“ये कौन हैं?”
सलमान खान का सवाल सुनते ही जवाब आया- “जानी…, अपने अब्बा से जाकर पूछना, हम कौन हैं।” यही थे राजकुमार। वो अभिनेता, जो फ्लॉप फिल्म के बाद भी अपनी फीस बढ़ा देते थे। कहते थे- ‘मेरी पिक्चर चले न चले, मैं फेल नहीं हुआ। कभी बप्पी लाहिड़ी के गहने पहनने का सरेआम मजाक बना देते थे, तो कभी गोविंदा जैसे कलाकारों की शर्ट काटकर रूमाल बना लेते थे। बेबाकी और हाजिर जवाबी ऐसी थी कि बड़े-बड़े कलाकार भी इनके सामने बोलने से कतराते थे। और हुनर और खौफ ऐसा कि रजनीकांत जैसे सुपरस्टार भी एक दौर में इनके साथ फिल्म करने से झिझकते थे। ‘हम तुम्हें मारेंगे और जरूर मारेंगे, लेकिन वो बंदूक भी हमारी होगी, गोली भी हमारी होगी और वक्त भी हमारा होगा….’ (फिल्म-सौदागर, 1991) ‘हम तुम्हें वो मौत देंगे, जो न किसी कानून की किताब में लिखी होगी और न ही कभी किसी मुजरिम ने सोची होगी…’ (फिल्म- तिरंगा, 1992) राजकुमार के ये डायलॉग भी उनकी रौबदार पर्सनैलिटी और भारी आवाज को मद्देनजर रखते हुए ही लिखे गए थे। लेकिन अफसोस की जिस आवाज ने लाखों दिलों पर राज किया, वही आवाज आखिरी दिनों में नासूर बन गई। गले के कैंसर के चलते 1996 में उनका निधन हो गया। राजकुमार का मानना था कि मौत एक निजी मामला है, यही वजह है कि उन्होंने बीमारी और मौत राज रखने की आखिरी इच्छा जाहिर की। आज राजकुमार गुजरे 30 साल हो चुके हैं। उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर पढ़िए उनकी बेबाकी, रौबदार पर्सनैलिटी के वो किस्से जो उनके व्यक्तित्व को समझने में मदद करते हैं- किस्सा-1 पार्टी में अमिताभ बच्चन के सूट की कर दी पर्दे से तुलना 60 के दशक में राजकुमार करियर के शिखर पर थे। जितनी उनके अभिनय की तारीफ होती थी, उससे कहीं ज्यादा चर्चा उनके बड़बोलेपन की होती थी। हर कोई उनके सामने ज्यादा बाद करने से कतराते थे। एक समय ऐसा था, जब अमिताभ बच्चन फिल्मों में नए-नए आए थे। दोनों की मुलाकात एक पार्टी में हुई। अमिताभ ने पार्टी में विदेशी थ्रीपीस सूट पहना था। राजकुमार पास आए और पूछा, सूट कहां से सिलवाया। अमिताभ को लगा वो तारीफ कर रहे हैं, तो उन्होंने झट से पता बताना चाहा, लेकिन आगे राजकुमार ने सूट को ऊपर से नीचे देखते हुए कहा- मुझे भी पर्दे सिलवाने हैं। अमिताभ बच्चन इस बेइज्जती पर कुछ कह नहीं सके और मुस्कुराकर वहां से निकल गए। किस्सा- 2 गोविंदा की तोहफे में दी हुई शर्ट काटकर बना लिया रूमाल गोविंदा ने करियर की शुरुआत में राजकुमार के साथ 1989 की फिल्म जंगबाज में काम किया था। एक दिन सेट पर राजकुमार ने गोविंदा को देखकर कहा- तुम्हारी शर्ट बहुत शानदार है। गोविंदा, राजकुमार जैसे बड़े स्टार से तारीफ मिलने से बेहद खुश हो गए। उन्होंने झट से कहा- सर, आपको ये शर्ट पसंद आ रही है, तो आप इसे रख लीजिए। गोविंदा ने तुरंत शर्ट उतारकर राजकुमार को दे दी। गोविंदा जैसे नए एक्टर के लिए ये बड़ी बात थी कि उन्होंने राजकुमार को तोहफे में शर्ट दी और राजकुमार उनकी दी हुई शर्ट कभी पहनेंगे। दो दिन बाद गोविंदा का दिल तब टूटा, जब राजकुमार ने उनकी दी हुई शर्ट काटकर रुमाल बना लिया था। ये किस्सा डायरेक्टर मेहुल कुमार ने एक इंटरव्यू में सुनाया। किस्सा- 3 मिथुन चक्रवर्ती को देखकर प्रोड्यूसर से कहा- किस स्ट्रगलिंग एक्टर को उठा लाए मिथुन चक्रवर्ती को 80 के दशक में उस दौर के स्टार राजकुमार के साथ फिल्म गोलियों के बादशाह में छोटा सा रोल मिला था। राजकुमार का रवैया नए एक्टर्स के साथ उस समय ठीक नहीं था। शूटिंग के पहले ही दिन जब मिथुन कॉस्ट्यूम पहनकर तैयार हुए, तो उन्हें देख राजकुमार ने डायरेक्टर से कहा- माना कि रोल छोटा है, लेकिन इसके लिए आप किसी स्ट्रगलिंग एक्टर को क्यों ले आए। किसी अच्छे एक्टर को लेना था, ये किसे उठा लाए। मिथुन को ये बात काफी बुरी लगी। वो सीधे राजकुमार के पास गए और कहा- जिस स्ट्रगलिंग एक्टर की आप बात कर रहे हैं, वो मैं ही हूं। मिथुन को देख राजकुमार हंस पड़े और कहा- तुम यहां कहां आ गए एक्टिंग करने। ये कोई बच्चों का खेल नहीं है। इस पर मिथुन ने कहा- जानता हूं कि ये बच्चों का खेल नहीं है। मैं 7 साल से एक्टिंग कर रहा हूं। एक दिन मैं भी बड़ा एक्टर बनूंगा। ये सुनकर राजकुमार फिर हंसे और कहा- कोई छोटा-मोटा रोल चाहिए हो तो बताना। किस्सा- 4 बप्पी लाहिड़ी के गहने देख कहा- मंगलसूत्र भी पहन लेते लीजेंड्री सिंगर बप्पी लाहिड़ी सोने के भारी गहने पहनने के लिए भी मशहूर थे। एक दिन एक पार्टी में राजकुमार की बप्पी दा पर नजर पड़ गई। जब बप्पी उनसे मिलने करीब गए, तो राजकुमार ने ऊपर से नीचे देखकर कहा- ”वाह, शानदार! एक से एक गहने पहने हो, सिर्फ मंगलसूत्र की कमी रह गई है, वो भी पहन लेते। किस्सा- 5 सलमान पहचान नहीं सके तो कहा- अपने अब्बा से पूछो हम कौन हैं 1989 में सलमान खान की फिल्म मैंने प्यार किया सुपरहिट रही। प्रोड्यूसर सूरज बड़जात्या ने एक पार्टी रखी, जिसमें राजकुमार भी पहुंचे। बड़जात्या के लिए ये फक्र की बात थी। वो तुरंत सलमान खान को राजकुमार से मिलवाने ले गए, लेकिन कामयाबी की खुशी में सलमान उन्हें पहचान नहीं सके। सलमान ने ठंडी प्रतिक्रिया दी और फिर दबे शब्दों में सूरज बड़जात्या से पूछा- ये कौन हैं। ये बात राजकुमार ने सुन ली और खुद जवाब देकर कहा- घर जाकर अपने अब्बा से जाकर पूछना, हम कौन हैं, फिर पता चलेगा। पास खड़े सूरज बड़जात्या ये सुनते ही सलमान को एक किनारे ले गए और राजकुमार के बारे में बताया। सलमान को तुरंत गलती का एहसास हुआ और उन्होंने दोबारा राजकुमार के पास आकर माफी मांगी। किस्सा- 6 कॉमेडियन को ज्यादा डायलॉग मिले तो भड़क गए राजकुमार, खुद बोल डाले सारे डायलॉग 1971 में रिलीज हुई फिल्म मर्यादा में राजकुमार को एक दयालु व्यक्ति की भूमिका मिली। फिल्म में दिखाया जाना था कि उन्होंने नौकर की मां के इलाज के लिए पैसे दिए और मां ठीक हो गईं। नौकर का किरदार कॉमेडियन मोहन चोटी को दिया गया था। सीन के मुताबिक मोहन चोटी को कहना था, मालिक आपने मुझे मां के इलाज के लिए पैसे दिए थे, मां बिल्कुल ठीक हो गई है। मैं आपका ये एहसान कैसे उतारूंगा। मालिक क्या मैं आपके नहाने के लिए पानी गर्म कर दूं। सेट पर रिहर्सल शुरू हुई। मोहन चोटी ने जैसे ही ये डायलॉग कहा, राजकुमार भड़क गए और कहा- अब हमारे ऐसे दिन आ गए कि ये मोहन चोटी बोलेगा और हम सुनेंगे। कुछ देर बाद जैसे ही एक्शन बोला गया, मोहन चोटी के डायलॉग बोलने से पहले ही राजकुमार ने खुद पूरे डायलॉग बदल दिए और कहा, मोहन इधर आओ, हमने तुम्हारी मां के इलाज के लिए रुपया दिया था, सुना है तुम्हारी मां बिल्कुल ठीक हो गई। अरे भाई, एहसान मानने की बात नहीं है, ये हमारा फर्ज था। अब खड़े-खड़े मुंह क्या देख रहे हो, जाओ मेरे नहाने के लिए पानी गर्म करो। किस्सा- 7 साधना के घर पर खाने से किया इनकार, कहा- खाना खाते हैं, लेकिन कुछ भी नहीं खा लेते राजकुमार ने 70 के दशक में फिल्म उल्फत में काम किया, जिसमें उनकी को-स्टार वहीदा रहमान और साधना थीं। एक दिन शूटिंग खत्म कर साधना ने राजकुमार और दूसरे एक्टर्स को डिनर पर इनवाइट किया। राजकुमार पहुंचे और खाना निकला। सभी खाना खा रहे थे, लेकिन राजकुमार खामोश बैठे थे। साधना ने उनसे कहा- राज साहब खाना खाइए। राजकुमार ने कहा- नहीं, आप खाइए। साधना ने फिर कहा- कुछ तो खाइए। थोड़ा सा ही खा लीजिए। राजकुमार ने फिर कहा- नहीं आप लोग ही खाइए। साधना ने झिझकते हुए कहा- आप खाना तो खाते ही होंगे। इस पर राजकुमार ने अपने स्टाइल में कहा- जानी…, खाना तो हम खाते हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं की कहीं भी कुछ भी खा लें। किस्सा- 8 लड़की को छेड़ने वाले शख्स की इतना पीटा, हो गई मौत 8 अक्टूबर 1926 को राजकुमार का जन्म ब्रिटिश इंडिया के बलूचिस्तान में हुआ। उनका असली नाम कुलभूषण पंडित था। 1940 में राजकुमार की बॉम्बे पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्ति हुई। कद-काठी और गौरी रंगत देख, दोस्त अक्सर उन्हें फिल्मों में जाने का सुझाव देते थे। इसी समय उन्हें राज कपूर ने फिल्म आवारा ऑफर की, जो राजकुमार ने ठुकरा दी। एक दिन छुट्टी होने पर राजकुमार एक दोस्त और उसकी गर्लफ्रेंड के साथ जुहू में सैर कर रहे थे। तभी कुछ आवारा लड़कों ने दोस्त की गर्लफ्रेंड को छेड़ दिया। इस बात से राजकुमार आगबबूला हो गए और एक लड़के की इस कदर पिटाई की कि उसकी वहीं मौत हो गई। राजकुमार पर हत्या के आरोप लगे। रजा मुराद के पिता राजकुमार के दोस्त थे, तो वो अक्सर हर सुनवाई में साथ जाते थे। लंबे समय बाद राजकुमार को केस से बरी कर दिया गया। कुछ समय बाद दोस्त की जिद पर राजकुमार ने एक फोटोशूट करवाया, जिसकी बदौलत उन्हें 1952 की फिल्म रंगीली मिल गई। ये फिल्म खास नहीं चली, लेकिन राजकुमार को लगातार फिल्में मिलने लगीं। 1957 की फिल्म मदर इंडिया से राजकुमार को पहचान मिली और आगे वक्त, ऊंचे लोग, हमराज, नील कमल हीर रांझा जैसी फिल्मों ने उन्हें स्टार बना दिया। किस्सा-9 फिल्म ठुकराने पर राज कपूर ने सरेआम कहा-हत्यारा, जवाब से बंद की बोलती समय के साथ राज कुमार को बड़ी-बड़ी फिल्में मिलने लगीं, लेकिन सालों पहले आवारा ठुकराने पर राज कपूर को हमेशा वो खटकते रहे। एक ही इंडस्ट्री की दो अहम शख्सियत होने के बावजूद दोनों की कभी बात नहीं हुई। सालों बाद प्रेम चोपड़ा की शादी की पार्टी में दोनों आमना-सामना हुआ। राज कपूर को पुराने जख्म याद आ गए। पार्टी में राज कपूर ने खूब शराब पी और नशे में राजकुमार को खरी-खोटी सुनाना शुरू कर दिया। बहस में बात इतनी बढ़ गई कि राज कपूर ने चिल्लाते हुए राज कुमार से कहा- तुम हत्यारे हो। राजकुमार ने जवाब में कहा- ‘बेशक मैं हत्यारा हूं, लेकिन मैं आपके पास काम मांगने नहीं आया था, बल्कि आप मेरे पास फिल्म का ऑफर लेकर आए थे।’ किस्सा- 10 दिलीप कुमार ने थप्पड़ मारा तो 33 साल नहीं की बात इस फिल्म के ठीक एक साल बाद उनकी फिल्म पैगाम रिलीज हुई, जिसमें उन्होंने दिलीप कुमार के बड़े भाई का रोल किया। एक सीन के लिए दिलीप कुमार को उन्हें थप्पड़ मारना था। एक्शन सुनते ही, दिलीप कुमार ने पूरी ताकत से राजकुमार के गाल पर थप्पड़ मारा, जो उन्हें तेजी से लगा। राजकुमार, जिनके सामने लोग बोलने से भी कतराते थे, थप्पड़ पड़ते ही हिल गए। उन्होंने मान लिया कि दिलीप कुमार ने जानबूझकर ऐसा किया और दिलीप कुमार से दोस्ती खत्म कर दी। दोनों की 33 सालों तक बात बंद रही। दोनों ने इंडस्ट्री में एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी। 33 साल बाद सुभाष घई ने दोनों की सुलह करवाई। दरअसल, फिल्म सौदागर की स्क्रिप्ट जब सुभाष घई ने दिलीप कुमार और राजकुमार के मुताबिक ही लिखी थी। जब दिलीप कुमार को फिल्म के लिए कॉल किया गया, तो उन्हें कहानी पसंद आई। लेकिन उन्होंने फिल्म करने की शर्त रखते हुए सुभाष घई से कहा था- शूटिंग के दौरान राजकुमार को संभालने की जिम्मेदारी आपको ही लेनी पड़ेगी। फिर जब सुभाष ने इसकी कहानी राजकुमार को सुनाई। जब ये बात उन्हें पता चली कि दिलीप कुमार इस फिल्म का हिस्सा हैं, तो वो बहुत खुश हुए। उन्होंने ये भी कहा- जानी, मैं इस इंडस्ट्री में अपने बाद किसी को बेहतर एक्टर मानता हूं, तो वो सिर्फ दिलीप कुमार ही हैं। किस्सा- 11 फिरोज खान ने कहा- आप मुझे मत सिखाइए, अगले दिन कहा- अकड़ बरकरार रखा 1965 की फिल्म ऊंचे लोग में राजकुमार के साथ फिरोज खान ने काम किया था। उस वक्त फिरोज इंडस्ट्री में नए आए थे। शूटिंग के पहले दिन राजकुमार उनके पास गए और कहा- देखो ये तुम्हारी पहली फिल्म है। फिल्म को बहुत परफेक्शन के साथ करना। हालांकि, मैं बीच-बीच में तुम्हें सिखाता रहूंगा। अभी उनकी बात पूरी भी नहीं हुई थी कि फिरोज खान बोल पड़े- आप मुझे मत सिखाइए। मैं अपना काम अच्छे से कर लूंगा। सेट पर मौजूद लोग ये देखकर डर गए कि कहीं राजकुमार फिल्म छोड़कर ना चले जाएं। हालांकि, ऐसा हुआ नहीं। अगले दिन खुद राजकुमार फिरोज खान के पास गए और कहा- ये अकड़ तुम्हारी अच्छी है, इसे हमेशा बरकरार रखना। किस्सा- 12 रजनीकांत, नसीरुद्दीन शाह ने कर दिया साथ काम करने से इनकार राजकुमार की रौबदार पर्सनैलिटी के चलते कई बड़े-बड़े एक्टर उनके साथ काम करने से कतराते थे। यही वजह थी कि जब रजनीकांत को राजकुमार के साथ फिल्म तिरंगा मिली, तो उन्होंने डायरेक्टर मेहुल कुमार को कॉल कर रहा, मेहुल जी, मुझे एक ही प्रॉब्लम है- राज साहब के साथ कैसे काम कर पाऊंगा। कुछ सेट पर टेंशन हो गई, तब क्या करूंगा। मुझे माफ कर दो।’ जब मेहुल कुमार ने नसीरुद्दीन शाह को फिल्म ऑफर की तो जवाब मिला- मेहुल भाई आपके साथ मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन राज साहब के साथ तो काम करने से रहा।
आखिरकार ये फिल्म नाना पाटेकर को दी गई। नाना पाटेकर ने फिल्म करने की शर्त रखी- राज साहब सेट पर इंटरफेयर करेंगे, तब मैं सेट छोड़कर चला जाऊंगा। एक दिन राजकुमार ने मेहुल कुमार को कॉल कर पूछा- ये फिल्म कौन कर रहा है। जवाब मिला- नाना पाटेकर। इस पर राजकुमार ने कहा- ‘अरे मेहुल! उसका दिमाग बहुत खराब रहता है,। सुना है कि वह सेट पर गाली-गलौज कर देता है।’ इस कास्टिंग पर फिल्म इंडस्ट्री के हर शख्स ने कहा कि मेहुल कुमार कभी ये फिल्म पूरी नहीं कर सकेंगे, क्योंकि दोनों ही एक्टर गुस्से के तेज हैं। लेकिन सेट पर दोनों ने बेहतरीन ढंग से तालमेल मिलाया और फिल्म 6 महीने में बनकर तैयार हो गई। किस्सा- 13 स्टार बन चुकीं जीनत अमान से कहा- फिल्मों में काम क्यों नहीं करतीं राजकुमार, बेबाकी के अलावा अपने ह्यूमर के लिए भी मशहूर थे। 70 के दशक में हरे रामा हरे कृष्णा जैसी बेहतरीन फिल्में करते हुए जीनत अमान स्टार बन चुकी थीं। एक दिन उनकी मुलाकात राजकुमार से हुई। राजकुमार उनके पास पहुंचे और स्टाइल मारते हुए कहा, जीनत, तुम बहुत सुंदर हो। तुम फिल्मों में काम करने की कोशिश क्यों नहीं करतीं। ये सुनते ही वहां मौजूद लोग हंस पड़े। किस्सा- 14 धर्मेंद्र ने कॉलर पकड़ी, तो फिल्म अधूरी छोड़कर सेट से चले गए फिल्म काजल की शूटिंग के पहले दिन राजकुमार ने धर्मेंद्र को देखकर कहा- जानी, फिल्म की शूटिंग के लिए हीरो चाहिए था, कोई पहलवान नहीं। ये सुनकर धर्मेंद्र बहुत गुस्सा हुए, लेकिन उन्होंने बहुत अदब के साथ कहा कि वो उनका मजाक ना बनाएं। फिर भी राजकुमार नहीं माने तो धर्मेंद्र ने उनकी कॉलर पकड़ ली। ये देखकर सेट पर मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। बाद में ये फिल्म राजकुमार के बिना ही पूरी हुई। किस्सा- 15 पालतु कुत्ते ने जवाब नहीं दिया, तो रामानंद सागर से कहा- कुत्ता नहीं माना तो मैं रोल कैसे करूं 1968 में रामानंद सागर फिल्म आंखें बना रहे थे। वो स्क्रिप्ट लेकर राजकुमार के पास पहुंचे। राजकुमार का मूड उस दिन ठीक नहीं था। उन्होंने अपने पालतु कुत्ते को पास बुलाया और पूछा- क्या तुम इस फिल्म में काम करोगे। कुत्ता शांत खड़ा रहा। इस पर राजकुमार ने रामानंद सागर से कहा- जब मेरा कुत्ता भी इस रोल के लिए तैयार नहीं है, तो मैं भला इसे कैसे कर सकता हूं। रामानंद सागर नाराज होकर वहां से निकल गए और फिर धर्मेंद्र को कास्ट कर लिया।















































