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Indira Nooyi: Indias Road Chaos is Beauty

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11 मिनट पहले

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इंद्रा नूई पेप्सिको की पूर्व चेयरमैन और सीईओ हैं। (फाइल फोटो)

पेप्सिको की पूर्व सीईओ इंद्राा नूई के एक इंटरव्यू में भारत की सड़कों पर दिखने वाली अव्यवस्था को यहां की खूबसूरती बताया, जिस पर अब लोग दो गुटों में बंट गए हैं। अमेरिकी राजनीतिक वैज्ञानिक और पूर्व सेक्रेटरी ऑफ स्टेट कोंडोलिसा राइस के साथ बातचीत में नूई ने भारत और चीन की तुलना की।

सवाल 1: इंद्रा नूई ने भारत को लेकर क्या बयान दिया है, जिस पर विवाद हो रहा है?

जवाब: पेप्सिको की पूर्व चेयरमैन और सीईओ इंद्रा नूई ने एक इंटरव्यू के दौरान भारत को ‘क्योस’ यानी अव्यवस्थित या उथल-पुथल से भरा देश बताया है। उन्होंने चीन से भारत की तुलना करते हुए कहा कि भारत की असली खूबसूरती उसके इसी ‘क्योस’ यानी अव्यवस्था में छिपी है।

सवाल 2: इंटरव्यू में उन्होंने चीन से भारत की तुलना किस आधार पर की?

जवाब: इंद्रा नूई ने दोनों एशियाई देशों के अंतर को समझाया। उन्होंने कहा कि चीन तुलनात्मक रूप से होमोजिनियस यानी एक जैसा या एकरूप है। इस वजह से वहां आने वाले विदेशी पर्यटकों या बाहरी लोगों के लिए रास्ते तलाशना और ट्रेवल करना काफी आसान होता है। इसके उलट भारत की सबसे बड़ी पहचान ही उसकी विविधता और अनिश्चितता है।

सवाल 3: उन्होंने भारत की रोजमर्रा की जिंदगी और सड़कों का क्या उदाहरण दिया?

जवाब: नूई ने भारत की स्ट्रीट लाइफ का जिक्र करते हुए कहा कि यहां सड़कों पर गाड़ियों के साथ गायों का घूमना एक आम बात है। जो विदेशी पहली बार भारत आते हैं और जिन्हें बिल्कुल साफ-सुथरा या व्यवस्थित माहौल पसंद होता है, वे इस दृश्य को देखकर भ्रमित हो सकते हैं। लेकिन अधिकांश भारतीयों के लिए ये जमीनी सच्चाइयां उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का एक सामान्य हिस्सा हैं।

सवाल 4: भारतीयों की मानसिकता को लेकर इंद्रा नूई ने क्या टिप्पणी की?

जवाब: भारतीय लोग इस अव्यवस्था को अपने सामाजिक ताने-बाने का हिस्सा मान चुके हैं। ऐसे माहौल में भारतीयों की मानसिकता आमतौर पर “यह वक्त भी गुजर जाएगा” वाली होती है। वे इस डिसऑर्डर को स्वीकार कर लेते हैं और इसी के साथ सहजता से जीना सीख जाते हैं।

सवाल 5: सोशल मीडिया पर इंद्रा नूई के इस बयान का समर्थन करने वाले यूजर्स का क्या तर्क है?

जवाब: सोशल मीडिया पर एक वर्ग इंद्रा नूई के बयान को भारत की नागरिक सुविधाओं और नागरिक समझ की चुनौतियों का एक ईमानदार आईना मान रहा है। एक यूजर ने लिखा, “भारतीयों को रचनात्मक आलोचना स्वीकार करना शुरू करना चाहिए। उन्होंने जो कहा वह सच है। जब भारतीय देश से बाहर रहते हैं, तब उन्हें अहसास होता है कि हमारे कुछ राज्यों का गवर्नेंस कितना कमजोर है।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “वे बिल्कुल सही कह रही हैं, और हमें बहुत तेजी से खुद को बदलने की जरूरत है।”

सवाल 7: उनके इस बयान का विरोध करने वाले लोगों का क्या कहना है?

जवाब: कई यूजर्स ने उनके बयान से असहमति जताई है और इसे भारत की छवि को कमतर आंकना बताया है। एक यूजर ने लिखा, “यह पूरी तरह से बकवास है। भारत में कई जगहें बहुत साफ हैं और कुछ जगहें साफ नहीं हैं। यही स्थिति चीन में भी है।

“एक अन्य यूजर ने भारत की विविधता का पक्ष लेते हुए लिखा, “चीन होमोजिनियस है, यह उसका की-वर्ड है। हम कभी भी एकरूप नहीं हो सकते। इसके बावजूद, हम सब मिलकर बेहद खूबसूरती से काम कर रहे हैं।”

सवाल 8: क्या कुछ लोग इस अव्यवस्था को ‘खूबसूरती’ कहने पर भी नाराज हैं?

जवाब: हां। एक यूजर ने कमेंट किया, “अव्यवस्था में गर्व करने जैसा कुछ नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि हमारा सिस्टम और समाज बदलाव के लिए कोई ऊर्जा खर्च नहीं करना चाहता।” एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, “क्योस कभी खूबसूरत नहीं हो सकता। मुझे लगता है कि भारत में सिविक सेंस और साफ-सफाई की कमी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टोका जाना जरूरी है, तभी शायद चीजें सुधरेंगी।”

सवाल 9: बिजनेस जगत में इंद्रा नूई की क्या साख है और वे वर्तमान में क्या कर रही हैं?

जवाब: कॉर्पोरेट जगत में इंद्रा नूई को दुनिया के सबसे प्रभावशाली बिजनेस लीडर्स में गिना जाता है। वे लंबे समय तक मशहूर बेवरेज कंपनी पेप्सिको की चेयरमैन और सीईओ रही हैं। वर्तमान में वे टेक दिग्गज अमेजन के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हैं। इसके अलावा वे एक लेखक भी हैं और उनकी संस्मरण ‘माय लाइफ इन फुल’ दुनिया भर में काफी चर्चित रही है।

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राजनीति

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इंद्रा नूई पेप्सिको की पूर्व चेयरमैन और सीईओ हैं। (फाइल फोटो)

पेप्सिको की पूर्व सीईओ इंद्राा नूई के एक इंटरव्यू में भारत की सड़कों पर दिखने वाली अव्यवस्था को यहां की खूबसूरती बताया, जिस पर अब लोग दो गुटों में बंट गए हैं। अमेरिकी राजनीतिक वैज्ञानिक और पूर्व सेक्रेटरी ऑफ स्टेट कोंडोलिसा राइस के साथ बातचीत में नूई ने भारत और चीन की तुलना की।

सवाल 1: इंद्रा नूई ने भारत को लेकर क्या बयान दिया है, जिस पर विवाद हो रहा है?

जवाब: पेप्सिको की पूर्व चेयरमैन और सीईओ इंद्रा नूई ने एक इंटरव्यू के दौरान भारत को ‘क्योस’ यानी अव्यवस्थित या उथल-पुथल से भरा देश बताया है। उन्होंने चीन से भारत की तुलना करते हुए कहा कि भारत की असली खूबसूरती उसके इसी ‘क्योस’ यानी अव्यवस्था में छिपी है।

सवाल 2: इंटरव्यू में उन्होंने चीन से भारत की तुलना किस आधार पर की?

जवाब: इंद्रा नूई ने दोनों एशियाई देशों के अंतर को समझाया। उन्होंने कहा कि चीन तुलनात्मक रूप से होमोजिनियस यानी एक जैसा या एकरूप है। इस वजह से वहां आने वाले विदेशी पर्यटकों या बाहरी लोगों के लिए रास्ते तलाशना और ट्रेवल करना काफी आसान होता है। इसके उलट भारत की सबसे बड़ी पहचान ही उसकी विविधता और अनिश्चितता है।

सवाल 3: उन्होंने भारत की रोजमर्रा की जिंदगी और सड़कों का क्या उदाहरण दिया?

जवाब: नूई ने भारत की स्ट्रीट लाइफ का जिक्र करते हुए कहा कि यहां सड़कों पर गाड़ियों के साथ गायों का घूमना एक आम बात है। जो विदेशी पहली बार भारत आते हैं और जिन्हें बिल्कुल साफ-सुथरा या व्यवस्थित माहौल पसंद होता है, वे इस दृश्य को देखकर भ्रमित हो सकते हैं। लेकिन अधिकांश भारतीयों के लिए ये जमीनी सच्चाइयां उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का एक सामान्य हिस्सा हैं।

सवाल 4: भारतीयों की मानसिकता को लेकर इंद्रा नूई ने क्या टिप्पणी की?

जवाब: भारतीय लोग इस अव्यवस्था को अपने सामाजिक ताने-बाने का हिस्सा मान चुके हैं। ऐसे माहौल में भारतीयों की मानसिकता आमतौर पर “यह वक्त भी गुजर जाएगा” वाली होती है। वे इस डिसऑर्डर को स्वीकार कर लेते हैं और इसी के साथ सहजता से जीना सीख जाते हैं।

सवाल 5: सोशल मीडिया पर इंद्रा नूई के इस बयान का समर्थन करने वाले यूजर्स का क्या तर्क है?

जवाब: सोशल मीडिया पर एक वर्ग इंद्रा नूई के बयान को भारत की नागरिक सुविधाओं और नागरिक समझ की चुनौतियों का एक ईमानदार आईना मान रहा है। एक यूजर ने लिखा, “भारतीयों को रचनात्मक आलोचना स्वीकार करना शुरू करना चाहिए। उन्होंने जो कहा वह सच है। जब भारतीय देश से बाहर रहते हैं, तब उन्हें अहसास होता है कि हमारे कुछ राज्यों का गवर्नेंस कितना कमजोर है।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “वे बिल्कुल सही कह रही हैं, और हमें बहुत तेजी से खुद को बदलने की जरूरत है।”

सवाल 7: उनके इस बयान का विरोध करने वाले लोगों का क्या कहना है?

जवाब: कई यूजर्स ने उनके बयान से असहमति जताई है और इसे भारत की छवि को कमतर आंकना बताया है। एक यूजर ने लिखा, “यह पूरी तरह से बकवास है। भारत में कई जगहें बहुत साफ हैं और कुछ जगहें साफ नहीं हैं। यही स्थिति चीन में भी है।

“एक अन्य यूजर ने भारत की विविधता का पक्ष लेते हुए लिखा, “चीन होमोजिनियस है, यह उसका की-वर्ड है। हम कभी भी एकरूप नहीं हो सकते। इसके बावजूद, हम सब मिलकर बेहद खूबसूरती से काम कर रहे हैं।”

सवाल 8: क्या कुछ लोग इस अव्यवस्था को ‘खूबसूरती’ कहने पर भी नाराज हैं?

जवाब: हां। एक यूजर ने कमेंट किया, “अव्यवस्था में गर्व करने जैसा कुछ नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि हमारा सिस्टम और समाज बदलाव के लिए कोई ऊर्जा खर्च नहीं करना चाहता।” एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, “क्योस कभी खूबसूरत नहीं हो सकता। मुझे लगता है कि भारत में सिविक सेंस और साफ-सफाई की कमी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टोका जाना जरूरी है, तभी शायद चीजें सुधरेंगी।”

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