Sunday, 06 Sep 2026 | 09:06 AM

Trending :

अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा:ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की, 125 करोड़ रुपए से डेटाबेस बनेगा अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा:ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की, 125 करोड़ रुपए से डेटाबेस बनेगा नेपाल बाढ़ से 400 अरब रुपये का नुकसान:5 हजार लोग लापता, 1,344 शव मिले; पीक सीजन में बुकिंग रद्द कर रहे टूरिस्ट नेपाल बाढ़ से 400 अरब रुपये का नुकसान:5 हजार लोग लापता, 1,344 शव मिले; पीक सीजन में बुकिंग रद्द कर रहे टूरिस्ट अमित दुबे की साइबर कहानियां पहुंचीं हिरानी-नीरज पांडे तक:बोले- क्रिमिनल डिवाइस नहीं, पहले इंसान को हैक करता है, ऐसे बचें साइबर ठगी से अमित दुबे की साइबर कहानियां पहुंचीं हिरानी-नीरज पांडे तक:बोले- क्रिमिनल डिवाइस नहीं, पहले इंसान को हैक करता है, ऐसे बचें साइबर ठगी से
EXCLUSIVE

Odisha High Court Ruling on APAAR ID

Odisha High Court Ruling on APAAR ID
  • Hindi News
  • Career
  • Odisha High Court Ruling On APAAR ID | Parents Get Opt Out Option

5 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

सुप्रीम कोर्ट ने APAAR ID को लेकर सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट का कहना है कोई भी स्कूल खुद बच्चों की अपार आईडी नहीं बना सकता। इसके लिए माता-पिता की मर्जी जरूरी है।

भुवनेश्वर के पेरेंट्स ने दायर की याचिका

भुवनेश्वर के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के पेरेंट्स रोहित आनंद दास से APAAR ID बनाने के लिए सहमति मांगी। सहमति पत्र में इंकार या स्वीकृति देने जैसा कोई विकल्प नहीं था। इसके खिलाफ पेरेंट्स ने ओडिशा हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

पहले से मना करने का अधिकार भी हो

APAAR ID को सरकार स्वैच्छिक बता रही है, लेकिन सहमति पत्र में मना करने का विकल्प नहीं है। आधार और अन्य व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से प्राइवेसी प्रभावित हो सकती है। केवल बाद में सहमति वापस लेने का विकल्प पर्याप्त नहीं है। पहले से मना करने का अधिकार भी होना चाहिए।

सरकार का फैसला पेरेंट्स के पक्ष में

केंद्र और राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि APAAR ID पूरी तरह स्वैच्छिक है। पेरेंट्स चाहें तो सहमति न दें और बाद में सहमति वापस भी ले सकते हैं। APAAR ID के कई मामलों में छात्र की ऊंचाई, वजन जैसी जानकारी भी दर्ज की जा सकती है। इसी वजह से नाबालिग छात्रों के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य रखी गई है।

छात्रों के अधिकार नहीं होंगे प्रभावित

याचिका में यह भी मांग की गई थी कि अगर कोई छात्र APAAR ID नहीं बनवाता है, तो उसे एडमिशन, परीक्षा में रजिस्ट्रेशन, मार्कशीट, सर्टिफिकेट या किसी अन्य एकेडमिक सुविधा से दूर नहीं रखा किया जाना चाहिए।

APAAR ID 12 अंकों की छात्र पहचान

अपार आईडी (Automated Permanent Academic Account Registry) भारत सरकार की ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ पहल के तहत हर छात्र को दी जाने वाली 12 अंकों की स्थायी डिजिटल छात्र पहचान (स्टूडेंट आईडी) है।

इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) की अवधारणा के अनुरूप विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य छात्र के पूरे शैक्षणिक रिकॉर्ड को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखना है।

सरकार का दावा – छात्रों के हित में योजना

सरकार और CBSE का कहना है कि APAAR ID छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है। इसका उद्देश्य छात्रों का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखना है ताकि भविष्य में उन्हें बार-बार डॉक्यूमेंट्स जमा न करने पड़ें। सरकार का दावा है कि यह योजना पूरी तरह छात्रों के हित में है और इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और आसान बनेगी।

डाटा लीक होने का खतरा बढ सकता है

याचिकाकर्ताओं और कई विशेषज्ञों ने इस योजना को लेकर कुछ गंभीर चिंताएं भी जताई हैं। उनका कहना है कि बच्चों का इतना बड़ा डिजिटल डाटा एक जगह इकट्ठा होने से डाटा लीक होने का खतरा बढ़ सकता है।

यदि किसी वजह से डाटा का गलत इस्तेमाल होता है तो बच्चों की प्राइवेसी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा कई पेरेंट्स का कहना है कि यदि APAAR ID को अनिवार्य बना दिया गया तो बिना आईडी वाले बच्चों को शिक्षा और परीक्षाओं में परेशानी हो सकती है।

ये खबर भी पढ़ें

मॉनिटर ने बच्चे को 2 मिनट में मारे 52 थप्पड़:हेड डाउन न करने पर नर्सरी के बच्‍चे को गर्ल मॉनीटर ने पीटा; वीडियो वायरल

लखनऊ में 5 साल के नर्सरी क्लास के बच्चे को क्लास की मॉनिटर ने 2 मिनट तक जमकर मारा। ये घटना क्लास टीचर की गैर मौजूदगी में हुई। क्लॉस मॉनिटर ने बच्चे को लगातार थप्पड़े मारे। उसने सिर पकड़कर लड़के के बाल भी खींचे। यह घटना लखनऊ के ALS एकेडमी की है। पूरी खबर यहां पढ़ें

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
नोएल टाटा नवंबर में वोल्टास के चेयरमैन पद से हटेंगे:आज 72वीं एजीएम में ऐलान किया; शेयरहोल्डर्स से कहा- यह मेरी आखिरी सालाना जनरल मीटिंग

June 30, 2026/
5:39 pm

नोएल टाटा इस साल नवंबर में 70 साल की उम्र पूरी होने के बाद वोल्टास के चेयरमैन पद से इस्तीफा...

A file photo of Twisha Sharma

May 25, 2026/
11:10 pm

आखरी अपडेट:25 मई, 2026, 23:10 IST टीएमसी को उथल-पुथल का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि 101 पार्षदों ने इस्तीफा...

भगवंत मान मामले में नया मोड़, शिकायतकर्ता ने लगाया छेड़छाड़ का आरोप | न्यूज18

June 24, 2026/
5:00 pm

भगवंत मान मामले में शिकायतकर्ता द्वारा आधिकारिक रिपोर्ट में छेड़छाड़ के आरोप के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है।...

महिला आयोग का प्रणित मोरे-हिमांशु जांगड़ा को नोटिस:सेजल पवार के कमेंट्स पर AIMSA ने कार्रवाई की मांग की; तीनों पर FIR भी दर्ज

June 12, 2026/
12:05 pm

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने गुरुग्राम में हुए कॉमेडियन प्रणित मोरे के स्टैंड-अप कॉमेडी शो से जुड़े विवाद का स्वतः...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

Odisha High Court Ruling on APAAR ID

Odisha High Court Ruling on APAAR ID
  • Hindi News
  • Career
  • Odisha High Court Ruling On APAAR ID | Parents Get Opt Out Option

5 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

सुप्रीम कोर्ट ने APAAR ID को लेकर सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट का कहना है कोई भी स्कूल खुद बच्चों की अपार आईडी नहीं बना सकता। इसके लिए माता-पिता की मर्जी जरूरी है।

भुवनेश्वर के पेरेंट्स ने दायर की याचिका

भुवनेश्वर के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के पेरेंट्स रोहित आनंद दास से APAAR ID बनाने के लिए सहमति मांगी। सहमति पत्र में इंकार या स्वीकृति देने जैसा कोई विकल्प नहीं था। इसके खिलाफ पेरेंट्स ने ओडिशा हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

पहले से मना करने का अधिकार भी हो

APAAR ID को सरकार स्वैच्छिक बता रही है, लेकिन सहमति पत्र में मना करने का विकल्प नहीं है। आधार और अन्य व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से प्राइवेसी प्रभावित हो सकती है। केवल बाद में सहमति वापस लेने का विकल्प पर्याप्त नहीं है। पहले से मना करने का अधिकार भी होना चाहिए।

सरकार का फैसला पेरेंट्स के पक्ष में

केंद्र और राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि APAAR ID पूरी तरह स्वैच्छिक है। पेरेंट्स चाहें तो सहमति न दें और बाद में सहमति वापस भी ले सकते हैं। APAAR ID के कई मामलों में छात्र की ऊंचाई, वजन जैसी जानकारी भी दर्ज की जा सकती है। इसी वजह से नाबालिग छात्रों के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य रखी गई है।

छात्रों के अधिकार नहीं होंगे प्रभावित

याचिका में यह भी मांग की गई थी कि अगर कोई छात्र APAAR ID नहीं बनवाता है, तो उसे एडमिशन, परीक्षा में रजिस्ट्रेशन, मार्कशीट, सर्टिफिकेट या किसी अन्य एकेडमिक सुविधा से दूर नहीं रखा किया जाना चाहिए।

APAAR ID 12 अंकों की छात्र पहचान

अपार आईडी (Automated Permanent Academic Account Registry) भारत सरकार की ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ पहल के तहत हर छात्र को दी जाने वाली 12 अंकों की स्थायी डिजिटल छात्र पहचान (स्टूडेंट आईडी) है।

इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) की अवधारणा के अनुरूप विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य छात्र के पूरे शैक्षणिक रिकॉर्ड को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखना है।

सरकार का दावा – छात्रों के हित में योजना

सरकार और CBSE का कहना है कि APAAR ID छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है। इसका उद्देश्य छात्रों का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखना है ताकि भविष्य में उन्हें बार-बार डॉक्यूमेंट्स जमा न करने पड़ें। सरकार का दावा है कि यह योजना पूरी तरह छात्रों के हित में है और इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और आसान बनेगी।

डाटा लीक होने का खतरा बढ सकता है

याचिकाकर्ताओं और कई विशेषज्ञों ने इस योजना को लेकर कुछ गंभीर चिंताएं भी जताई हैं। उनका कहना है कि बच्चों का इतना बड़ा डिजिटल डाटा एक जगह इकट्ठा होने से डाटा लीक होने का खतरा बढ़ सकता है।

यदि किसी वजह से डाटा का गलत इस्तेमाल होता है तो बच्चों की प्राइवेसी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा कई पेरेंट्स का कहना है कि यदि APAAR ID को अनिवार्य बना दिया गया तो बिना आईडी वाले बच्चों को शिक्षा और परीक्षाओं में परेशानी हो सकती है।

ये खबर भी पढ़ें

मॉनिटर ने बच्चे को 2 मिनट में मारे 52 थप्पड़:हेड डाउन न करने पर नर्सरी के बच्‍चे को गर्ल मॉनीटर ने पीटा; वीडियो वायरल

लखनऊ में 5 साल के नर्सरी क्लास के बच्चे को क्लास की मॉनिटर ने 2 मिनट तक जमकर मारा। ये घटना क्लास टीचर की गैर मौजूदगी में हुई। क्लॉस मॉनिटर ने बच्चे को लगातार थप्पड़े मारे। उसने सिर पकड़कर लड़के के बाल भी खींचे। यह घटना लखनऊ के ALS एकेडमी की है। पूरी खबर यहां पढ़ें

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.