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सावधान! घर बैठे कमाई का लालच पड़ सकता है भारी, 12वीं पास साइबर ठग ने इस शख्स से झटके में कूट लिए 17 लाख रुपये | delhi police cyber crime arrest pathan uzef khalil khan maharashtra jalna work from home fraud case

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नई दिल्ली. डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां इंटरनेट ने हमारे जीवन को सुगम बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने इसे ठगी का नया हथियार बना लिया है. दिल्ली पुलिस की नॉर्थ-वेस्ट जिला साइबर सेल ने एक ऐसे ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो वर्क फ्रॉम होम यानी घर बैठे काम के नाम पर मासूम लोगों की मेहनत की कमाई डकार रहा था. इस मामले में पुलिस ने महाराष्ट्र के जालना जिले से 25 वर्षीय एक युवक को गिरफ्तार किया है, जो इस पूरे खेल का मुख्य किरदार था.

इस सनसनीखेज मामले की शुरुआत नए साल के पहले ही दिन यानी 1 जनवरी 2026 को हुई, जब दिल्ली के त्रिनगर के केशव पुरम निवासी राहुल सैनी ने पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई. राहुल ने बताया कि उसे घर बैठे ऑनलाइन टास्क पूरा करने के बदले मोटी कमाई का झांसा दिया गया था. शुरुआत में उसे कुछ छोटे-मोटे टास्क दिए गए और बदले में पैसे भी मिले, जिससे उसका भरोसा जीत लिया गया. लेकिन जैसे ही उसने बड़े निवेश वाले टास्क शुरू किए, साइबर ठगों ने उसे अपने जाल में फंसा लिया. राहुल से अलग-अलग बहानों और टैक्स के नाम पर कुल 17,16,777 रुपये ठग लिए गए. जब राहुल को अहसास हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है, तब तक काफी देर हो चुकी थी.

दिल्ली पुलिस का ऑपरेशन

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर-पश्चिमी जिला पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया. इस टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर दिनेश दहिया कर रहे थे, जिसमें एसआई आरएन अशांग, हेड कांस्टेबल अमित, सोहन और संदीप शामिल थे. पुलिस ने सबसे पहले उन बैंक खातों की पड़ताल शुरू की जिनमें राहुल ने पैसे ट्रांसफर किए थे. जांच के दौरान एक चौंकाने वाला मनी ट्रेल सामने आया. ठगी की गई रकम को कई म्यूल अकाउंट्स में घुमाया गया था ताकि पुलिस को भ्रमित किया जा सके. तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर पुलिस को पता चला कि इस गिरोह का एक मुख्य सदस्य महाराष्ट्र के जालना में बैठकर अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है. पुलिस टीम ने तुरंत महाराष्ट्र का रुख किया और जालना में डेरा डाल दिया. कड़ी मेहनत और तकनीकी निगरानी के बाद आरोपी पठान उजेफ खलील खान को उसके ठिकाने से दबोच लिया गया.

कौन है पठान उजेफ और क्या था उसका काम?

25 वर्षीय पठान उजेफ खलील खान केवल 12वीं पास है और पेशे से एक निजी होटल में शेफ का काम करता था. पूछताछ में उसने खुलासा किया कि वह अपनी विलासितापूर्ण जीवनशैली और माता-पिता की खराब आर्थिक स्थिति के कारण इस अपराध की दुनिया में शामिल हुआ. पुलिस के अनुसार, उजेफ इस गिरोह का वह ‘वर्टिकल’ था जो ठगी के पैसे को लिक्विडेट (नकद में बदलना) करता था. गिरोह के अन्य सदस्य जब शिकार को फंसा लेते थे तो पैसे उजेफ द्वारा प्रबंधित खातों में आते थे. उजेफ इन पैसों को ‘सेल्फ चेक’ के जरिए बैंक से निकालता था और फिर अपना कमीशन काटकर मुख्य सरगनाओं तक पहुंचा देता था. गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपने मोबाइल नंबर और ठिकाने बदलता रहता था. पुलिस ने उसके पास से अपराध में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन भी बरामद किया है.

कैसे काम करता है वर्क फ्रॉम होम स्कैम?

यह स्कैम आमतौर पर टेलीग्राम या व्हाट्सएप मैसेज से शुरू होता है. ठग खुद को किसी बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी या मार्केटिंग फर्म का प्रतिनिधि बताते हैं.

  1. लुभावना ऑफर: आपको यूट्यूब वीडियो लाइक करने या होटल रिव्यू देने जैसे आसान काम दिए जाते हैं.
  2. भरोसा जीतना: पहले दो-तीन टास्क के लिए आपको 200-500 रुपये का भुगतान किया जाता है.
  3. बड़ा निवेश: इसके बाद आपको ‘वीआईपी टास्क’ के लिए पैसे जमा करने को कहा जाता है, जहाँ से ठगी का असली खेल शुरू होता है.
  4. पैसे की लेयरिंग: ठगी गई रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजा जाता है ताकि पुलिस मुख्य अपराधी तक न पहुँच सके.

दिल्ली पुलिस के एडिशनल कमिश्नर नॉर्थ-वेस्ट जिला भीष्म सिंह ने कहा है कि किसी भी अज्ञात नंबर से आए ‘वर्क फ्रॉम होम’ के ऑफर्स पर भरोसा न करें. यदि कोई भी व्यक्ति या संस्था काम देने से पहले आपसे पैसे की मांग करती है, तो वह निश्चित रूप से एक फ्रॉड है. पुलिस अब उजेफ से पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पता लगाया जा सके. उजेफ को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया है और पुलिस को उम्मीद है कि उससे पूछताछ के बाद कई और बड़े खुलासे होंगे.

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नई दिल्ली. डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां इंटरनेट ने हमारे जीवन को सुगम बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने इसे ठगी का नया हथियार बना लिया है. दिल्ली पुलिस की नॉर्थ-वेस्ट जिला साइबर सेल ने एक ऐसे ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो वर्क फ्रॉम होम यानी घर बैठे काम के नाम पर मासूम लोगों की मेहनत की कमाई डकार रहा था. इस मामले में पुलिस ने महाराष्ट्र के जालना जिले से 25 वर्षीय एक युवक को गिरफ्तार किया है, जो इस पूरे खेल का मुख्य किरदार था.

इस सनसनीखेज मामले की शुरुआत नए साल के पहले ही दिन यानी 1 जनवरी 2026 को हुई, जब दिल्ली के त्रिनगर के केशव पुरम निवासी राहुल सैनी ने पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई. राहुल ने बताया कि उसे घर बैठे ऑनलाइन टास्क पूरा करने के बदले मोटी कमाई का झांसा दिया गया था. शुरुआत में उसे कुछ छोटे-मोटे टास्क दिए गए और बदले में पैसे भी मिले, जिससे उसका भरोसा जीत लिया गया. लेकिन जैसे ही उसने बड़े निवेश वाले टास्क शुरू किए, साइबर ठगों ने उसे अपने जाल में फंसा लिया. राहुल से अलग-अलग बहानों और टैक्स के नाम पर कुल 17,16,777 रुपये ठग लिए गए. जब राहुल को अहसास हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है, तब तक काफी देर हो चुकी थी.

दिल्ली पुलिस का ऑपरेशन

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर-पश्चिमी जिला पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया. इस टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर दिनेश दहिया कर रहे थे, जिसमें एसआई आरएन अशांग, हेड कांस्टेबल अमित, सोहन और संदीप शामिल थे. पुलिस ने सबसे पहले उन बैंक खातों की पड़ताल शुरू की जिनमें राहुल ने पैसे ट्रांसफर किए थे. जांच के दौरान एक चौंकाने वाला मनी ट्रेल सामने आया. ठगी की गई रकम को कई म्यूल अकाउंट्स में घुमाया गया था ताकि पुलिस को भ्रमित किया जा सके. तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर पुलिस को पता चला कि इस गिरोह का एक मुख्य सदस्य महाराष्ट्र के जालना में बैठकर अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है. पुलिस टीम ने तुरंत महाराष्ट्र का रुख किया और जालना में डेरा डाल दिया. कड़ी मेहनत और तकनीकी निगरानी के बाद आरोपी पठान उजेफ खलील खान को उसके ठिकाने से दबोच लिया गया.

कौन है पठान उजेफ और क्या था उसका काम?

25 वर्षीय पठान उजेफ खलील खान केवल 12वीं पास है और पेशे से एक निजी होटल में शेफ का काम करता था. पूछताछ में उसने खुलासा किया कि वह अपनी विलासितापूर्ण जीवनशैली और माता-पिता की खराब आर्थिक स्थिति के कारण इस अपराध की दुनिया में शामिल हुआ. पुलिस के अनुसार, उजेफ इस गिरोह का वह ‘वर्टिकल’ था जो ठगी के पैसे को लिक्विडेट (नकद में बदलना) करता था. गिरोह के अन्य सदस्य जब शिकार को फंसा लेते थे तो पैसे उजेफ द्वारा प्रबंधित खातों में आते थे. उजेफ इन पैसों को ‘सेल्फ चेक’ के जरिए बैंक से निकालता था और फिर अपना कमीशन काटकर मुख्य सरगनाओं तक पहुंचा देता था. गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपने मोबाइल नंबर और ठिकाने बदलता रहता था. पुलिस ने उसके पास से अपराध में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन भी बरामद किया है.

कैसे काम करता है वर्क फ्रॉम होम स्कैम?

यह स्कैम आमतौर पर टेलीग्राम या व्हाट्सएप मैसेज से शुरू होता है. ठग खुद को किसी बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी या मार्केटिंग फर्म का प्रतिनिधि बताते हैं.

  1. लुभावना ऑफर: आपको यूट्यूब वीडियो लाइक करने या होटल रिव्यू देने जैसे आसान काम दिए जाते हैं.
  2. भरोसा जीतना: पहले दो-तीन टास्क के लिए आपको 200-500 रुपये का भुगतान किया जाता है.
  3. बड़ा निवेश: इसके बाद आपको ‘वीआईपी टास्क’ के लिए पैसे जमा करने को कहा जाता है, जहाँ से ठगी का असली खेल शुरू होता है.
  4. पैसे की लेयरिंग: ठगी गई रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजा जाता है ताकि पुलिस मुख्य अपराधी तक न पहुँच सके.

दिल्ली पुलिस के एडिशनल कमिश्नर नॉर्थ-वेस्ट जिला भीष्म सिंह ने कहा है कि किसी भी अज्ञात नंबर से आए ‘वर्क फ्रॉम होम’ के ऑफर्स पर भरोसा न करें. यदि कोई भी व्यक्ति या संस्था काम देने से पहले आपसे पैसे की मांग करती है, तो वह निश्चित रूप से एक फ्रॉड है. पुलिस अब उजेफ से पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पता लगाया जा सके. उजेफ को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया है और पुलिस को उम्मीद है कि उससे पूछताछ के बाद कई और बड़े खुलासे होंगे.

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