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क्लीन एयर इकोनॉमिक्स; साफ हवा, अब आर्थिक समृद्धि:देश में वायु प्रदूषण 20% घटा, तो मिलेंगे 20 लाख करोड़ और 14 लाख नौकरियां

क्लीन एयर इकोनॉमिक्स; साफ हवा, अब आर्थिक समृद्धि:देश में वायु प्रदूषण 20% घटा, तो मिलेंगे 20 लाख करोड़ और 14 लाख नौकरियां

देश में हवा जितनी जहरीली, उतनी ही महंगी भी साबित हो रही है। लेकिन इसे साफ करने में बड़ा मुनाफा छिपा है। ‘आईवीसीए क्लीन एयर फोरम 2026’ में पेश एक विश्लेषण के मुताबिक, भारत का पीएम 2.5 प्रदूषण स्तर करीब 20% घटाकर 2030 तक 220 अरब डॉलर (करीब ~20 लाख करोड़) का आर्थिक मौका हासिल किया जा सकता है। डालबर्ग एडवाइजर्स के पार्टनर और इंडिया हेड जगजीत सरीन ने यह अनुमान ‘द इकोनॉमिक्स ऑफ क्लीन एयर’ रिपोर्ट के हवाले से पेश किया है। उनके मुताबिक, यह रकम भारत के जीडीपी के करीब 5.5% के बराबर होगी। यह उत्पादकता बढ़ने, कम स्वास्थ्य खर्च, बिजनेस के नए मौकों, पर्यावरण से जुड़े फायदों से हासिल होगी। सरीन ने कहा कि अब तक साफ हवा को सिर्फ सार्वजनिक स्वास्थ्य और नियमों के पालन के नजरिए से देखा जाता रहा है। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यह उतना ही बड़ा आर्थिक मौका भी है। उनके मुताबिक, पीएम 2.5 में 20% की कमी से उत्पादकता बढ़ेगी और नई वैल्यू चेन बनेंगी। साथ ही इससे 14 लाख नौकरियां भी पैदा हो सकती हैं और सालाना 11.5 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन घटाया जा सकता है। उन्होंने कहा- अब निवेश की बारी है, क्योंकि आंकड़े खुद निवेश के पक्ष में दलीलें गढ़ चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, साफ हवा से मिलने वाले फायदे सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है। बेहतर कार्यक्षमता, कम छुट्टियां और बेहतर सेहत सीधे कामकाजी उत्पादकता बढ़ाएंगे। इसके अलावा असमय मौतों से जुड़ा आर्थिक नुकसान भी कम होगा। इससे क्लीन-एयर टेक्नोलॉजी और सर्विसेज के मामले में नए बाजार खुलेंगे। विश्लेषण में परिवहन और ठोस कचरा प्रबंधन क्षेत्र को सबसे ज्यादा मूल्य सृजन क्षमता वाला बताया गया है। लेकिन इस मौके को भुनाने के लिए भारी निवेश की जरूरत होगी। परिवहन, कृषि, घरेलू ईंधन, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण, निर्माण व सड़क धूल प्रबंधन, बिजली उत्पादन, कचरा प्रबंधन और वायु गुणवत्ता के निगरानी ढांचे जैसे कई क्षेत्रों में एक साथ पूंजी लगानी होगी। प्रजेंटेशन में यह भी कहा गया कि साफ हवा में निवेश को अब सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और जलवायु, तीनों तरह के फायदे देने वाली ग्रोथ पूंजी के तौर पर देखा जाना चाहिए। निजी पूंजी की ज्यादा भागीदारी, मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल, विशेष कौशल विकास और समुदायों की गहरी भागीदारी- इन पांच बातों को इस बदलाव में तेजी लाने वाले अहम फैक्टर बताए गए हैं। आईवीसीए क्लीन एयर फोरम 2026 का मकसद प्रदूषण को सिर्फ पर्यावरणीय चुनौती से हटाकर एक निवेश योग्य आर्थिक मौके के तौर पर पेश करना है। एयर-टेक सेक्टर सबसे कम निवेश वाला सेगमेंट भारत में हर साल वायु प्रदूषण से 16 लाख से ज्यादा मौतें होती हैं। फिर भी एयर-टेक सेक्टर जलवायु से जुड़े निवेश के सबसे कम फंडेड सेगमेंट में शुमार है। फोरम में संस्थागत निवेशकों, डीप-टेक स्टार्टअप्स, नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के दिग्गजों ने मिलकर इस बात पर मंथन किया कि कैसे पूंजी की मदद से भारत में स्केलेबल और व्यावसायिक रूप से टिकाऊ वायु गुणवत्ता समाधान की राह निकाली जा सकती है।

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