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कौन है अक्षरा जिसे फीमेल वैभव सूर्यवंशी कहा जा रहा:8 साल की उम्र में बल्ला उठाया, 15 में ट्रिपल सेंचुरी; मां बनीं पहली कोच

कौन है अक्षरा जिसे फीमेल वैभव सूर्यवंशी कहा जा रहा:8 साल की उम्र में बल्ला उठाया, 15 में ट्रिपल सेंचुरी; मां बनीं पहली कोच

पिछले कुछ महीनों में भारतीय क्रिकेट में बिहार का नाम सबसे ज्यादा वैभव सूर्यवंशी की वजह से चर्चा में रहा। महज 15 साल की उम्र में IPL 2026 में सबसे ज्यादा 776 रन और टीम इंडिया के लिए चुने जाने वाले सबसे युवा क्रिकेटर भी बने। लेकिन अब बिहार से एक और टीनएजर ने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार चर्चा महिला क्रिकेट की है। नाम है अक्षरा गुप्ता। उम्र सिर्फ 15 साल। बिहार विमेंस अंडर-19 वनडे ट्रॉफी में उन्होंने महज 126 गेंदों में नाबाद 306 रन बना दिए। उनकी पारी में 55 चौके और 8 छक्के शामिल रहे। 233 मिनट तक क्रीज पर टिककर उन्होंने 242.86 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए। उन्होंने महज 16 गेंदों में अर्धशतक और 34 गेंदों में तिहरा शतक पूरा कर लिया। लेकिन यह कहानी सिर्फ 306 रन की नहीं है। यह कहानी बिहार के नेपाल बॉर्डर से सटे एक छोटे से शहर रक्सौल की है, जहां न कोई बड़ी क्रिकेट अकादमी थी, न आधुनिक सुविधाएं और न ही लड़कियों के लिए क्रिकेट खेलने का माहौल। आगे पढ़िए अक्षरा कैसे बनीं फीमेल वैभव सूर्यवंशी… 8 साल की उम्र में बल्ला उठाया, घर के पीछे बनी पिच ने बदली जिंदगी अक्षरा के पिता राज किशोर शाह चिकन की दुकान चलाते हैं। मां रीना देवी हाउस वाइफ हैं। बेटी का क्रिकेट के प्रति जुनून देखकर पिता ने घर के पीछे नेट और प्रैक्टिस पिच बनवा दी। मां रोज सुबह 5 बजे उठाकर दूध पिलातीं और दौड़ने भेजती थीं। अक्षरा ने 8 साल की उम्र में भाइयों और मोहल्ले के लड़कों के साथ क्रिकेट खेलना शुरू किया। चाचा रामकृपा ने उनका टैलेंट पहचाना और रोज थ्रोडाउन कराकर अभ्यास कराया। 2020 से रेगुलर ट्रेनिंग और अक्षरा आज भी रोज करीब 5 घंटे प्रैक्टिस करती हैं। 14 साल में मिली U-19 की कप्तानी, उसी उम्र में सीनियर टीम में भी जगह अक्षरा के कजिन ऋषभ, जो बिहार क्रिकेट से जुड़े हैं, उनके पहले आइडल बने। 2024 उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। बिहार अंडर-19 टीम में चयन के कुछ ही समय बाद महज 14 साल की उम्र में उन्हें कप्तानी सौंप दी गई। हरियाणा और पंजाब जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ अर्धशतक जड़कर उन्होंने पहचान बनाई। इसका इनाम उन्हें फरवरी 2026 में मिला। 14 साल की उम्र में ही उनका सिलेक्शन बिहार की सीनियर महिला टीम में हो गया। वह राज्य के लिए सीनियर क्रिकेट खेलने वाली सबसे कम उम्र की महिला क्रिकेटर बनीं। एक ही सीजन में BCCI के चार एज ग्रुप खेले, फिर 126 गेंदों में जड़ दिया तिहरा शतक अक्षरा एक ही सीजन में BCCI के चारों एज ग्रुप (अंडर-15, अंडर-19 टी-20, अंडर-19 वनडे और अंडर-23) टूर्नामेंट खेलने वाली बिहार की पहली महिला क्रिकेटर बनीं। इसके कुछ ही समय बाद उन्होंने लगातार दो ऐसी पारियां खेलीं, जिसने उन्हें देशभर में पहचान दिला दी। 19 जून को भागलपुर के संदीस कंपाउंड ग्राउंड में बिहार महिला अंडर-19 वनडे ट्रॉफी के मुकाबले में अक्षरा ने 126 गेंदों में नाबाद 306 रन ठोक दिए। इस दौरान उन्होंने 55 चौके और 8 छक्के लगाए। 242.86 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए 233 मिनट तक क्रीज पर डटी रहीं। उनकी पारी की बदौलत टीम ने 40 ओवर में 450 रन बनाए, जबकि विपक्षी टीम 121 रन पर सिमट गई। चार दिन बाद अक्षरा ने 68 गेंदों में 164 रन बनाए, जिसमें 24 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। क्यों कहा जा रहा ‘फीमेल वैभव सूर्यवंशी’? अक्षरा और वैभव दोनों बिहार से हैं, दोनों बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और दोनों पहली ही गेंद से गेंदबाजों पर हमला करने में भरोसा रखते हैं। यही वजह है कि क्रिकेट जगत और सोशल मीडिया पर अक्षरा को ‘फीमेल वैभव सूर्यवंशी’ कहा जाने लगा। अक्षरा का पसंदीदा शॉट कवर ड्राइव है। स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ उनकी बल्लेबाजी सबसे मजबूत मानी जाती है। स्मृति से इंस्पायर, विराट की मेंटालिटी पसंद अक्षरा की सबसे बड़ी इंस्पिरेशन स्मृति मंधाना हैं। उनकी बल्लेबाजी, टाइमिंग और कवर ड्राइव अक्षरा को सबसे ज्यादा पसंद हैं। वहीं वे विराट कोहली की अटैकिंग सोच, फिटनेस की फैन हैं। अक्षरा WPL और IPL में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को सपोर्ट करती हैं। अक्षरा कहती हैं कि उनका सबसे बड़ा सपना भारतीय महिला टीम की जर्सी पहनना है।

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कौन है अक्षरा जिसे फीमेल वैभव सूर्यवंशी कहा जा रहा:8 साल की उम्र में बल्ला उठाया, 15 में ट्रिपल सेंचुरी; मां बनीं पहली कोच

कौन है अक्षरा जिसे फीमेल वैभव सूर्यवंशी कहा जा रहा:8 साल की उम्र में बल्ला उठाया, 15 में ट्रिपल सेंचुरी; मां बनीं पहली कोच

पिछले कुछ महीनों में भारतीय क्रिकेट में बिहार का नाम सबसे ज्यादा वैभव सूर्यवंशी की वजह से चर्चा में रहा। महज 15 साल की उम्र में IPL 2026 में सबसे ज्यादा 776 रन और टीम इंडिया के लिए चुने जाने वाले सबसे युवा क्रिकेटर भी बने। लेकिन अब बिहार से एक और टीनएजर ने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार चर्चा महिला क्रिकेट की है। नाम है अक्षरा गुप्ता। उम्र सिर्फ 15 साल। बिहार विमेंस अंडर-19 वनडे ट्रॉफी में उन्होंने महज 126 गेंदों में नाबाद 306 रन बना दिए। उनकी पारी में 55 चौके और 8 छक्के शामिल रहे। 233 मिनट तक क्रीज पर टिककर उन्होंने 242.86 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए। उन्होंने महज 16 गेंदों में अर्धशतक और 34 गेंदों में तिहरा शतक पूरा कर लिया। लेकिन यह कहानी सिर्फ 306 रन की नहीं है। यह कहानी बिहार के नेपाल बॉर्डर से सटे एक छोटे से शहर रक्सौल की है, जहां न कोई बड़ी क्रिकेट अकादमी थी, न आधुनिक सुविधाएं और न ही लड़कियों के लिए क्रिकेट खेलने का माहौल। आगे पढ़िए अक्षरा कैसे बनीं फीमेल वैभव सूर्यवंशी… 8 साल की उम्र में बल्ला उठाया, घर के पीछे बनी पिच ने बदली जिंदगी अक्षरा के पिता राज किशोर शाह चिकन की दुकान चलाते हैं। मां रीना देवी हाउस वाइफ हैं। बेटी का क्रिकेट के प्रति जुनून देखकर पिता ने घर के पीछे नेट और प्रैक्टिस पिच बनवा दी। मां रोज सुबह 5 बजे उठाकर दूध पिलातीं और दौड़ने भेजती थीं। अक्षरा ने 8 साल की उम्र में भाइयों और मोहल्ले के लड़कों के साथ क्रिकेट खेलना शुरू किया। चाचा रामकृपा ने उनका टैलेंट पहचाना और रोज थ्रोडाउन कराकर अभ्यास कराया। 2020 से रेगुलर ट्रेनिंग और अक्षरा आज भी रोज करीब 5 घंटे प्रैक्टिस करती हैं। 14 साल में मिली U-19 की कप्तानी, उसी उम्र में सीनियर टीम में भी जगह अक्षरा के कजिन ऋषभ, जो बिहार क्रिकेट से जुड़े हैं, उनके पहले आइडल बने। 2024 उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। बिहार अंडर-19 टीम में चयन के कुछ ही समय बाद महज 14 साल की उम्र में उन्हें कप्तानी सौंप दी गई। हरियाणा और पंजाब जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ अर्धशतक जड़कर उन्होंने पहचान बनाई। इसका इनाम उन्हें फरवरी 2026 में मिला। 14 साल की उम्र में ही उनका सिलेक्शन बिहार की सीनियर महिला टीम में हो गया। वह राज्य के लिए सीनियर क्रिकेट खेलने वाली सबसे कम उम्र की महिला क्रिकेटर बनीं। एक ही सीजन में BCCI के चार एज ग्रुप खेले, फिर 126 गेंदों में जड़ दिया तिहरा शतक अक्षरा एक ही सीजन में BCCI के चारों एज ग्रुप (अंडर-15, अंडर-19 टी-20, अंडर-19 वनडे और अंडर-23) टूर्नामेंट खेलने वाली बिहार की पहली महिला क्रिकेटर बनीं। इसके कुछ ही समय बाद उन्होंने लगातार दो ऐसी पारियां खेलीं, जिसने उन्हें देशभर में पहचान दिला दी। 19 जून को भागलपुर के संदीस कंपाउंड ग्राउंड में बिहार महिला अंडर-19 वनडे ट्रॉफी के मुकाबले में अक्षरा ने 126 गेंदों में नाबाद 306 रन ठोक दिए। इस दौरान उन्होंने 55 चौके और 8 छक्के लगाए। 242.86 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए 233 मिनट तक क्रीज पर डटी रहीं। उनकी पारी की बदौलत टीम ने 40 ओवर में 450 रन बनाए, जबकि विपक्षी टीम 121 रन पर सिमट गई। चार दिन बाद अक्षरा ने 68 गेंदों में 164 रन बनाए, जिसमें 24 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। क्यों कहा जा रहा ‘फीमेल वैभव सूर्यवंशी’? अक्षरा और वैभव दोनों बिहार से हैं, दोनों बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और दोनों पहली ही गेंद से गेंदबाजों पर हमला करने में भरोसा रखते हैं। यही वजह है कि क्रिकेट जगत और सोशल मीडिया पर अक्षरा को ‘फीमेल वैभव सूर्यवंशी’ कहा जाने लगा। अक्षरा का पसंदीदा शॉट कवर ड्राइव है। स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ उनकी बल्लेबाजी सबसे मजबूत मानी जाती है। स्मृति से इंस्पायर, विराट की मेंटालिटी पसंद अक्षरा की सबसे बड़ी इंस्पिरेशन स्मृति मंधाना हैं। उनकी बल्लेबाजी, टाइमिंग और कवर ड्राइव अक्षरा को सबसे ज्यादा पसंद हैं। वहीं वे विराट कोहली की अटैकिंग सोच, फिटनेस की फैन हैं। अक्षरा WPL और IPL में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को सपोर्ट करती हैं। अक्षरा कहती हैं कि उनका सबसे बड़ा सपना भारतीय महिला टीम की जर्सी पहनना है।

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