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नई कहानी लिखूंगा तो बीवी मार देगी:विक्रम भट्ट बोले- बेटी ने प्रेग्नेंसी में फिल्म संभाली, अब नाती और परिवार को समय दूंगा

नई कहानी लिखूंगा तो बीवी मार देगी:विक्रम भट्ट बोले- बेटी ने प्रेग्नेंसी में फिल्म संभाली, अब नाती और परिवार को समय दूंगा

‘हॉन्टेड 3D’ की सफलता के बाद जहां हर कोई विक्रम भट्ट की अगली फिल्म का इंतजार कर रहा है, वहीं डायरेक्टर फिलहाल परिवार को समय देना चाहते हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर अभी नई कहानी लिखने बैठ गए तो शायद बीवी मार दे। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी कृष्णा प्रेग्नेंसी के दौरान भी फिल्म के हर शॉट और फ्रेम पर नजर रख रही थीं। अगर वह साथ नहीं होतीं तो शायद फिल्म बन नहीं पाती। विक्रम भट्ट अब नाना बन चुके हैं और नाती के साथ वक्त बिताना चाहते हैं। सवाल: “हॉन्टेड 3डी: इकोस ऑफ द पास्ट’ को बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। क्या इतनी जल्दी ऐसी उम्मीद थी? जवाब: मुझे उम्मीद और यकीन था कि ‘हॉन्टेड’ और मेरी हॉरर फिल्मों की अपनी ऑडियंस है। कभी वह ज्यादा संख्या में आती है, कभी कम, लेकिन आती जरूर है। हमारा एक प्यार का रिश्ता है। मुझे भरोसा था कि दर्शक मुझे निराश नहीं करेंगे और उन्होंने फिल्म को सफल बनाया। इसके लिए मैं उनका शुक्रगुजार हूं। सवाल : पहली हॉन्टेड को भी लोगों ने पसंद किया था। फिर फ्रेंचाइजी आगे बढ़ाने में इतना समय क्यों लगा? जवाब: मुझे लगता है जिंदगी में हर चीज सही समय पर होती है। आप कितनी भी प्लानिंग कर लें, होता वही है जो ऊपर वाला चाहता है। हमने पहले भी कोशिश की थी, लेकिन बात नहीं बन पाई। फिर लगा कि अब सही समय है और हमने फिल्म बना ली। सवाल: फिल्म की कास्टिंग कैसे तय हुई? चेतना पांडे और मिमोह को कैसे चुना? जवाब: मिमोह पहले से इस फ्रेंचाइजी का हिस्सा रहे हैं। मजाक में कहूं तो उन्होंने ‘हॉन्टेड’ पर अपना हक जमा लिया है। शुरुआत में दूसरी हीरोइन थी, लेकिन कुछ बातें मैच नहीं हुईं। मैं चेतना के साथ दूसरे प्रोजेक्ट पर सोच रहा था, फिर लगा कि वह इस किरदार के लिए सही रहेंगी। मैंने उन्हें कहानी सुनाई और उन्हें पसंद आ गई। सवाल: आपने हॉरर सिनेमा को एक अलग पहचान दी। आज के दर्शक हॉरर में क्या नया चाहते हैं? जवाब: मेरे हिसाब से भारत में हॉरर देखने वाली दो तरह की ऑडियंस है। एक हॉलीवुड स्टाइल हॉरर पसंद करती है, जबकि दूसरी भारतीय अंदाज का हॉरर देखना चाहती है, जिसमें प्यार, रिश्ते और इमोशन हों। मेरी फिल्में दूसरी तरह की ऑडियंस के लिए होती हैं। मेरा मानना है कि फिल्ममेकर का काम मनोरंजन करना है। सवाल : आपकी फिल्मों में हॉरर और इमोशन साथ चलते हैं। दोनों को कैसे बैलेंस करते हैं? जवाब: मेरे लिए हॉरर एक लव स्टोरी का विलेन होता है। अगर दर्शक किरदारों से जुड़ेंगे नहीं और उनके लिए महसूस नहीं करेंगे, तो डर भी महसूस नहीं होगा। इसलिए मेरी फिल्मों में रिश्ते और डर साथ चलते हैं। सवाल : हॉरर अभी भी पूरी तरह मेनस्ट्रीम क्यों नहीं बन पाया? जवाब: मेरा मानना है कि बड़े स्टार्स हॉरर करना पसंद नहीं करते। उन्हें लगता है कि डरते हुए दिखना उनकी इमेज के खिलाफ जाएगा। इसलिए इस जॉनर में कम लोग काम करते हैं। कुछ लोग हॉरर-कॉमेडी बना रहे हैं और कुछ क्लासिक हॉरर। सवाल : क्या कभी आपने किसी बड़े स्टार को खुद फिल्म का विषय सुझाया? जवाब: बहुत ज्यादा नहीं। मुझे पहले से अंदाजा होता है कि जो कहानियां मैं बनाना चाहता हूं, जरूरी नहीं कि हर स्टार उन्हें करना चाहे। एक-दो बार कोशिश की, लेकिन मैं ज्यादा फॉलो-अप नहीं करता। किसी पर दबाव भी नहीं डाल सकता। अगर सामने वाला कहता है कि करेगा, तो ठीक है। अगर कहता है कि सोचकर बताएगा, तो मैं समझ जाता हूं कि शायद उसकी रुचि नहीं है। सवाल : आपको कब लगा कि हॉरर को अपनी पहचान बनाना है और इंडस्ट्री में इसकी अलग जगह बनानी है? जवाब: जब मुझे लगा कि इस तरह की कहानियां बताना मुझे आता है और इनके लिए मेरी अपनी ऑडियंस है। देखिए, मैं डर बेचने वाला इंसान हूं। हर डायरेक्टर कुछ न कुछ बेचता है— कोई इमोशन, कोई लव स्टोरी और कोई कॉमेडी। मैं डर बेचता हूं। मेरी डर की दुकान है। किसी भी दुकान की तरह, जब आपकी दुकान चलने लगती है तो आप उसी पर ज्यादा काम करते हैं। बाद में दूसरी चीजें भी कर सकते हैं, लेकिन पहचान वही रहती है। मेरे लिए हॉरर वही पहचान है। जब तक दर्शक आ रहे हैं और उन्हें पसंद आ रहा है, मैं इसी दुनिया में नई कहानियां सुनाता रहूंगा। सवाल : हर बार हॉरर में कुछ नया लाना कितना मुश्किल होता है? जवाब: ये चुनौती सिर्फ हॉरर में नहीं, हर जॉनर में होती है। लव स्टोरी में नया एंगल, कॉमेडी में नए गैग्स और एक्शन में नया स्केल चाहिए। इसलिए हर फिल्म में कुछ अलग लाने की कोशिश करनी पड़ती है। सवाल: आपके लिए बॉक्स ऑफिस ज्यादा मायने रखता है या समय के साथ फिल्मों का पसंद किया जाना? जवाब: बॉक्स ऑफिस सिर्फ नंबर होते हैं। मेरी कई फिल्मों को रिलीज के समय पसंद नहीं किया गया, लेकिन बाद में वही लोगों की पसंदीदा बन गईं। उदाहरण के तौर पर ‘राज’ को शुरुआत में अच्छे रिव्यू नहीं मिले थे, लेकिन बाद में उसे क्लासिक कहा गया। पहली ‘हॉन्टेड’ के साथ भी ऐसा ही हुआ। रिलीज के समय आलोचना हुई, लेकिन बाद में लोगों ने उसे पसंद किया। मेरा मानना है कि जो फिल्म समय के साथ टिकती है, वही असली मायने में सफल होती है। सवाल : आगे भी हॉरर फिल्में बनाएंगे या कुछ नया सोच रहे हैं? जवाब: अभी मैं कुछ नहीं सोच रहा हूं। इस फिल्म को बनाने में बहुत मेहनत लगी है। थोड़ा आराम करना चाहता हूं और छुट्टियों पर जा रहा हूं। उसके बाद तय करूंगा कि आगे क्या करना है। सवाल : क्या छुट्टियों में भी नई कहानियों पर काम करेंगे? जवाब: अभी अगर मैं छुट्टियों में भी नई कहानियों पर काम करने लगूं तो शायद मेरी बीवी मार दे, क्योंकि उन्हें बिल्कुल समय नहीं दे पाया हूं। मेरी बेटी कृष्णा ने भी इस फिल्म के लिए बहुत मेहनत की है। वह प्रेग्नेंट थीं, लेकिन फिर भी हर शॉट और फ्रेम पर नजर रखती रहीं। सच कहूं तो अगर वह साथ नहीं होतीं तो शायद फिल्म बन नहीं पाती। अब मैं नाना बन चुका हूं, लेकिन नाती के साथ वक्त नहीं बिता पाया हूं। इसलिए फिलहाल परिवार और नाती के साथ समय बिताना चाहता हूं। उसके बाद आगे की फिल्मों के बारे में सोचूंगा।

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‘हॉन्टेड 3D’ की सफलता के बाद जहां हर कोई विक्रम भट्ट की अगली फिल्म का इंतजार कर रहा है, वहीं डायरेक्टर फिलहाल परिवार को समय देना चाहते हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर अभी नई कहानी लिखने बैठ गए तो शायद बीवी मार दे। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी कृष्णा प्रेग्नेंसी के दौरान भी फिल्म के हर शॉट और फ्रेम पर नजर रख रही थीं। अगर वह साथ नहीं होतीं तो शायद फिल्म बन नहीं पाती। विक्रम भट्ट अब नाना बन चुके हैं और नाती के साथ वक्त बिताना चाहते हैं। सवाल: “हॉन्टेड 3डी: इकोस ऑफ द पास्ट’ को बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। क्या इतनी जल्दी ऐसी उम्मीद थी? जवाब: मुझे उम्मीद और यकीन था कि ‘हॉन्टेड’ और मेरी हॉरर फिल्मों की अपनी ऑडियंस है। कभी वह ज्यादा संख्या में आती है, कभी कम, लेकिन आती जरूर है। हमारा एक प्यार का रिश्ता है। मुझे भरोसा था कि दर्शक मुझे निराश नहीं करेंगे और उन्होंने फिल्म को सफल बनाया। इसके लिए मैं उनका शुक्रगुजार हूं। सवाल : पहली हॉन्टेड को भी लोगों ने पसंद किया था। फिर फ्रेंचाइजी आगे बढ़ाने में इतना समय क्यों लगा? जवाब: मुझे लगता है जिंदगी में हर चीज सही समय पर होती है। आप कितनी भी प्लानिंग कर लें, होता वही है जो ऊपर वाला चाहता है। हमने पहले भी कोशिश की थी, लेकिन बात नहीं बन पाई। फिर लगा कि अब सही समय है और हमने फिल्म बना ली। सवाल: फिल्म की कास्टिंग कैसे तय हुई? चेतना पांडे और मिमोह को कैसे चुना? जवाब: मिमोह पहले से इस फ्रेंचाइजी का हिस्सा रहे हैं। मजाक में कहूं तो उन्होंने ‘हॉन्टेड’ पर अपना हक जमा लिया है। शुरुआत में दूसरी हीरोइन थी, लेकिन कुछ बातें मैच नहीं हुईं। मैं चेतना के साथ दूसरे प्रोजेक्ट पर सोच रहा था, फिर लगा कि वह इस किरदार के लिए सही रहेंगी। मैंने उन्हें कहानी सुनाई और उन्हें पसंद आ गई। सवाल: आपने हॉरर सिनेमा को एक अलग पहचान दी। आज के दर्शक हॉरर में क्या नया चाहते हैं? जवाब: मेरे हिसाब से भारत में हॉरर देखने वाली दो तरह की ऑडियंस है। एक हॉलीवुड स्टाइल हॉरर पसंद करती है, जबकि दूसरी भारतीय अंदाज का हॉरर देखना चाहती है, जिसमें प्यार, रिश्ते और इमोशन हों। मेरी फिल्में दूसरी तरह की ऑडियंस के लिए होती हैं। मेरा मानना है कि फिल्ममेकर का काम मनोरंजन करना है। सवाल : आपकी फिल्मों में हॉरर और इमोशन साथ चलते हैं। दोनों को कैसे बैलेंस करते हैं? जवाब: मेरे लिए हॉरर एक लव स्टोरी का विलेन होता है। अगर दर्शक किरदारों से जुड़ेंगे नहीं और उनके लिए महसूस नहीं करेंगे, तो डर भी महसूस नहीं होगा। इसलिए मेरी फिल्मों में रिश्ते और डर साथ चलते हैं। सवाल : हॉरर अभी भी पूरी तरह मेनस्ट्रीम क्यों नहीं बन पाया? 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जवाब: ये चुनौती सिर्फ हॉरर में नहीं, हर जॉनर में होती है। लव स्टोरी में नया एंगल, कॉमेडी में नए गैग्स और एक्शन में नया स्केल चाहिए। इसलिए हर फिल्म में कुछ अलग लाने की कोशिश करनी पड़ती है। सवाल: आपके लिए बॉक्स ऑफिस ज्यादा मायने रखता है या समय के साथ फिल्मों का पसंद किया जाना? जवाब: बॉक्स ऑफिस सिर्फ नंबर होते हैं। मेरी कई फिल्मों को रिलीज के समय पसंद नहीं किया गया, लेकिन बाद में वही लोगों की पसंदीदा बन गईं। उदाहरण के तौर पर ‘राज’ को शुरुआत में अच्छे रिव्यू नहीं मिले थे, लेकिन बाद में उसे क्लासिक कहा गया। पहली ‘हॉन्टेड’ के साथ भी ऐसा ही हुआ। रिलीज के समय आलोचना हुई, लेकिन बाद में लोगों ने उसे पसंद किया। मेरा मानना है कि जो फिल्म समय के साथ टिकती है, वही असली मायने में सफल होती है। सवाल : आगे भी हॉरर फिल्में बनाएंगे या कुछ नया सोच रहे हैं? जवाब: अभी मैं कुछ नहीं सोच रहा हूं। इस फिल्म को बनाने में बहुत मेहनत लगी है। थोड़ा आराम करना चाहता हूं और छुट्टियों पर जा रहा हूं। उसके बाद तय करूंगा कि आगे क्या करना है। सवाल : क्या छुट्टियों में भी नई कहानियों पर काम करेंगे? जवाब: अभी अगर मैं छुट्टियों में भी नई कहानियों पर काम करने लगूं तो शायद मेरी बीवी मार दे, क्योंकि उन्हें बिल्कुल समय नहीं दे पाया हूं। मेरी बेटी कृष्णा ने भी इस फिल्म के लिए बहुत मेहनत की है। वह प्रेग्नेंट थीं, लेकिन फिर भी हर शॉट और फ्रेम पर नजर रखती रहीं। सच कहूं तो अगर वह साथ नहीं होतीं तो शायद फिल्म बन नहीं पाती। अब मैं नाना बन चुका हूं, लेकिन नाती के साथ वक्त नहीं बिता पाया हूं। इसलिए फिलहाल परिवार और नाती के साथ समय बिताना चाहता हूं। उसके बाद आगे की फिल्मों के बारे में सोचूंगा।

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