कोर’ इसे रिप्लेस कर देगा, जहां प्रैक्टिकल काम और प्रोफेशनल कोर्सेज के जरिए अंक मिलेंगे। आने वाले समय में लोग पूछेंगे कि आप ‘5.5 स्केलर’ हैं या नहीं। टेक वर्ल्ड में पहली नौकरी के बाद कोई आपकी डिग्री नहीं पूछेगा।
  5. ऐसे में जॉब पाने का अच्छा तरीका क्या?सबसे अच्छा तरीका है कि आप ‘10x इंजीनियर’ या ‘10x प्रोफेशनल’ बनें, यानी जो अकेले 10 सामान्य लोगों का काम संभाल सके। अगर आप AI की मदद से किसी कंपनी का समय और लागत बचा सकते हैं, तो जहां पहले 5 लाख रु. का शुरुआती पैकेज मिलता था, वहां आज कंपनियां 25 लाख रु. की शुरुआती तनख्वाह देने को तैयार हैं। कंपनियों को ‘औसत’ लोग नहीं, बल्कि काम के लोग चाहिए।
  6. AI कोर्सेज से जॉब के दावे सही हैं?बिल्कुल नहीं। नुक्कड़ पर चल रहे किसी भी संस्थान से AI का सर्टिफिकेट ले लेने से नौकरी की कोई गारंटी नहीं मिलती। AI सर्टिफिकेट सीवी को शॉर्टलिस्ट होने में मदद कर सकता है, पर नौकरी तभी मिलेगी जब बुनियादी योग्यता होगी, AI का व्यावहारिक ज्ञान होगा और असेसमेंट टेस्ट क्लियर करेंगे।
  7. एंट्री लेवल यानी फ्रेशर्स की जॉब्स पर इसका क्या और कितना असर पड़ रहा है?शुरुआती दौर में दबाव जरूर है क्योंकि जो बुनियादी काम पहले 10 लोग मिलकर करते थे, वह अब दो लोग AI की मदद से निपटा रहे हैं। इंफोसिस, विप्रो और टीसीएस जैसी ट्रेडिशनल कंपनियों ने शुरुआत में फ्रेशर्स की हायरिंग रोकी या टाली है। लेकिन यह केवल शॉर्ट-टर्म ट्रेंड है, लॉन्ग-टर्म में जॉब मार्केट में नेट एडिशन (नौकरियों की बढ़ोतरी) ही होने वाला है।
  8. जब आईटी कंपनियां भर्तियां रोक रही हैं, तो नए युवाओं को जॉब कहां मिलेगी?भारत में इस समय ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स यानी जीसीसी (GCCs) की बाढ़ आई हुई है। देश में 4000 से ज्यादा जीसीसी हैं और हर हफ्ते दो नए सेंटर खुल रहे हैं। ये सेंटर्स AI स्किल्स वाले युवाओं को बहुत भारी पैकेज और ऊंची सैलरी पर हायर कर रहे हैं। इसके अलावा धीरे-धीरे ट्रेडिशनल कंपनियों में भी नियुक्तियां दोबारा खुलने लगी हैं।
  9. क्या AI इंसानों को पूरी तरह रिप्लेस कर देगा, क्या इसकी लागत इंसानों से कम है?वैश्विक संगठनों को समझ आने लगा है कि AI की कॉस्ट (टोकन और जीपीयू प्रोसेसिंग लागत) इंसानी लागत से कम नहीं है। कई स्टार्टअप्स का AI बिल इतना ज्यादा आ रहा है कि वे AI टूल्स के बजाय दो इंसानों को हायर करना बेहतर समझ रहे हैं। इसके अलावा, जिन कामों में मानवीय निर्णय और लोगों से जुड़ने की जरूरत होती है, वहां AI कभी रिप्लेस नहीं कर सकता।
  10. वो कौन-सी मानवीय खूबियां और सेक्टर्स हैं, जहां इंसान ही सबसे आगे रहेंगे?AI के दौर में चार मानवीय खूबियां सबसे कीमती हो गई हैं- एग्रीगेशन एबिलिटी (चीजों को आपस में जोड़ने की समझ), डिसीजन मेकिंग (निर्णय क्षमता), हाई ईक्यू (इमोशनल कोशेंट) और अपनी बात को प्रभावी ढंग से बयां करने का हुनर। अगर सेक्टर्स की बात करें, तो हॉस्पिटैलिटी, डेटा साइंसेज, सेल्स और AI-असिस्टेड स्पेशलिस्ट्स (जैसे डॉक्टर या जर्नलिस्ट जो AI जानते हों) के रोल्स हमेशा सुरक्षित और मजबूत रहेंगे।

चीन ने 12 हजार डिग्रियां खत्म कीं, AI कोर्स शुरू

चीन ने 2021 और 2025 के बीच अपने विश्वविद्यालयों ने 12,200 से अधिक स्नातक (अंडरग्रेजुएट) कार्यक्रमों को रद्द या निलंबित कर दिया, जबकि लगभग 10,200 नए कार्यक्रम शुरू किए।

इनमें से कई कटौतियां कला, मानविकी, विदेशी भाषाओं और प्रबंधन में केंद्रित थीं, क्योंकि चीन सरकार विश्वविद्यालयों पर AI, सेमीकंडक्टर्स, रोबोटिक्स और अन्य रणनीतिक उद्योगों के लिए प्रतिभाएं तैयार करने का दबाव बना रही है।

भारत में कर्नाटक सरकार ने 1300 कोर्स की सीटें घटाईं

भारत में फिलहाल कर्नाटक सरकार ने कम दाखिले और अन्य कारकों का हवाला देते हुए शैक्षणिक 2026-27 के लिए सरकारी कॉलेजों में 458 बीए, बीएससी, बीकॉम कार्यक्रम संयोजनों (कॉम्बिनेशन्स) को बंद कर दिया है। 1,300+ कोर्स में सीटें घटाईं।

……………..

यह खबर भी पढ़ें…

सैम ऑल्टमैन बोले- AI से नौकरी जाने का खतरा नहीं: रोजगार में इंसानी हिस्सा बदलना नामुमकिन; शुरुआती डर गलत साबित हुआ

ओपन-AI के CEO सैम ऑल्टमैन ने कहा कि AI की तेज ग्रोथ और इस्तेमाल से दुनिया में जॉब्स एपोकैलिप्स यानी नौकरियों का संकट नहीं आएगा। उन्होंने माना कि तकनीक ने उतने व्हाइट कॉलर जॉब्स खत्म नहीं किए हैं, जितने का उन्हें पहले डर था।CBA के चीफ एग्जीक्यूटिव मैट कॉम्यन को दिए इंटरव्यू में ऑल्टमैन ने कहा कि शुरुआत में वह ग्लोबल एम्प्लॉयमेंट लेवल पर AI के प्रभाव को लेकर चिंतित थे। पूरी खबर पढ़ें…

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नई दिल्ली5 मिनट पहले

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देश में आईटी, कानून, वाणिज्य, अनुवाद, डिजाइन और पुस्तकालय विज्ञान जैसे क्षेत्रों में बड़ा उलटफेर शुरू हो चुका है। AI के टूल्स ने उन कामों को या तो खत्म कर दिया है या बेहद सिकोड़ दिया है, जिनके लिए लाखों छात्र हर साल डिग्रियां लेते हैं।

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  1. पारंपरिक डिग्री वालों का क्या होगा?पारंपरिक डिग्रियां पूरी तरह बेकार नहीं होंगी, लेकिन उनका स्वरूप अप्रासंगिक हो रहा है। पढ़ाई का तरीका और कंटेंट न बदला, तो उन डिग्रियों की कोई वैल्यू नहीं बचेगी। बाजार में केवल थ्योरी या रट्टा वाले औसत छात्रों की जरूरत खत्म हो रही है। अपग्रेड करना होगा।
  2. जो डिग्री ले रहे हैं, वे क्या कर सकते हैं?जो छात्र अभी सेकंड या थर्ड ईयर में हैं, वे लाइव प्रोजेक्ट पर काम शुरू करें। AI टूल्स का प्रोफेशनल लाइसेंस लें, उस पर 6 महीने रात-दिन काम करें और सॉफ्टवेयर या वेबसाइट्स बनाएं।
  3. जो डिग्री पूरी कर चुके हैं, वे क्या करें?सबसे बेहतरीन रास्ता है- इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट। अगर आपको किसी बड़ी कंपनी में मौका नहीं मिल रहा है, तो छोटे स्टार्टअप, एनजीओ या अपने स्थानीय क्षेत्र की किसी फैक्ट्री या दुकान के पास जाएं। उनकी समस्याओं को समझें और AI से उन्हें सुलझाएं।
  4. ‘ग्रेजुएशन’ की वैल्यू कितनी बचेगी?भारत में अभी नौकरी के आवेदन शॉर्टलिस्ट करने के लिए ग्रेजुएशन की ‘स्टैम्पिंग’ जरूरी है और यह स्थिति अगले 3 से 5 साल तक बनी रहेगी। लेकिन इसके बाद न्यू एजुकेशन पॉलिसी (NEP) का ‘5.5 क्रेडिट स्कोर’ इसे रिप्लेस कर देगा, जहां प्रैक्टिकल काम और प्रोफेशनल कोर्सेज के जरिए अंक मिलेंगे। आने वाले समय में लोग पूछेंगे कि आप ‘5.5 स्केलर’ हैं या नहीं। टेक वर्ल्ड में पहली नौकरी के बाद कोई आपकी डिग्री नहीं पूछेगा।
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  6. AI कोर्सेज से जॉब के दावे सही हैं?बिल्कुल नहीं। नुक्कड़ पर चल रहे किसी भी संस्थान से AI का सर्टिफिकेट ले लेने से नौकरी की कोई गारंटी नहीं मिलती। AI सर्टिफिकेट सीवी को शॉर्टलिस्ट होने में मदद कर सकता है, पर नौकरी तभी मिलेगी जब बुनियादी योग्यता होगी, AI का व्यावहारिक ज्ञान होगा और असेसमेंट टेस्ट क्लियर करेंगे।
  7. एंट्री लेवल यानी फ्रेशर्स की जॉब्स पर इसका क्या और कितना असर पड़ रहा है?शुरुआती दौर में दबाव जरूर है क्योंकि जो बुनियादी काम पहले 10 लोग मिलकर करते थे, वह अब दो लोग AI की मदद से निपटा रहे हैं। इंफोसिस, विप्रो और टीसीएस जैसी ट्रेडिशनल कंपनियों ने शुरुआत में फ्रेशर्स की हायरिंग रोकी या टाली है। लेकिन यह केवल शॉर्ट-टर्म ट्रेंड है, लॉन्ग-टर्म में जॉब मार्केट में नेट एडिशन (नौकरियों की बढ़ोतरी) ही होने वाला है।
  8. जब आईटी कंपनियां भर्तियां रोक रही हैं, तो नए युवाओं को जॉब कहां मिलेगी?भारत में इस समय ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स यानी जीसीसी (GCCs) की बाढ़ आई हुई है। देश में 4000 से ज्यादा जीसीसी हैं और हर हफ्ते दो नए सेंटर खुल रहे हैं। ये सेंटर्स AI स्किल्स वाले युवाओं को बहुत भारी पैकेज और ऊंची सैलरी पर हायर कर रहे हैं। इसके अलावा धीरे-धीरे ट्रेडिशनल कंपनियों में भी नियुक्तियां दोबारा खुलने लगी हैं।
  9. क्या AI इंसानों को पूरी तरह रिप्लेस कर देगा, क्या इसकी लागत इंसानों से कम है?वैश्विक संगठनों को समझ आने लगा है कि AI की कॉस्ट (टोकन और जीपीयू प्रोसेसिंग लागत) इंसानी लागत से कम नहीं है। कई स्टार्टअप्स का AI बिल इतना ज्यादा आ रहा है कि वे AI टूल्स के बजाय दो इंसानों को हायर करना बेहतर समझ रहे हैं। इसके अलावा, जिन कामों में मानवीय निर्णय और लोगों से जुड़ने की जरूरत होती है, वहां AI कभी रिप्लेस नहीं कर सकता।
  10. वो कौन-सी मानवीय खूबियां और सेक्टर्स हैं, जहां इंसान ही सबसे आगे रहेंगे?AI के दौर में चार मानवीय खूबियां सबसे कीमती हो गई हैं- एग्रीगेशन एबिलिटी (चीजों को आपस में जोड़ने की समझ), डिसीजन मेकिंग (निर्णय क्षमता), हाई ईक्यू (इमोशनल कोशेंट) और अपनी बात को प्रभावी ढंग से बयां करने का हुनर। अगर सेक्टर्स की बात करें, तो हॉस्पिटैलिटी, डेटा साइंसेज, सेल्स और AI-असिस्टेड स्पेशलिस्ट्स (जैसे डॉक्टर या जर्नलिस्ट जो AI जानते हों) के रोल्स हमेशा सुरक्षित और मजबूत रहेंगे।

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